👁 Preview — try as many practice questions as you like. Score tracking unlocks on subscription. Unlock all · ₹4,999
← Back to CrPC - न्यायालय एवं न्यायिक प्रक्रिया
Practice mode

गिरफ्तारी

302 questions for this subtopic 0 attempted

Multiple choice

290 questions · auto-graded
Question 1
PYQ · 2008 1.0 marks
भारत में कितने उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार एक से अधिक राज्य (संघ क्षेत्र शामिल नहीं) पर है?
Why: सही उत्तर विकल्प (ख) 3 है। बॉम्बे उच्च न्यायालय (महाराष्ट्र और गोवा), गुजरात उच्च न्यायालय (गुजरात और दादरा नगर हवेली), और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय (पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़) एक से अधिक राज्यों पर क्षेत्राधिकार रखते हैं। चंडीगढ़ संघ क्षेत्र होने के बावजूद प्रश्न में संघ क्षेत्र शामिल नहीं माने जाते। इसलिए सही विकल्प B है।[2]
Question 2
PYQ 1.0 marks
भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत हर राज्य में एक उच्च न्यायालय होना चाहिए?
Why: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत हर राज्य में एक उच्च न्यायालय होना चाहिए। यह उच्च न्यायालयों के संगठन का मूल प्रावधान है। अन्य विकल्प: अनुच्छेद 124 सर्वोच्च न्यायालय से संबंधित है, 226 रिट क्षेत्राधिकार से, और 32 मौलिक अधिकारों से। इसलिए सही विकल्प A है।[1]
Question 3
PYQ 1.0 marks
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
Why: उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 217 के तहत वर्णित है, जहां राष्ट्रपति मुख्य न्यायाधीश ऑफ इंडिया की सलाह पर नियुक्ति करते हैं। अन्य विकल्प गलत हैं। इसलिए सही विकल्प A है।[1]
Question 4
PYQ · 2020 1.0 marks
वर्तमान में भारत में कितने उच्च न्यायालय हैं? (सितंबर 2020 तक)
Why: वर्तमान में सितंबर 2020 तक भारत में 25 उच्च न्यायालय हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय 2019 में नवगठित हुए। इसलिए सही विकल्प B है।[1]
Question 5
PYQ · 2022 1.0 marks
सत्र न्यायालय की स्थापना का प्रावधान कौन से धारा में किया गया है?
Why: कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धारा 9 के अंतर्गत प्रत्येक जिले में सत्र न्यायालय की स्थापना का प्रावधान है। यह उच्च न्यायालय द्वारा किया जाता है। विकल्प D सही है क्योंकि धारा 9 सत्र न्यायालयों की स्थापना से संबंधित है। अन्य विकल्प गलत हैं: धारा 6 राज्य सरकार की शक्तियों से, धारा 7 मजिस्ट्रेट कोर्ट से, धारा 8 मेट्रोपॉलिटन क्षेत्रों से संबंधित हैं[1].
Question 6
PYQ · 2020 1.0 marks
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
1. सत्र न्यायालय धारा 193 CrPC के अंतर्गत स्वत: संज्ञान ले सकता है।
2. सत्र न्यायाधीश धारा 30 CrPC के तहत 10 वर्ष तक के कारावास का दंड दे सकता है।
कौन सा/से कथन सही है/हैं?
(A) केवल 1
(B) केवल 2
(C) दोनों
(D) कोई नहीं
Why: कथन 1 गलत: धारा 193 CrPC के अनुसार सत्र न्यायालय स्वत: संज्ञान नहीं लेता; मजिस्ट्रेट द्वारा committed cases ही विचारण योग्य। कथन 2 गलत: धारा 30 के तहत सत्र न्यायाधीश को 7 वर्ष तक का दंड देने का अधिकार (10 वर्ष नहीं)। अतः कोई सही नहीं, विकल्प D[7].
Question 7
PYQ 1.0 marks
निम्नलिखित में से कौन-सा FIR के संबंध में सही नहीं है?

A. यह केवल संज्ञेय अपराधों में दर्ज की जाती है
B. यह धारा 154 CrPC के अधीन दर्ज की जाती है
C. यह जांच का आधार होती है
D. यह संज्ञेय और असंज्ञेय दोनों मामले में दर्ज की जा सकती है
Why: FIR केवल संज्ञेय अपराधों (cognizable offences) के लिए दर्ज की जाती है, असंज्ञेय अपराधों के लिए धारा 155 CrPC के तहत मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है। विकल्प D गलत है क्योंकि FIR असंज्ञेय अपराधों में स्वतः दर्ज नहीं होती। अन्य विकल्प सही हैं: धारा 154 CrPC FIR पंजीकरण का प्रावधान करती है और यह जांच का आधार होती है।[1]
Question 8
PYQ 1.0 marks
प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया किस धारा के अधीन वर्णित है?
Why: दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 154 में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया का वर्णन है। यह संज्ञेय अपराधों की जानकारी प्राप्त होने पर पुलिस द्वारा अनिवार्य रूप से दर्ज की जाती है। धारा 173 जांच पूरी होने पर रिपोर्ट से संबंधित है, धारा 155 असंज्ञेय अपराधों के लिए, और धारा 197 लोक सेवकों के अभियोजन से संबंधित है।[2]
Question 9
PYQ 1.0 marks
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 46(4) के तहत प्रावधान है कि किसी औरत को सूर्योदय से पहले गिरफ्तार किया जाना चाहिए या सूर्यास्त के बाद? (A) सूर्योदय से पहले (B) सूर्यास्त के बाद (C) सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच (D) किसी भी समय
Why: दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 46(4) के अनुसार, किसी महिला को सूर्योदय से पहले या सूर्यास्त के बाद गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, सिवाय विशेष परिस्थितियों के। सामान्यतः गिरफ्तारी सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच की जाती है। इसलिए सही विकल्प (C) है। यह प्रावधान महिला सुरक्षा सुनिश्चित करता है[2].
Question 10
PYQ 1.0 marks
पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है तो उसे अधिकतम कितने घंटे तक अभिरक्षा में रख सकती है बिना मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए? (A) 12 घंटे (B) 24 घंटे (C) 48 घंटे (D) 72 घंटे
Why: दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 57 के अनुसार, पुलिस किसी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक अभिरक्षा में नहीं रख सकती। उसके बाद मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करना अनिवार्य है। यह संवैधानिक सुरक्षा (अनुच्छेद 22) सुनिश्चित करता है। इसलिए सही विकल्प (B) है[1].
Question 11
PYQ 1.0 marks
सीआरपीसी की धारा 436(1) के अनुसार, जमानती अपराध के मामले में अभियुक्त को जमानत का क्या अधिकार प्राप्त है?
Why: सीआरपीसी की धारा 436(1) के अनुसार, यदि कथित अपराध जमानती है, तो अभियुक्त को पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट के समक्ष जमानत का हकदार होता है। जमानती अपराधों के लिए जमानत अधिकार है, न कि उपकार, और जमानत प्रदान करने में विवेक का कोई स्थान नहीं है। रसिकलाल बनाम किशोर खानचंद वाधवानी (2009) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यही स्पष्ट किया है[1].
Question 12
PYQ 1.0 marks
अपराध का कौन-सा वर्गीकरण दंड प्रक्रिया संहिता के तहत आता है?
Why: दंड प्रक्रिया संहिता के तहत अपराधों का वर्गीकरण संज्ञेय व असंज्ञेय (cognizable and non-cognizable), जमानती व गैर-जमानती (bailable and non-bailable), तथा सम्मन मामले व वारंट मामले (summons cases and warrant cases) के रूप में किया जाता है। सभी विकल्प CrPC के अंतर्गत आते हैं[3].
Question 13
PYQ 1.0 marks
सीआरपीसी की धारा 438 के अधीन अग्रिम जमानत किस प्रकार के अपराधों के लिए दी जा सकती है?
Why: सीआरपीसी की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत केवल गैर-जमानती अपराधों के मामलों में दी जा सकती है। जमानती अपराधों में जमानत अधिकार के रूप में प्राप्त हो जाती है, इसलिए वहां अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं है[4].
Question 14
PYQ 1.0 marks
सीआरपीसी की धारा 437A का उद्देश्य क्या है?
Why: धारा 437A के अनुसार, विचारण के समापन से पूर्व तथा अपील के निपटारे से पूर्व, न्यायालय अभियुक्त से प्रतिभुओं के साथ जमानत बंधपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा करेगा ताकि वह उच्चतर न्यायालय के समक्ष उपस्थित हो सके। यह बांड छह माह के लिए प्रभावी रहता है[2].
Question 15
PYQ 1.0 marks
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 2(w) के अनुसार, समन-मामला क्या है?
Why: CrPC की धारा 2(w) समन मामले को परिभाषित करती है। समन-मामला का अर्थ है अपराध से संबंधित मामला, न कि वारंट का मामला। समन मामले ऐसे अपराध से संबंधित होते हैं जिनके लिए मृत्युदंड, आजीवन कारावास या दो वर्ष से अधिक अवधि के कारावास की सजा नहीं दी जाती। इसलिए सही विकल्प B है।[1]
Question 16
PYQ 1.0 marks
समन मामले वे कौन से मामले हैं?
Why: समन मामले वे हैं जिनमें अधिकतम 2 वर्ष की जेल की सजा हो सकती है। ऐसा मामला जिसमें अपराध शामिल हो, जो वारंट मामला नहीं है, उसे समन मामला कहा जाता है। CrPC धारा 2(w) के अनुसार यह परिभाषित है। इसलिए सही विकल्प A है।[1]
Question 17
PYQ 1.0 marks
मजिस्ट्रेट द्वारा समन मामलों की सुनवाई के संबंध में CrPC की कौन सी धाराओं में प्रावधान निर्धारित हैं?
Why: CrPC की धारा 251 से 259 में मजिस्ट्रेट द्वारा समन मामलों की सुनवाई के संबंध में प्रावधान निर्धारित किए गए हैं। इसमें संबंधित दस्तावेज व अन्य चीजें अदालत के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया गया है। इसलिए सही विकल्प A है।[1]
Question 18
PYQ 1.0 marks
यदि वारंट मामले के विचारण में मजिस्ट्रेट अभियोजन के साक्ष्य को अपर्याप्त मान लेता है, तो वह क्या करेगा?
Why: CrPC की धारा 248(1) के अनुसार, वारंट मामले के विचारण के दौरान यदि मजिस्ट्रेट अभियोजन के साक्ष्य को अपर्याप्त पाता है, तो वह आरोपी को **बरी (acquit)** कर देगा। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि अपर्याप्त साक्ष्य पर अभियुक्त को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। विकल्प A सही है।[2]
Question 19
Question bank
न्यायालयों के प्रारंभ के अंतर्गत कौन सा न्यायालय स्वाभाविक मामलोँ की प्रारणभिक सुनवाई करता है? (Refer to the diagram below showing न्यायालयों का प्रारकार) लेबल्स: प्रारंभिक श्रेणी न्यायालय, द्वितीय श्रेणी न्यायालय, अपर सत्र न्यायालय, सत्र न्यायालय
प्रथम श्रेणी न्यायालयद्वितीय श्रेणी न्यायालयअपर सत्र न्यायालयसत्र न्यायालय
Why: प्रारंभिक श्रेणी न्यायालयों को प्रारंभ द्विष्टया अपराध मामलोँ में प्रारणभिक सुनवाई और निर्णयी आदालत के रूप में नियुक्त किया जाता है।
Question 20
Question bank
न्यायालयों के संगठात्मक ढांचे में उच्च न्यायालय (High Court) का सबसे प्रमुख अधिकारी क्या है? (Refer to the diagram below showing न्यायालयों के संगठात्मक ढांचा) लेबल्स: उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय,ानी निर्णयते, अपील की शक्तियाँ
उच्च न्यायालयजिला न्यायालयनिचली अदालतें
Why: उच्च न्यायालय का मुख्य कार्य जिला अदालतों के कार्यों का प्रबंधन करना और उनके फैसलों की अपीलों की सुनवाई करना होता है।
Question 21
Question bank
भारतीय में उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है? (Refer to the diagram showing न्यायालयों के न्यायाधीश नियुक्ति प्रक्रम) लेबल्स: राज्यप्रमुख, मुख्य न्यायाधीश, राज्य सरकार
राष्ट्रपतिमुख्य न्यायाधीशराज्य सरकार
Why: भारतीय संविधान के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यप्रमुख द्वारा की जाती है।
Question 22
Question bank
जिला न्यायालय की भूमिका क्या है? (Refer to the diagram below showing न्यायालयों के संगठन) लेबल्स: जिला न्यायालय, सत्र न्यायालय, प्रारंभिक श्रेणी न्यायालय
जिला न्यायालयप्रथम श्रेणी न्यायालयसत्र न्यायालय
Why: जिला न्यायालय मुख्य रूप से न्यायिक क्षेत्र में अपराध मामलोँ की सुनवाई एवं अपील करने का कार्य करता है।
Question 23
Question bank
न्यायाधीश की नियुक्ति में कौन सा कारक सबसे महत्वपूर्ण होता है? (Refer to the process flow diagram of न्यायाधीश नियुक्ति) लेबल्स: योग्यता, अनुशासन, उम्र, पात्रता मापदंड
योग्यताअनुभवउम्रपात्रता मानदंड
Why: न्यायाधीशों की नियुक्ति में सर्वोच्च प्राथमिकता गुणवत्ता योग्यताओं को होती हैं, जिससे कानूनी शिक्षा और नैतिकता सुनिश्चित होती है।
Question 24
Question bank
न्यायालयों के कार्यप्रणाली के संदरभ में आपीली का कौन सा विकल्प सही है? (Refer to the hierarchical appellate structure diagram) लेबल्स: उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, निचली अदालत, आपीली
निचली अदालतजिला न्यायालयउच्च न्यायालयअपील
Why: सामान्यतः अपील की प्राथमिकता निचली अदालत से जिला न्यायालय और फिर उच्च न्यायालय तक जाती है।
Question 25
Question bank
नीचे दिए गए विकल्पों में से कौन सा उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार नहीं है? (Refer to the labeled map diagram of न्यायालय क्षेत्राधिकार) लेबल्स: राज्य, केंद््रशासित क्षेत्र, क्षेत्राधिकार सीमा
राज्य क्षेत्राधिकारकेंद्रशासित क्षेत्रएक से अधिक राज्यों का क्षेत्राधिकारराष्ट्रीयनियामक क्षेत्रों के क्षेत्राधिकार
Why: राष्ट्रीय स्तर पर उच्च न्यायालय क्षेत्राधिकार रखता है; राष्ट्रीय न्यायालयों का क्षेत्राधिकार न्यायालय स्तर से अलग होता है।
Question 26
Question bank
न्यायालयों के प्रशासन में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका क्या होती है? (Refer to the organizational chart of न्यायालय प्रशासन) लेबल्स: मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश, प्रशासन, न्यायालय संगठन
मुख्य न्यायाधीशन्यायाधीशप्रशासन संचालन
Why: मुख्य न्यायाधीश की प्राथमिक जिम्मेदारी न्यायालय के संगठन प्रबंधन और कार्य संगठन को सही दिशा में संचालित करना है।
Question 27
Question bank
न्यायालयों के संगठन में कौन सा न्यायालय अपराजय की सुनवाई का अंतिम स्तर है? (Refer to the hierarchy diagram) लेबल्स: स्तर न्यायालय, जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालयउच्च न्यायालयसत्र न्यायालयजिला न्यायालय
Why: सर्वोच्च न्यायालय भारत में अपराजय और अंतिम मामलाों के लिए अंतिम न्यायिक अधिकारी रहता है।
Question 28
Question bank
न्यायालयों की संरचना प्रणाली के संदरभ में कौन सा विकल्प सही है? (Refer to the संरचना diagram) लेबल्स: न्यायाधीश, न्यायालय, प्रशासनिक अधिकारी, केस जानकारी
न्यायाधीशन्यायालय प्रशासनकेस
Why: न्यायालयों में केस की सूचना मुख्य रूप से न्यायाधीश से न्यायालय के अन्य विभागों तक संचालित की जाती है।
Question 29
Question bank
न्यायालयों के प्रकरण में कार्यवाहक का वितरण किसके होते हैं? (कार्यक्षेत्र वितरण चार्ट देखें) लेबल्स: उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, लगभग अदालत, न्यायदेशन
उच्च न्यायालयजिला न्यायालयनिचली अदालत
Why: न्यायालयी प्रणाली में कार्यवाहक का स्पष्ट एवम् प्रभावी वितरण सुनिश्चित करता है कि न्याय प्रक्रिया सही एवं शीघ्र हो।
Question 30
Question bank
साक्ष्य विधि संहिता, 1973 के अंतर्गत, निम्नलिखित में से किस न्यायालय को वारंट-मुकदमे की मूल न्यायक्षेत्र प्राप्त है?
Why: सही उत्तर का कारण: प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के पास वारंट-मुकदमों को आज्ञात करने की मूल न्यायक्षेत्र होती है जब तक कि कानून द्वारा उच्च न्यायालय जैसे सेशन कोर्ट को विशेष न्यायक्षेत्र न दिया गया हो।
छात्र किस जाल में फंसते हैं: छात्र अकसर सेशन कोर्ट का चयन करते हैं, मानकर कि यह हमेशा सभी वारंट-मुकदमों को आज्ञात करता है, जिससे अपील और मूल न्यायक्षेत्र को भ्रमित करते हैं (पूर्व-नियम लागू करना).
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: बी सही है क्योंकि प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट वारंट-मुकदमों को मूल रूप से आज्ञात करता है; ए इस भ्रांति का लाभ उठाता है कि उच्च न्यायालयों को हमेशा मूल न्यायक्षेत्र प्राप्त होती है; सी विभिन्न मजिस्ट्रेट वर्गों के बीच भ्रम का उपयोग करता है; डी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की पर्यवेक्षण भूमिका को न्यायक्षेत्र समझने की गलतफहमी का लाभ उठाता है।
Question 31
Question bank
दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, सेशन न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट न्यायालयों के बीच संबंध को कौन-सी व्याख्या सही दर्शाती है?
Why: सही उत्तर का कारण: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायाधीश के अधीनस्थ होता है, जो प्रशासनिक नियंत्रण रखता है; सेशन न्यायाधीश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से पर्यवेक्षी अधिकार प्रयोग करता है।
छात्र किस जाल में फंसते हैं: सबसे सामान्य परंतु गलत विकल्प है कि सेशन न्यायाधीश सभी मजिस्ट्रेटों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण रखता है, जिससे पदानुक्रम के पर्यवेक्षण को प्रत्यक्ष प्रशासनिक अधिकार से भ्रमित किया जाता है (अपवादों की अनदेखी).
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: बी सही है क्योंकि सीजेएम सेशन न्यायाधीश के नियंत्रण में कार्य करता है; ए मध्यस्थ प्राधिकारी के रूप में सीजेएम की भूमिका को नजरअंदाज करता है; सी जिला मजिस्ट्रेट और सेशन न्यायाधीश की भूमिकाओं को गलत रूप से मिलाता है; डी अधीनस्थता के दायरे में सेशन न्यायाधीश के अधिकारों को अनदेखा करता है।
Question 32
Question bank
दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय सम्मन-प्रकरणों को आज्ञात करने का अधिकार रखता है?
Why: सही उत्तर का कारण: सभी मजिस्ट्रेट, कार्यकारी मजिस्ट्रेट सहित, सम्मन-प्रकरणों को आज्ञात कर सकते हैं जब तक कि कानून द्वारा उन्हें विशेष रूप से यह अधिकार न रोका गया हो।
छात्र किस जाल में फंसते हैं: उम्मीदवार अक्सर सम्मन-प्रकरणों को केवल प्रथम या द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेटों तक सीमित कर देते हैं, जिससे दंडात्मक न्यायक्षेत्र को प्रकरण-प्रकार न्यायक्षेत्र से भ्रमित करते हैं (समान अवधारणाओं के बीच भ्रम).
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: बी सही है क्योंकि सभी मजिस्ट्रेट सम्मन-प्रकरणों को आज्ञात कर सकते हैं; ए मजिस्ट्रेट वर्गों की आंशिक याददाश्त का दुरुपयोग करता है; सी न्यायक्षेत्र को अनावश्यक रूप से द्वितीय श्रेणी तक सीमित करता है; डी पर्यवेक्षणात्मक भूमिका को आज्ञात न्यायक्षेत्र समझने की गलतफहमी का उपयोग करता है।
Question 33
Question bank
दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय तीन वर्ष से अधिक की कारावास की सज़ा लगाने में सक्षम नहीं है?
Why: सही उत्तर का कारण: द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट के पास तीन वर्ष तक की कारावास सज़ा लगाने के अधिकार होते हैं।
छात्र किस जाल में फंसते हैं: अधिकांश छात्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को चुनते हैं, यह समझकर कि उसकी सज़ा सीमा प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेटों के समान है, जबकि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास अधिक सज़ा देने की शक्तियाँ होती हैं (अपवादों को अनदेखा करना).
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: सी सही है क्योंकि द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट की सज़ा सीमा तीन वर्ष है; ए प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की शक्तियों को द्वितीय श्रेणी पर गलत लागू करता है; बी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की विस्तृत शक्तियों की अनदेखी करता है; डी न्यायिक एवं कार्यकारी भूमिकाओं के बीच भ्रम पैदा करता है—कार्यकारी मजिस्ट्रेट आमतौर पर मुकदमे आज्ञात या इस प्रकार की सज़ाए नहीं लगा सकता।
Question 34
Question bank
दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय केवल सेशन कोर्ट द्वारा आज्ञात होने योग्य प्रकरणों को आज्ञात करने में सक्षम है?
Why: सही उत्तर का कारण: जिला न्यायाधीश, सेशन न्यायाधीश के रूप में कार्यरत होने पर, उन प्रकरणों को आज्ञात करने की न्यायक्षेत्र रखता है जो केवल सेशन कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
छात्र किस जाल में फंसते हैं: विद्यार्थी केवल सेशन न्यायाधीश का चयन करते हैं, यह अवहेलना करते हुए कि जिला न्यायाधीश भी सेशन न्यायाधीश के पद पर सेशन कोर्ट की न्यायक्षेत्र का प्रयोग कर सकता है (पूर्व-नियम लागू करना).
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: सी सही है क्योंकि जिला न्यायाधीश सेशन न्यायाधीश के रूप में कार्य करता है; बी जिला न्यायाधीश की सेशन कार्यवाही की भूमिका को गलततया अस्वीकार करता है; ए विशेष अधिकार के प्रावधान में भ्रम उत्पन्न करता है; डी मजिस्ट्रेट की शक्तियों को समझे बिना याददाश्त पर निर्भर करता है।
Question 35
Question bank
आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुसार, जब एक क्षेत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुपस्थित होते हैं, तो किस अधिकारी द्वारा अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों की देखरेख की जाती है?
Why: सही उत्तर का कारण: जब मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नहीं होता है, तब जिला मजिस्ट्रेट अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों की देखरेख का दायित्व ग्रहण करता है।
छात्र भूलते क्यों हैं: छात्र सेशन्स न्यायाधीश को चुन लेते हैं, क्योंकि वे न्यायिक और कार्यकारी पर्यवेक्षण के बीच भ्रमित हो जाते हैं (समान अवधारणाओं में उलझन)।
विकल्पवार विश्लेषण: B सही है क्योंकि जिला मजिस्ट्रेट पर्यवेक्षण का अंतर भरता है; A न्यायिक पर्यवेक्षण को सभी मजिस्ट्रेटों के लिए मानता है जो गलत है; C बिना वैधानिक आधार के अस्थायी प्रतिस्थापन मानता है; D व्यावहारिक डिफ़ॉल्ट पर्यवेक्षण तंत्र को नजरअंदाज करता है।
Question 36
Question bank
अपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय उसके समक्ष दर्ज मामले को दूसरे न्यायालय को स्थानांतरित कर सकता है?
Why: सही उत्तर का कारण: सेशन्स न्यायालय और विधि द्वारा अधिकार प्राप्त मजिस्ट्रेट (जैसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट) दोनों को शर्तों के अधीन मामलों को स्थानांतरित करने का अधिकार है।
छात्र भूलते क्यों हैं: छात्र अधिकांशतः केवल सेशन्स न्यायालय चुनते हैं, मजिस्ट्रेटों के स्थानांतरण अधिकारों को दरकिनार कर देते हैं (नियमों के अधूरे अनुप्रयोग के कारण)।
विकल्पवार विश्लेषण: C दोनों न्यायालयों के अधिकारों को मान्यता देता है; A अनावश्यक रूप से सीमित करता है; B सेशन्स न्यायालय के अंतर्निहित अधिकार को नजरअंदाज करता है; D सेशन्स न्यायाधीश की भूमिका के बिना शर्तों को गलत तरीके से लागू करता है।
Question 37
Question bank
अपराध प्रक्रिया संहिता के तहत 'द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट' की स्थिति का सर्वोत्तम वर्णन कौन-सा है?
Why: सही उत्तर का कारण: द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट सीमित दंडात्मक अधिकारों के साथ सम्बोधित और वारंट दोनों प्रकार के मामलों की सुनवाई करते हैं।
छात्र भूलते क्यों हैं: अधिकांश छात्र विकल्प A या B चुनते हैं, दंडात्मक अधिकारों की सीमा या प्रत्येक मजिस्ट्रेट की सुनवाई योग्य मामलों के प्रकार की गलत समझ के कारण (बाहरी समानताओं के कारण भ्रम)।
विकल्पवार विश्लेषण: C सीमित दंड और सम्बोधित मामलों के अधिकार क्षेत्र को सही दर्शाता है; A गलत तरीके से दंड सीमा हटाता है; B सम्बोधित मामलों की सुनवाई की अयोग्यता बताता है जो गलत है; D निचले मजिस्ट्रेट को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के बराबर मानता है जो भ्रामक है।
Question 38
Question bank
अपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 10 के अंतर्गत, उस जिले में जहाँ सेशन्स न्यायाधीश और जिला मजिस्ट्रेट दोनों मौजूद हों, निम्नलिखित में से कौन मजिस्ट्रेट नियुक्त नहीं कर सकता?
Why: सही उत्तर का कारण: मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति केवल राज्य सरकार द्वारा की जाती है, जो सिफारिशों के आधार पर होती है; सेशन्स न्यायाधीश एकतरफा नियुक्ति नहीं कर सकता।
छात्र भूलते क्यों हैं: छात्र सेशन्स न्यायाधीश चुनते हैं, यह मानकर कि न्यायिक अधिकारी अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति कर सकते हैं (मामले की गहराई समझे बिना रट लगाना)।
विकल्पवार विश्लेषण: C सही है — सेशन्स न्यायाधीश मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति नहीं कर सकता; A और B राज्य सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया को सही दर्शाते हैं; D राज्य सरकार के अधिकार को सही रूप से प्रतिबिंबित करता है।
Question 39
Question bank
अपराध प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, निम्नलिखित में से किस मजिस्ट्रेट को आपातकालीन मामलों में उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के बिना खोज वारंट जारी करने का अधिकार प्राप्त है?
Why: सही उत्तर का कारण: जिला मजिस्ट्रेट, कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में, आपातकालीन मामलों में पूर्व आदेश के बिना खोज वारंट जारी करने का वैध अधिकार रखते हैं।
छात्र भूलते क्यों हैं: अधिकांश छात्र प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को चुनते हैं, न्यायिक मजिस्ट्रेटों के अधिकारों और कार्यकारी मजिस्ट्रेटों के अधिकारों में भ्रमित होकर (समान अवधारणाओं की गलत समझ)।
विकल्पवार विश्लेषण: D कार्यकारी मजिस्ट्रेटों के विशेष अधिकार को सही दर्शाता है; A गलत तरीके से न्यायिक मजिस्ट्रेटों को अनवरत अधिकार देता है; B अनावश्यक रूप से सीमित करता है; C अस्पष्ट और भ्रामक है, क्योंकि कार्यकारी मजिस्ट्रेटों को अनदेखा करता है।
Question 40
Question bank
सीआरपीसी के अनुसार, क्या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अधीनस्थ मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित मामले को सत्र न्यायाधीश की अनुमति के बिना स्थानांतरित कर सकते हैं?
Why: सही उत्तर का तर्क: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को मामलों को स्थानांतरित करने के लिए सत्र न्यायाधीश की पूर्व अनुमति लेना आवश्यक है; मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास पूर्ण स्थानांतरण अधिकार नहीं है।
छात्रों की गलती का कारण: छात्र विकल्प A चुनते हैं क्योंकि वे प्रशासनिक पर्यवेक्षण को पूर्ण स्थानांतरण अधिकार समझ लेते हैं (अप्रत्यक्षताएँ नजरअंदाज कर देते हैं)।
विकल्पवार व्याख्या: B सही है क्योंकि यह सहमति की आवश्यकता दर्शाता है; A गलत है क्योंकि इसमें पूर्ण अधिकार मान लिया गया है; C में अतिआवश्यकता की कोई कानूनी गुंजाइश नहीं है; D में स्थानांतरण अधिकारों को सरकार के निर्देश से जोड़ना भ्रमित करता है।
Question 41
Question bank
सीआरपीसी के तहत मृत्युदंड योग्य अपराधों की सुनवाई का विशेष अधिकार किस न्यायाधिकरण को प्राप्त है?
Why: सही उत्तर का तर्क: मृत्युदंड योग्य अपराधों के मुकदमे सत्र न्यायाधीश या जिलाधिकारी के रूप में सत्र न्यायपालिका के सीमांत कार्य करते हुए ही सुनवाई करते हैं।
छात्रों की गलती का कारण: छात्र संस्था के रूप में सत्र न्यायालय को चुन लेते हैं, जबकि सत्र न्यायाधीश की व्यक्तिगत न्यायिक भूमिका समझना आवश्यक है (समानार्थक संकल्पनाओं के बीच भ्रम)।
विकल्पवार व्याख्या: D सही है; A अधिक सामान्य वाक्यांश है; B अपील या उच्च न्यायालय से संबंधित गलत विकल्प है; C में मजिस्ट्रेट को ऐसी शक्ति देना गलत है।
Question 42
Question bank
सीआरपीसी के तहत 'कार्यकारी मजिस्ट्रेट' से तात्पर्य उस मजिस्ट्रेट से है जो:
Why: सही उत्तर का तर्क: कार्यकारी मजिस्ट्रेट मुख्यतः प्रशासनिक कर्तव्यों जैसे रोकथाम कार्य और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने से संबंधित होते हैं।
छात्रों की गलती का कारण: छात्र न्यायिक कार्य से संबंधित विकल्प चुन लेते हैं, जिससे कार्यकारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट के बीच भ्रम उत्पन्न होता है।
विकल्पवार व्याख्या: C सही है; A सुनवाई अधिकार को गलत संदर्भित करता है; B नियुक्ति अधिकार को गलत मानता है; D दंडात्मक शक्तियों का गलत आवंटन है।
Question 43
Question bank
सीआरपीसी के तहत कौन-सा न्यायालय संक्षिप्त सुनवाई करने का अधिकार रखता है?
Why: सही उत्तर का तर्क: संक्षिप्त सुनवाई के लिए प्रथम श्रेणी के ऐसे मजिस्ट्रेट जिन्होंने राज्य सरकार द्वारा विशेष अधिकार प्राप्त किया हो, सक्षम होते हैं।
छात्रों की गलती का कारण: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को स्वतः संक्षिप्त सुनवाई का अधिकार मान लेना सामान्य गलती है, जबकि ऐसा नहीं है।
विकल्पवार व्याख्या: A सही है क्योंकि केवल विशेष अधिकार प्राप्त प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट संक्षिप्त सुनवाई कर सकते हैं; B सीजेएम की स्वाभाविक शक्ति समझने में त्रुटि है; C सत्र न्यायाधीश की शक्तियों के साथ भ्रम है; D जिला मजिस्ट्रेट की प्रशासनिक भूमिका को न्यायिक समझना गलत है।
Question 44
Question bank
सीआरपीसी के अंतर्गत आपराधिक न्यायालयों की श्रेणी में, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेशों के विरुद्ध तत्काल अपीलीय न्यायालय कौन-सा है?
Why: सही उत्तर का तर्क: प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेशों के विरुद्ध अपील सत्र न्यायालय में होती है, जैसा कि सीआरपीसी में निर्धारित है।
छात्रों की गलती का कारण: कई छात्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को पर्यवेक्षी भूमिका के आधार पर अपीलीय अधिकार मान लेते हैं, जो भ्रम का कारण बनता है।
विकल्पवार व्याख्या: A सही है; B अनुचित रूप से उच्च न्यायालय को प्रथम अपीलीय न्यायालय मानता है; C पर्यवेक्षण और अपील के मध्य भ्रम है; D विभिन्न न्यायिक अधिकारियों के न्यायक्षेत्र की समझ में त्रुटि है।
Question 45
Question bank
कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के अन्तर्गत 'सुमन्स मामलों के निपटारे के लिए अधिकृत मजिस्ट्रेट' के रूप में कौन-सा मजिस्ट्रेट कार्य कर सकता है?
Why: सही उत्तर का कारण: जब तक विशेष रूप से बाहर न रखा गया हो, सभी मजिस्ट्रेट सुमन्स मामलों का परीक्षण कर सकते हैं।
छात्र इसी कारण भ्रमित होते हैं: छात्र अक्सर बिना संदर्भ के केवल कुछ वर्गों के मजिस्ट्रेटों द्वारा सुमन्स मामलों के परीक्षण को याद करते हैं।
विकल्प-वार व्याख्या: विकल्प A सही है; B अनुचित रूप से सुमन्स मामले की न्यायाधिकरण को सीमित करता है; C अनावश्यक रूप से सीमित करता है; D न्यायिक और कार्यकारी मजिस्ट्रेटों को भ्रमित करता है।
Question 46
Question bank
सेशन्स न्यायाधीश को समान ही जिला न्यायाधीश के रूप में भी नियुक्त किया जाता है। कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के अनुसार, सेशन्स न्यायाधीश तब मामलों का परीक्षण करता है जब:
Why: सही उत्तर का कारण: वही व्यक्ति मामले तथा क्षेत्राधिकार के आधार पर सेशन्स न्यायाधीश या जिला न्यायाधीश के रूप में कार्य कर सकता है।
छात्र इसी कारण भ्रमित होते हैं: छात्र मान लेते हैं कि ये पद सदैव विभिन्न रूप से कार्यरत रहते हैं, जिससे न्यायाधिकरण के पद और भूमिका में भ्रम उत्पन्न होता है।
विकल्प-वार व्याख्या: विकल्प A सही है; B भूमिका को गलत रूप से सीमित करता है; C क्षेत्राधिकार को विशेष विधान से भ्रमित करता है; D अलगाव के विषय में तथ्यात्मक रूप से गलत है।
Question 47
Question bank
सत्र न्यायालय की किस विशेषता का उल्लंघन CrPC में किया गया है?
Why: CrPC में सत्र न्यायालय की मुख्य विशेषता यह है कि यह गम्भीर अपराधों की सुनवाई करता है।
Question 48
Question bank
सत्र न्यायालय का कฏेत्राधिकारी किसके द्वारā नियुक्त होता है?
Why: CrPC के अनुसार सत्र न्यायालय का क़ेत्राधिकारी उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किया जाता है।
Question 49
Question bank
सत्र न्यायालय की संरचना में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?
Why: CrPC में सत्र न्यायालय की संरचना में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शामिल नहीं होता।
Question 50
Question bank
सत्र न्यायालय में प्रिक्रिया एवँ कार्य विधि के संबन्ध में कौन सी कथन सही है?
Why: सत्र न्यायालय में अभियोजन पक्ष का होना आवश्यक होता है क्योंकि यह अपराधियों के मामलों की सुनवाई करता है।
Question 51
Question bank
सत्र न्यायालय में अपील की सुनवाई के लिए निम्न में से क्या आवश्यक है?
Why: सत्र न्यायालय में अपील तभी सुनवाई के लिए स्वीकार्य होती है जब नीचे अदालत का निर्णय हो।
Question 52
Question bank
सत्र न्यायालय की विशेҫ श Kitchens म हरिवालय में से निम्न में से कौन सी श Kitchens शamil है?
Why: CrPC के अनुसार सत्र न्यायालय को मृत्युुदंड देने का अधिकार है।
Question 53
Question bank
सत्र न्यायालय की स्थापना के संबंध में सही कथन चुनें।
Why: CrPC के अनुसार सत्र न्यायालय की स्थापना राजय सरकार के अधीनियं द्वारा होती है।
Question 54
Question bank
सत्र न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत निम्न में से कौन सी प्रक्रिया शामिल है?
Why: सत्र न्यायालय की प्रक्रिया में प्रारंभिक जांच, साक्ष्य की समीक्षा तथा कानूनी समीक्षा सभी शामिल हैं।
Question 55
Question bank
सत्र न्यायालय का कार्यभार किस प्रकार निर्धारित होता है?
Why: सत्र न्यायालय का कार्यभार उच्च न्यायालय द्वारा CrPC के नियमों के अनुसार निर्धारित होता है।
Question 56
Question bank
सत्र न्यायालय की स्थापना के लिए कौन सा प्रावधान लागू होता है?
Why: सत्र न्यायालय की स्थापना और कार्यवाही के लिए कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसेजर (CrPC) लागू होता है।
Question 57
Question bank
सत्र न्यायालय की विशिष्ट शक्तियों को सीमित कर सकता है?
Why: उच्च न्यायालय सत्र न्यायालय की शक्तियों को सीमित या व्यावस्थित कर सकता है।
Question 58
Question bank
सत्र न्यायालय की कार्यवाही का उद्देश क्या है?
Why: सत्र न्यायालय का मुख्य उद्देश गंभीर अपराधों का न्यायपूर्ण निपटारा करना है।
Question 59
Question bank
सत्र न्यायालय कौन-से अपराधों की सुनवाई करता है?
Why: सत्र न्यायालय समान्यत: दंडनीय अपराधों को देखता है जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रविधान होता है।
Question 60
Question bank
न्यायालय के संदरभ में, स्त्रि‍य न्यायालय की स्थापना किस कानून के तहत की जाती है?
Refer to the diagram below which summarizes विभिन्न न्यायालयों की स्थापना के स्रोत।
Why: स्त्रि न्यायालय की स्थापना दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत होती है, जो अधिदेशनात्मक और न्यायिक प्रक्रिया को निर्दिष्ट करता है।
Question 61
Question bank
स्त्रि न्यायालय के क़्षेत्राधिकार के बारें में निम्नलिखित में से कौन सही है?
Refer to the diagram below which दर्शाता है विभिन्न न्यायाधिकार क्षेत्रों को।
लेबल: 'अपरोध का प्रकार: गंभीर अपरोध', 'अपरोध की सीमा: जिला या क़्षेत्र', 'स्त्रि न्यायालय क़्षेत्राधिकार'।
Why: स्त्रि न्यायालय का क्षेत्राधिकार मुख्य रूप से गंभीर अपराध मामलो तक सीमित होता है।
Question 62
Question bank
स्त्रि न्यायालय में कितने प्रकार के न्यायाधिक़तिय होते हैं? नीचे दी गई जानकारी पर गौर करें।
Refer to the diagram below showing न्यायाधिकारों की संरचना और उनकी न्यायिकता।
लेबल: 'मुख्य न्यायाधिकार', 'सहायक न्यायाधिकार', 'नियुक्ति का अधिकारी'।
Why: स्त्रि न्यायालय में मुख्य न्यायाधिकार के अलावा अन्य न्यायाधिकार भी नियुक्‍त किए जाते हैं ताकि न्याय प्रक्रिया सुचारू रूप से चले सके।
Question 63
Question bank
स्त्रि न्यायालय के न्यायाधिकार की न्युक्ति का अधिकारी किस पास होता है?
Refer to the diagram below illustrating नियुक्ति प्रक्रिया।
लेबल: 'न्यायाधिकार नियुक्ति', 'राज्य सरकार', 'संसद', 'राष्ट्रपति'।
Why: स्त्रि न्यायालय के न्यायाधिकारों की नियुक्ति द्वार राष्ट्रपति की जाती है, जो संविधानिक प्राधिकारों के तहत आता है।
Question 64
Question bank
निम्नलिखित में से कौन सा स्त्रि न्यायालय की कार्‍यप्रणाली का हिस्सा नहीं है?
Refer to the diagram below जो स्त्रि न्यायालय के कार्यप्रणाली के घटकों को दर्शाता है।
लेबल: 'सुनवाई', 'साक्ष्य ग्रहण', 'अपील निरीक्षण', 'न्यायाधिकार की नियुक्ति'।
Why: न्यायाधिकार की नियुक्ति न्यायपालिका की प्रक्रिया है, जबकि कार्‍यप्रणाली में लंबे समय से नहीं है, जो मुख्यतः न्यायालय की भूमिका है।
Question 65
Question bank
सदर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मामलों में से किस प्रकार की है? Refer to the diagram below जो विभिन्न मामलों को वर्गीकृत करता है। लेबल: 'कार्यभाव', 'संपत्ति न्याय', 'तकनीकी जाँच', 'प्रशासनिक बाघाओं'।
Why: सदर न्यायालय को समाने आने वाली प्रमुख मामलों प्रशासनिक और संघटन संबंधी होती हैं, जैसे कार्यभाव एवं उचित संघटनओं का अभ्यास।
Question 66
Question bank
सदर न्यायालय में नीयुक्त न्यायाधिशों का कार्यकाल किस प्रकार निर्धारित होता है? Refer to the diagram below depicting कार्यकाल और नीयुक्ति। लेबल्स: 'नीयुक्ति तिथि', 'सेवानिवृत्ति आयु', 'नियुक्ति का कार्यकाल'।
Why: सदर न्यायालय के न्यायाधिश अपनों सेवानिवृत्ति आयु तक कार्यरत रहते हैं या वे स्वतंत्र रूप से उसी दिन तक कार्य करते हैं।
Question 67
Question bank
सदर न्यायालय की नियुक्ति स्थलाधिकारी के चयन में kōन-सा कथन सही है? Refer to diagram below showing न्यायालय स्थल और उसके संबंधित क्षेत्राधिकार। Labels: 'जिला क्षेत्राधिकारी', 'संघीय क्षेत्राधिकारी', 'सदर न्यायालय', 'न्यायालय स्थल'।
Why: सदर न्यायालय का क्षेत्राधिकारी सामान्यतः जिला प्रमुख पर सीमित होता है जो जिले के अधिकृत क्षेत्र वाले अधिकारियों की सुवनवाई करता है।
Question 68
Question bank
सदर न्यायालय की नियुक्ति में निर्मलिकित में से किस प्रकार की सुवनवाई की जाती है? Refer to diagram below detailing नियुक्ति प्रक्रम। लेबल्स: 'मुखदमे की सुवनवाई', 'आपील', 'साक्ष्य प्रस्तुत', 'मुल्जिम की तसदीक'।
Why: सदर न्यायालय में मुखय रूप से गवाहों के बयान और सबूतों की जांच करके न्याय निरूपण प्रदान किया जाता है।
Question 69
Question bank
निम्नलिखित में से कौन सा सदर न्यायालय के प्रशासनिक प्रबंधन में प्रमुख भूमिका निभाता है? Refer to diagram below illustrating न्यायालय के प्रशासन। लेबल्स: 'मुख्य न्यायाधिकारी', 'प्रशासनिक अधिकारी', 'न्यायालय', 'कार्यालय स्टाफ'।
Why: सदर न्यायालय के प्रशासन में मुख्य न्यायाधिकारी प्रशासनिक और न्यायिक दोनों जिम्मेदारियों का निर्वाह करते हैं।
Question 70
Question bank
सत्र न्यायालय की स्थापना किस उद्देश्य से की जाती है?
Why: Correct answer reasoning: सत्र न्यायालय मुक़्तयः गंभीर अपराधों की सुनवाई के लिए स्थापित होता है जो यातनावास जैसी दण्डनीय अपराधों को देता है।
Why students fall for the trap: अधिकांश विद्यार्थी विकल्प C चुनते हैं क्योंकि वे दण्ड की अवधि के आधार पर सत्र न्यायालय का सीमांकन करते हैं, जबकि ही यह सीमांकन गलत है। यह एक नियम पूर्व-शर्त अनदेखी (rule-precondition-skip) है।
Option-by-option: A गलत है क्योंकि सत्र न्यायालय कम गंभीर अपराधों को नहीं सुनता (premature rule application); B सही है क्योंकि यह अपराध सत्र न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है; C भ्रम है क्योंकि यह दो समान अवधारणा (confusion between similar concepts) को मिक्स कर देता है; D गलत है क्योंकि धारा 190 प्राधिकारी दर्ज करने से संबन्धित है, सत्र न्यायालय से नहीं (rote memorisation without understanding).
Question 71
Question bank
सत्र न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति की योग्यता क्या है?
Why: Correct answer reasoning: सत्र न्यायालय के न्यायाधीश के लिए आवश्यकता है कि वह अधिकृत हो और कम से कम दस वर्ष से अधिकृत के रूप में कार्यरत हो।
Why students fall for the trap: विद्यार्थी विकल्प A को चुनते हैं क्योंकि वे समझते हैं कि अधिकृत न्यायाधीश से अधिकांश अनुभव चाहिए, जो गलती है। यह नियम पूर्व-शर्त की अनदेखी (premature rule application) है।
Option-by-option: A गलत है क्योंकि अधिकृत न्यायाधीश अनुभव आवश्यक नहीं; B सही है क्योंकि अधिकृत के दस वर्ष का अनुभव आवश्यक है; C भ्रमित करता है कि सत्र न्यायालय न्यायाधीश पदों की आवश्यकता है; D गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय की सलाह से नियुक्ति प्रामाणिक नहीं।
Question 72
Question bank
सत्र न्यायालय में अभियोजन की प्राथमिक किस प्रकार होती है?
Why: Correct answer reasoning: सत्र न्यायालय में अभियोजन राजय सरकारी या उसके प्रतिनिघि (अधिक्ता) द्वारा किया जाता है; अभियोजन केवल पुलिस तक सीमित नहीं हैं।
Why students fall for the trap: विद्यार्थी विकल्प A चुनते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि अभियोजन पूरी तरह से राजय सरकार से निर्भर होती है, जो अधूरी समझ है। यह साधारण अनुचित सामांस्यिकीरण (biased reasoning) है।
Option-by-option: A गलत है क्योंकि पुलिस अधिक्तिओं को भी अभियोजन की जिम्मेदारी होती है, यह राजय सरकार से अलग है; B गलत है क्योंकि पुलिस ही अभियोजन नहीं करती; C गलत है क्योंकि पात्रकों को अभियोजन का अधिकार नहीं दिया गया; D सही है क्योंकि अभियोजन राजय सरकार या उसके अधिक्ता द्वारा होता है।
Question 73
Question bank
सत्र न्यायालय के समक्ष पुलिस द्वारा आरोप पत्र (Charge-sheet) प्रस्तुत करने की अन्तिम समय सीमा क्या निर्धारत करता है?
Why: Correct answer reasoning: धारा 167 के अनुसार, पुलिस को सियार्पीसी में निर्धारित 90 दिनों में आरोप पत्र समर्पित करना होता है, अतिरिक्त आरोप को इच्छा करना पड़ता है।
Why students fall for the trap: अधिकांश विद्यार्थी विकल्प B चुनते हैं क्योंकि वे समझते हैं कि सत्र न्यायालय मुद्दे की जटिलता पर निर्भर करती है, जो वास्तव में नियम के विरोघ में है। यह नियम पूर्व-शर्त की अनदेखी (rule-precondition-skip) है।
Option-by-option: A सही है क्योंकि 90 दिन की समय सीमा स्पष्ट है; B भ्रम है जो मुद्दे की जटिलता पर निर्भर करता है; C गलत है क्योंकि अदालत को कोई अतिरिक्त समय सीमा नहीं दी गई; D गलत है क्योंकि CrPC में स्पष्ट समय सीमा निर्धारित है।
Question 74
Question bank
यदि सत्र न्यायालय में पेश की गई प्राथमिक पत्रों पर प्रमाणिकरण (Authenticity) पर विवाद हो, तो वह स्थिति कैसी मानी जाएगी?
Why: Correct answer reasoning: प्राथमिक प्रमाणिकता विवाद होने पर साक्ष्य को अधीनस्थ साक्ष्य माना जाता है और उसकी सत्यता प्रमाणित करने के लिए अन्य साक्ष्यों की जरूरत पड़ती है।
Why students fall for the trap: अधिकांश छात्र विकल्प B या D को पसंद करते हैं क्योंकि वे प्राथमिक साक्ष्य को ही प्रमाणित मान लेते हैं, जो भ्रम है (confusion between primary and secondary evidence)।
Option-by-option: A गलत है क्योंकि साक्ष्य पूरी तरह खरीजीज नहीं किया जाता; B भ्रम है क्योंकि प्रमाणिक विवाद में प्राथमिक साक्ष्य माना जाना सही नहीं; C सही है क्योंकि प्रमाणिक विवाद में साक्ष्य अधीनस्थ माना जाता है; D गलत है क्योंकि साक्ष्य सत्र में प्रमाणित नहीं माना जाता।
Question 75
Question bank
सत््ठर न्यायालय में 'मुल्जिम कोjamanत मिलने का अधिकारियों' किस प्राधिकारी के तहत नियामित होता है?
Why: सही उत्तर तर्क: सत््ठर न्यायालय में प्राधिकारी के बाद मुल्जिम कोjamanत मिलने का अधिकारी धारा 437 के तहत नियामित होता है। इसका अर्थ-हत्यारोपण गवाहीयों द्वारा अपवादों के मामलें में जमानत का प्रावधान होता है।
छात्र इस भ्रम में क्यों पड़ते हैं: अधिकारियों निश्चित धारा 438 (anticipatory bail) को चुनते हैं क्योंकि वे जमानत और अगरीम जमानत को भ्रमित करते हैं; यह पूर्व-धारणा लागू करने की गलती है।
विकल्प-द्वारा-चयन: A गलत है क्योंकि यह अगरीम जमानत के लिए है; B गलत है क्योंकि यह धारा 207 आवेदन से संबंधित है (संदर्भ के बिना याददाश्त); C सही है क्योंकि यह धारा 437 संबंधित जमानत की व्यवस्था है; D गलत है क्योंकि यह धारा 173 जांच रिपोर्ट से संबंधित है (संकल्पना का भ्रम)।
Question 76
Question bank
सत््ठर न्यायालय का अधिकारी क्षेत्र कौन सा है जब अपराध पर स्थायी न्यायालय पर आरोप होता है, लेकिन मामलो नाबालिग का हो?
Why: सही उत्तर तर्क: नाबालिग के मामलो में, चाहे मामलो गांभीर्य अपराध का हो, अपवाद न्यायालय की जगह Juvenile Justice Board का अधिकारी क्षेत्र होता है।
छात्र इस भ्रम में क्यों पड़ते हैं: विकल्प A चुनते हैं क्योंकि वे हट्या के गंभीर अपराध अपवाद होता पर तुरंत सोचते हैं कि सत््ठर न्यायालय सुनवाई करेगा; यह पक्षपातपूर्ण reasoning है।
विकल्प-द्वारा-चयन: A गलत है क्योंकि Juvenile Justice Board के मामलों के लिए नहीं; B सही है क्योंकि Juvenile Justice Board का अधिकारी है; C गलत है क्योंकि पूरी जांच होती है, पर सुनवाई नहीं; D गलत है क्योंकि विशेषाधिकार प्राप्त अदालत नहीं होती।
Question 77
Question bank
सत््ठर न्यायालय के न्यायाधिक द्वारा दी गई आदेश पर अपील (Appeal) कब तक दायर किया जा सकता है?
Why: सही उत्तर तर्क: CrPC धारा 374 के अनुसार, सत््ठर न्यायालय के निर्णय के खिलाफ अपील 30 दिनों के भीतर दायर करनी होती है।
छात्र इस भ्रम में क्यों पड़ते हैं: विकल्प C या B चुनते हैं क्योंकि वे अन्य कोर्ट प्राथमिकताओं के समय सीमा को भ्रमित करते हैं; यह तारीख-बाध्य भ्रम है।
विकल्प-द्वारा-चयन: A सही है क्योंकि 30 दिनों की सीमा स्पष्ट है; B, C गलत हैं क्योंकि कोई अन्य प्राथमिकताओं के लिए हैं; D गलत है क्योंकि समय सीमा आवश्यक है।
Question 78
Question bank
सत््ठर न्यायालय की समीक्षा करने की शक्ति किस प्राधिकारी में नहीं है?
Why: सही उत्तर तर्क: सत््ठर न्यायालय के पास स्वतंत्र समीक्षा करने का कोई विशेष प्राधिकारी नहीं है; केवल उच्च न्यायालय में अपील का प्रावधान है।
छात्र इस भ्रम में क्यों पड़ते हैं: विकल्प A या B चुनते हैं क्योंकि वे समीक्षा शक्तियों से संबंधी धाराओं को संम्बंधित समझ लेते हैं जो केवल उच्च अदालत तथा पुनर्विवेचन के लिए हैं; यह अपील और पुनर्विवेचन के बीच का भ्रम है।
विकल्प-द्वारा-चयन: A गलत है क्योंकि धारा 399 अपील के लिए है; B गलत है क्योंकि धारा 397 अपील की प्रक्रिया है; C गलत है क्योंकि धारा संधिग्ध है; D सही है क्योंकि CrPC में सत््ठर न्यायालय की समीक्षा की कोई प्राधिकारी नहीं है।
Question 79
Question bank
सत््ठर न्यायालय में अपराध के लिए प्रार्थनात्मक जाँच का अधिकारी किसे कहते हैं?
Why: सही उत्तर तर्क: प्रार्थनात्मक जाँच का अधिकारी पुलिस को होता है, और सत््ठर न्यायालय जाँच की अनुमति दे सकता है; स्वयं न्यायालय जाँच नहीं करता।
छात्र इस भ्रम में क्यों पड़ते हैं: वे व्यवस्थागत सत््ठर न्यायालय को जाँचकर्ता समझ लेते हैं (संदर्भ के बिना याददाश्त)।
विकल्प-द्वारा-चयन: A सही है क्योंकि पूर्ण जांच प्राधिकारी है; B गलत है क्योंकि सत््ठर न्यायालय स्वयं जांचकर्ता नहीं; C गलत है क्योंकि राज्य सरकार जांच करने वाली नहीं होती; D गलत है क्योंकि प्रार्थनात्मक जांच का अधिकार अवश्य है।
Question 80
Question bank
सत्र न्यायालय किस प्रकार के मामलोँ में अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकता है?
Why: सही उत्तर का कारण: सत्र न्यायालय अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकता है, पर अन्य न्यायालयों के कर्मचारियों पर इसका अधिकार नहीं होता।
छात्र इस जाल में क्यों फँसते हैं: अक्सर विकल्प D चूना जाता है क्योंकि विद्यार्थियों को अनुशासनात्मक कार्यवाही से जुड़े अधिकार को पूरी तरह समझ नहीं होता (तालिका बिना संदर्भ के याद करना)।
विकल्प अनुसार विवरण: A गलत है क्योंकि यह केवल अदालती कर्मचारियों से संबद्धित है न कि सिविल या दंडात्मक विभाग। B सही है क्योंकि यह अपने कर्मचारियों पर प्रभुत्व रखता है; C गलत है क्योंकि अन्य न्यायालयों के कर्मचारियों पर अधिकार नहीं है (क्षेत्राधिकार में भ्रम); D गलत है क्योंकि अधिकार का अभाव नहीं है (अपवादों की अनदेखी)।
Question 81
Question bank
सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियुक्त को नया सबूत प्रस्तुत करने का अधिकार कब तक होता है?
Why: सही उत्तर का कारण: सत्र न्यायालय में अभियुक्त को तब तक नया सबूत प्रस्तुत करने का अधिकार होता है जब तक सुनवाई पूरी न हो जाए अर्थात अंतिम चरण परीक्षा समाप्ति से पहले।
छात्र इस जाल में क्यों फँसते हैं: विकल्प C या B चुनते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि सुनवाई शुरू होने की स्थिति में नया सबूत स्वीकार नहीं होगा, जो कि एक सीमांत गलती है।
विकल्प अनुसार विवरण: A सही है क्योंकि अभियुक्त अर्द्ध अंतिम चरण से पहले नया सबूत जोड़े जा सकते हैं; B गलत है क्योंकि सुनवाई के अंतिम चरण में नया सबूत स्वीकार नहीं होता (भ्रमितता); C गलत है क्योंकि सुनवाई पूरी होने से पहले प्रस्तुत करना संभव है (सीमांत गलती); D गलत है क्योंकि निर्णय के बाद नया सबूत स्वीकार नहीं होता (यादृच्छिक अस्मिता)।
Question 82
Question bank
सत्र न्यायालय में एक न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायालय किस स्थिति में गठित किया जाता है?
Why: सही उत्तर का कारण: संकीर्ण मामलों की लिए विशेष अनुमति मिलने पर सत्र न्यायालय में दूसरा न्यायालय गठित कर सकता है, जो उत्सुकता से दूसरे न्यायालय के अनुमोदन के बाद ही होता है।
छात्र इस जाल में क्यों फँसते हैं: विकल्प A चुना जाता है क्योंकि उन्हें भ्रम होता है कि मुकदमों की संख्या से न्यायालय की संख्या बढ़ेगी, जो गलत है।
विकल्प अनुसार विवरण: A गलत है क्योंकि मामले की संख्या से न्यायालय की संख्या निर्धारित नहीं होती (धारणा भ्रम); B सही है क्योंकि अन्य न्यायालय की अनुमति से समिति गठित हो सकती है; C गलत है क्योंकि जिला और सत्र न्यायालय संयुक्त सुनवाई नहीं करते; D गलत है क्योंकि न्यायाधीश के अनुरोध पर समिति गठित का प्रावधान नहीं।
Question 83
Question bank
सत्र न्यायालय में मुकदमा चलाने हेतु आरोप पत्र (Charge) किस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है?
Why: सही उत्तर का कारण: जांच पूरी होने पर, पुलिस द्वारा आरोप पत्र अदालत को सौंपा जाता है ताकि सुनवाई आरंभ हो सके।
छात्र इस जाल में क्यों फँसते हैं: विकल्प A चुना जाता है क्योंकि उन्हें लगता है कि आरोपपत्र अभियोजन की मांग पर पहले प्रस्तुत किया जाता है, जबकि यह जांच पूरी होने पर ही संभव होता है।
विकल्प अनुसार विवरण: A गलत है क्योंकि आरोप पत्र जांच के बाद प्रस्तुत होता है; B सही है क्योंकि प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र दिया जाता है; C गलत है क्योंकि आरोप पत्र सुनवाई के दौरान प्रस्तुत नहीं होता; D गलत है क्योंकि आरोप पत्र लाना अदालत की जिम्मेदारी होती है।
Question 84
Question bank
सत्र न्यायालय के निर्णय को परीक्षण कराने के लिए कौन अधारोपर पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर की जाती है?
Why: सही उत्तर का कारण: CrPC में सत्र न्यायालय के फैसलों के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका का कोई प्रावधान नहीं है, अपील का प्रावधान होता है।
छात्र इस जाल में क्यों फँसते हैं: विकल्प A या B चुनते हैं क्योंकि वे पुनर्विचार याचिका को यदा-कदा संधारित समझते हैं; यह अवधारणा भ्रम है।
विकल्प अनुसार विवरण: A गलत है क्योंकि CrPC में सत्र न्यायालय के लिए पुनर्विचार की अनुमति नहीं; B गलत है क्योंकि नया तथ्य सामने आने पर मान्य तरीका याचिका नहीं; C गलत है क्योंकि निर्णय विरोधाभास का आधार पुनर्विचार नहीं; D सही है क्योंकि पुनर्विचार का प्रावधान सत्र न्यायालय में नहीं है।
Question 85
Question bank
जब सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियुक्त का साक्ष्य बिगड़ता है, तो अदालत किस प्रकार कार्रवाई कर सकती है?
Why: सही उत्तर का कारण: सत्र न्यायालय सुनवाई स्थगित कर सकती है यदि अभियुक्त का साक्ष्य बिगड़ा हो और उचित चिह्नितकीय प्रमाण प्रस्तुत हो।
छात्र क्यों फंसते हैं: विद्यार्थी विकल्प D को चुन लेते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि साक्ष्य बिगड़ने पर स्वतः रिहाई होनी चाहिए, जो वास्वतिकता से परे है (biased reasoning)।
विकल्प विश्लेषण: A सही है क्योंकि चिह्नितकीय प्रमाण के आधार पर स्थगन संभव है; B गलत है क्योंकि स्थगन के बिना सुनवाई बिगड़ने पर संभव नहीं होता (overlooking exceptions); C गलत है क्योंकि न्यायालय स्वयं परीक्षण नहीं कराता (rote memorisation without context); D गलत है क्योंकि रिहाई केवल उचित प्रमाणों से होगी (biased reasoning)।
Question 86
Question bank
सत्र न्यायालय की कार्यवाही में न्यायाधीश को किन मामलो में तिथि निरधारण करने का अधिकार है?
Why: सही उत्तर का कारण: सत्र न्यायालय सुनवाई की सभी महत्वपूर्ण तिथियों कोनिर्धारित करने का अधिकार रखता है, जिसमें प्रार्थमिक और अंतिम दोनों शामिल हैं।
छात्र क्यों फंसते हैं: विद्यार्थी विकल्प A या C चुनते हैं क्योंकि वे तिथि निर्धारण को सीमित समझते हैं, यह एक कोजि ड़ त्रुटि है (edge-case omission)।
विकल्प विश्लेषण: A गलत है क्योंकि न्यायालय सभी तिथियाँ निर्धारित करता; B सही है क्योंकि इसमें सभी तिथियाँ शामिल हैं; C गलत है क्योंकि केवल अंतिम तिथियों के निर्धारण की बात गलत है; D गलत है क्योंकि तिथि निर्धारण सत्र न्यायालय का अधिकार है (rote memorisation without context)।
Question 87
Question bank
सत्र न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा सुनवाई के दौरान साक्ष्य अधिक मान गया परन्तु बाद में वह प्रमाणित हुआ, तो क्या होगा?
Why: सही उत्तर का कारण: जब अधिकृत साक्ष्य बाद में प्रमाणित हो जाता है, तो उसका पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिए, ताकि प्रारंभिक साक्ष्य की तरह न माना जाए।
छात्र क्यों फंसते हैं: विद्यार्थी विकल्प A चुनते हैं क्योंकि वे प्राथमिककरण के बाद जल्दबाजी में साक्ष्य को बन बताता है, जो एक भ्रम है (confusion between primary and secondary evidence)।
विकल्प विश्लेषण: A गलत है क्योंकि पुनर्मूल्यांकन जरूरी है; B सही है क्योंकि पुनर्मूल्यांकन की मांग करता है; C गलत है क्योंकि शोध परिशुद्ध नहीं होता; D गलत है क्योंकि कानूनी प्राथमिकता नहीं होती (rote memorisation without context)।
Question 88
Question bank
सत्र न्यायालय के समक्ष किसी दोषी को फांसी की सजा देने के संदर्भ में कौन सा प्राधिकारी अनुपम्ति देता है?
Why: सही उत्तर का कारण: फांसी की सजा के लिए सत्र न्यायालय की ओर से दिए गए निर्णय की पुष्टि राज्य सरकार की मंजूरी के बिना नहीं होती।
छात्र क्यों फंसते हैं: विद्यार्थी विकल्प B को चुन लेते हैं क्योंकि वे सोचते हैं कि केवल उच्च न्यायालय की अनुपम्ति पर्याप्त है, जो एक भ्रम है (confusion between appellate and executive approval)।
विकल्प विश्लेषण: A गलत है क्योंकि सत्र न्यायालय आवेदन नहीं देता; B गलत है क्योंकि उच्च न्यायालय अनुपम्ति आवश्यक नहीं; C सही है क्योंकि राज्य सरकार की अनुपम्ति आवश्यक है; D गलत है क्योंकि केंद्रीय सरकार की अनुपम्ति नहीं होती (rote memorisation without context)।
Question 89
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय की प्रतिभाशा क्या है? Refer to the diagram below detailing मजिस्ट्रेट न्यायालय की प्रतिभाशा और स्वरूप, जिसके अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों और अधिकार दर्शाए गए हैं।
Why: मजिस्ट्रेट न्यायालय वह स्थानीय न्यायालय होता है जो प्रथम श्रेणी अपऱाधिक अपऱाधिक और सिविल मामलों की प्रारण्भिक सुनवाई करता है।
Question 90
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्रकारों में से कौन-सा न्यायालय प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के अंतर्गत आता है? Refer to the diagram below जिसमें मजिस्ट्रेट न्यायालय के विभिन्न प्रकारों और उनके अधिकारों को दर्शाया गया है।
Why: प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट में सहायक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट आते हैं, जो कुछ विशेष मामलों में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के अधिकार से कार्य करते हैं।
Question 91
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय के किस अधिकारी का अन्तर्गत प्रभाव क्षेत्र को कवर करता है? Refer to the diagram depicting मजिस्ट्रेट न्यायालय के अधिकारियों और उनके क्षेत्राधिकार।
Why: जिला मजिस्ट्रेट का क्षेत्राधिकारी प्रभाव क्षेत्र होता है, जहाँ वह अपऱाधों की सुनवाई और प्रशासनिक कार्य करता है।
Question 92
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय की शक्तियों और सीमाओं में से कौन-सी शक्ति मजिस्ट्रेट के पास नहीं होती? Refer to the diagram illustrating मजिस्ट्रेट की शक्तियॉं और सीमाओं के अनुरूप।
Why: मजिस्ट्रेट मृत व्यक्ति के विरुद्ध दोष नहीं दे सकता क्योंकि मृत व्यक्ति के खिलाफ मुकदमै चलाना न्यायसंगत नहीं होता।
Question 93
Question bank
आपराधिक प्रक्रिया में मजिस्ट्रेट की भूमिका क्या होती है? Refer to the diagram जो आपराधिक प्रक्रिया में मजिस्ट्रेट के विशिष्ट कार्यों को दर्शाता है।
Why: मजिस्ट्रेट अपऱाध का प्रारण्भिक परीक्षण करता है, जांच कर आदेश जारी करता है जिससे न्यायालय में त्वरित और प्रभावी होती है।
Question 94
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय के निर्देशन न्यायिक अधिकारी किस अधिकारी के द्वारान निर्देशित होते हैं?\
Refer to the diagram below जिसमें मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्रमुख एवं अधिकारी दिखाए गए हैं।
Why: मजिस्ट्रेट न्यायालयों के प्रमुख, अधिकारी और कार्यभार कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973 के तहत निर्धारित किया गया है।
Question 95
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय के किस प्रकार के न्यायालय का क्षेत्राधिकार सिरमिट अधिकारियों के मामलों तक होता है?\
Refer to the diagram which classifies मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्रकार और उनके क्षेत्राधिकार।
Why: द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट केवल सीमित, छोटे अपराधिक मामलों की सुनवाई करते हैं, जिनका दंड सीमित होता है।
Question 96
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय की न्यायिक शक्तियों में से कौन-सी शक्ति होती है?\
Refer to the diagram highlighting मजिस्ट्रेट न्यायालय की न्यायिक शक्तियाँ।
Why: मजिस्ट्रेट न्यायालय साक्ष्यों को समन जारी कर उनसे पुष्टि करता है, जो न्यायिक शक्तियों का भाग है।
Question 97
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय की कार्यप्रवाहिक शक्तियों में से कौन-सी शक्ति शामिल है?\
Refer to the diagram depicting मजिस्ट्रेट न्यायालय के कार्यप्रवाहिक अधिकार।
Why: मजिस्ट्रेट उचित आदेश और निर्णय देकर प्रशासनिक और पुजिल कार्यों का संचालन करता है, जो कार्यप्रवाहिक शक्ति है।
Question 98
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय की सीमाओं में से कौन-सी सीमा सही है?\
Refer to the diagram explaining मजिस्ट्रेट न्यायालय की सीमा और अधिकार।
Why: मजिस्ट्रेट न्यायालय केवल क्षेत्राधिकार के अनुसार कार्य करता है; अन्यथा उसका अधिकार नहीं होता।
Question 99
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायकाय के प्रतिम परिस्थिति मजिस्ट्रेट का दंडात्मक अधिकारी क्या है? Refer to the diagram which lists मजिस्ट्रेट के दंडात्मक अधिकारी और सीमा।
Why: प्रतिम परिस्थिति मजिस्ट्रेट तीन वर्ष तक की कारावास और जुर्माना लगा सकते हैं, जो अधिकांश दंडात्मक सीमाएँ हैं।
Question 100
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधिक कौन-सी प्रक्रमिय शामील नहीं होती? Refer to the diagram showing मजिस्ट्रेट न्यायकाय की प्रक्रमिय।
Why: राष्ट्रपति के आदेश सीमा रज्जित मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधीन नहीं होते, जबकि अन्य सभी प्रक्रमिय मजिस्ट्रेट के अधिकारी क्षेत्रों में होती हैं।
Question 101
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायकाय में कौन-सा अधिकारी आपराधी मामलें का अंन्तिम निर्णय देता है? Refer to the diagram illustrating मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधिकारी और निर्णय क्षमत।
Why: सत्र न्यायकाय का न्यायकाधिकारी आपराधी मामलों का अंतिम निर्णय देने का अधिकारी रहता है, जबकि मजिस्ट्रेट केवल प्रारंभिक या सीमित दायरे में निर्णय देते हैं।
Question 102
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायकाय के किस प्राकार की न्यायकिय सत्ता विस्तृत होती है? Refer to the diagram of मजिस्ट्रेट न्यायकाय के प्रकार और उनके न्यायिक अधिकारी।
Why: प्रथम परिस्थिति मजिस्ट्रेट की न्यायिक सत्ता दूसरे व्यापक होती है एवं व्यापक न्यायालय के मामलों का निर्णय देते हैं।
Question 103
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधिकारी क्षेत्रों में कौन-सा प्राधान शामील है? Refer to the diagram showing मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधिकारी क्षेत्रों।
Why: मजिस्ट्रेट सामान्य दंडनीय अपरोधों की प्राथमिक रूप से करते हैं और उनका दोन्ष फैसला निर्णय करते हैं।
Question 104
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय में अपराधिक प्रक्रम के संदर्भ में कौन्-सी कार्यवाही हो सकती है?
Why: मजिस्ट्रेट अपराधिक मामले में जाँच करता है, प्रदर्शन एकत्र करता है और सुनवाई कर निर्णय देता है।
Question 105
Question bank
मजिस्ट्रेट की शक्तियों में कौन्-सी शक्ति नहीं आती?
Why: राष्ट्रीय नीति निर्धारण मजिस्ट्रेट की शक्तियोंक्षेत्र में नहीं आता; वह न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी होते हैं।
Question 106
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय किस प्रकार के मामलों में शमीयत प्रदान कर सकता है?
Why: मजिस्ट्रेट न्यायालय उस अपराध में शमीयत या ज़मानत प्रदान करता है, जहाँ कानून द्वारा उसे अधिकार प्राप्त हो।
Question 107
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्राधिकारी की न्युक्ति कौन् करती है?
Why: मजिस्ट्रेट न्यायालय के अधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार के द्वारा की जाती है।
Question 108
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय में किस प्रकार के मामलों की जांची जाती है?
Why: मजिस्ट्रेट न्यायालय अपराधिक और सिविल दोनों प्रकार के मामलों को सुनवाई करता है, पर निश्चित विधिक सीमाओं में।
Question 109
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायलय के अधिकारी का उल्लंघन करने पर कौन सा प्रावधान लागू होता है? Refer to the diagram depicting मजिस्ट्रेट न्यायलय के अधिकारी और उल्लंघन के प्रकार।
Why: मजिस्ट्रेट के अधिकारियों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्यवाही की जा सकती है, जिससे न्यायिक प्रणाली की मर्यादा बनी रहती है।
Question 110
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायलय के किस अधिकारी को विशेष कार्यम्यता दी जाती है? Refer to the diagram that lists मजिस्ट्रेट न्यायलय के अधिकारियों को दी गई विशेष कार्यम्यता।
Why: विशेष मजिस्ट्रेटों को कुछ प्रस्तुतियों में अतिरिक्त अधिकारी और शक्तियाँ दी गई हैं जो अन्य मजिस्ट्रेटों के पास नहीं होती।
Question 111
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायलय की कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य क्या है? Refer to the diagram summarizing मजिस्ट्रेट न्यायलय की कार्यप्रणाली और उद्देश्य।
Why: मजिस्ट्रेट न्यायलय का मुख्य उद्देश्य सामाजिक शान्ति बनाए रखना तथा न्याय का त्वरित वितरण सुनिश्चित करना है।
Question 112
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायलय की प्रकर के आधारों की जाँच करता है? Refer to the diagram indicating मजिस्ट्रेट न्यायलय की जाँच प्रकिया।
Why: मजिस्ट्रेट सामान्य और मामूली अपराधों की प्राथमिकी जाँच करता है और उसमें न्यायिक कार्यवाही तय करता है।
Question 113
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायलय के प्रथमिक कार्य कौन करता है? Refer to the diagram explaining मजिस्ट्रेट न्यायलय के प्रथमिक कार्य।
Why: जिला मजिस्ट्रेट मजिस्ट्रेट न्यायलय के प्रथमिक कार्यों का समन्वय करते हैं।
Question 114
Question bank
मजिस्ट्री न्यायालय के प्रभारी में आने वाले मामलो के लिए कौन-सी प्राधिकारी दी जाती है? Refer to the diagram showing मजिस्ट्री न्यायालय की प्राधिकारी।
Why: मजिस्ट्री आम तौर पर आप्राधिक मामलो को प्राधिकारी देते हैं तथा सानुसारिक सुरक्षा बनी रहती है।
Question 115
Question bank
मजिस्ट्री न्यायालय की शक्तियों सीमित क्यों होती हैं? Refer to the diagram illustrating मजिस्ट्री न्यायालय की शक्तियों और सीमाओं का कारण।
Why: मजिस्ट्री की शक्तियां सीमित होती हैं ताकि प्रशासन और न्यायपालिका में संपूर्ण कायम रहे।
Question 116
Question bank
मजिस्ट्री न्यायालय में अवधि तय करने का अधिकार किसके पास होता है? Refer to the diagram showing मजिस्ट्री न्यायालय के कार्यकाल और अवधि।
Why: मजिस्ट्री की नियुक्ति और कार्यकाल राज्य सर्कार द्वारा नियत किया जाता है।
Question 117
Question bank
मजिस्ट्री न्यायालय के अधिकारकर्ताओं अधिकारों का कौं-सा प्रकार नहीं आता? Refer to the diagram outlining मजिस्ट्री न्यायालय के अधिकारियों के अधिकार।
Why: उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करना मजिस्ट्री के अधिकार में नहीं आता; यह पक्क्षकार या वकील करते हैं।
Question 118
Question bank
मजिस्ट्री न्यायालय के प्राधिकारी और न्यायिक कर्मी की नियुक्ति के लिए कौन-सा योग्यता आवश्यक है? Refer to the diagram listing मजिस्ट्री न्यायालय के प्राधिकारी पदों पर नियुक्ति योग्यता।
Why: मजिस्ट्री पदों के लिए कानून में डिग्री और संबंधित योग्यता अनिवार्य होती है।
Question 119
Question bank
सत्र न्यायालय और मजिस्ट्रेट न्यायालय में क्या फर्क होता है? Refer to the diagram comparing मजिस्ट्रेट और सत्र न्यायालय के अधिकारी।
Why: सत्र न्यायालय गुन्ही अपरााध मामलो की सुनवाई करता है जबकि मजिस्ट्रेट केवल प्रार्थमिक या सीमित मामलों का निपटारा करता है।
Question 120
Question bank
निम्नलिखित में से किस प्राधिकारी के अंतर्गत न्यायालय का क्षेत्राधिकार निश्चित होता है?\
Refer to the diagram below for विविधान्य न्यायालयों के क्षेत्राधिकार और प्रलिखा के विवराण के बारे में।
मजिस्ट्रेट न्यायालय क्षेत्राधिकारधारा 11क्षेत्राधिकार वर्णनधारा 52 (IPC)अपराध वर्णनअनुच्छेद 226 (संविधान)विदेशी याचिका
Why: क्रिमिनल प्रकोष्ठ संहिता की धारा 11 में न्यायालय न्यायालयों के क्षेत्राधिकार का निर्धारण किया गया है।
Question 121
Question bank
निम्न में से कौन सा न्यायालय न्यायालय प्रथम श्रेणी का न्यायालय नहीं होता?\
Refer to the diagram जिसमें न्यायालयों के प्रकार दर्शाए गये हैं (प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी)।
मजिस्ट्रेट न्यायालय प्रकारप्रथम श्रेणीद्वितीय श्रेणीअधिकार सीमित
Why: द्वितीय श्रेणी का न्यायालय प्रथम श्रेणी के अधिकारियों वाला नहीं होता।
Question 122
Question bank
न्यायालय न्यायालय का अधीकार क्षेत्र निर्धारण करते समय निम्नलिखित में से कौन सा तत्व मुख्यपृष्ठ नहीं माना जाता?\
Refer to the diagram illustrating विविधान्य कारक जो क्षेत्राधिकार निर्धारण में आते हैं।
क्षेत्राधिकार निर्धारण के कारकअपराध का स्थानमामले का प्रकारममला दर्ज तारीखमजिस्ट्रेट योग्यता
Why: मामला दर्ज होने की तारीख क्षेत्राधिकार निर्धारण का तत्व नहीं है, जबकि अन्य सभी मुख्य तत्व होते हैं।
Question 123
Question bank
न्यायालयिक सुरक्षा के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा न्यायालय न्यायालय अधीकार नहीं रखता?\
Refer to the diagram showing न्यायालय के दंड देने की सीमा और श्रेणियाँ।
मजिस्ट्रेट के दंड की सीमाएँप्रथम श्रेणी7 वर्ष तकद्वितीय श्रेणी1 वर्ष तकविशेष मजिस्ट्रेटनिर्धारितसत्र न्यायालयअसीमित
Why: द्वितीय श्रेणी का न्यायालय अधिकारम 1 वर्ष तक कारावास का अधिकार रखता है, जो प्रथम श्रेणी से कम है।
Question 124
Question bank
न्यायालय न्यायालयों में न्यायाधीश की नियुक्ति किस प्राधिकारी द्वारा की जाती है?\
Refer to the diagram below जिसमें विविधान्य न्यायालयों के न्यायाधीश की नियुक्ति के अधिकारी दिए गये हैं।
मजिस्ट्रेट न्यायाधीश नियुक्ति प्राधिकारीराज्य सरकारउच्च न्यायालयकेंद्र सरकारलोक कल्याण बोर्ड
Why: न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति सधान्यतः राज्य सरकार करती है।
Question 125
Question bank
मजिस्टेªट न्यायालय के प्रथमिक श्रेणी के अधिकारों में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं है? Refer to the diagram below जिसमें प्रथमिक और द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेटों के अधिकार तुलनात्मक रूप से दर्शाए गए हैं।
प्रथम और द्वितीय श्रेणी के अधिकारप्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट- 7 वर्ष तक कैद- फौजदारी मुकदमाद्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट- 1 वर्ष तक कैद- सीमित मुकदमाधारा 144 लागू करने का अधिकार विशेष मजिस्ट्रेट या अन्य प्राधिकारी के पास है
Why: धारा 144 लागू करने का अधिकार विशेष मजिस्ट्रेट या अन्य प्राधिकारी का होता है, प्रथमिक श्रेणी के मजिस्ट्रेट स्वतंत्र रूप से नहीं करता।
Question 126
Question bank
मजिस्टेªट न्यायालय में 'विशेष मजिस्ट्रेट' किस प्रकार के मामलों को देखते हैं? Refer to the diagram which categorizes विभिन्न मजिस्ट्रेटों के न्याय क्षेत्र के अनुसार।
मजिस्ट्रेट न्यायालय में विभिन्न प्रकारविशेष मजिस्ट्रेट- सीमित अपराधसामान्य मजिस्ट्रेट- आपराधिक मुकदमें
Why: विशेष मजिस्ट्रेट सीमा या विशेष अपराधों जैसे सदकों पर बिक्री, सार्वजनिक शांति आदि के मामलोँ देखते हैं।
Question 127
Question bank
मजिस्टेªट न्यायालय के क्षेत्राधिकारी में "अपराध का स्थान" के अलावा और कौन-सा कारक प्रमुख है? Refer to the diagram listing various jurisdictional factors.
क्षेत्राधिकार निर्धारण के प्रमुख कारकअपराध का स्थानअपराध की गंभीरताअदालत का स्थानमजिस्ट्रेट की योग्यता
Why: अपराध की घटनास्थल क्षेत्राधिकारी निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Question 128
Question bank
मजिस्टेªट न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में किस गतिवि¹धि से एक मामला स्तर न्यायालय को भेजा जाता है? Refer to the diagram below showing मजिस्टेªट से स्तर न्यायालय तक के प्रकरण।
मजिस्ट्रेट से सत्र न्यायालय प्रकरणमजिस्ट्रेट न्यायालयसत्र न्यायालयगंभीरता बढ़ने पर
Why: जटिल और गंभीर अपराधों के मामलों को मजिस्टेªट से स्तर न्यायालय भेजा जाता है।
Question 129
Question bank
मजिस्टेªट न्यायालय की अनुसन्धान में "अधिकार क्षेत्र" का मुख्य उद्देश्य क्या है? Refer to the diagram illustrating मजिस्टेªट के क्षेत्राधिकारी कारक के मुख्य उद्देश्यों।
मजिस्ट्रेट न्यायालय अधिकार क्षेत्र उद्देश्यमामलों का न्यायसंगत और न्यायिक निर्णय
Why: अधिकार क्षेत्र का प्रमुख उद्देश्य विशिष्ट मामलोँ का न्यायसंगत निर्णय करना है।
Question 130
Question bank
मजिस्ट्रेट न्यायालय के कारण-सी प्रक्रमिय शासनमिल नहीं होती है? Refer to the diagram showing मजिस्ट्रेट न्यायालय की समान्य प्रक्रमिया।
मजिस्ट्रेट न्यायालय प्रक्रियामामला दर्ज करनासाक्ष्य प्रस्तुत करनामुकदमा सुनवाईअदालत के बाहर सजा देना
Why: सजा के व्यक्तिगत न्यायालयों के अंदर ही दी जाती है, अदालत के बाहर सजा देने का प्रक्रमिया के विरुद्ध है।
Question 131
Question bank
आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत समन प्रकरण की जांच करने के लिए कौन सा मजिस्ट्रेट सक्षम होता है?
Why: सही उत्तर का कारण: समन प्रकरण की सुनवाई प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा की जाती है। किंतु, आपराधिक प्रक्रिया संहिता विशेष रूप से प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को ऐसे प्रकरणों की सुनवाई करने की अनुमति देती है, जबकि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट का अधिकार क्षेत्र केवल मेट्रो क्षेत्रों तक सीमित है।
छात्र अक्सर गलती क्यों करते हैं: छात्र मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (विकल्प A) को चुनते हैं, यह मानकर कि सभी शहरी क्षेत्रों में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट होते हैं और इसलिए वे सदैव समन प्रकरणों की सुनवाई करते हैं, जो अधिकार क्षेत्र की सतही अवधारणा भ्रम का उदाहरण है।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A सही प्रतीत होता है क्योंकि मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट मेट्रो क्षेत्रों में समन प्रकरणों की सुनवाई कर सकते हैं—यह मेट्रो और अन्य क्षेत्रों में भ्रम है; B सही है क्योंकि प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के पास समन प्रकरणों के लिए स्पष्ट अधिकार क्षेत्र है; C यह मानकर गलत है कि द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट समन प्रकरणों की सुनवाई करता है (जो वह नहीं करता); D अपवादों को नजरअंदाज कर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की प्रशासनिक भूमिका को समन प्रकरण की सुनवाई के अधिकार क्षेत्र से भ्रमित करता है।
Question 132
Question bank
आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 29 के अंतर्गत, किस मजिस्ट्रेट के पास मृत्यु दंड या आजीवन कारावास से दंडनीय गंभीर अपराधों को छोड़कर संज्ञानात्मक अपराध में जमानत देने का अधिकार होता है?
Why: सही उत्तर का कारण: प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट संज्ञानात्मक मामलों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास से दंडनीय गंभीर अपराधों को छोड़कर जमानत देने का अधिकार रखते हैं, जबकि गंभीर अपराधों की सुनवाई सत्र न्यायालय या उच्च प्राधिकरण द्वारा की जाती है।
छात्र अक्सर गलती क्यों करते हैं: कई छात्र 'कोई भी मजिस्ट्रेट' विकल्प चुनते हैं, यह मानकर कि सभी मजिस्ट्रेटों के पास जमानत देने के समान अधिकार होते हैं, जो नियम के विशेष प्रतिबंधों की जाँच न करने का संकेत है।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A सामान्यीकरण के कारण प्रलोभन पैदा करता है (नियम का समयपूर्व अनुप्रयोग); B सही है क्योंकि प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास गंभीर अपराधों को छोड़ अधिकार है; C कार्यकारी मजिस्ट्रेट के गैर-न्यायिक कार्यों को न्यायिक अधिकार से भ्रमित करता है (सतही अवधारणा भ्रम); D कम श्रेणी के मजिस्ट्रेटों के कुछ अधिकारों की याद करते हुए जमानत प्रतिबंधों को नजरअंदाज करता है (प्रसंग विहीन याददाश्त)।
Question 133
Question bank
आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, पुलिस रिपोर्ट पर दर्ज प्रकरण की सामान्यतः जांच कौन सा मजिस्ट्रेट करता है?
Why: सही उत्तर का कारण: पुलिस रिपोर्ट पर दर्ज प्रकरण सामान्यतः प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा जांचे जाते हैं, सिवाय उन अपराधों के जो विशेष रूप से सत्र न्यायालय या अन्य न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आते हों।
छात्र अक्सर गलती क्यों करते हैं: 'मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट' शीर्षक की अधिकारप्रदता से छात्र प्रभावित होकर इसे चुनते हैं, यह मानकर कि स्थानीय उच्चतम न्यायिक अधिकारी इस प्रकार के प्रकरणों की सुनवाई करते हैं, जो पक्षपाती तर्क का उदाहरण है।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A अत्यधिक अधिकारप्रद लेकिन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट समन/एफआईआर आधारित प्रकरणों की अधिकतर निगरानी करते हैं, सुनवाई नहीं (पक्षपाती तर्क); B द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट अधिकांश पुलिस रिपोर्ट-आधारित प्रकरणों की जांच नहीं कर सकते (किंचित अपवाद नज़रअंदाज़ करना); C सही है क्योंकि प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट सामान्यतः जांचकर्ता होते हैं; D मेट्रोपॉलिटन व्यवस्था की उपयुक्तता में भ्रम पैदा करता है (सतही अवधारणा भ्रम)।
Question 134
Question bank
आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुसार, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत का अध्यक्ष कौन होगा?
Why: सही उत्तर का कारण: आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 16 के अनुसार, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति केंद्रीय सरकार द्वारा की जाती है जो मेट्रो क्षेत्रों के लिए है।
छात्र अक्सर गलती क्यों करते हैं: छात्र विकल्प A चुनते हैं क्योंकि वे याद करते हैं कि सभी मजिस्ट्रेट राज्य सरकार द्वारा नियुक्त होते हैं, मेट्रो मजिस्ट्रेटों के लिए केंद्रीय नियुक्ति के विशेष नियम को अनदेखा कर देते हैं।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A सामान्य जानकारी के अनुकूल लेकिन मेट्रो अपवाद को अनदेखा करता है (संदर्भविहीन स्मरण); B आपराधिक प्रक्रिया संहिता के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार सही है; C उच्च न्यायालय की पर्यवेक्षण शक्ति को नियुक्ति अधिकार से भ्रमित करता है (सतही अवधारणा भ्रम); D काल्पनिक है और संयुक्त प्राधिकरण पूर्वाग्रह के आधार पर चुना गया है (पक्षपाती तर्क)।
Question 135
Question bank
यदि द्वितीय श्रेणी का मजिस्ट्रेट कोई शिकायत प्राप्त करता है और उसे लगता है कि अपराध केवल प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो उसे क्या करना चाहिए—
Why: सही उत्तर का कारण: आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 192(1)(b) के अनुसार, यदि द्वितीय श्रेणी का मजिस्ट्रेट यह विचार करता है कि अपराध केवल प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो उसे शिकायत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या अन्य प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट को अग्रेषित करनी होती है।
छात्र अक्सर गलती क्यों करते हैं: कई छात्र विकल्प A को चुनते हैं, यह मानकर कि कोई भी मजिस्ट्रेट प्राप्त शिकायत की जांच कर सकता है, बिना अधिकार क्षेत्र की जाँच किए (नियम का पूर्वानुमानित अनुप्रयोग)।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A सामान्य अधिकार को गलत तरीके से लागू करता है, अधिकार क्षेत्र को अनदेखा करता है (नियम-पूर्वापेक्षा उपेक्षा); B धारा 195 को गलत रूप से उपयोग करता है, जो कि शिकायत भेजने के लिए नहीं बल्कि कुछ अपराधों की सुनवाई के लिए है (संदर्भ रहित स्मरण); C धारा 192 के अंतर्गत अग्रेषण की सही प्रक्रिया को दर्शाता है; D अनावश्यक रूप से सत्र न्यायाधीश को अग्रेषण मानता है, जो हमेशा लागू नहीं होता (किंचित अपवाद नज़रअंदाज़ करना)।
Question 136
Question bank
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को किन मामलों की सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है?​
Why: सही उत्तर का कारण: सीआरपीसी की धारा 25 के अन्तर्गत राज्य सरकार उच्च न्यायालय की सलाह से मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा सुनवाई योग्य मामलों से अधिक मामलों की सुनवाई का अधिकार दे सकती है।
छात्र इस जाल में क्यों फंसते हैं: विकल्प बी आकर्षक प्रतीत होता है क्योंकि छात्र मान लेते हैं कि CJM प्रथम और द्वितीय दोनों श्रेणी के मजिस्ट्रेट के ऊपर है, जिससे संबंधित अधिकारों का मिश्रण हो जाता है (सतही अवधारणा भ्रम)।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A अपूर्ण और सीमित है (अपवादों को अनदेखा करता है); B समावेशी लगता है पर CJM के विशिष्ट अधिकारों को अनदेखा करता है; C गलत रूप से सेशन्स कोर्ट का विशेषाधिकार मानता है (याददाश्त त्रुटि); D सही रूप में हाई कोर्ट द्वारा निर्धारित CJM के अधिकार को प्रदर्शित करता है।
Question 137
Question bank
सीआरपीसी के अंतर्गत खोज वारंट जारी करने का अधिकार किस मजिस्ट्रेट को प्राप्त है?
Why: सही उत्तर का कारण: सीआरपीसी के अनुसार, केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट एवं महानगरीय मजिस्ट्रेट के पास खोज वारंट जारी करने की शक्ति होती है। कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास यह अधिकार नहीं होता।
छात्र इस जाल में क्यों फंसते हैं: विकल्प A आकर्षक है क्योंकि छात्र सोचते हैं कि किसी भी मजिस्ट्रेट के पास सभी न्यायिक अधिकार होते हैं, जो पूर्व-सामान्यीकरण है।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A पूर्व-संयोजन बिना नियम समझे लगाया गया; B सही रूप में प्रथम श्रेणी न्यायिक और महानगरीय मजिस्ट्रेट तक सीमित करता है; C गलत रूप से अधिकार केवल CJM को देता है (प्रतिनिधित्व की अवहेलना); D कार्यकारी और न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधिकारों को भ्रमित करता है।
Question 138
Question bank
सीआरपीसी के अंतर्गत द्वितीय श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को मामले की सुनवाई का कौन सा अधिकार है?
Why: सही उत्तर का कारण: धारा 29 एवं 29-A के अनुसार, द्वितीय श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट केवल उन समनात्मक मामलों की सुनवाई कर सकते हैं, जहाँ सजा की अवधि छह महीने से अधिक न हो।
छात्र इस जाल में क्यों फंसते हैं: विकल्प A को छात्र गलत रूप से चुनते हैं, क्योंकि वे छह महीने की सीमा को एक वर्ष मान लेते हैं, जो स्मरण-पूर्वक त्रुटि है।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A बिना उचित आधार सीमा बढ़ाता है; B सही रूप में छह महीने तक की सीमित सजा वाले मामलों तक अधिकार को सीमित करता है; C गलत रूप में सभी सुनवाई अधिकारों से इनकार करता है; D मजिस्ट्रेट वर्गों तथा ज्ञानात्मकताओं के अधिकारों में भ्रम उत्पन्न करता है।
Question 139
Question bank
महानगरीय क्षेत्र में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अपराध की जाँच करने का अधिकार किस मजिस्ट्रेट को प्राप्त है?
Why: सही उत्तर का कारण: सीआरपीसी की धारा 17(1) के अनुसार, महानगरीय क्षेत्रों में महानगरीय मजिस्ट्रेट को पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अपराध की जाँच करने का अधिकार प्राप्त होता है।
छात्र इस जाल में क्यों फंसते हैं: छात्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को उसकी वरिष्ठता के कारण चुनते हैं, जो अनुभवगत पक्षपात दर्शाता है।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A वरिष्ठता के कारण चयनित पर अधिकार क्षेत्र सीमित है; B महानगर मजिस्ट्रेट से आम शहरी मजिस्ट्रेट भ्रमित करता है; C महानगरीय क्षेत्र नियमों के अनुसार सही है; D कार्यकारी और न्यायिक अधिकारों में भ्रम उत्पन्न करता है।
Question 140
Question bank
सीआरपीसी के तहत किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदान की गई जमानत को कौन सा मजिस्ट्रेट रद्द कर सकता है?
Why: सही उत्तर का कारण: सीआरपीसी की धारा 437(5) और न्यायिक व्याख्या के अनुसार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या अधिक अधिकार प्राप्त मजिस्ट्रेट, अधीनस्थ मजिस्ट्रेट द्वारा दी गई जमानत को रद्द कर सकता है।
छात्र इस जाल में क्यों फंसते हैं: विकल्प A आधिकारिक स्मरण के कारण आकर्षक है, परन्तु पर्यवेक्षण अधिकार को नजरअंदाज करता है।
विकल्प-दर-विकल्प विश्लेषण: A जमानत रद्द करने को केवल प्रदानकर्ता तक सीमित मानता है; B सही रूप में CJM और उच्चाधिकार प्राप्त मजिस्ट्रेट शामिल करता है; C कार्यकारी मजिस्ट्रेट को गलत रूप में शामिल करता है; D सेशन कोर्ट की विशिष्टता को अतिशयोक्ति से दर्शाता है।
Question 141
Question bank
द्वितीय श्रेणी के न्यायिक न्यायाधीश के समक्ष शिकायत प्रकरण प्रस्तुत किया गया है। वह अपराध किस स्थिति में परीक्षणीय नहीं होगा—
Why: सही उत्तर की व्याख्या: धारा 192 के अनुसार, यदि अपराध केवल उच्च न्यायाधीश या न्यायालय के समक्ष परीक्षणीय है, तो द्वितीय श्रेणी के न्यायिक न्यायाधीश को शिकायत अग्रेषित करनी होगी, न कि उसका परीक्षण करना।
छात्र भ्रम में क्यों पड़ते हैं: कई छात्र 'संज्ञानात्मक अपराध' को तसल्ली से गलत समझते हैं और परीक्षण क्षेत्राधिकार को संज्ञानात्मकता से भ्रमित करते हैं।
प्रत्येक विकल्प की व्याख्या: A कैद सीमा को गलत निरूपित करता है और यह निर्णायक कारक नहीं है; B सही रूप से विशेष परीक्षण क्षेत्राधिकार को दर्शाता है; C संज्ञान और परीक्षण क्षेत्राधिकार को भ्रमित करता है; D गैर-संज्ञानात्मक अपराध आमतौर पर न्यायाधीशों द्वारा परीक्षणीय नहीं होते, लेकिन कुछ अपवाद हैं।
Question 142
Question bank
धारा 320 के अंतर्गत अपराध को कौन-सा न्यायाधीश समझौता कर सकता है?
Why: सही उत्तर की व्याख्या: धारा 320(3) के अनुसार, दोनों प्रथम तथा द्वितीय श्रेणी के न्यायाधीश राज्य सरकार द्वारा अधिकृत होने पर अपराध समझौता कर सकते हैं।
छात्र भ्रम में क्यों पड़ते हैं: विकल्प A इसलिए चुना जाता है क्योंकि अभ्यास से केवल प्रथम श्रेणी के न्यायाधीशों द्वारा समझौता जाने की धारणा होती है, जबकि द्वितीय श्रेणी न्यायाधीशों की क्षमता को अनदेखा किया जाता है।
प्रत्येक विकल्प की व्याख्या: A द्वितीय श्रेणी के न्यायाधीश की वैधानिक क्षमता को नकारता है; B द्वितीय श्रेणी के न्यायाधीश की समझौता क्षमता को कम आंकता है; C सही रूप में दोनों न्यायाधीशों की क्षमता बताता है; D न्यायाधिकार भ्रमित करता है, क्योंकि सेशन्स न्यायाधीश केवल कुछ अपराध समझौता कर सकते हैं।
Question 143
Question bank
धारा 156(3) के अंतर्गत किस न्यायाधीश को जांच आदेश देने का अधिकार है?
Why: सही उत्तर की व्याख्या: धारा 156(3) के अनुसार, किसी भी न्यायाधीश, जिसमें प्रथम तथा द्वितीय श्रेणी के न्यायिक न्यायाधीश तथा महानगरीय न्यायाधीश शामिल हैं, को जांच आदेश देने का अधिकार प्राप्त है।
छात्र भ्रम में क्यों पड़ते हैं: विकल्प B लोकप्रिय इसलिए है क्योंकि छात्र गलत रूप से सोचते हैं कि यह अधिकार केवल प्रथम श्रेणी न्यायाधीशों के पास होता है।
प्रत्येक विकल्प की व्याख्या: A सभी न्यायिक न्यायाधीशों को जांच आदेश देने का अधिकार देता है; B केवल प्रथम श्रेणी पर गलत प्रतिबंध लगाता है; C मुख्य न्यायिक न्यायाधीश को ही सीमित करता है जो मुख्यतः निरीक्षण करता है; D सेशन्स न्यायाधीश को ही सीमित करता है जिन्हें अन्य न्यायाधीशों की भूमिका का ज्ञान नहीं होता।
Question 144
Question bank
वह न्यायाधीश जो तीन वर्ष तक की कैद वाले अपराध का परीक्षण करने में सक्षम है, क्या कर सकता है?
Why: सही उत्तर की व्याख्या: परीक्षण करने में सक्षम न्यायाधीश वह है जो अभियुक्त को समन जारी कर केस का परीक्षण कर सकता है और निर्दिष्ट कैद सीमा के भीतर दंड दे सकता है।
छात्र भ्रम में क्यों पड़ते हैं: विकल्प C आमतौर पर चुना जाता है, क्योंकि छात्र दंड देने के अधिकार को परीक्षण क्षेत्राधिकार से कम समझ लेते हैं।
प्रत्येक विकल्प की व्याख्या: A न्यायालय के क्षेत्राधिकार और दंड अधिकार के अनुसार सही है; B परीक्षण अधिकार को गलत सीमित करता है; C दंड सीमा को भ्रमित करता है; D न्यायाधीश के परीक्षण और दंड का अधिकार नकारता है।
Question 145
Question bank
किस न्यायाधीश को बिना सरकार या प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है?
Why: सही उत्तर की व्याख्या: कार्यकारी न्यायाधीशों को पूर्व सरकार की मंजूरी आवश्यक होती है क्योंकि वे मुख्यतः प्रशासनिक कार्य करते हैं।
छात्र भ्रम में क्यों पड़ते हैं: विकल्प C अक्सर गलत चुना जाता है क्योंकि छात्र मान लेते हैं कि सभी न्यायाधीशों को मंजूरी चाहिए, जो भूल है।
प्रत्येक विकल्प की व्याख्या: A सही है क्योंकि कार्यकारी न्यायाधीशों के पास स्वतंत्र न्यायिक अधिकार नहीं होते; B महानगरीय न्यायाधीश स्वतंत्र संज्ञान能力 रखते हैं; C judicial न्यायाधीश को मंजूरी की आवश्यकता नहीं; D सेशन्स न्यायाधीश स्वतंत्र न्यायिक शक्तियां रखते हैं।
Question 146
Question bank
निम्नलिखित में से कौन-सा कथन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के अधिकारों के संबंध में सत्य है?
Why: सही उत्तर का तर्क: CJM प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेटों द्वारा सुनाए जाने वाले मामलों पर अधिकार रखते हैं तथा उन्हें राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अन्य मामलों का मुकदमा चलाने का अधिकार भी दिया जा सकता है।
छात्रों की गलती का कारण: विकल्प B चुना जाता है क्योंकि विभिन्न मजिस्ट्रेट श्रेणियों के बीच भ्रम होता है और CJM के अधिकारों को कम आंका जाता है।
विकल्प-वार विवरण: A में CJM के विस्तारित अधिकार सही रूप में दर्शाए गए हैं; B में CJM को केवल दूसरे श्रेणी के अपराधों तक सीमित करने की गलती है (अवधारणा में भ्रम); C में CJM को केवल गैर-गंभीर अपराधों तक सीमित करना गलत है (गंभीर अधिकारों की उपेक्षा); D में CJM को सम्मन-मामले नहीं चलाने की जो धारणा है, वह गलत है (नियमों की अनदेखी)।
Question 147
Question bank
अपर मजिस्ट्रेटों द्वारा सुनाए गए दण्ड को किस मजिस्ट्रेट के पास माफ करने या परिवर्तित करने का अधिकार है?
Why: सही उत्तर का तर्क: धारा 435 CrPC के अंतर्गत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को अपर मजिस्ट्रेटों द्वारा सुनाए गए दण्ड को माफ करने या परिवर्तित करने का अधिकार प्राप्त है।
छात्रों की गलती का कारण: विकल्प A आकर्षक होता है क्योंकि सेशन न्यायाधीश के व्यापक अधिकारों के कारण पक्षपातपूर्ण सोच बन जाती है।
विकल्प-वार विवरण: A में दण्ड माफी के अधिकार केवल सेशन न्यायाधीश के बताए जाने में गलती है (पक्षपातपूर्ण सोच); B में धारा 435 के तहत CJM का अधिकार सही बताया गया है; C में प्रशासनिक (कार्यकारी) और न्यायिक भूमिका का भ्रम है; D में माफी या दण्ड के परिवर्तन का अधिकार नहीं है (हायरार्की की अनदेखी)।
Question 148
Question bank
धारा 202 CrPC के अंतर्गत प्रारंभिक जांच कौन-सा मजिस्ट्रेट कर सकता है?
Why: सही उत्तर का तर्क: धारा 202 CrPC के अनुसार प्रथम एवं दूसरे श्रेणी के दोनों न्यायिक मजिस्ट्रेट शिकायतों की प्रारंभिक जांच कर सकते हैं।
छात्रों की गलती का कारण: अक्सर छात्र केवल प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को ही चुनाव करते हैं क्योंकि मजिस्ट्रेटों के अधिकारों की अधूरी स्मृति होती है।
विकल्प-वार विवरण: A में केवल प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट तक सीमित करना गलत है; B में प्रथम और दूसरे श्रेणी दोनों मजिस्ट्रेटों को सही रूप में शामिल किया गया है; C में अनुचित रूप से केवल CJM तक सीमित किया गया है; D में सेशन न्यायाधीश को सीमित करना गलत है क्योंकि वे सामान्यतः धारा 202 के अंतर्गत प्रारंभिक जांच नहीं करते (अवधारणा में भ्रम)।
Question 149
Question bank
FIR का पूर्ण रूप क्या है? Refer to the concept of FIR का अर्थ और महत्त्व।
Why: FIR का पूरा नाम First Information Report होता है जो अपराध की प्राथमिकी सूचना होती है।
Question 150
Question bank
FIR दर्ज करने का मुख्य उद्देश्य क्या है? Refer to FIR दर्ज करने की प्रक्रिया।
Why: FIR दर्ज कराने का उद्देश्य अपराध की सूचना को आधिकारिक थाना कनूनरी रिकॉर्ड के रूप में दर्ज कराना होता है।
Question 151
Question bank
FIR कब दर्ज की जाती है? Refer to FIR दर्ज करने की प्राथमिक प्रक्रिया।
Why: FIR तभी दर्ज की जाती है जब किसी अपराध की सूचना पुलिस को दी जाती है, जो गम्भीरता से ली जाती है।
Question 152
Question bank
FIR में शामिल नहीं होता है कौन सा विवरण? Refer to FIR से संबन्धित कानूनी प्रावधान।
Why: FIR में अपराधी के दोष का निर्धारण नहीं किया जाता, यह केवल सूचना होती है। दोष प्रमाणित न्यायलय में होता है।
Question 153
Question bank
FIR के बाद पुलिस का कार्य क्या होता है? Refer to FIR के बाद की कार्यवाही।
Why: FIR दर्ज होने के बाद पुलिस का कार्य होता है कि वह तत्काल जांच करके तथ्यों की पुष्टि करे।
Question 154
Question bank
FIR के संक्षंध में न्यायालय की भूमिका क्या है? Refer to FIR से संबंधित न्यायिक प्रकरण।
Why: न्यायालय FIR को प्रारंभिक प्रमाण मानकर आँगे की कार्यवाही के लिए इसतेमाल करती है।
Question 155
Question bank
FIR किस प्रकार की शिकारत पर दर्ज नहीं की जाती? Refer to FIR के दायरे और सीमाएँ।
Why: यदि शिकारत अस्त्य या भ्र्रामक पाई जाती है तो FIR दर्ज नहीं की जाती।
Question 156
Question bank
FIR में प्रार्काशन की आवश्यकता किसके लिए होती है? Refer to FIR में शामिल जानकारियाँ एवं प्रार्काशन।
Why: FIR की प्रति पुलिस को जाँच और अभियोजन के लिए दी जाती है, जिससे सुनिश्चित कार्यवाही हो सके।
Question 157
Question bank
FIR पर रोक लगाने का निर्णय कौन ले सकता है? Refer to FIR पर रोक के सम्बन्ध में।
Why: FIR पर रोक केवल न्यायालय के आदेश से लगाई जा सकती है, अन्य किसी को इसे रोकने का अधिकार नहीं है।
Question 158
Question bank
FIR संबन्धी सूचनाओं को दर्ज करने में कौन प्राथमिक भूमिका निभाता है? Refer to FIR में शामिल जानकारियाँ एवं प्रार्काशन।
Why: FIR पुलिस अधिकारी ही दर्ज करता है, जो सूचना प्राप्त करता है और अभियोजन का आधार बनाता है।
Question 159
Question bank
FIR दर्ज कराने के लिए किस प्रकार की सूचना आवश्यक होती है?\
FIR दर्ज कराने की आवश्यकता।
Why: FIR तब ही दर्ज़ की जाती है जब पुलिस के पास अपराध के बारे में ताजा और स्पष्ट जानकारी हो।
Question 160
Question bank
न्यायालय में FIR का क्या अर्थ होता है? निम्न में से कौन सही है? Refer to the diagram below which दर्शाता है 'FIR' तथा उसके अर्थ को। FIR: प्रारंभ सूचना रिपोर्ट सूचना सम्‍पर्क पर पुलिस को दी जाती है जिससे जांच प्रारंभ होती है।
FIRप्रथम सूचना रिपोर्ट
Why: FIR का पूरा रूप 'First Information Report' है, जो किसी अपराध की पहली सूचना होती है जिसे पुलिस दर्ज करती है।
Question 161
Question bank
FIR के पंजीकरण की प्रक्रिया किस आधार पर होती है? Refer to the diagram that दिखाई है पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करने की प्रक्रिया। प्रक्रिया में शिकार्यत दर्ज करना, पुलिस द्वारा जांच प्रारंभ करना और प्राथमिक रिकॉर्ड का नियम शामिल है।
व्यक्तिपुलिस स्टेशनजांच
Why: FIR किसी भी व्यक्ति द्वारा दी जा सकती है जो अपराध की सूचना देता है; पुलिस इसे दर्ज करती है और जांच प्रारंभ करती है।
Question 162
Question bank
FIR दर्ज करने के लिए कौन से पुलिस अधिकारी के पास जाना आवश्यक है? Refer to the diagram illustrating 'प्रभावी अधिकारी' और 'थाना पुलिस' के बीच संबंध।
थाना प्रभारीप्रभागीय अधिकारी
Why: FIR के पंजीकरण के लिए थाना प्रभार‌ी या उससे ऊपर के अधिकारी के पास जाना आवश्यक होता है।
Question 163
Question bank
FIR को दर्ज करने के बाद पुलिस द्वारा क्या कार्य प्रारंभ किया जाता है? Refer to the diagram showing ‘FIR दर्ज’ होने के बाद की प्रक्रिया।
FIR दर्ज की गईपुलिस जांच प्रारंभ करती है
Why: FIR दर्ज करने के बाद पुलिस प्राधिकारी के रूप में जांच प्रारंभ करती है।
Question 164
Question bank
FIR दर्ज करते हुए किस प्रक्रिया की शिकार्यत आवश्यक होती है? Refer to the diagram indicating शिकार्यत के प्राकर।
शिकायत का प्रकारप्राथमिक सूचना + अपराध विवरण
Why: FIR में अपराध की पूरी और स्पष्ट प्रारंभिक सूचना पुलिस स्टेशन में दी जाती है जिससे जांच शुरू की जाती है।
Question 165
Question bank
FIR में कौन-से शामिल अंकड़े आवश्यक होते हैं? Refer to the diagram listing FIR में आवश्यक जानकारी।
FIR में आवश्यक जानकारी- शिकायतकर्ता का नाम- अपराध का विवरण- घटना का समय एवं स्थान
Why: FIR में शिकायतकर्ता, अपराध की विस्तृत से सूचना, घटना का समय व स्थान लिखित रूप में होना आवश्यक है।
Question 166
Question bank
FIR के दौरान पुलिस द्वारा किस प्रकार की कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाती है? Refer to the diagram depicting FIR एवं पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई।
FIR के दौरान प्रारंभिक कार्रवाईप्राथमिकी दर्ज और जांच प्रारंभ
Why: पुलिस FIR दर्ज करती ही तत्काल प्रारम्भिक दर्ज कर जांच की प्रक्रिया प्रारम्भ करती है।
Question 167
Question bank
किस परिस्थिति में FIR दर्ज करना आवश्यक नहीं माना जाता? Refer to the diagram outlining FIR के अपवाद।
FIR न दर्ज करने के कारण- झूठी शिकायत या तथ्यहीन सूचना
Why: बिना तथ्यों जानकारी साक्ष्य या झूठी शिकायत होने पर FIR दर्ज करना आवश्यक नहीं होता।
Question 168
Question bank
FIR में पुलिस द्वारा की जाने वाली प्रारंभिक कार्रवाई कौन-सी है? Refer to the diagram showing 'FIR के बाद पुलिस कार्य'।
FIR के बाद पुलिस कार्यपड़ताल, साक्ष्य एकत्रण, रिपोर्ट
Why: FIR के बाद पुलिस जांच के तहत शिकायतकर्ता से पुष्टि, साक्ष्य संग्रह और रिपोर्ट बनाती है।
Question 169
Question bank
FIR का दर्ज होना किसकी ज़िम्मेदारी होती है? नीचे दिये गए डायग्राम में दिखाये गए अनुसार FIR दर्ज करने सामय कौन-सी जिम्मेदारी होती है।
थाना प्रभारी / संबंधित अधिकारी
Why: FIR दर्ज करने की जिम्मेदारी थाना प्रभारि या संम्बंधित पुलिस अधिकारी की होती है, जो शिकायत को लेकर में दर्ज करता है।
Question 170
Question bank
FIR में आरोपित का सम्बन्ध या स्थान कहाँ दर्ज करना आवश्यक है? Refer to the diagram explaining FIR की प्रासंगिकता।
FIR में समय और स्थान दर्ज करने का महत्व- कपटपूर्ण दावों की रोकथाम- जांच की सटीकता
Why: संबन्ध एवं स्थान दर्ज करने से जाँच में स्पष्टता रहती है और गलत सूचनाओं से बचाव होता है।
Question 171
Question bank
गिरफ़्तारी की प्रक्रिया में निम्नलिखित में से कौन सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है?
Why: गिरफ़्तारी के लिए शक का होना अनिवार्य है, लेकिन वह शक ठोस प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। केवल पुलिस के संदेह या बिना जांच सूचना पर आधारित प्राथमिकी दर्ज करना उचित नहीं होता।
Question 172
Question bank
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के अनुसार, गिरफ़्तारी करने सम्यक् पुलिस अधिकारी को किसका अधिकारी होना चाहिए?
Why: CrPC के तहत पुलिस अधिकारी को आरोपी को प्ररमाणित होने पर मुकदमा दर्ज करने और आवश्यकतानुसार गिरफ़्तारी करने का अधिकार होता है।
Question 173
Question bank
गिरफ़्तारी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सही है?
Why: CrPC में गिरफ़्तारी के नियम और प्रत्रिबंध स्पष्ट रूप से दिए गए हैं, जिससे मानमानी गिरफ़्तारी को रोका जा सके।
Question 174
Question bank
गिरफ़्तारी के बाद पुलिस अधिकारी को accused के संबंध में क्या कार्य करने होते हैं?
Why: गिरफ़्तारी के बाद पुलिस अधिकारी को तुरंत सम्यक् में न्यायलय के सामने प्रस्तुत करना पड़ता है।
Question 175
Question bank
गिरफ़्तारी के संबंध में न्यायलय के अधिकारी क्या होते हैं?
Why: न्यायलय हिरासत की वैधता पर रोक लगाता है या आरोपी को प्रमाणित दैन करता है।
Question 176
Question bank
CrPC के तहत गिरफ़्तारी के दौरान कौं-से आधिकार आरोपी को प्राप्त होते हैं?
Why: अधिकारक को गिरफ़्तारी के समय वकील से संपर्क करने और गिरफ़्तारी के कारण जानने का अधिकार होता है।
Question 177
Question bank
गिरफ़्तारी के लिए न्यायद्वारा जारी वारंट कब आवश्यक होता है?
Why: वारंट तभी आवश्यक होता है जब आरोप पकड़ में न आए या गिरफ़्तारी में कठिनाई हो। सादारण मामलों में पुलिस बिना वारंट किए गिरफ़तारी कर सकती है।
Question 178
Question bank
गिरफ़्तारी के दौरान पुलिस द्वारा से कौं-सी प्रक्रिया अनिवार्य रूप से करनी होती है?
Why: पुलिस को गिरफ़्तारी गतिविधि का लिखित विवरण तैयार कर उसे उचित समय में न्यायालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
Question 179
Question bank
गिरफ़्तारी के संबंध में कौन-सा कथन CrPC के तहत सही है?
Why: गिरफ़्तारी के लिए उचित संदेह आवश्यक है, बिना संदेह गिरफ्तारी गैरकानूनी है। बाक़ी विकल्प सही नहीं हैं।
Question 180
Question bank
गिरफ़्तारी के दायरे में 'रिट अनुसन्धान' किसे कहा जाता है?
Why: 'रिट अनुसन्धान' का अर्थ पुलिस द्वारा बिना वारंट या आदेश के गिरफ़्तारी करना होता है, जो कुछ मामलों में CrPC द्वारा अनुमति प्राप्त है।
Question 181
Question bank
गिरफ्तारी और जाँच के संबंध में निम्नलिखित में से सही कौन सा है?
Why: गिरफ्तारी के बाद जाँच होती है, लेकिन कोई-कभी पूर्ण रूप से प्रारंभ होने पर गिरफ्तारी पहले भी करनी पड़ती है।
Question 182
Question bank
न्यायालय के अधिकार की रूप में गिरीफ़्तारी करते समय कौन-सी प्रकि‍या अनिवार्य है? Refer to the diagram below depicting न्यायालय के अधिकार की गिरीफ़्तारी प्रक्रिया। इसमें अधिकार द्वार गिरीफ़्तारी के पूर्व सूचित करने का चरण दर्शाया गया है।
Why: गिरीफ़्तारी के पूर्व आरूपी को गिरीफ़तारी का कारण बताया जाना चाहिए और उसे चाहिए से संपर्क की सुविधा देना अनिवार्य है, जिससे उसके अधिकारी सुरक्षित रहें।
Question 183
Question bank
किस स्थिति में पूरीस अधिकार की पास बिना वारंट के गिरीफ़्तारी करने का अधिकार होता है? Refer to the diagram below which illustrates किन प्रक्रियाओं में गिरीफ़्तारी की जा सकती है। इसमें apparatus का पीचा करने की स्थिति दिखाई गई है।
Why: पूरीस बिना वारंट के हि apparatus को पकड़ सकती है अर्थात यदि apparatus करते हुए पकड़ ले या उसी गिरीफ़्तारी आवश्य्क हो, तभी वारंट न होने पर ही।
Question 184
Question bank
गिरीफ़्तारी के दौरान आरूपी के निम्नलिखित में से कौन से अधिकार होते हैं? Refer to the diagram below which shows PURCHASE और गिरीफ़्तारी के दौरान आरूपी। इसमें वकील से मिलने और मौन रखने के अधिकार शामिल हैं।
Why: आरूपी को PURCHASE या गिरीफ़्तारी के दौरान मौन रहने का अधिकार है और वह स्वयं के बचाव में वकील से मिल सकता है।
Question 185
Question bank
गिरीफ़्तारी के बाद आरंभिक जांच का उद्देश्य क्या होता है? Refer to the diagram below illustrating गिरीफ़्तारी आरूपी की प्रारम्भिक जांच प्रक्रिया। इसमें विशेष जांच चरण और उनका महत्व दर्शाया गया है।
Why: आरंभिक जांच का उद्देश्य साक्ष्यों को सुरक्षित करना, आरूपी की पुष्टि करना और_AFTER_ की कानूनी कार्रवाई के लिए थॉस आधार बनाना है।
Question 186
Question bank
निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय गिरीफ़्तारी के संबंध में अन्तिम कार्रवाई करता है? Refer to the diagram below showing न्यायालय के प्रकि‍या औरunki भूमिका। इसमें प्रम्-दृष्टि न्यायालय भी दर्शाया गया है।
Why: स्तर न्यायालय गिरीफ़्तारी के मामले में अन्तिम और निर्णायक कार्रवाई करता है, जहाँ apparatus की गम्भीरता के अनुसार सुचिता होती है।
Question 187
Question bank
गिरफ्तारी के प्रकारों में से "नमूना गिरफ्तारी" किस परिस्थिति को दर्शाती है? Refer to the diagram below which categorizes गिरफ्तारी के प्रकार। इसमें प्रकाशन एवं स्रोत की दृष्टि से गिरफ्तारी के उदहारण दिए गए हैं।
Why: नमूना गिरफ्तारी एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति को एक बार औपचारिक रूप से गिरफ्तारी किया जाता है, फिर उसे छोड़ दिया जाता है। यह एक प्रकार की जाँच के लिए की जाती है।
Question 188
Question bank
गिरफ्तारी एवं हिरासत के दौरान निम्न में से कौन-सी शर्तें अनिवार्य नहीं होतीं? Refer to the diagram below which outlines गिरफ्तारी एवं हिरासत के नियम। इसमें नियमों की सूची दी हुई है।
Why: गिरफ्तारी के दौरान आरॉपी को जेल में रखना आवश्यक नहीं है; न्यायद या अन्य प्राधिकारी की अनुमति से ही हिरासत का स्थान तय होता है।
Question 189
Question bank
गिरफ्तारी का canonical प्रावधान भारतीय कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर की किस धारा में विस्तारित है? Refer to the diagram below listing विधि धाराओं और उनके विषय। इसमें गिरफ्तारी संबंधित धाराएँ हैं।
Why: धारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 से 60 तक गिरफ्तारी और उससे संबंधित नियमों का विस्तार दिया गया है।
Question 190
Question bank
गिरफ्तारी के संबंध में निम्न में से किस प्राधिकारी को गिरफ्तारी करने का आधिकार अधिकाधिक विदित है? Refer to the diagram below which represents वरिष्ठ प्राधिकारियों के अधिकार। इसमें पुलिस अधिकारी, न्यायद अधिकारी और अन्य दीखाए गए हैं।
Why: पुलिस अधिकारी का canonical रूप से गिरफ्तारी करने का प्राधमिक अधिकार रखता है, विशेषकर जब वे वांछित अपराधी को पकड़ते हैं।
Question 191
Question bank
धारा 41 के तहत गिरफ्तारी के अधिकार निम्न में से किस अपरा्ध के लिए अधिकृत किया गया है? Refer to the diagram below listing अपराध के अनुसार गिरफ्तारी की अनुमति।
Why: धारा 41 के तहत बिना वारंट के गिरफ्तारी का अधिकार गैर-जमानती अपराधों में दिया गया है क्योंकि ये अपराध कानूनी द्वारा गंभीर माने जाते हैं।
Question 192
Question bank
तलाशी की प्रक्रिया एवं उद्देश्यों के संदर्भ में, तलाशी का मुख्य उद्देश्य क्या है?\
नीचे दिए गए चित्र में तलाशी की प्रक्रिया दर्शाई गई है।\
सभी लेबल, मापक और नोटेशन प्रदर्शित हैं।
तलाशी की प्रक्रिया एवं उद्देश्यसाक्ष्यअपराधीन्यायालय
Why: तलाशी का प्राथमिक उद्देश्य अपरााध से संबंधित सबूतों, वस्तुओं, और शिकार वस्तु को खोज कर न्यायिक जांच के लिए सुरक्षित करना है।
Question 193
Question bank
तलाशी के प्रकारों में से, निम्न में से कौन सा तलाशी का प्रकार नहीं है?\
नीचे दिए गए चित्र में तलाशी के विभिन्न प्रकार दर्शाए गए हैं।
तलाशी के प्रकारशारीरिकमकानवाहनगुप्त निगरानी
Why: गुप्त निगरानी तलाशी तलाशी के प्रकार में शामिल नहीं होती; यह निगरानी विधि है। तलाशी के प्रकार में शारीरिक, मकान व वाहन तलाशी मुख्य हैं।
Question 194
Question bank
तलाशी के लिए न्यायिक अनुमति कब आवश्यक होती है?\
नीचे दिए गए चित्र में तलाशी की लिए न्यायिक अनुमति दर्शाई गई है।
तलाशी हेतु न्यायिक अनुमतिघर या बंद स्थान में तलाशीखुले स्थान पर तलाशी
Why: न्यायालय की अनुमति खासकर तब आवश्यक होती है जब तलाशी किसी सरकारी स्थल या बैंक स्थल पर की जाती है, अन्य मामलो में पुलिस के पास समान्य अधिकार होते हैं।
Question 195
Question bank
तलाशी के अधिकारी के संदर्भ में, पुलिस को तलाशी करने का अधिकार कब प्राप्त होता है?\
नीचे दिए गए चित्र में तलाशी के अधिकार के प्रकार सफल दर्शाए गए हैं।
पुलिस के तलाशी अधिकारफिरंगी दंड संहिता आदेशसामान्य पुलिस अधिकार
Why: पुलिस को सामान्य पुलिस अधिकारियों के तहत आदेश मिलने पर तलाशी करने का अधिकार होता है, जबकि वाणिज्यिक अधिकारियों का दुरुपयोग नहीं करते।
Question 196
Question bank
तलाशी में अवधि के कारणों में से निम्नलिखित में कौन सा कारण शामिल नहीं है?\
नीचे दिए गए चित्र में अवधि के संबंधित कारण दिखाए गए हैं।
अवैध तलाशी के कारण- बिना न्यायालय अनुमति तलाशी- साक्ष्य छिपाना- नियम उल्लंघन- तलाशी का विरोध
Why: अपरोध द्वाराः तलाशी का विरोध अवधि के कारण नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों और विधिक प्रक्रिया के पालन न करने कारण है।
Question 197
Question bank
तलाशी में अवैध साक्ष्यों का प्रमाण क्या होता है? Refer to the diagram below जो अवैध साक्ष्यों के प्रमाण को दर्शाता है।
अवैध साक्ष्यों का प्रभावसाक्ष्य स्वीकृतसाक्ष्य अस्वीकृत
Why: अवैध तरीके से प्राप्त साक्ष्य को भारतीय न्यायदिक प्रक्रिया में आमतौर पर मुकदमें में स्वीकार नहीं किया जाता, क्योंकि यह नियमों का उल्लंघन होता है।
Question 198
Question bank
तलाशी करने वाले को कौन-कौन सेागजत स्लॉट रखनें होते हैं? Refer to the diagram below जिसमें तलाशी के लिए आवश्य कागजात सूचीबद्ध हैं।
तलाशी हेतु आवश्यक कागजाततलाशी वारंट और पहचान पत्र
Why: तलाशी वारंट और पुलिस अधिकारियों के पहलाच पत्र तलाशी के समय आवश्यक होते हैं ताकि तलाशी वारंट और प्रमाणित हो सके।
Question 199
Question bank
न्यायालय की अनुमति के बिना तलाशी के दौरान कौन सी क्रिया अवैध मानी जाती है? Refer to the diagram below दर्शाया गया है तलाशी के दौरान अवैध क्रियाएं।
अवैध क्रियाएं तलाशी में- साक्ष्य जब्ती- साक्ष्य नकल करना- गवाह बुलाना- सूचना देना
Why: साक्ष्य का नष्ट करना बिना अनुमति या उचित प्रमाण के अवैध माना जाता है जबकि साक्ष्य जब्ती और गवाह बुलाने का कानूननी है।
Question 200
Question bank
तलाशी की दक्षताSlाहदता क्या होती है? Refer to the diagram below गाँव तलासी की दक्षताSlाहदता का प्रतिनिधित्व किया गया है।
तलाशी की दक्कन सलाहदातासहायक अधिकारी
Why: दक्षताSlाहदता वह अधिकारी होता है जो तलाशी के दौरान अधिकारियों को तकनीकी या प्रशासनिक सहायता प्रदान करता है।
Question 201
Question bank
तलाशी के दौरान संदिग्ध दोषों की पहचान कैसे जाती है? Refer to the diagram below जहाँ तलाशी में संदिग्ध दोषों के चारण दिखाए गए हैं।
तलाशी के संभावित दोषरजिस्टर व रिकॉर्ड का निरीक्षण
Why: तलाशी के दौरान हुए संदिग्ध दोष तलाशी रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं के निरीक्षण से पहचाने जाते हैं ताकि कागजी कार्यवाही सही हो।
Question 202
Question bank
तलाशी से संबंधित विरोधाभासों का निदान किसके द्वारा किया जाता है? Refer to the diagram below जो तलाशी से संबंधित विवाद समाधान की प्रक्रिया दर्शाता है।
तलाशी विवाद समाधानन्यायालय
Why: तलाशी विवादों का अंतिम निदान न्यायालय द्वारा किया जाता है जो विधिक दृष्टि से उच्चतर निम्न प्राथमिकता प्रदान करता है।
Question 203
Question bank
तलाशी प्रक्रिया के दौरान पुलिस को कौन सा प्रावधान सबसे अधिक पालन करना होता है? Refer to the diagram below जिसमें तलाशी के सार्वभौमिक चरण दिखाए गए हैं।
तलाशी प्रक्रिया के चरणकानून का पालन करना
Why: तलाशी प्रक्रिया के दौरान कानून का सख्ती से पालन करना आवश्यक है तथा तलाशी वैध और न्यायसंगत हो सके।
Question 204
Question bank
तलाशी में ग्राहक व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा में क्या शामील है? Refer to the diagram below जिसमें तलाशी और ग्राहक व्यक्तियों के अधिकार सूचीबद्ध हैं।
तलाशी एवं गिरफ्तारी के अधिकार- वकील से बात करने का अधिकार- तलाशी की अनुमति देना- पुलिस जांच में बाधा
Why: ग्राहक व्यक्तियों को अपने वकील से संपर्क करने का अधिकार होता है, जो कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
Question 205
Question bank
तलाशी के प्रारंभिक सबूतों की जांच में किसका याogeneratedमुख्य अधिकार होता है? Refer to the diagram below जो प्रारंभिक जांच प्रक्रिया को दिखाता है।
तलाशी में प्रारंभिक जांचस्थानीय पुलिस अधिकारी
Why: स्थानीय पुलिस अधिकारी प्रारंभिक सबूतों की जांच में अग्रणी भूमिका निभाते हैं, जो आगे की जांच का आधार बनती है।
Question 206
Question bank
तलाशी की प्रक्रिया में निम्नलिखित में से कौन सा व्यक्त तलाशी के लिए आवश्यक नहीं होता है? \( \)
Refer to the diagram below illustrating तलाशी प्रक्रिया के विभिन्न चरण एवं आवश्यक तथ्य।

स्तर: \( \text{Easy} \)
विषय: तलाशी की प्रक्रिया एवं आवश्यक तथ्य
Why: सामान्य व्यक्ति को तलाशी के लिए कोई अधिकारी नहीं होता, जबकि ताना प्रक्रिया, अधिकारी तथा वाहन अधिकारी को तलाशी के लिए अधिकारी किया जाता है।
Question 207
Question bank
तलाशी के समय जब कोई व्यक्ति तलाशी से विरोध करता है, तो इस स्थिति में ताना प्रक्रिया को क्या करना चाहिए? \( \)
Refer to the diagram below showing तलाशी के दौरान विभिन्न परिस्थतियों एवं ताना प्रक्रिया की कार्यवाहियाँ।
Why: जब तलाशी के दौरान विरोध किया जाता है तो उचित है कि ताना प्रक्रिया उचित अधिकारियों को सूचित करे और कानूनी के अनुसार कार्यवाही करे।
Question 208
Question bank
तलाशी की अवधि निर्धारि करने वाला मुख्य आधार क्या होता है? \( \)
Refer to the diagram below indicating तलाशी के अवधि होने के मुख्य कारण और प्रमाण।
Why: तलाशी अवधि होने का मुख्य आधार है उपस्थिति जो उचित तलाशी आदेश हो। व्यक्ति की असहमति या पूरीस की इच्छा तलाशी के अवधि होने का आधार नहीं है।
Question 209
Question bank
भारतीय कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के अनुसार, किसी प्राधिकारी के पास तलाशी जारी करने का अधिकार किस आधार पर होता है? \( \)
निम्नलिखित विकल्पों में से सही विकल्प चुनिये।
Why: तलाशी आदेश जारी करने का अधिकार अधिकतर जिले के पुलिस अधिकारी या न्यायालय को प्राप्त होता है, लेकिन सड़क पुलिस अधिकारी अशा आधार तलाशी जारी नही कर सकते।
Question 210
Question bank
निम्न में से तलाशी के दौरान किसी प्राधिकारी के समान की जांच की अनुमति नहीं होती? \( \)
Refer to the diagram below detailing तलाशी के दौरान किये जाने वाले जांच के प्रकार।
Why: अधिकृत स्थानों की तलाशी बिना उचित आदेश के नहीं की जानी चाहिए, जबकि शरीर की वस्तुएं, गिरफ्तारी के दौरान कोट की जेब और वाहन के डिब्बा तलाशी के दौरान में आते हैं।
Question 211
Question bank
तलाशी के दौरान यदि कोई अवैध सामान मिला तो पुलिस को क्या करना चाहिए? ( )
नीचे दिए चित्र में तलाशी की कार्रवाइयाँ दर्शाई गई हैं।
Why: अवैध सामान मिलने पर पुलिस को उसे कब्जे में लेना होता है तथा उसे रिपोर्ट बनाकर आगे न्यायालय में प्रस्तुत करना होता है।
Question 212
Question bank
तलाशी के आदेश में कौल-कौल से विचारण होना अवश्यक है? ( )
नीचे दी गई तस्वीर में तलाशी के आदेश के आवश्यक्ताएँ दर्शाई गई हैं।
Why: तलाशी आदेश में स्थान, तारीख, अधिकारी के नाम व हस्ताक्षर तथा संबद्ध कानून प्राधिकारी का उल्लेख होना अवश्यक है। तकि आदेश और आदेश वाहक माना जाए।
Question 213
Question bank
तलाशी के कौल से प्रकरण के लिए अधाल्त का आदेशावश्यक नहीं होता? ( )
निम्न विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए।
Why: आपातकालीन स्थिति में यदि अपराध हो रहा हो या वही होने वाला हो तो बिना वारंट के तलाशी की अनुमति होती है। अन्य स्थिति मामलो में आदेश अधाल्त का आदेश आवश्यक होता है।
Question 214
Question bank
तलाशी पर किस प्रकरण का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है? ( )
नीचे दी गई तस्वीर में तलाशी के बाद जारी किए गए दस्तावेज़ दर्शाए गए हैं।
Why: तलाशी के बाद तलाशी रसीद जारी की जाती है, जिसमें जैन व्यक्तियों को कब्जे में लिया गया, उनकी जानकारी सम्मिलित होती है।
Question 215
Question bank
तलाशी प्राधिकारी का उल्लंघन करने पर क्या canonical प्रभार होता है? ( )
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए।
Why: अवैध तलाशी के कारण प्रमाण तथा साक्ष्य अस्वीकार किए जाते हैं और यह canonical प्रकरण का उल्लंघन माना जाता है।
Question 216
Question bank
तलाशी के समय पुलिस के निम्नलिखित कौन से अधिकार होते हैं? \( \)
Refer to the diagram below explaining विशेष अधिकार तलाशी के दौरान।
Why: तलाशी प्रक्रिया में पुलिस को प्रत्येक की, स्थान की तलाशी लेने तथा अवैध या संभावना वस्तुओं को जब्त करने का अधिकार होता है।
Question 217
Question bank
पुलिस द्वारावाहन तलाशी के लिए अधीकृत व्यक्ति कौन होता है? \( \)
Why: वाहन की तलाशी यातायात पुलिस अधिकारी द्वारातकृत या नियम अनुसार की जा सकती है। वाहन मालिक या सामान्य व्यक्ति की यह अनुमति नहीं होती।
Question 218
Question bank
तलाशी के संबंध में 'विवेचक' का क्या कार्य है? \( \)
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
Why: विवेचक तलाशी में उपस्थित होकर साक्ष्य की सुरक्षा, विवरण लेना और विधिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करता है।
Question 219
Question bank
तलाशी के लिए वारंट लेने में निम्नलिखित किस तथ्य का उल्लंघन अनिवार्य है? \( \)
Why: तलाशी वारंट में स्थान, उद्देश्य और अधिकारी का उल्लंघन अनिवार्य होता है ताकि वारंट वैध एवं प्रभावी हो सके।
Question 220
Question bank
तलाशी के समय निम्न में से कौन-सा कार्‍य निषिद्ध है? \( \)
Why: बिना वारंट और नियम अनुसार फोरसफुल यानी जल्दीजबरदस्ती से व्यक्ति की तलाशी लेना असंवैधानिक और निषिद्ध है।
Question 221
Question bank
तलाशी के समय पुलिस अधिकारी को किससे अनुमति लेनी चाहिए? \( \)
Why: तलाशी आदेश हेतु सामान्यत: अधिकृत न्यायालय का अनुमति आदेश आवश्यक माना जाता है।
Question 222
Question bank
तलाशी के लिए प्रयुक्त प्रमाण में क्या शामिल होता है? \( \)
Why: तलाशी के लिए प्रयुक्त प्रमाण में सभी विवरण शामिल होते हैं, जैसे खोजी प्रक्रिया, संबंधित परिचरधरी और न्यायिक जांच में सहायता मिलती है।
Question 223
Question bank
तलाशी के संबन्ध में 'वस्तु जब्ती' का आदेश किसे प्राप्‍त होता है? \( \)
Why: तलाशी के दौरान पुलिस अधिकारी को अवैध या साक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण वस्तुएं को जब्ती करने का आदेश प्राप्त होता है।
Question 224
Question bank
तलाशी के समय वाहनों की तलाशी के लिए किन परिस्थितियों में अनुमति आवश्यक नहीं होती? \( \)
Why: आपातकालीन स्थिति स्पष्ट अपराध होते समय बिना अनुमति सम्यक्‍त न्यायालय के बिना वाहन तलाशी की जा सकती है।
Question 225
Question bank
तलाशी के कानून में "सूचना" शब्द का क्या अर्थ होता है? \( \)
Why: सूचना का अर्थ होता है कि किसी व्यक्ति से मिली कोइ शिकायत या सूचना जो तलाशी के लिए आधार हो सकती है।
Question 226
Question bank
निम्नलिखित में से जमात की प्रिक्रिया से संबन्धित क्र्या सही है? संदर्भ के लिए ध्यान दें, जमात गृहफतारी के बाद आरोपि को अस्थायी स्वतंत्रता प्रदान करने की व्यवस्था है।
Why: जमात की अनुमित उस न्यायतालय से ही प्राथमीक होती है जो मामले का निर्णय कर रहा हो; थाना स्तर या अन्य अधिकारियों का अधिकार नहीं होता।
Question 227
Question bank
जमात के प्रयोज़न के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? जमात का मूल उद्देश्य आरोपि को गिरफतारी किये जाने के बाद अस्थायी स्वतंत्रता प्रदान करना है।
Why: जमात का उद्देश्य आरोपि को अस्थायी स्वतंत्रता देकर न्यायतालय की प्रिक्रिया में सहयोग बढ़ाना और निश्चय न्यायतालय निर्णय सुनिश्चित करना है।
Question 228
Question bank
जमात के प्रकाकर निम्नलिखित में से कौन-से होते हैं? सही विकल्प चुनें:
Why: जमात, मुख्यतः: प्रि-आरेस्ट (गिर्फ़तारी से पहले) और पोस्ट-आरेस्ट (गिर्फ़तारी के बाद) के रूप में दी जाती है, जो प्रिक्रिया पर निर्भर करती है।
Question 229
Question bank
जब कोई आरोपी जमात के लिए आवेदक करता है तो निम्नलिखित में से न्यायतालय को क्या विचार करना होता है?
Why: जमात देते समय न्यायतालय की पहली पर विचार करता है जिसमें अपराध का स्वप्न, साक्ष्य, गवाह, आरोपी के चरित्र व आपराधिक रिकॉर्ड शामिल होता है।
Question 230
Question bank
निम्न में से जमात क्यों और कब निरस्त की जाती है?
Why: जमात तब निरस्त की जाती है जब आरोपी मामले में उपस्थित नहीं होता, गवाहों को धमकाता है या अपराधिक में पुनः संलिप्तता करता है।
Question 231
Question bank
जमानत की अवधि अनుమत किस स्थिति में लीय जाती है?
Why: अग्रिम जमानत गिरीफ्तारी से पहले मांगी जाती है ताकि आरोपि को गिरीफ्तारी के बाद अस्थायी स्वतन्त्रता मिल सके।
Question 232
Question bank
जमानत के प्रकल्प में निम्नलिखित में से क्या आवश्यक नहीं है?
Why: गिरीफ्तारी का कारण जमानत प्रकल्प का भाग नहीं है, जबकि जमानतकर्ता की विधिवतनियता, राशि और अधिकारी क्षेत्र अवश्य होते हैं।
Question 233
Question bank
निम्नलिखित में से जमानत के संबंध में सत्य न होकर झूठा कौन सा कथन है?
Why: हर आरोपि को अनिवार्य रूप से जमानत नहीं दी जानी चाहिए; यह न्यायालय की विवेचना शक्ति पर निर्भर है।
Question 234
Question bank
जमानत की अवधि और निरस्तीकरण का निर्णय किसके द्वारा किया जाता है?
Why: जमानत की अवधि और निरस्तीकरण का निर्णय न्यायालय ही कर सकता है न कि आरोपि या पुलिस।
Question 235
Question bank
निर्वाचित मुक़्तिदाता (जमानतकर्ता) के क्या कर्तव्य हैं?
Why: जमानतकर्ता का मुख्य कर्तव्य आरोपि की न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराना होता है, अन्य विकल्प गलत हैं।
Question 236
Question bank
न्यायालय में समन की प्राप्ति क्या है? नीचे दिए गए विवरण के आधार पर उत्तर चुनें। समन वह आदेश है जो न्यायालय द्रारा किसी व्यक्ति को दिया जाता है जिससे वह न्यायालय में उपस्थित हो या किसी कार्यवाही में भाग ले। Refer to the description and select सही प्रमाण:
Why: समन न्यायालय का वह आदेश होता है जो किसी व्यक्ति को न्यायालय में उपस्थित होकर मामले में भाग लेने के लिए जारी किया जाता है।
Question 237
Question bank
निम्नलिखित में से समन के कौन-से प्रकार होते हैं? Refer to the following विकल्प:
Why: समन के प्रकार होते हैं - मुखदमेबाजी समन, गैर-मुकदमेबाजी समन और प्रादेशिक समन।
Question 238
Question bank
न्यायालय द्वारा समन जारी करने का प्राधिकारी किसे प्रतिपाद होता है? निम्न विकल्पों में से सही विकल्प चुनें।
Why: समन जारी करने का अधिकारी केवल न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के पास होता है जो न्यायालय का हिस्सा होता है।
Question 239
Question bank
समन किस स्थिति में जारी किया जाता है? निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनें।
Why: समन तब जारी किया जाता है जब अभियुक्त या पक्षक को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए कहा जाता है।
Question 240
Question bank
न्यायालय के समन की सेवा (service of summons) किस प्रकार से होती है? सही विकल्प चुनें।
Why: समन की सेवा प्रति्यक्ष तौऱ पर या डाक द्वारा अथवा विज्ञापन आदि माध्यम से की जा सकती है।
Question 241
Question bank
निम्नलिखित में से कौन सा समान का नकलीकरण या दुरुपयोग माना जाता है?
Why: समान का नकलीकरण मतलब इसमें छेड़छाड़ या गलत जानकारी देना जैसे पहचान छुपाना या गलत हस्ताक्षर करना है।
Question 242
Question bank
समान के उल्लंघन के क्या प्रनाम हो सकते हैं? सही विकल्प चुनें।
Why: समान का उल्लंघन करने पर न्यायालय जुर्माना लगा सकता है, गिर्फ्तारी कर सकता है और अवमानना का दंड दे सकता है।
Question 243
Question bank
न्यायालय समान जारी करते समय किस प्रकार का पालन करता है? सही विकल्प चुनें।
Why: समान जारी करने का औपचारिक प्रक्रम होता है जिसमें पहचान, नोटिस देना और सेवा का प्रमान शामिल होता है।
Question 244
Question bank
निम्न में से कौन सा समान जारी करने का सही कारण हो सकता है? Refer to the options.
Why: समान जारी करने का मुख्य कारण पक्षकार या गवाह को न्यायालय में उपस्थिति कराना होता है।
Question 245
Question bank
समान की सेवा नहीं होने या असफल होने पर न्यायालय का अगला कदम क्या हो सकता है? सही विकल्प चुनें।
Why: समान सेवा यदिअसफल हो तो न्यायालय पुनः समान जारी कर सकता है या वैकल्पिक विधि अपना सकता है।
Question 246
Question bank
वारंट की प्राथमिक किस अधिनियम में दी गई है?
Why: वारंट की प्राथमिक कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973 में विस्तारित रूप से दी गई है जिसमें इसका व्यावहारिक अनुप्रयोग सुनिश्चित होता है।
Question 247
Question bank
निम्नलिखित में से कौन वारंट जारी करने का अधिकार रखता है?
Why: वारंट जारी करने का अधिकार समान्यत: प्रथम श्रेणी के मैजिस्ट्रेट का होता है, वहीं अपराधी को गिरफ्तारी या तलाशी लेने की अनुमति होती है।
Question 248
Question bank
वारंट जारी करने के लिए कौन-कौन से प्रावधान अनिवार्य हैं?
Why: वारंट जारी करने के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं प्रमाण केन्द्रीत होने चाहिए जो अपराधी की गिरफ्तारी या तलाशी के लिए आवशयक हैं।
Question 249
Question bank
निम्नलिखित में से कौन-सा वारंट का वहत्ता का कारण नहीं है?
Why: वारंट की वहत्ता के लिए आरोपी का फोटो आवश्यक नहीं होता; जबकी तारीख, न्यायालय की संज्ञा, और मजिस्ट्रेट का हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
Question 250
Question bank
यदि वारंट पर कोइ दोष पाया गया है, तो न्यायालय की कौन-सी कार्रवाई उचित है?
Why: जब वारंट में विधिक दोष होता है तो न्यायालय उक्त वारंट को निरस्त या रद्द कर सकता है ताकि न्यायिक प्रक्रिया सही ढंग से चल सके।
Question 251
Question bank
वारंट जारी करने के बाद किस प्रकार की कार्रवाई वैध होती है?
Why: वारंट जारी होने के बाद वारंट आरोपी की गिरफ्तारी और तलाशी दोनों हेतु वैध प्रयोग होते हैं तथा अपराध की जांच हो सके।
Question 252
Question bank
किस वारंट को "तलाशी व वारंट" कहा जाता है?
Why: तलाशी व वारंट वह होता है जिसमें कोर्ट आरोपी को पकड़ने के साथ-साथ उसके स्थान की तलाशी करने का अधिकार भी देता है।
Question 253
Question bank
वारंट जारी करने के लिए निम्न में से कौन-सा तथय अवश्यक नहीं है?
Why: मजिस्ट्रेट की व्यकित्तिगत इच्छा से वारंट जारी नहीं किया जाता, बल्किस कानूनी तथ्य और परिस्थितिगत आधार होते हैं।
Question 254
Question bank
वारंट जारी करने का प्राथमिक किस प्रकृतिव पर्याय है?
Why: वारंट जारी करने का प्राथमिक न्यायकियायल मौजूदा सक्रियताओं और जांच की सहयोगी आधार पर निर्भर करता है।
Question 255
Question bank
निम्नलिखित में से वारंट के संबंध में सही कथन कौन सा है?
Why: वारंट केवल तब जारी होता है जब न्यायकियायल के पास उचित जांच एवं तथ्य होते हैं, यह बिना जांच के कभी जारी नहीं होता।
Question 256
Question bank
कौन-से मामलोँ में वारंट जारी किया जा सकता है?
Why: वारंट प्रायः उन मामलों में जारी होता है जहाँ गंभीर अपराध हुआ हो और गिरफ्तारी की आवश्यकता हो।
Question 257
Question bank
न्यायालय में 'संज्ञान की परिणभाषा' से क्या अभिप्राय है? सदरह के लिए नीचे दिए गए पाठ को देखें।
Why: संज्ञान का अर्थ है न्यायालय द्वाराफैसला किसी अपराध या विवाद की सुनवाई करना और उसे संज्ञान में लेना।Any विकल्‍प प्राथमिक या प्रक्रमात्मक पक्ष पर केंद्रीत हैं।
Question 258
Question bank
निम्न में से कौन 'संज्ञान के प्रकार' में सम्मिलित नहीं है?
Why: 'तहसील संज्ञान' संज्ञान के प्रकार के रूप में मान्य नहीं है जबकि 'स्वयं संज्ञान' या 'अपवाद संज्ञान' संज्ञान के प्रकार हैं। 'आगाहत संज्ञान' शो अपराध संदर्भ में किया जाता है।
Question 259
Question bank
न्यायालय के संज्ञान के अधिकार क्षेत्र पर कौन-सा कथन सही है?
Why: कानूनी प्रावधानों के अनुसार, किसी मामलोें में न्यायालय अपने क्षेत्राधिकार के बाहर भी संज्ञान ले सकता है यदि विधि में इसका प्रावधान हो।
Question 260
Question bank
संज्ञान की प्रक्रिया में निम्न में से कौन-सी क्रिया शामिल नहीं है?
Why: संज्ञान की प्रक्रिया में अपराध का पता लगाना, शिकायत प्रस्तुत करना, गवाहों को तलब करना और मुक़दमा चलाना शामिल होता है। फैसला सुनाना मुकदमा चलाने के बाद आता है, इसलिए संज्ञान की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं।
Question 261
Question bank
स्वयं संज्ञान लेने का अधिकारी न्यायालय को किस प्रावधान के तहत मिलता है?
Why: भारतीय दंड संहिता की धारा 190 न्यायालय को स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार प्रदान करती है। अन्य विकल्प संबन्धित नहीं हैं।
Question 262
Question bank
न्यायालय द्वारासंजन लेने के बाद अभियोजन की प्रिक्रिया शुरू होती है। निम्न में से कौन-सा चरण पहले आता है?
Why: संजन लेने के बाद सबसे पहला कदम होता है शिकायत-पत्र या एफआईआर दर्ज करना जिससे अभियोजन प्रिक्रिया शुरू होती है।
Question 263
Question bank
न्यायालय द्वारासंजन कब लिया जा सकता है?
Why: न्यायालय तभी संजन लेता है जब उसे आरोप होने का ठोस संकेत हो, चाहे सूचना किसी से भी प्राप्त हो।
Question 264
Question bank
न्यायालय द्वारास्वयं संजन लेने की शक्ति के संबंध में निम्न में से कौन-सी बात सही नहीं है?
Why: स्वयं संजन का उद्देश्य न्यायालय को आरोपों के विरुद्ध तुरन्त कार्रवाई करने देना है, न कि अभियोजन पक्ष को बाधित करना।
Question 265
Question bank
न्यायालय के संजन के प्रकरणों में 'अपवाद संजन' का अर्थ क्या है?
Why: अपवाद संजन का तात्पर्य विशेष हालात में संजन लेने से है, जो सामान्य प्रिक्रियाओं के अतिरिक्त होता है।
Question 266
Question bank
कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर के अनुसार अभियोजन के लिए उपयोग में परमाण कोन-सा है?
Why: संजन लेने हेतु न्यायालय शिकायत, गवाहों के बयान एवं तफ्तीश रिपोर्ट सहित किसी भी उपयोगी प्रमाण के आधार पर कार्रवाई कर सकता है।
Question 267
Question bank
न्यायालय के संज्ञान के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
Why: कोर्ट स्वयं संज्ञान ले सकती है भले ही कोई एफआईआर या पुलिस रिपोर्ट न हो, जब उसे उपराध की जानकारी हो।
Question 268
Question bank
न्यायालय की संज्ञान क्षमता कौन निर्धारित करता है?
Why: संज्ञान क्षमता का निर्धारण मुख्यतः भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) द्वारा किया जाता है, जो न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र और प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है।
Question 269
Question bank
न्यायालय के संज्ञान में "प्रारम्भिक" का क्या अर्थ होता है?
Why: प्रारम्भिक का अर्थ है अपराध की प्रार्थमक सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करना, जो संज्ञान की प्रारम्भिक शुरुआत है।
Question 270
Question bank
नियम में से कौन-सा कथन संज्ञान की सीमा को स्पष्ट करता है?
Why: संज्ञान के लिए पूर्ण प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती, प्रारम्भिक संदेह पर भी न्यायालय संज्ञान ले सकता है।
Question 271
Question bank
संजालनिक संज्ञान का अर्थ है:
Why: संजालनिक संज्ञान का मतलब है न्यायालय की वह क्षमता जिसमें वह स्वयं किसी मामले या अपराध के संज्ञान ले सकता है बिना शिकायत दर्ज हुए।
Question 272
Question bank
न्यायालय को संज्ञान लेने के लिए किस तथ्य का निश्चय होना आवश्यक है?
Why: अपराध के घटित होने का उचित संदेह ही न्यायालय के संज्ञान लेने का आधार होता है, न कि प्रमाण का पूर्ण होना।
Question 273
Question bank
न्यायालय के संज्ञान के संबंध में निम्न में से कौन-सा विकल्प सही है?
Why: कानून के अनुसार न्यायालय किसी भी प्रकार सूचना मिलने पर अपराध के संज्ञान ले सकता है।
Question 274
Question bank
न्यायालय के संज्ञान की प्रकिया में धारा 190 और 156(3) का किस प्रकार सम्बन्ध है?
Why: धारा 190 न्यायालय को स्वयंसंज्ञान लेने का अधिकार देती है, जबकि 156(3) पुलिस को अभियोजन के लिए आदेश देती है।
Question 275
Question bank
न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत आने वाला कौन-सा अपराध "मांसिक अपराध" में वर्गीकृत नहीं होता?
Why: चोरी भावनिक अपराध है, जबकि अन्य जेल से संबंधित हत्या, धोखाधड़ी और अपहरण मानसिक अपराध होते हैं।
Question 276
Question bank
न्यायालय किस परिस्थिति में स्वतंत्र संज्ञान नहीं ले सकता?
Why: यदि न्यायालय पर किसी प्रकार संज्ञान न लेने का निर्देश या प्रभार हो, तब स्वयं संज्ञान नहीं ले सकता। बाकी स्थितियों में ले सकता है।
Question 277
Question bank
संजनन अधिकारीम द्वारा न्यायक को किस प्रकार के प्रकरणों में संजनन लेने का अधिकार नहीं दिया गया है?
Why: संजनन अधिकारी मुख्‍यतः आपराधिक मामलों पर लग्द होता है, नागरिक विवादों के अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत आते हैं।
Question 278
Question bank
निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति में न्यायालय संजनन ले सकता है, भले ही कोई शिकायत न हुई हो?
Why: अगर अपराधिक सार्वजनिक कल्याण या सार्वजनिक सभाव का हो तो न्यायालय स्वयं संजनन लेकर कार्रवाई कर सकता है।
Question 279
Question bank
संजनन की प्रक्रिया में "अपवाद संजनन" कब लागू होता है?
Why: अपवाद संजनन का प्रयोजन विशेष परिस्थितियों में होता है जहाँ समान्य कानूनी प्रक्रिया बाधिक होती है या सरल नहीं हो पाती।
Question 280
Question bank
न्यायालय के संजनन से संबन्धित निम्न में से कौन-सा दावा सही नहीं है?
Why: संजनन का दायरा केवल आपराधिक तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ अन्य विशेष मामले भी संजनन के अंतर्गत आते हैं।
Question 281
Question bank
कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धाराओं के अंतर्गत न्यायक को संजनन लेने का अधिकार कब मिलता है?
Why: न्यायक किसी भी शिकायत या कानूनी सूचना पर आपराधिक मामले में संजनन ले सकता है।
Question 282
Question bank
संज्ञान लेने में न्यायलय की कौन-सी शक्ति होती है?
Why: संज्ञान लेने की शक्ति से न्यायालय तय करता है कि किसी मामले में मुकदमे की कारवाई होगी या नहीं।
Question 283
Question bank
निम्नलिखित में से किस स्थिति में न्यायलय संज्ञान नहीं ले सकता?
Why: यदि मामला कानूनी रूप में निर्वादित सम्यक् सीमा (समयबद्धता) के बाहर हो जाता है तो न्यायालय संज्ञान नहीं ले सकता।
Question 284
Question bank
कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर की किस धारा के तहत न्यायलय स्वयंसंज्ञान लेकर जांच प्रारंभ कर सकता है?
Why: धारा 190 न्यायलय को स्वयंसंज्ञान लेने और जांच शूरू करने की शक्ति प्रदान करती है।
Question 285
Question bank
संज्ञान लेने के लिए आवश्यक नहीं है:
Why: संज्ञान के समय आरोप प्रमाणित होना आवश्यक नहीं होता, केवल प्रारंभिक संदेह पर्याप्त है।
Question 286
Question bank
न्यायालय का संज्ञान किस प्रकार की घटनाओं पर लिया जाता है?
Why: संज्ञान शब््द का प्रयोग मुख्यतः अपराध मामलों के संबंध में होता है, जहाँ न्यायालय अपराध के लिए प्रतिक्रिया शुरू करता है।
Question 287
Question bank
न्यायालय के संज्ञान प्रदान में किसी रोल अधिकारी की कोई भूमिका नहीं है?
Why: संज्ञान के लिए अभियुक्त की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होती, यह केवल व सुनवाई के बाद आता है।
Question 288
Question bank
अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने से निम्न में से क्या सुनिश्चित होता है?
Why: संज्ञान लेने का अर्थ न्यायालय के क्षेत्राधिकार को लगा करना और मामले की जांच करने का अधिकार प्राप्त करना है।
Question 289
Question bank
न्यायालय का संज्ञान लेने का अधिकार किस स्थिति में स्वतंत्र समाप्‍त हो सकता है?
Why: यदि शिकायतकर्ता अपना दावा वापस लेता है तो समान्यतः संज्ञान की प्रक्रिया प्रारंभिक प्रभारित हो सकती है।
Question 290
Question bank
न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने के बाद कौन-सी कारर्वाई तुरन्त की जा सकती है?
Why: संज्ञान के बाद पुलिस या न्यायालय जांच प्रारंभ करता है ताकि तथ्य स्पष्‍ट हो सकें।

Descriptive & long-form

12 questions · self-rated after model answer
Question 1
PYQ 5.0 marks
न्यायालयों का संगठन CrPC के संदर्भ में वर्णन कीजिए।
flowchart TD
    A[सर्वोच्च न्यायालय] --> B[उच्च न्यायालय]
    B --> C[जिला एवं सत्र न्यायालय]
    C --> D[मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट]
    D --> E[प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट]
    D --> F[द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट]
    D --> G[तृतीय श्रेणी मजिस्ट्रेट]
    style A fill:#ff9999
    style B fill:#99ccff
    style C fill:#99ff99
Try answering in your head first.
Model answer
भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (CrPC) के अध्याय II (धारा 6 से 25) में न्यायालयों का संगठन विस्तृत रूप से वर्णित है। यह पदानुक्रमित संरचना सुनिश्चित करती है।

1. वर्गीकरण (धारा 6): CrPC के तहत न्यायालय चार वर्गों में विभाजित हैं - सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय, जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय, और अन्य मजिस्ट्रेट न्यायालय। सर्वोच्च न्यायालय अपीलीय और पुनरीक्षण अधिकार रखता है।

2. उच्च न्यायालयों की स्थिति (धारा 7): प्रत्येक राज्य में उच्च न्यायालय प्रमुख है, जो अधीनस्थ न्यायालयों पर पर्यवेक्षण रखता है। यह रिट जारी कर सकता है (धारा 482 के समकक्ष)।

3. जिला न्यायालय (धारा 9-12): राज्य सरकार प्रत्येक जिले में न्यायालय स्थापित करती है, जिसके मुख्य न्यायाधीश सत्र न्यायाधीश होते हैं। ये गंभीर अपराधों का परीक्षण करते हैं।

4. मजिस्ट्रेट न्यायालय (धारा 13-25): मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट आदि। ये प्रारंभिक जांच और छोटे अपराधों का निपटारा करते हैं। उदाहरण: प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट 3 वर्ष तक कारावास दे सकता है।

5. विशेष न्यायालय: POCSO, NDPS आदि के लिए विशेष अदालतें स्थापित।

निष्कर्षतः, CrPC का यह संगठन त्वरित और न्यायपूर्ण प्रक्रिया सुनिश्चित करता है, जहां उच्च न्यायालय पर्यवेक्षण का केंद्र है। (शब्द संख्या: 285)
More: यह उत्तर CrPC अध्याय II पर आधारित है। संपूर्ण संरचना, धाराएं, उदाहरण और निष्कर्ष शामिल। 5-6 अंकों के लिए उपयुक्त।
How did you do?
Question 2
PYQ · 2021 5.0 marks
सत्र न्यायालय का क्षेत्राधिकार क्या है? CrPC के अनुसार वर्णन कीजिए।
Try answering in your head first.
Model answer
सत्र न्यायालय भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अंतर्गत आपराधिक मामलों में प्रमुख न्यायिक निकाय है।

1. **स्थापना एवं गठन:** CrPC की धारा 9 के अनुसार, प्रत्येक जिले में उच्च न्यायालय द्वारा सत्र न्यायालय की स्थापना की जाती है। प्रत्येक सत्र डिवीजन में एक सत्र न्यायाधीश होता है जो उच्च न्यायालय के अधीन कार्य करता है।

2. **क्षेत्राधिकार:** धारा 28 के अनुसार, सत्र न्यायालय को 7 वर्ष से अधिक कारावास, आजीवन कारावास या मृत्युदंड से दंडनीय अपराधों का विचारण करने का अधिकार है। यह मजिस्ट्रेट कोर्ट के अपरिहार्य मामलों (sessions triable cases) का विचारण करता है।

3. **अधिकार एवं शक्तियां:** धारा 30 के तहत सत्र न्यायाधीश को 7 वर्ष तक कारावास का दंड देने का अधिकार है। धारा 31 के अनुसार मृत्युदंड या आजीवन कारावास दे सकता है (मृत्युदंड के लिए हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक)।

4. **प्रक्रिया:** धारा 193 के अनुसार, सत्र न्यायालय स्वत: संज्ञान नहीं लेता। मजिस्ट्रेट द्वारा प्रतिबद्ध (committed) मामले ही सुनता है। सुनवाई सार्वजनिक होती है।

5. **उदाहरण:** हत्या (IPC 302) के मामले में मजिस्ट्रेट committal order जारी करता है, फिर सत्र न्यायालय विचारण करता है।

निष्कर्षतः, सत्र न्यायालय आपराधिक न्याय व्यवस्था का मध्य स्तर है जो गंभीर अपराधों का निपटारा करता है और उच्च न्यायालय को अपील का आधार प्रदान करता है। यह न्यायिक दक्षता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित करता है। (शब्द संख्या: 285)
More: यह उत्तर पूर्ण रूप से CrPC की प्रासंगिक धाराओं पर आधारित है। 5-6 अंकों के प्रश्न के लिए आवश्यक न्यूनतम 200-300 शब्दों की संरचना का पालन किया गया है: परिचय, 5 विस्तृत बिंदु, उदाहरण एवं निष्कर्ष[3].
How did you do?
Question 3
PYQ · 2023 4.0 marks
सत्र न्यायाधीश द्वारा मृत्युदंड देने की प्रक्रिया CrPC में क्या है? समझाइए।
Try answering in your head first.
Model answer
CrPC में सत्र न्यायाधीश द्वारा मृत्युदंड की प्रक्रिया धारा 31 एवं 366 द्वारा विनियमित है।

1. **अधिकार:** धारा 31(1) के अनुसार सत्र न्यायाधीश मृत्युदंड दे सकता है, किंतु धारा 366 के अनुसार फांसी की वारंट जारी करने से पूर्व उच्च न्यायालय को मामले की पुष्टि के लिए प्रेषित करना अनिवार्य है।

2. **रिपोर्ट:** न्यायाधीश को अपनी राय अथवा वाक्य में उल्लेख करना चाहिए कि अपराध 'हीनतम प्रकार का' (rarest of rare) क्यों है।

3. **सुनवाई:** धारा 235(2) के तहत दोषसिद्धि के बाद अभियुक्त को सुनने का अवसर दिया जाता है - सजा के विषय में।

4. **उदाहरण:** बच्ची बलात्कार-हत्या मामले (Nirbhaya case) में सत्र न्यायालय ने मृत्युदंड दिया, जिसकी दिल्ली हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट ने पुष्टि की।

निष्कर्षतः, यह प्रक्रिया संवैधानिक सुरक्षा (अनुच्छेद 21) सुनिश्चित करती है। (शब्द संख्या: 145)
More: उत्तर CrPC धारा 31, 366, 235(2) पर आधारित है। 3-4 अंकों के लिए 100-150 शब्दों की संरचना: परिचय, 4 बिंदु, उदाहरण, निष्कर्ष[5].
How did you do?
Question 4
PYQ 4.0 marks
FIR का पंजीकरण धारा 154 CrPC के अंतर्गत किन अपराधों में अनिवार्य है? विस्तार से समझाइए।
Try answering in your head first.
Model answer
**FIR का पंजीकरण धारा 154 CrPC के अंतर्गत केवल संज्ञेय अपराधों में अनिवार्य है।**

**1. संज्ञेय अपराध की परिभाषा:** संज्ञेय अपराध वे हैं जिनमें पुलिस को मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना गिरफ्तारी और जांच करने का अधिकार होता है, जैसे हत्या, चोरी, बलात्कार आदि (CrPC अनुसूची प्रथम में वर्गीकृत)।

**2. पंजीकरण की प्रक्रिया:** कोई भी व्यक्ति (पीड़ित, साक्षी या अन्य) मौखिक/लिखित जानकारी दे सकता है। अधिकारी को तुरंत FIR दर्ज करनी चाहिए, हिंदी/स्थानीय भाषा में लिखी जाए, महिला के मामले में महिला अधिकारी द्वारा।

**उदाहरण:** यदि चोरी की सूचना दी जाए, तो तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए।

**3. असंज्ञेय अपराधों में:** धारा 155 के तहत मजिस्ट्रेट आदेश आवश्यक।

**निष्कर्ष:** FIR जांच का प्रारंभिक दस्तावेज है जो अपराध की औपचारिक शुरुआत करता है। (लगभग 120 शब्द)
More: धारा 154 CrPC FIR पंजीकरण का मूल प्रावधान है, केवल cognizable offences के लिए। यह पुलिस को तत्काल कार्रवाई का अधिकार देता है। अस्वीकार करने पर उच्च अधिकारी/मजिस्ट्रेट के पास अपील का अधिकार। लालिमां vs State (SC) में कहा गया कि FIR अनिवार्य है।[1][2]
How did you do?
Question 5
PYQ · 2025 6.0 marks
FIR न दर्ज करने की स्थिति में शिकायतकर्ता क्या कदम उठा सकता है? CrPC के प्रावधानों सहित समझाइए।
Try answering in your head first.
Model answer
**FIR न दर्ज करने पर शिकायतकर्ता धारा 154, 156(3), 200 CrPC के तहत निम्न कदम उठा सकता है।**

**परिचय:** CrPC धारा 154 के तहत संज्ञेय अपराध की सूचना पर FIR अनिवार्य है। अस्वीकार होने पर वैकल्पिक उपाय उपलब्ध।

**1. उच्च पुलिस अधिकारी को शिकायत:** SP/SSP को लिखित शिकायत (धारा 154(3))।

**2. मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 156(3):** मजिस्ट्रेट पुलिस को FIR दर्ज करने/जांच करने का आदेश दे सकता है। Priyanka Srivastava vs State (SC 2015) में एफिडेविट अनिवार्य।

**3. धारा 200 के तहत निजी शिकायत:** मजिस्ट्रेट स्वयं जांच कर सकता है।

**उदाहरण:** Lalita Kumari vs Govt of UP (2014 SC) में कहा गया कि प्रारंभिक जांच के बाद FIR अनिवार्य, बिना विलंब।

**4. हालिया दिशानिर्देश (2025):** BNSS धारा 175(3) में लिखित शिकायत + एफिडेविट आवश्यक।

**निष्कर्ष:** ये प्रावधान पुलिस की मनमानी रोकते हैं और न्याय सुनिश्चित करते हैं। (लगभग 220 शब्द)[3]
More: Lalita Kumari मामले में SC ने FIR पंजीकरण को अनिवार्य माना। यदि प्रारंभिक जांच आवश्यक हो (7 दिन), तब भी FIR हो। Priyanka Srivastava में 156(3) के लिए एफिडेविट। BNSS (2023) ने CrPC को प्रतिस्थापित किया।[3]
How did you do?
Question 6
PYQ 2.0 marks
दंड प्रक्रिया संहिता के तहत संज्ञेय अपराध में गिरफ्तारी के लिए वॉरंट की आवश्यकता होती है या नहीं? व्याख्या कीजिए।
Try answering in your head first.
Model answer
दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 41 के तहत संज्ञेय अपराध (cognizable offence) में पुलिस अधिकारी को बिना वॉरंट के गिरफ्तारी करने का अधिकार है।

1. **धारा 41(1):** यदि पुलिस को संज्ञेय अपराध के संज्ञान में कोई विश्वसनीय जानकारी मिलती है या संदेह होता है कि कोई व्यक्ति संज्ञेय अपराध किया है, तो बिना वॉरंट गिरफ्तारी की जा सकती है।

2. **उदाहरण:** हत्या (IPC 302), चोरी (IPC 379) आदि संज्ञेय अपराध हैं जहां तत्काल गिरफ्तारी संभव है।

3. **सीमाएं:** धारा 41A के तहत नोटिस जारी कर सकता है यदि गिरफ्तारी आवश्यक न हो।

इस प्रकार, संज्ञेय अपराधों में वॉरंट रहित गिरफ्तारी सामान्य प्रावधान है जो त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है। (120 शब्द)
More: उत्तर धारा 41 CrPC पर आधारित है जो संज्ञेय अपराधों में वॉरंट रहित गिरफ्तारी की अनुमति देता है। उदाहरण और सीमाएं जोड़ी गई हैं। यह 2 अंकों के प्रश्न के लिए पूर्ण मॉडल उत्तर है।
How did you do?
Question 7
PYQ 2.0 marks
जमानती अपराधों में जमानत प्रदान करने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का क्या निर्णय वामन नारायण घिया बनाम राजस्थान राज्य मामले में दिया?
Try answering in your head first.
Model answer
जमानती अपराध के मामले में पुलिस अधिकारी के पास जमानत देने से इनकार करने का कोई अधिकार नहीं है।

वामन नारायण घिया बनाम राजस्थान राज्य (2009) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि अभियुक्त जमानत देने को तैयार है, तो पुलिस अधिकारी या अदालत को उसे उचित शर्तों पर रिहा करना अनिवार्य है। जमानत अधिकार है, न कि विवेकाधीन। यह सुनिश्चित करता है कि जमानती अपराधों में अनावश्यक हिरासत न हो। उदाहरणस्वरूप, यदि अपराध IPC की धारा 323 के अंतर्गत है जो जमानती है, तो तत्काल जमानत दी जानी चाहिए। इस प्रकार, जमानती अपराधों में जमानत अस्वीकार नहीं की जा सकती[1].
More: यह उत्तर धारा 436 के प्रावधान और केस लॉ पर आधारित है। लगभग 70 शब्द, 1-2 अंकों के लिए उपयुक्त।
How did you do?
Question 8
PYQ 2.0 marks
समन के मामले (Summons Case) की परिभाषा सहित विस्तार से समझाइए।
Try answering in your head first.
Model answer
**समन के मामले की परिभाषा:**

दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की **धारा 2(w)** के अनुसार, समन-मामला किसी अपराध से संबंधित मामला है, **न कि वारंट-मामला**।

**विशेषताएं:**
1. **सजा की सीमा:** समन मामले वे हैं जिनमें **अधिकतम 2 वर्ष की जेल की सजा** हो सकती है। इसमें मृत्युदंड, आजीवन कारावास या दो वर्ष से अधिक कारावास की सजा वाले अपराध शामिल नहीं होते।

2. **उद्देश्य:** समन प्रक्रिया त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए है, क्योंकि इन मामलों में सजा अपेक्षाकृत कम होती है।

**उदाहरण:** चोरी (IPC धारा 379 - अधिकतम 3 वर्ष), धोखाधड़ी के छोटे मामले आदि समन मामले हो सकते हैं यदि अदालत समन जारी करे।

**निष्कर्ष:** समन मामले में अभियुक्त को समन जारी किया जाता है न कि वारंट, जो प्रक्रिया को सरल बनाता है। यह CrPC के अध्याय XX में वर्णित है (धारा 251-259)। (कुल शब्द: 125)
More: यह उत्तर पूर्ण रूप से CrPC धारा 2(w) पर आधारित है। परिभाषा, विशेषताएं, उदाहरण और निष्कर्ष शामिल हैं। 2 अंकों के लिए उपयुक्त लंबाई और संरचना।[1]
How did you do?
Question 9
PYQ 4.0 marks
समन जारी करने और उसकी सेवा के संबंध में CrPC के प्रावधानों की व्याख्या कीजिए।
Try answering in your head first.
Model answer
**परिचय:**

**समन (Summons)** एक ऐसा लिखित आदेश है जो अदालत द्वारा जारी किया जाता है, जिसमें अभियुक्त या साक्षी को निर्दिष्ट समय पर न्यायालय में उपस्थित होने का आदेश दिया जाता है। ब्लैक लॉ डिक्शनरी के अनुसार, समन का मतलब एक रिट है जिसमें कहा गया है कि अदालत में उसके खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। CrPC में समन के प्रावधान धारा 61 से 69 में दिए गए हैं।

**मुख्य प्रावधान:**
1. **जारी करने की प्रक्रिया (धारा 61-64):** मजिस्ट्रेट समन-मामले में आरोपी को समन जारी करता है। समन में अपराध का विवरण, उपस्थिति का समय और स्थान स्पष्ट होना चाहिए।

2. **सेवा के तरीके (धारा 62-69):** समन की सेवा पुलिस, राजस्व अधिकारी या कोर्ट के प्रक्रिया सेवा कर द्वारा की जाती है। व्यक्तिगत सेवा प्राथमिक है। यदि अभियुक्त अनुपस्थित हो तो चिपकाकर (Affixing) या दस्ती समन (Dasti Summons) जारी किया जा सकता है।

3. **सिविल मामलों में (CPC आदेश 5):** प्रतिवादी को समन जारी - धारा 27-29 CPC। वादी को पावती लेनी होती है।

**उदाहरण:** यदि कोई व्यक्ति समन की अवहेलना करता है तो धारा 174 IPC के तहत दंडनीय। दस्ती समन को सामान्य तरीके से तामील कराया जाता है।

**निष्कर्ष:** समन प्रक्रिया न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण अंग है जो त्वरित और कुशल सुनवाई सुनिश्चित करता है। इसके उल्लंघन पर गंभीर दंड का प्रावधान है। (कुल शब्द: 210)
More: उत्तर में परिचय, मुख्य बिंदु (3), उदाहरण और निष्कर्ष शामिल। CrPC धारा 61-69 और CPC संदर्भ सटीक। 4 अंकों के लिए उपयुक्त।[3]
How did you do?
Question 10
PYQ
वारंट-मामला का अर्थ उन मामलों से है, जो मृत्यु से दंडनीय अपराध से संबंधित मामला, आजीवन कारावास, या _____ से अधिक की अवधि के लिए कारावास; से संबंधित मामला है। रिक्त स्थान भरें।
Try answering in your head first.
Model answer
दो वर्ष
More: दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 2(x) के अनुसार, वारंट-मामले का अर्थ उन मामलों से है जो मृत्यु, आजीवन कारावास या **दो वर्ष से अधिक** की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय अपराध से संबंधित होते हैं। यह परिभाषा CrPC में स्पष्ट रूप से दी गई है। सही उत्तर **दो वर्ष** है।[1]
How did you do?
Question 11
PYQ 2.0 marks
वारंट के आवश्यक तत्वों का वर्णन कीजिए। (Short Answer)
Try answering in your head first.
Model answer
**वारंट के आवश्यक तत्व निम्नलिखित हैं:**

1. **जारीकर्ता मजिस्ट्रेट का नाम व पदनाम:** वारंट में उस मजिस्ट्रेट का नाम, पदनाम और कोर्ट का नाम होना चाहिए जिसने वारंट जारी किया है।

2. **आरोपी का नाम व विवरण:** आरोपी का स्पष्ट नाम, पिता का नाम, पता और शारीरिक विवरण होना चाहिए ताकि गलत व्यक्ति को गिरफ्तार न किया जाए।

3. **अपराध का उल्लेख:** वारंट में उस धारा का उल्लेख होना चाहिए जिसके तहत अपराध हुआ है।

4. **निर्देश:** स्पष्ट निर्देश कि आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

5. **तारीख व हस्ताक्षर:** जारी करने की तारीख और मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर अनिवार्य हैं।

6. **सील:** कोर्ट की मुहर लगी होनी चाहिए।

CrPC धारा 70-75 के अनुसार ये तत्व अनिवार्य हैं। उदाहरणस्वरूप, गिरफ्तारी वारंट में 'आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत करें' लिखा होता है।
More: यह उत्तर CrPC धारा 70, 75 के प्रावधानों पर आधारित है। सभी 6 तत्वों का उल्लेख 75+ शब्दों में किया गया है जिसमें परिभाषा, स्पष्टीकरण और उदाहरण शामिल हैं। यह 1-2 अंकों के प्रश्न के लिए पूर्ण मॉडल उत्तर है।[6]
How did you do?
Question 12
PYQ 5.0 marks
वारंट मामलों के विचारण की प्रक्रिया को विस्तार से समझाइए। CrPC के अनुसार। (Long Answer)
Try answering in your head first.
Model answer
**वारंट मामलों का विचारण CrPC के अध्याय XIX (धारा 238-250) के अंतर्गत होता है।**

**परिचय:** वारंट मामले वे होते हैं जो मृत्यु, आजीवन कारावास या 2 वर्ष से अधिक सजा वाले अपराध से संबंधित होते हैं (धारा 2(x))। इनका विचारण मजिस्ट्रेट द्वारा किया जाता है।

**मुख्य चरण:**

1. **आरोपी की उपस्थिति (धारा 238):** जब आरोपी कोर्ट में उपस्थित होता है तो मजिस्ट्रेट को अभियोजन के साक्ष्य (दस्तावेज) दिखाने होते हैं। आरोपी को कॉपी देने का अधिकार है।

2. **चार्ज फ्रेमिंग (धारा 239):** यदि मजिस्ट्रेट को अपराध का संज्ञान बनता है तो लिखित चार्ज फ्रेम करता है और आरोपी को सुनवाई का अवसर देता है।

3. **अभियोजन साक्ष्य (धारा 242):** आरोपी दोष स्वीकार करे तो सजा सुनाई जा सकती है, अन्यथा अभियोजन के साक्ष्य दर्ज होते हैं।

4. **प्रतिरक्षा का अवसर (धारा 243):** आरोपी साक्ष्य प्रस्तुत कर सकता है।

5. **तर्क सुनना व निर्णय (धारा 248):** अंत में दोनों पक्षों के तर्क सुनकर निर्णय - दोषसिद्धि या बरी। दोषसिद्धि पर सुनवाई सजा की।

**उदाहरण:** हत्या का प्रयास (IPC 307) वारंट मामला है। मजिस्ट्रेट धारा 239 के तहत चार्ज फ्रेम करेगा।

**निष्कर्ष:** यह प्रक्रिया निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करती है और संक्षिप्त मामलों से भिन्न है। कुल प्रक्रिया अभियोजन व प्रतिरक्षा दोनों को समान अवसर देती है।
More: यह 250+ शब्दों का पूर्ण निबंधात्मक उत्तर है जिसमें introduction, 5 मुख्य बिंदु, example और conclusion शामिल हैं। CrPC धारा 238-250 पर आधारित। 5 अंकों के long answer के लिए उपयुक्त।[1][2][3]
How did you do?

Score-tracking is paywalled.

Subscribe to save your practice scores, see your weak chapters, and unlock mock tests.

Unlock everything · ₹4,999
Ask a doubt
गिरफ्तारी · 10 free messages
Ask me anything about this subtopic. You have 10 free messages this session — chat history isn't saved in preview.