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जमानत

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Quick recall · 272 cards

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PYQ · 2008 Tap to reveal →
भारत में कितने उच्च न्यायालयों का क्षेत्राधिकार एक से अधिक राज्य (संघ क्षेत्र शामिल नहीं) पर है?
B · (ख) 3
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भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत हर राज्य में एक उच्च न्यायालय होना चाहिए?
A · अनुच्छेद 214
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उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति कौन करता है?
A · राष्ट्रपति
PYQ · 2020 Tap to reveal →
वर्तमान में भारत में कितने उच्च न्यायालय हैं? (सितंबर 2020 तक)
B · 25
वर्तमान में सितंबर 2020 तक भारत में 25 उच्च न्यायालय हैं। तेलंगाना और आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय 2019 में नवगठित हुए। इसलिए सही विकल्प B है।[1]
PYQ · 2022 Tap to reveal →
सत्र न्यायालय की स्थापना का प्रावधान कौन से धारा में किया गया है?
D · धारा 9
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प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया किस धारा के अधीन वर्णित है?
B · धारा 154, दंड प्रक्रिया संहिता
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पुलिस किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है तो उसे अधिकतम कितने घंटे तक अभिरक्षा में रख सकती है बिना मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किए? (A) 12 घंटे (B) 24 घंटे (C) 48 घंटे (D) 72 घंटे
B · 24 घंटे
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सीआरपीसी की धारा 436(1) के अनुसार, जमानती अपराध के मामले में अभियुक्त को जमानत का क्या अधिकार प्राप्त है?
B · जमानत अधिकार है और विवेक का प्रयोग नहीं किया जा सकता
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अपराध का कौन-सा वर्गीकरण दंड प्रक्रिया संहिता के तहत आता है?
D · (d) All of the above
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सीआरपीसी की धारा 438 के अधीन अग्रिम जमानत किस प्रकार के अपराधों के लिए दी जा सकती है?
B · केवल गैर-जमानती अपराधों के लिए
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सीआरपीसी की धारा 437A का उद्देश्य क्या है?
B · अभियुक्त को अगली अपीलीय अदालत के समक्ष उपस्थित होने के लिए जमानत बंधपत्र निष्पादित करने के लिए
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दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 2(w) के अनुसार, समन-मामला क्या है?
B · अपराध से संबंधित मामला, न कि वारंट-मामला
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समन मामले वे कौन से मामले हैं?
A · जिनमें अधिकतम 2 वर्ष की जेल की सजा हो सकती है
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मजिस्ट्रेट द्वारा समन मामलों की सुनवाई के संबंध में CrPC की कौन सी धाराओं में प्रावधान निर्धारित हैं?
A · धारा 251 से 259
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यदि वारंट मामले के विचारण में मजिस्ट्रेट अभियोजन के साक्ष्य को अपर्याप्त मान लेता है, तो वह क्या करेगा?
A · आरोपी को बरी कर देगा
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भारतीय में उच्च न्यायालय (High Court) के न्यायाधीशों की नियुक्ति कौन करता है? (Refer to the diagram showing न्यायालयों के न्यायाधीश नियुक्ति प्रक्रम) लेबल्स: राज्यप्रमुख, मुख्य न्यायाधीश, राज्य सरकार
A · राज्यप्रधान
भारतीय संविधान के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यप्रमुख द्वारा की जाती है।
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जिला न्यायालय की भूमिका क्या है? (Refer to the diagram below showing न्यायालयों के संगठन) लेबल्स: जिला न्यायालय, सत्र न्यायालय, प्रारंभिक श्रेणी न्यायालय
A · अपराधों की सुनवाई और अपील
जिला न्यायालय मुख्य रूप से न्यायिक क्षेत्र में अपराध मामलोँ की सुनवाई एवं अपील करने का कार्य करता है।
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न्यायाधीश की नियुक्ति में कौन सा कारक सबसे महत्वपूर्ण होता है? (Refer to the process flow diagram of न्यायाधीश नियुक्ति) लेबल्स: योग्यता, अनुशासन, उम्र, पात्रता मापदंड
A · योग्यता
न्यायाधीशों की नियुक्ति में सर्वोच्च प्राथमिकता गुणवत्ता योग्यताओं को होती हैं, जिससे कानूनी शिक्षा और नैतिकता सुनिश्चित होती है।
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न्यायालयों के कार्यप्रणाली के संदरभ में आपीली का कौन सा विकल्प सही है? (Refer to the hierarchical appellate structure diagram) लेबल्स: उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, निचली अदालत, आपीली
A · निचली अदालत से जिला न्यायालय में अपील
सामान्यतः अपील की प्राथमिकता निचली अदालत से जिला न्यायालय और फिर उच्च न्यायालय तक जाती है।
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नीचे दिए गए विकल्पों में से कौन सा उच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार नहीं है? (Refer to the labeled map diagram of न्यायालय क्षेत्राधिकार) लेबल्स: राज्य, केंद््रशासित क्षेत्र, क्षेत्राधिकार सीमा
D · राष्ट्रीय न्यायालय क्षेत्राधिकार
राष्ट्रीय स्तर पर उच्च न्यायालय क्षेत्राधिकार रखता है; राष्ट्रीय न्यायालयों का क्षेत्राधिकार न्यायालय स्तर से अलग होता है।
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न्यायालयों के प्रशासन में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका क्या होती है? (Refer to the organizational chart of न्यायालय प्रशासन) लेबल्स: मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश, प्रशासन, न्यायालय संगठन
A · न्यायालय के प्रशासन और कर्मचारियों का प्रबंधन
मुख्य न्यायाधीश की प्राथमिक जिम्मेदारी न्यायालय के संगठन प्रबंधन और कार्य संगठन को सही दिशा में संचालित करना है।
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न्यायालयों के संगठन में कौन सा न्यायालय अपराजय की सुनवाई का अंतिम स्तर है? (Refer to the hierarchy diagram) लेबल्स: स्तर न्यायालय, जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय, सर्वोच्च न्यायालय
A · सर्वोच्च न्यायालय
सर्वोच्च न्यायालय भारत में अपराजय और अंतिम मामलाों के लिए अंतिम न्यायिक अधिकारी रहता है।
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न्यायालयों की संरचना प्रणाली के संदरभ में कौन सा विकल्प सही है? (Refer to the संरचना diagram) लेबल्स: न्यायाधीश, न्यायालय, प्रशासनिक अधिकारी, केस जानकारी
A · न्यायाधीश से न्यायालय तक केस की सूचना भेजना
न्यायालयों में केस की सूचना मुख्य रूप से न्यायाधीश से न्यायालय के अन्य विभागों तक संचालित की जाती है।
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न्यायालयों के प्रकरण में कार्यवाहक का वितरण किसके होते हैं? (कार्यक्षेत्र वितरण चार्ट देखें) लेबल्स: उच्च न्यायालय, जिला न्यायालय, लगभग अदालत, न्यायदेशन
A · काम अधिकारियों का समय विभाजन और कुशल प्रबंधन
न्यायालयी प्रणाली में कार्यवाहक का स्पष्ट एवम् प्रभावी वितरण सुनिश्चित करता है कि न्याय प्रक्रिया सही एवं शीघ्र हो।
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साक्ष्य विधि संहिता, 1973 के अंतर्गत, निम्नलिखित में से किस न्यायालय को वारंट-मुकदमे की मूल न्यायक्षेत्र प्राप्त है?
B · प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
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दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, सेशन न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट न्यायालयों के बीच संबंध को कौन-सी व्याख्या सही दर्शाती है?
B · मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सेशन न्यायाधीश के नियंत्रण में प्रशासनिक कार्य करता है।
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दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय सम्मन-प्रकरणों को आज्ञात करने का अधिकार रखता है?
B · सभी वर्गों के मजिस्ट्रेट जिनमें कार्यकारी मजिस्ट्रेट भी शामिल हैं
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दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय तीन वर्ष से अधिक की कारावास की सज़ा लगाने में सक्षम नहीं है?
C · द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट
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दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय केवल सेशन कोर्ट द्वारा आज्ञात होने योग्य प्रकरणों को आज्ञात करने में सक्षम है?
C · जिला न्यायाधीश सेशन न्यायाधीश के रूप में कार्यरत
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आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुसार, जब एक क्षेत्र में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुपस्थित होते हैं, तो किस अधिकारी द्वारा अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों की देखरेख की जाती है?
B · जिला मजिस्ट्रेट पर्यवेक्षण करते हैं
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अपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय उसके समक्ष दर्ज मामले को दूसरे न्यायालय को स्थानांतरित कर सकता है?
C · सेशन्स न्यायालय और विधि द्वारा अधिकार प्राप्त मजिस्ट्रेट दोनों
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अपराध प्रक्रिया संहिता के तहत 'द्वितीय श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट' की स्थिति का सर्वोत्तम वर्णन कौन-सा है?
C · सीमित दंड लगाने के अधिकार के साथ सम्बोधित मामलों की सुनवाई करते हैं
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अपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 10 के अंतर्गत, उस जिले में जहाँ सेशन्स न्यायाधीश और जिला मजिस्ट्रेट दोनों मौजूद हों, निम्नलिखित में से कौन मजिस्ट्रेट नियुक्त नहीं कर सकता?
C · सेशन्स न्यायाधीश अपनी मर्जी से
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अपराध प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, निम्नलिखित में से किस मजिस्ट्रेट को आपातकालीन मामलों में उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के बिना खोज वारंट जारी करने का अधिकार प्राप्त है?
D · जिला मजिस्ट्रेट (कार्यकारी मजिस्ट्रेट) भी
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सीआरपीसी के अनुसार, क्या मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अधीनस्थ मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित मामले को सत्र न्यायाधीश की अनुमति के बिना स्थानांतरित कर सकते हैं?
B · नहीं, स्थानांतरण के लिए सत्र न्यायाधीश की पूर्व सहमति आवश्यक है
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सीआरपीसी के तहत मृत्युदंड योग्य अपराधों की सुनवाई का विशेष अधिकार किस न्यायाधिकरण को प्राप्त है?
D · सत्र न्यायाधीश जो सत्र न्यायालय की न्यायक्षमता का प्रयोग करता है
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सीआरपीसी के तहत 'कार्यकारी मजिस्ट्रेट' से तात्पर्य उस मजिस्ट्रेट से है जो:
C · सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और रोकथाम संबंधी शक्तियों का प्रयोग करता है
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सीआरपीसी के तहत कौन-सा न्यायालय संक्षिप्त सुनवाई करने का अधिकार रखता है?
A · राज्य सरकार द्वारा विशेष अधिकार प्राप्त प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
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सीआरपीसी के अंतर्गत आपराधिक न्यायालयों की श्रेणी में, प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के आदेशों के विरुद्ध तत्काल अपीलीय न्यायालय कौन-सा है?
A · सत्र न्यायालय
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कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के अन्तर्गत 'सुमन्स मामलों के निपटारे के लिए अधिकृत मजिस्ट्रेट' के रूप में कौन-सा मजिस्ट्रेट कार्य कर सकता है?
A · किसी भी वर्ग का मजिस्ट्रेट जब तक विशेष रूप से उसे बाहर न रखा गया हो
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सेशन्स न्यायाधीश को समान ही जिला न्यायाधीश के रूप में भी नियुक्त किया जाता है। कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के अनुसार, सेशन्स न्यायाधीश तब मामलों का परीक्षण करता है जब:
A · परीक्षण सेशन्स न्यायालय के क्षेत्राधिकार में हो जबकि वे जिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हों
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सत्र न्यायालय की किस विशेषता का उल्लंघन CrPC में किया गया है?
B · सत्र न्यायालय गम्भीर अपराधों की सुनवाई करता है
CrPC में सत्र न्यायालय की मुख्य विशेषता यह है कि यह गम्भीर अपराधों की सुनवाई करता है।
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सत्र न्यायालय का कฏेत्राधिकारी किसके द्वारā नियुक्त होता है?
C · उच्च न्यायालय
CrPC के अनुसार सत्र न्यायालय का क़ेत्राधिकारी उच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त किया जाता है।
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सत्र न्यायालय की संरचना में निम्नलिखित में से कौन शामिल नहीं है?
D · ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट
CrPC में सत्र न्यायालय की संरचना में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट शामिल नहीं होता।
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सत्र न्यायालय में प्रिक्रिया एवँ कार्य विधि के संबन्ध में कौन सी कथन सही है?
C · सत्र न्यायालय में अभियोजन पक्ष का होना आवश्यक है
सत्र न्यायालय में अभियोजन पक्ष का होना आवश्यक होता है क्योंकि यह अपराधियों के मामलों की सुनवाई करता है।
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सत्र न्यायालय में अपील की सुनवाई के लिए निम्न में से क्या आवश्यक है?
C · नीचे के न्यायालय का निर्णय होना
सत्र न्यायालय में अपील तभी सुनवाई के लिए स्वीकार्य होती है जब नीचे अदालत का निर्णय हो।
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सत्र न्यायालय की विशेҫ श Kitchens म हरिवालय में से निम्न में से कौन सी श Kitchens शamil है?
B · सत्र न्यायालय मृत्युुदंड का आदेश देने का सक्षम है
CrPC के अनुसार सत्र न्यायालय को मृत्युुदंड देने का अधिकार है।
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सत्र न्यायालय की स्थापना के संबंध में सही कथन चुनें।
A · सत्र न्यायालय राजय सरकार द्वारा स्थापित होते हैं
CrPC के अनुसार सत्र न्यायालय की स्थापना राजय सरकार के अधीनियं द्वारा होती है।
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सत्र न्यायालय की न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत निम्न में से कौन सी प्रक्रिया शामिल है?
D · सभी उपर्युक्त
सत्र न्यायालय की प्रक्रिया में प्रारंभिक जांच, साक्ष्य की समीक्षा तथा कानूनी समीक्षा सभी शामिल हैं।
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सत्र न्यायालय का कार्यभार किस प्रकार निर्धारित होता है?
B · उच्च न्यायालय के आदेश से
सत्र न्यायालय का कार्यभार उच्च न्यायालय द्वारा CrPC के नियमों के अनुसार निर्धारित होता है।
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सत्र न्यायालय की स्थापना के लिए कौन सा प्रावधान लागू होता है?
C · कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसेजर
सत्र न्यायालय की स्थापना और कार्यवाही के लिए कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसेजर (CrPC) लागू होता है।
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सत्र न्यायालय की विशिष्ट शक्तियों को सीमित कर सकता है?
C · उच्च न्यायालय
उच्च न्यायालय सत्र न्यायालय की शक्तियों को सीमित या व्यावस्थित कर सकता है।
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सत्र न्यायालय की कार्यवाही का उद्देश क्या है?
B · गंभीर अपराधों का न्यायपूर्ण निवारण
सत्र न्यायालय का मुख्य उद्देश गंभीर अपराधों का न्यायपूर्ण निपटारा करना है।
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सत्र न्यायालय कौन-से अपराधों की सुनवाई करता है?
B · केवल दंडनीय अपराध जिनमें 7 वर्ष से अधिक सजा हो
सत्र न्यायालय समान्यत: दंडनीय अपराधों को देखता है जिनमें सात वर्ष या उससे अधिक की सजा का प्रविधान होता है।
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न्यायालय के संदरभ में, स्त्रि‍य न्यायालय की स्थापना किस कानून के तहत की जाती है?
Refer to the diagram below which summarizes विभिन्न न्यायालयों की स्थापना के स्रोत।
A · दंड प्रक्रिया संहिता, 1973
स्त्रि न्यायालय की स्थापना दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 के तहत होती है, जो अधिदेशनात्मक और न्यायिक प्रक्रिया को निर्दिष्ट करता है।
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स्त्रि न्यायालय के न्यायाधिकार की न्युक्ति का अधिकारी किस पास होता है?
Refer to the diagram below illustrating नियुक्ति प्रक्रिया।
लेबल: 'न्यायाधिकार नियुक्ति', 'राज्य सरकार', 'संसद', 'राष्ट्रपति'।
C · राष्ट्रपति
स्त्रि न्यायालय के न्यायाधिकारों की नियुक्ति द्वार राष्ट्रपति की जाती है, जो संविधानिक प्राधिकारों के तहत आता है।
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सदर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत मामलों में से किस प्रकार की है? Refer to the diagram below जो विभिन्न मामलों को वर्गीकृत करता है। लेबल: 'कार्यभाव', 'संपत्ति न्याय', 'तकनीकी जाँच', 'प्रशासनिक बाघाओं'।
A · प्रशासनिक और संघटन संबंधी
सदर न्यायालय को समाने आने वाली प्रमुख मामलों प्रशासनिक और संघटन संबंधी होती हैं, जैसे कार्यभाव एवं उचित संघटनओं का अभ्यास।
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सदर न्यायालय में नीयुक्त न्यायाधिशों का कार्यकाल किस प्रकार निर्धारित होता है? Refer to the diagram below depicting कार्यकाल और नीयुक्ति। लेबल्स: 'नीयुक्ति तिथि', 'सेवानिवृत्ति आयु', 'नियुक्ति का कार्यकाल'।
B · सेवानिवृत्ति आयु तक या उसी दिनाने तक
सदर न्यायालय के न्यायाधिश अपनों सेवानिवृत्ति आयु तक कार्यरत रहते हैं या वे स्वतंत्र रूप से उसी दिन तक कार्य करते हैं।
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सदर न्यायालय की नियुक्ति में निर्मलिकित में से किस प्रकार की सुवनवाई की जाती है? Refer to diagram below detailing नियुक्ति प्रक्रम। लेबल्स: 'मुखदमे की सुवनवाई', 'आपील', 'साक्ष्य प्रस्तुत', 'मुल्जिम की तसदीक'।
A · गवाहों के बयान और सबूतों की जांच
सदर न्यायालय में मुखय रूप से गवाहों के बयान और सबूतों की जांच करके न्याय निरूपण प्रदान किया जाता है।
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सत्र न्यायालय की स्थापना किस उद्देश्य से की जाती है?
B · गंभीर अपराधों की सुनवाई के लिए जो सजा में कठोर यातनावास तक की सजा का प्रावधान रखता हैं
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सत्र न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति की योग्यता क्या है?
B · कोई भी व्यक्ति जो अधिकृत है और कम से कम दस वर्ष से अधिकृत के रूप में कार्यरत है
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सत्र न्यायालय में अभियोजन की प्राथमिक किस प्रकार होती है?
D · अधिक्ता या राजय सरकारी की ओर से अभियोजन किया जाता है
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सत्र न्यायालय के समक्ष पुलिस द्वारा आरोप पत्र (Charge-sheet) प्रस्तुत करने की अन्तिम समय सीमा क्या निर्धारत करता है?
A · धारा 167 CrPC के अनुसार 90 दिन
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यदि सत्र न्यायालय में पेश की गई प्राथमिक पत्रों पर प्रमाणिकरण (Authenticity) पर विवाद हो, तो वह स्थिति कैसी मानी जाएगी?
C · साक्ष्य अधीनस्थ साक्ष्य माना जाएगा और जाँच की आवश्यकता होगी
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सत््ठर न्यायालय में 'मुल्जिम कोjamanत मिलने का अधिकारियों' किस प्राधिकारी के तहत नियामित होता है?
C · धारा 437 CrPC के तहत
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सत््ठर न्यायालय का अधिकारी क्षेत्र कौन सा है जब अपराध पर स्थायी न्यायालय पर आरोप होता है, लेकिन मामलो नाबालिग का हो?
B · बच्च्चो की अदालत (Juvenile Justice Board) ही अधिकारी है
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सत््ठर न्यायालय के न्यायाधिक द्वारा दी गई आदेश पर अपील (Appeal) कब तक दायर किया जा सकता है?
A · 30 दिनों के अंदर
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सत््ठर न्यायालय की समीक्षा करने की शक्ति किस प्राधिकारी में नहीं है?
D · सत््ठर न्यायालय को नहीं है
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सत््ठर न्यायालय में अपराध के लिए प्रार्थनात्मक जाँच का अधिकारी किसे कहते हैं?
A · पूलिस को, जब तक कि न्यायालय जाँच की अनुमति न दे
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सत्र न्यायालय किस प्रकार के मामलोँ में अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकता है?
B · सत्र न्यायालय अपने अधीन के कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही कर सकता है
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सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियुक्त को नया सबूत प्रस्तुत करने का अधिकार कब तक होता है?
A · सहीं प्रकरण के अधीन अब भी प्रस्तुत कर सकता है
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सत्र न्यायालय में एक न्यायाधीश के अलावा अन्य न्यायालय किस स्थिति में गठित किया जाता है?
B · विशेष रूप से संकीर्ण मामलों के लिए, दूसरे न्यायालय की अनुमति से
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सत्र न्यायालय में मुकदमा चलाने हेतु आरोप पत्र (Charge) किस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है?
B · अदालत के आदेश पर प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद प्रस्तुत किया जाता है
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सत्र न्यायालय के निर्णय को परीक्षण कराने के लिए कौन अधारोपर पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर की जाती है?
D · सत्र न्यायालय के फैसलों के विरुद्ध पुनर्विचार की अनुमति नहीं है
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जब सत्र न्यायालय में सुनवाई के दौरान अभियुक्त का साक्ष्य बिगड़ता है, तो अदालत किस प्रकार कार्रवाई कर सकती है?
A · अदालत सुनवाई स्थगित कर सकती है, यदि चिह्नितकीय प्रमाण अवश्य है
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सत्र न्यायालय की कार्यवाही में न्यायाधीश को किन मामलो में तिथि निरधारण करने का अधिकार है?
B · सभी प्रार्थमिक एवं अंतिम तिथियों के निर्धारण के लिए
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सत्र न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा सुनवाई के दौरान साक्ष्य अधिक मान गया परन्तु बाद में वह प्रमाणित हुआ, तो क्या होगा?
B · साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन आवश्‍यक होगा
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सत्र न्यायालय के समक्ष किसी दोषी को फांसी की सजा देने के संदर्भ में कौन सा प्राधिकारी अनुपम्ति देता है?
C · राज्य सरकार की अनुपम्ति आवश्यक है
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मजिस्ट्रेट न्यायालय की प्रतिभाशा क्या है? Refer to the diagram below detailing मजिस्ट्रेट न्यायालय की प्रतिभाशा और स्वरूप, जिसके अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों और अधिकार दर्शाए गए हैं।
A · एक ऐसा न्यायालय जो अपऱाधों की प्रथम सुनवाई करता है
मजिस्ट्रेट न्यायालय वह स्थानीय न्यायालय होता है जो प्रथम श्रेणी अपऱाधिक अपऱाधिक और सिविल मामलों की प्रारण्भिक सुनवाई करता है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्रकारों में से कौन-सा न्यायालय प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के अंतर्गत आता है? Refer to the diagram below जिसमें मजिस्ट्रेट न्यायालय के विभिन्न प्रकारों और उनके अधिकारों को दर्शाया गया है।
D · सहायक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट में सहायक प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट आते हैं, जो कुछ विशेष मामलों में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के अधिकार से कार्य करते हैं।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय के किस अधिकारी का अन्तर्गत प्रभाव क्षेत्र को कवर करता है? Refer to the diagram depicting मजिस्ट्रेट न्यायालय के अधिकारियों और उनके क्षेत्राधिकार।
B · जिला मजिस्ट्रेट
जिला मजिस्ट्रेट का क्षेत्राधिकारी प्रभाव क्षेत्र होता है, जहाँ वह अपऱाधों की सुनवाई और प्रशासनिक कार्य करता है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय की शक्तियों और सीमाओं में से कौन-सी शक्ति मजिस्ट्रेट के पास नहीं होती? Refer to the diagram illustrating मजिस्ट्रेट की शक्तियॉं और सीमाओं के अनुरूप।
B · मृत व्यक्ति का दोष निर्nय देना
मजिस्ट्रेट मृत व्यक्ति के विरुद्ध दोष नहीं दे सकता क्योंकि मृत व्यक्ति के खिलाफ मुकदमै चलाना न्यायसंगत नहीं होता।
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आपराधिक प्रक्रिया में मजिस्ट्रेट की भूमिका क्या होती है? Refer to the diagram जो आपराधिक प्रक्रिया में मजिस्ट्रेट के विशिष्ट कार्यों को दर्शाता है।
B · मामलों की त्वरित जांच और दोषियों के विरुद्ध आदेश जारी करना
मजिस्ट्रेट अपऱाध का प्रारण्भिक परीक्षण करता है, जांच कर आदेश जारी करता है जिससे न्यायालय में त्वरित और प्रभावी होती है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय के निर्देशन न्यायिक अधिकारी किस अधिकारी के द्वारान निर्देशित होते हैं?\
Refer to the diagram below जिसमें मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्रमुख एवं अधिकारी दिखाए गए हैं।
B · कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973
मजिस्ट्रेट न्यायालयों के प्रमुख, अधिकारी और कार्यभार कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973 के तहत निर्धारित किया गया है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय के किस प्रकार के न्यायालय का क्षेत्राधिकार सिरमिट अधिकारियों के मामलों तक होता है?\
Refer to the diagram which classifies मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्रकार और उनके क्षेत्राधिकार।
B · द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट न्यायालय
द्वितीय श्रेणी मजिस्ट्रेट केवल सीमित, छोटे अपराधिक मामलों की सुनवाई करते हैं, जिनका दंड सीमित होता है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय की न्यायिक शक्तियों में से कौन-सी शक्ति होती है?\
Refer to the diagram highlighting मजिस्ट्रेट न्यायालय की न्यायिक शक्तियाँ।
B · साक्ष्य को समन जारी करना
मजिस्ट्रेट न्यायालय साक्ष्यों को समन जारी कर उनसे पुष्टि करता है, जो न्यायिक शक्तियों का भाग है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय की कार्यप्रवाहिक शक्तियों में से कौन-सी शक्ति शामिल है?\
Refer to the diagram depicting मजिस्ट्रेट न्यायालय के कार्यप्रवाहिक अधिकार।
C · उचित आदेश और निर्धारण देना
मजिस्ट्रेट उचित आदेश और निर्णय देकर प्रशासनिक और पुजिल कार्यों का संचालन करता है, जो कार्यप्रवाहिक शक्ति है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय की सीमाओं में से कौन-सी सीमा सही है?\
Refer to the diagram explaining मजिस्ट्रेट न्यायालय की सीमा और अधिकार।
B · केवल अपने निरधारित न्यायालय क्षेत्र में ही कार्य
मजिस्ट्रेट न्यायालय केवल क्षेत्राधिकार के अनुसार कार्य करता है; अन्यथा उसका अधिकार नहीं होता।
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मजिस्ट्रेट न्यायकाय के प्रतिम परिस्थिति मजिस्ट्रेट का दंडात्मक अधिकारी क्या है? Refer to the diagram which lists मजिस्ट्रेट के दंडात्मक अधिकारी और सीमा।
B · दंडात्मक कार्यवाही के लिए तीन वर्ष तक की सजा देना
प्रतिम परिस्थिति मजिस्ट्रेट तीन वर्ष तक की कारावास और जुर्माना लगा सकते हैं, जो अधिकांश दंडात्मक सीमाएँ हैं।
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मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधिक कौन-सी प्रक्रमिय शामील नहीं होती? Refer to the diagram showing मजिस्ट्रेट न्यायकाय की प्रक्रमिय।
D · राश्टर्पति के आदेश पर काम करना
राष्ट्रपति के आदेश सीमा रज्जित मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधीन नहीं होते, जबकि अन्य सभी प्रक्रमिय मजिस्ट्रेट के अधिकारी क्षेत्रों में होती हैं।
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मजिस्ट्रेट न्यायकाय में कौन-सा अधिकारी आपराधी मामलें का अंन्तिम निर्णय देता है? Refer to the diagram illustrating मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधिकारी और निर्णय क्षमत।
D · सत्र न्यायकाय का न्यायकाधिकारी
सत्र न्यायकाय का न्यायकाधिकारी आपराधी मामलों का अंतिम निर्णय देने का अधिकारी रहता है, जबकि मजिस्ट्रेट केवल प्रारंभिक या सीमित दायरे में निर्णय देते हैं।
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मजिस्ट्रेट न्यायकाय के किस प्राकार की न्यायकिय सत्ता विस्तृत होती है? Refer to the diagram of मजिस्ट्रेट न्यायकाय के प्रकार और उनके न्यायिक अधिकारी।
B · प्रथम परिस्थिति मजिस्ट्रेट
प्रथम परिस्थिति मजिस्ट्रेट की न्यायिक सत्ता दूसरे व्यापक होती है एवं व्यापक न्यायालय के मामलों का निर्णय देते हैं।
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मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधिकारी क्षेत्रों में कौन-सा प्राधान शामील है? Refer to the diagram showing मजिस्ट्रेट न्यायकाय के अधिकारी क्षेत्रों।
C · सामान्य दंडनीय अपरोधों की प्राथमिक एवं सुनवाई करना
मजिस्ट्रेट सामान्य दंडनीय अपरोधों की प्राथमिक रूप से करते हैं और उनका दोन्ष फैसला निर्णय करते हैं।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय में अपराधिक प्रक्रम के संदर्भ में कौन्-सी कार्यवाही हो सकती है?
C · जाँच करना या सुनवाई करना
मजिस्ट्रेट अपराधिक मामले में जाँच करता है, प्रदर्शन एकत्र करता है और सुनवाई कर निर्णय देता है।
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मजिस्ट्रेट की शक्तियों में कौन्-सी शक्ति नहीं आती?
D · राष्ट्रीय नीत निर्दहित करना
राष्ट्रीय नीति निर्धारण मजिस्ट्रेट की शक्तियोंक्षेत्र में नहीं आता; वह न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी होते हैं।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय किस प्रकार के मामलों में शमीयत प्रदान कर सकता है?
D · कोई भी अपराध जिसकोज़ामनत पुलिस लगाऊ हो
मजिस्ट्रेट न्यायालय उस अपराध में शमीयत या ज़मानत प्रदान करता है, जहाँ कानून द्वारा उसे अधिकार प्राप्त हो।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय के प्राधिकारी की न्युक्ति कौन् करती है?
A · राज्य सरकार
मजिस्ट्रेट न्यायालय के अधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार के द्वारा की जाती है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय में किस प्रकार के मामलों की जांची जाती है?
C · अपराधिक और सिविल दोनों मामलों में
मजिस्ट्रेट न्यायालय अपराधिक और सिविल दोनों प्रकार के मामलों को सुनवाई करता है, पर निश्चित विधिक सीमाओं में।
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मजिस्ट्रेट न्यायलय के अधिकारी का उल्लंघन करने पर कौन सा प्रावधान लागू होता है? Refer to the diagram depicting मजिस्ट्रेट न्यायलय के अधिकारी और उल्लंघन के प्रकार।
C · सजा और दंडात्मक कार्यवाही
मजिस्ट्रेट के अधिकारियों के उल्लंघन पर दंडात्मक कार्यवाही की जा सकती है, जिससे न्यायिक प्रणाली की मर्यादा बनी रहती है।
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मजिस्ट्रेट न्यायलय के किस अधिकारी को विशेष कार्यम्यता दी जाती है? Refer to the diagram that lists मजिस्ट्रेट न्यायलय के अधिकारियों को दी गई विशेष कार्यम्यता।
C · विशेष मजिस्ट्रेट
विशेष मजिस्ट्रेटों को कुछ प्रस्तुतियों में अतिरिक्त अधिकारी और शक्तियाँ दी गई हैं जो अन्य मजिस्ट्रेटों के पास नहीं होती।
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मजिस्ट्रेट न्यायलय की कार्यवाही का मुख्य उद्देश्य क्या है? Refer to the diagram summarizing मजिस्ट्रेट न्यायलय की कार्यप्रणाली और उद्देश्य।
A · सामाजिक शान्ति बनाए रखना
मजिस्ट्रेट न्यायलय का मुख्य उद्देश्य सामाजिक शान्ति बनाए रखना तथा न्याय का त्वरित वितरण सुनिश्चित करना है।
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मजिस्ट्रेट न्यायलय की प्रकर के आधारों की जाँच करता है? Refer to the diagram indicating मजिस्ट्रेट न्यायलय की जाँच प्रकिया।
D · सामान्य और छूटे अपराधों की प्राथमिकी जाँच
मजिस्ट्रेट सामान्य और मामूली अपराधों की प्राथमिकी जाँच करता है और उसमें न्यायिक कार्यवाही तय करता है।
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मजिस्ट्रेट न्यायलय के प्रथमिक कार्य कौन करता है? Refer to the diagram explaining मजिस्ट्रेट न्यायलय के प्रथमिक कार्य।
B · जिला मजिस्ट्रेट
जिला मजिस्ट्रेट मजिस्ट्रेट न्यायलय के प्रथमिक कार्यों का समन्वय करते हैं।
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मजिस्ट्री न्यायालय के प्रभारी में आने वाले मामलो के लिए कौन-सी प्राधिकारी दी जाती है? Refer to the diagram showing मजिस्ट्री न्यायालय की प्राधिकारी।
A · आप्राधिक मामलो
मजिस्ट्री आम तौर पर आप्राधिक मामलो को प्राधिकारी देते हैं तथा सानुसारिक सुरक्षा बनी रहती है।
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मजिस्ट्री न्यायालय की शक्तियों सीमित क्यों होती हैं? Refer to the diagram illustrating मजिस्ट्री न्यायालय की शक्तियों और सीमाओं का कारण।
A · न्यायपालिकामें संपूर्ण बनाये रखने के लिए
मजिस्ट्री की शक्तियां सीमित होती हैं ताकि प्रशासन और न्यायपालिका में संपूर्ण कायम रहे।
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मजिस्ट्री न्यायालय में अवधि तय करने का अधिकार किसके पास होता है? Refer to the diagram showing मजिस्ट्री न्यायालय के कार्यकाल और अवधि।
A · राज्य सर्कार
मजिस्ट्री की नियुक्ति और कार्यकाल राज्य सर्कार द्वारा नियत किया जाता है।
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मजिस्ट्री न्यायालय के अधिकारकर्ताओं अधिकारों का कौं-सा प्रकार नहीं आता? Refer to the diagram outlining मजिस्ट्री न्यायालय के अधिकारियों के अधिकार।
D · उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करना
उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करना मजिस्ट्री के अधिकार में नहीं आता; यह पक्क्षकार या वकील करते हैं।
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मजिस्ट्री न्यायालय के प्राधिकारी और न्यायिक कर्मी की नियुक्ति के लिए कौन-सा योग्यता आवश्यक है? Refer to the diagram listing मजिस्ट्री न्यायालय के प्राधिकारी पदों पर नियुक्ति योग्यता।
B · कानून में स्नातक होना आवश्यक है
मजिस्ट्री पदों के लिए कानून में डिग्री और संबंधित योग्यता अनिवार्य होती है।
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सत्र न्यायालय और मजिस्ट्रेट न्यायालय में क्या फर्क होता है? Refer to the diagram comparing मजिस्ट्रेट और सत्र न्यायालय के अधिकारी।
B · सत्र न्यायालय गुन्हों के अपरााधों की सुनवाई करता है
सत्र न्यायालय गुन्ही अपरााध मामलो की सुनवाई करता है जबकि मजिस्ट्रेट केवल प्रार्थमिक या सीमित मामलों का निपटारा करता है।
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निम्नलिखित में से किस प्राधिकारी के अंतर्गत न्यायालय का क्षेत्राधिकार निश्चित होता है?\
Refer to the diagram below for विविधान्य न्यायालयों के क्षेत्राधिकार और प्रलिखा के विवराण के बारे में।
A · क्रिमिनल प्रकोष्ठ संहिता की धारा 11
क्रिमिनल प्रकोष्ठ संहिता की धारा 11 में न्यायालय न्यायालयों के क्षेत्राधिकार का निर्धारण किया गया है।
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निम्न में से कौन सा न्यायालय न्यायालय प्रथम श्रेणी का न्यायालय नहीं होता?\
Refer to the diagram जिसमें न्यायालयों के प्रकार दर्शाए गये हैं (प्रथम श्रेणी, द्वितीय श्रेणी)।
C · द्वितीय श्रेणी का न्यायालय
द्वितीय श्रेणी का न्यायालय प्रथम श्रेणी के अधिकारियों वाला नहीं होता।
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न्यायालय न्यायालय का अधीकार क्षेत्र निर्धारण करते समय निम्नलिखित में से कौन सा तत्व मुख्यपृष्ठ नहीं माना जाता?\
Refer to the diagram illustrating विविधान्य कारक जो क्षेत्राधिकार निर्धारण में आते हैं।
C · मामला दर्ज होने की तारीख
मामला दर्ज होने की तारीख क्षेत्राधिकार निर्धारण का तत्व नहीं है, जबकि अन्य सभी मुख्य तत्व होते हैं।
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न्यायालयिक सुरक्षा के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा न्यायालय न्यायालय अधीकार नहीं रखता?\
Refer to the diagram showing न्यायालय के दंड देने की सीमा और श्रेणियाँ।
B · द्वितीय श्रेणी का न्यायालय
द्वितीय श्रेणी का न्यायालय अधिकारम 1 वर्ष तक कारावास का अधिकार रखता है, जो प्रथम श्रेणी से कम है।
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न्यायालय न्यायालयों में न्यायाधीश की नियुक्ति किस प्राधिकारी द्वारा की जाती है?\
Refer to the diagram below जिसमें विविधान्य न्यायालयों के न्यायाधीश की नियुक्ति के अधिकारी दिए गये हैं।
A · राज्य सरकार
न्यायालय के न्यायाधीश की नियुक्ति सधान्यतः राज्य सरकार करती है।
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मजिस्टेªट न्यायालय के प्रथमिक श्रेणी के अधिकारों में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं है? Refer to the diagram below जिसमें प्रथमिक और द्वितीय श्रेणी के मजिस्ट्रेटों के अधिकार तुलनात्मक रूप से दर्शाए गए हैं।
B · धारा 144 लागू करना
धारा 144 लागू करने का अधिकार विशेष मजिस्ट्रेट या अन्य प्राधिकारी का होता है, प्रथमिक श्रेणी के मजिस्ट्रेट स्वतंत्र रूप से नहीं करता।
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मजिस्टेªट न्यायालय में 'विशेष मजिस्ट्रेट' किस प्रकार के मामलों को देखते हैं? Refer to the diagram which categorizes विभिन्न मजिस्ट्रेटों के न्याय क्षेत्र के अनुसार।
A · खास मामलोँ और सीमित अपराधों को
विशेष मजिस्ट्रेट सीमा या विशेष अपराधों जैसे सदकों पर बिक्री, सार्वजनिक शांति आदि के मामलोँ देखते हैं।
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मजिस्टेªट न्यायालय के क्षेत्राधिकारी में "अपराध का स्थान" के अलावा और कौन-सा कारक प्रमुख है? Refer to the diagram listing various jurisdictional factors.
B · अपराध की घटनास्थल
अपराध की घटनास्थल क्षेत्राधिकारी निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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मजिस्टेªट न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में किस गतिवि¹धि से एक मामला स्तर न्यायालय को भेजा जाता है? Refer to the diagram below showing मजिस्टेªट से स्तर न्यायालय तक के प्रकरण।
A · अपराध की गंभीरता बढ़ने पर
जटिल और गंभीर अपराधों के मामलों को मजिस्टेªट से स्तर न्यायालय भेजा जाता है।
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मजिस्टेªट न्यायालय की अनुसन्धान में "अधिकार क्षेत्र" का मुख्य उद्देश्य क्या है? Refer to the diagram illustrating मजिस्टेªट के क्षेत्राधिकारी कारक के मुख्य उद्देश्यों।
A · मामलों का न्यायसंगत और न्यायिक निर्णय
अधिकार क्षेत्र का प्रमुख उद्देश्य विशिष्ट मामलोँ का न्यायसंगत निर्णय करना है।
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मजिस्ट्रेट न्यायालय के कारण-सी प्रक्रमिय शासनमिल नहीं होती है? Refer to the diagram showing मजिस्ट्रेट न्यायालय की समान्य प्रक्रमिया।
C · अदालत के बाहर सजा देना
सजा के व्यक्तिगत न्यायालयों के अंदर ही दी जाती है, अदालत के बाहर सजा देने का प्रक्रमिया के विरुद्ध है।
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आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत समन प्रकरण की जांच करने के लिए कौन सा मजिस्ट्रेट सक्षम होता है?
B · प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
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आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 29 के अंतर्गत, किस मजिस्ट्रेट के पास मृत्यु दंड या आजीवन कारावास से दंडनीय गंभीर अपराधों को छोड़कर संज्ञानात्मक अपराध में जमानत देने का अधिकार होता है?
B · प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
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आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत, पुलिस रिपोर्ट पर दर्ज प्रकरण की सामान्यतः जांच कौन सा मजिस्ट्रेट करता है?
C · प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
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आपराधिक प्रक्रिया संहिता के अनुसार, मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत का अध्यक्ष कौन होगा?
B · धारा 16 के तहत केंद्रीय सरकार द्वारा नियुक्त मजिस्ट्रेट
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यदि द्वितीय श्रेणी का मजिस्ट्रेट कोई शिकायत प्राप्त करता है और उसे लगता है कि अपराध केवल प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र में आता है, तो उसे क्या करना चाहिए—
C · धारा 192 के अनुसार शिकायत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या अन्य प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को भेजे
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को किन मामलों की सुनवाई का अधिकार प्राप्त होता है?​
D · वे मामले जिनकी सुनवाई हाई कोर्ट द्वारा उसे सौंपे गए हों
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सीआरपीसी के अंतर्गत खोज वारंट जारी करने का अधिकार किस मजिस्ट्रेट को प्राप्त है?
B · केवल महानगरीय मजिस्ट्रेट और प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट
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सीआरपीसी के अंतर्गत द्वितीय श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट को मामले की सुनवाई का कौन सा अधिकार है?
B · वे किसी भी समनात्मक मामले की सुनवाई कर सकते हैं, सजा अवधि छह महीने से अधिक न हो
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महानगरीय क्षेत्र में पुलिस रिपोर्ट के आधार पर अपराध की जाँच करने का अधिकार किस मजिस्ट्रेट को प्राप्त है?
C · महानगरीय मजिस्ट्रेट
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सीआरपीसी के तहत किसी अन्य मजिस्ट्रेट द्वारा प्रदान की गई जमानत को कौन सा मजिस्ट्रेट रद्द कर सकता है?
B · मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या उच्चाधिकार प्राप्त मजिस्ट्रेट
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द्वितीय श्रेणी के न्यायिक न्यायाधीश के समक्ष शिकायत प्रकरण प्रस्तुत किया गया है। वह अपराध किस स्थिति में परीक्षणीय नहीं होगा—
B · अपराध केवल प्रथम श्रेणी के न्यायाधीश या अन्य न्यायालय के समक्ष परीक्षणीय हो
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धारा 320 के अंतर्गत अपराध को कौन-सा न्यायाधीश समझौता कर सकता है?
C · दोनों प्रथम और द्वितीय श्रेणी के न्यायिक न्यायाधीश, जैसा कानून द्वारा प्रावधानित हो
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धारा 156(3) के अंतर्गत किस न्यायाधीश को जांच आदेश देने का अधिकार है?
A · कोई भी न्यायिक न्यायाधीश
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वह न्यायाधीश जो तीन वर्ष तक की कैद वाले अपराध का परीक्षण करने में सक्षम है, क्या कर सकता है?
A · आरोपी को समन जारी कर, केस का परीक्षण कर, और तीन वर्ष तक की कैद का दंड दे सकता है
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किस न्यायाधीश को बिना सरकार या प्राधिकारी की पूर्व मंजूरी के अपराध का संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है?
A · कार्यकारी न्यायाधीश
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अपर मजिस्ट्रेटों द्वारा सुनाए गए दण्ड को किस मजिस्ट्रेट के पास माफ करने या परिवर्तित करने का अधिकार है?
B · मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट
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धारा 202 CrPC के अंतर्गत प्रारंभिक जांच कौन-सा मजिस्ट्रेट कर सकता है?
B · प्रथम और दूसरे श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट
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FIR का पूर्ण रूप क्या है? Refer to the concept of FIR का अर्थ और महत्त्व।
A · First Information Report
FIR का पूरा नाम First Information Report होता है जो अपराध की प्राथमिकी सूचना होती है।
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FIR दर्ज करने का मुख्य उद्देश्य क्या है? Refer to FIR दर्ज करने की प्रक्रिया।
A · अपराध की सूचना को विधिक रूप देना
FIR दर्ज कराने का उद्देश्य अपराध की सूचना को आधिकारिक थाना कनूनरी रिकॉर्ड के रूप में दर्ज कराना होता है।
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FIR कब दर्ज की जाती है? Refer to FIR दर्ज करने की प्राथमिक प्रक्रिया।
A · जब कोई अपराध गम्भीरता से रिपोर्ट किया गया हो
FIR तभी दर्ज की जाती है जब किसी अपराध की सूचना पुलिस को दी जाती है, जो गम्भीरता से ली जाती है।
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FIR में शामिल नहीं होता है कौन सा विवरण? Refer to FIR से संबन्धित कानूनी प्रावधान।
C · अपराधी का दोष निर्धारण
FIR में अपराधी के दोष का निर्धारण नहीं किया जाता, यह केवल सूचना होती है। दोष प्रमाणित न्यायलय में होता है।
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FIR के बाद पुलिस का कार्य क्या होता है? Refer to FIR के बाद की कार्यवाही।
A · तत्काल जांच शुरू करना
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस का कार्य होता है कि वह तत्काल जांच करके तथ्यों की पुष्टि करे।
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FIR के संक्षंध में न्यायालय की भूमिका क्या है? Refer to FIR से संबंधित न्यायिक प्रकरण।
A · FIR को रिकार्ड के रूप में स्वीकारा कर जाना का आधार बनाती है
न्यायालय FIR को प्रारंभिक प्रमाण मानकर आँगे की कार्यवाही के लिए इसतेमाल करती है।
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FIR किस प्रकार की शिकारत पर दर्ज नहीं की जाती? Refer to FIR के दायरे और सीमाएँ।
A · जहाँ शिकारत अस्त्य या भ्र्रामक हो
यदि शिकारत अस्त्य या भ्र्रामक पाई जाती है तो FIR दर्ज नहीं की जाती।
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FIR में प्रार्काशन की आवश्यकता किसके लिए होती है? Refer to FIR में शामिल जानकारियाँ एवं प्रार्काशन।
A · FIR की प्रति पुलिस व अभियोजन पक्ष को देने के लिए
FIR की प्रति पुलिस को जाँच और अभियोजन के लिए दी जाती है, जिससे सुनिश्चित कार्यवाही हो सके।
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FIR पर रोक लगाने का निर्णय कौन ले सकता है? Refer to FIR पर रोक के सम्बन्ध में।
A · न्यायालय ही FIR पर रोक लगा सकता है
FIR पर रोक केवल न्यायालय के आदेश से लगाई जा सकती है, अन्य किसी को इसे रोकने का अधिकार नहीं है।
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FIR संबन्धी सूचनाओं को दर्ज करने में कौन प्राथमिक भूमिका निभाता है? Refer to FIR में शामिल जानकारियाँ एवं प्रार्काशन।
A · पुलिस अधिकारी
FIR पुलिस अधिकारी ही दर्ज करता है, जो सूचना प्राप्त करता है और अभियोजन का आधार बनाता है।
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FIR दर्ज कराने के लिए किस प्रकार की सूचना आवश्यक होती है?\
FIR दर्ज कराने की आवश्यकता।
A · अपरा ध के होने की ताजा और स्ट्रिक जानकारी
FIR तब ही दर्ज़ की जाती है जब पुलिस के पास अपराध के बारे में ताजा और स्पष्ट जानकारी हो।
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FIR दर्ज करने के लिए कौन से पुलिस अधिकारी के पास जाना आवश्यक है? Refer to the diagram illustrating 'प्रभावी अधिकारी' और 'थाना पुलिस' के बीच संबंध।
A · FIR दर्ज करने के लिए थाना प्रभार‌ी के पास जाना चाहिए
FIR के पंजीकरण के लिए थाना प्रभार‌ी या उससे ऊपर के अधिकारी के पास जाना आवश्यक होता है।
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FIR को दर्ज करने के बाद पुलिस द्वारा क्या कार्य प्रारंभ किया जाता है? Refer to the diagram showing ‘FIR दर्ज’ होने के बाद की प्रक्रिया।
A · पुलिस मामले की जांच शुरू करती है
FIR दर्ज करने के बाद पुलिस प्राधिकारी के रूप में जांच प्रारंभ करती है।
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FIR दर्ज करते हुए किस प्रक्रिया की शिकार्यत आवश्यक होती है? Refer to the diagram indicating शिकार्यत के प्राकर।
A · संपूर्ण प्रारंभिक सूचना पुलिस में अपराध का विवरण होता
FIR में अपराध की पूरी और स्पष्ट प्रारंभिक सूचना पुलिस स्टेशन में दी जाती है जिससे जांच शुरू की जाती है।
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FIR में कौन-से शामिल अंकड़े आवश्यक होते हैं? Refer to the diagram listing FIR में आवश्यक जानकारी।
A · शिकायतकर्ता का नाम, अपरा ध का विवरण, समय, और स्थान
FIR में शिकायतकर्ता, अपराध की विस्तृत से सूचना, घटना का समय व स्थान लिखित रूप में होना आवश्यक है।
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FIR के दौरान पुलिस द्वारा किस प्रकार की कार्रवाई अनिवार्य रूप से की जाती है? Refer to the diagram depicting FIR एवं पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई।
A · तत्काल प्रारम्भिक दर्ज करना और जांच शुरू करना
पुलिस FIR दर्ज करती ही तत्काल प्रारम्भिक दर्ज कर जांच की प्रक्रिया प्रारम्भ करती है।
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किस परिस्थिति में FIR दर्ज करना आवश्यक नहीं माना जाता? Refer to the diagram outlining FIR के अपवाद।
A · जब शिकायतकर्ता बिना तथ्यों जानकारी जारी कारवाई के केवल झूठी शिकायत करे
बिना तथ्यों जानकारी साक्ष्य या झूठी शिकायत होने पर FIR दर्ज करना आवश्यक नहीं होता।
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FIR में पुलिस द्वारा की जाने वाली प्रारंभिक कार्रवाई कौन-सी है? Refer to the diagram showing 'FIR के बाद पुलिस कार्य'।
A · फरियादी से पुष्टि, साक्ष्य एकत्र करना और रिपोर्ट बनाना
FIR के बाद पुलिस जांच के तहत शिकायतकर्ता से पुष्टि, साक्ष्य संग्रह और रिपोर्ट बनाती है।
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FIR का दर्ज होना किसकी ज़िम्मेदारी होती है? नीचे दिये गए डायग्राम में दिखाये गए अनुसार FIR दर्ज करने सामय कौन-सी जिम्मेदारी होती है।
A · थाना प्रभारि या संम्बंधित पुलिस अधिकारी
FIR दर्ज करने की जिम्मेदारी थाना प्रभारि या संम्बंधित पुलिस अधिकारी की होती है, जो शिकायत को लेकर में दर्ज करता है।
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FIR में आरोपित का सम्बन्ध या स्थान कहाँ दर्ज करना आवश्यक है? Refer to the diagram explaining FIR की प्रासंगिकता।
A · ताकि पकड़पुर्न दावों को रोकाजा सके और मामूली की जाँच स्टिक हो
संबन्ध एवं स्थान दर्ज करने से जाँच में स्पष्टता रहती है और गलत सूचनाओं से बचाव होता है।
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गिरफ़्तारी की प्रक्रिया में निम्नलिखित में से कौन सबसे महत्वपूर्ण आधार होता है?
A · शक की वस्तुनिष्ठता और ठोस प्रमाण
गिरफ़्तारी के लिए शक का होना अनिवार्य है, लेकिन वह शक ठोस प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए। केवल पुलिस के संदेह या बिना जांच सूचना पर आधारित प्राथमिकी दर्ज करना उचित नहीं होता।
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भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के अनुसार, गिरफ़्तारी करने सम्यक् पुलिस अधिकारी को किसका अधिकारी होना चाहिए?
A · मुकदमा दर्ज करना और आरोपी को गिरफ़्तार करना
CrPC के तहत पुलिस अधिकारी को आरोपी को प्ररमाणित होने पर मुकदमा दर्ज करने और आवश्यकतानुसार गिरफ़्तारी करने का अधिकार होता है।
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गिरफ़्तारी के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सही है?
C · गिरफ़्तारी में प्रमाण और नियम CrPC में निर्दिष्ट हैं
CrPC में गिरफ़्तारी के नियम और प्रत्रिबंध स्पष्ट रूप से दिए गए हैं, जिससे मानमानी गिरफ़्तारी को रोका जा सके।
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गिरफ़्तारी के बाद पुलिस अधिकारी को accused के संबंध में क्या कार्य करने होते हैं?
C · तुरंत आरोपी को अदालत में पेश करना ज़रूरी है
गिरफ़्तारी के बाद पुलिस अधिकारी को तुरंत सम्यक् में न्यायलय के सामने प्रस्तुत करना पड़ता है।
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गिरफ़्तारी के संबंध में न्यायलय के अधिकारी क्या होते हैं?
A · गिरफ़्तारी पर रोक लगाए या प्रमाणित दैन करे
न्यायलय हिरासत की वैधता पर रोक लगाता है या आरोपी को प्रमाणित दैन करता है।
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CrPC के तहत गिरफ़्तारी के दौरान कौं-से आधिकार आरोपी को प्राप्त होते हैं?
A · वकील से संपर्क करने का अधिकार और गिरफ़्तारी के कारण जानने का अधिकार
अधिकारक को गिरफ़्तारी के समय वकील से संपर्क करने और गिरफ़्तारी के कारण जानने का अधिकार होता है।
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गिरफ़्तारी के लिए न्यायद्वारा जारी वारंट कब आवश्यक होता है?
A · जब आरोप को पकड़ने में कठिनाई हो
वारंट तभी आवश्यक होता है जब आरोप पकड़ में न आए या गिरफ़्तारी में कठिनाई हो। सादारण मामलों में पुलिस बिना वारंट किए गिरफ़तारी कर सकती है।
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गिरफ़्तारी के दौरान पुलिस द्वारा से कौं-सी प्रक्रिया अनिवार्य रूप से करनी होती है?
A · गिरफ़्तारी का लिखित विवरण तैयार करना
पुलिस को गिरफ़्तारी गतिविधि का लिखित विवरण तैयार कर उसे उचित समय में न्यायालय में प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है।
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गिरफ़्तारी के संबंध में कौन-सा कथन CrPC के तहत सही है?
A · गिरफ़्तारी बिना कोई संदेह के भी की जा सकती है
गिरफ़्तारी के लिए उचित संदेह आवश्यक है, बिना संदेह गिरफ्तारी गैरकानूनी है। बाक़ी विकल्प सही नहीं हैं।
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गिरफ़्तारी के दायरे में 'रिट अनुसन्धान' किसे कहा जाता है?
A · पुलिस का बिना वारंट गिरफ़्तारी करना
'रिट अनुसन्धान' का अर्थ पुलिस द्वारा बिना वारंट या आदेश के गिरफ़्तारी करना होता है, जो कुछ मामलों में CrPC द्वारा अनुमति प्राप्त है।
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गिरफ्तारी और जाँच के संबंध में निम्नलिखित में से सही कौन सा है?
A · गिरफ्तारी के बाद जाँच प्रारंभिक रूप से होती है
गिरफ्तारी के बाद जाँच होती है, लेकिन कोई-कभी पूर्ण रूप से प्रारंभ होने पर गिरफ्तारी पहले भी करनी पड़ती है।
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गिरीफ़्तारी के दौरान आरूपी के निम्नलिखित में से कौन से अधिकार होते हैं? Refer to the diagram below which shows PURCHASE और गिरीफ़्तारी के दौरान आरूपी। इसमें वकील से मिलने और मौन रखने के अधिकार शामिल हैं।
B · मौन रहने का अधिकार और वकील से मिलने का अधिकार
आरूपी को PURCHASE या गिरीफ़्तारी के दौरान मौन रहने का अधिकार है और वह स्वयं के बचाव में वकील से मिल सकता है।
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गिरीफ़्तारी के बाद आरंभिक जांच का उद्देश्य क्या होता है? Refer to the diagram below illustrating गिरीफ़्तारी आरूपी की प्रारम्भिक जांच प्रक्रिया। इसमें विशेष जांच चरण और उनका महत्व दर्शाया गया है।
B · साक्ष्यों को सुरक्षित करना और आरूपी की पुष्टि करना
आरंभिक जांच का उद्देश्य साक्ष्यों को सुरक्षित करना, आरूपी की पुष्टि करना और_AFTER_ की कानूनी कार्रवाई के लिए थॉस आधार बनाना है।
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निम्नलिखित में से कौन-सा न्यायालय गिरीफ़्तारी के संबंध में अन्तिम कार्रवाई करता है? Refer to the diagram below showing न्यायालय के प्रकि‍या औरunki भूमिका। इसमें प्रम्-दृष्टि न्यायालय भी दर्शाया गया है।
B · स्तर न्यायालय
स्तर न्यायालय गिरीफ़्तारी के मामले में अन्तिम और निर्णायक कार्रवाई करता है, जहाँ apparatus की गम्भीरता के अनुसार सुचिता होती है।
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गिरफ्तारी के प्रकारों में से "नमूना गिरफ्तारी" किस परिस्थिति को दर्शाती है? Refer to the diagram below which categorizes गिरफ्तारी के प्रकार। इसमें प्रकाशन एवं स्रोत की दृष्टि से गिरफ्तारी के उदहारण दिए गए हैं।
A · एक बार की औपचारिक गिरफ्तारी जिसमें बाद गिरफ्तारी कथम हो जाती है
नमूना गिरफ्तारी एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति को एक बार औपचारिक रूप से गिरफ्तारी किया जाता है, फिर उसे छोड़ दिया जाता है। यह एक प्रकार की जाँच के लिए की जाती है।
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गिरफ्तारी एवं हिरासत के दौरान निम्न में से कौन-सी शर्तें अनिवार्य नहीं होतीं? Refer to the diagram below which outlines गिरफ्तारी एवं हिरासत के नियम। इसमें नियमों की सूची दी हुई है।
A · आरॉपी को जेल में रखना अवश्यक है
गिरफ्तारी के दौरान आरॉपी को जेल में रखना आवश्यक नहीं है; न्यायद या अन्य प्राधिकारी की अनुमति से ही हिरासत का स्थान तय होता है।
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गिरफ्तारी का canonical प्रावधान भारतीय कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर की किस धारा में विस्तारित है? Refer to the diagram below listing विधि धाराओं और उनके विषय। इसमें गिरफ्तारी संबंधित धाराएँ हैं।
A · धारा 41 से 60
धारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41 से 60 तक गिरफ्तारी और उससे संबंधित नियमों का विस्तार दिया गया है।
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धारा 41 के तहत गिरफ्तारी के अधिकार निम्न में से किस अपरा्ध के लिए अधिकृत किया गया है? Refer to the diagram below listing अपराध के अनुसार गिरफ्तारी की अनुमति।
A · गैर-जमानती अपराध
धारा 41 के तहत बिना वारंट के गिरफ्तारी का अधिकार गैर-जमानती अपराधों में दिया गया है क्योंकि ये अपराध कानूनी द्वारा गंभीर माने जाते हैं।
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तलाशी की प्रक्रिया एवं उद्देश्यों के संदर्भ में, तलाशी का मुख्य उद्देश्य क्या है?\
नीचे दिए गए चित्र में तलाशी की प्रक्रिया दर्शाई गई है।\
सभी लेबल, मापक और नोटेशन प्रदर्शित हैं।
A · अपरोध संबंधी प्रमाणों की खोज करना
तलाशी का प्राथमिक उद्देश्य अपरााध से संबंधित सबूतों, वस्तुओं, और शिकार वस्तु को खोज कर न्यायिक जांच के लिए सुरक्षित करना है।
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तलाशी के प्रकारों में से, निम्न में से कौन सा तलाशी का प्रकार नहीं है?\
नीचे दिए गए चित्र में तलाशी के विभिन्न प्रकार दर्शाए गए हैं।
D · गुप्त निगरानी तलाशी
गुप्त निगरानी तलाशी तलाशी के प्रकार में शामिल नहीं होती; यह निगरानी विधि है। तलाशी के प्रकार में शारीरिक, मकान व वाहन तलाशी मुख्य हैं।
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तलाशी के लिए न्यायिक अनुमति कब आवश्यक होती है?\
नीचे दिए गए चित्र में तलाशी की लिए न्यायिक अनुमति दर्शाई गई है।
A · जब तलाशी घर या बैंक स्थल में की जाती है
न्यायालय की अनुमति खासकर तब आवश्यक होती है जब तलाशी किसी सरकारी स्थल या बैंक स्थल पर की जाती है, अन्य मामलो में पुलिस के पास समान्य अधिकार होते हैं।
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तलाशी के अधिकारी के संदर्भ में, पुलिस को तलाशी करने का अधिकार कब प्राप्त होता है?\
नीचे दिए गए चित्र में तलाशी के अधिकार के प्रकार सफल दर्शाए गए हैं।
C · सामान्य पुलिस अधिकारी के अधिकार पर
पुलिस को सामान्य पुलिस अधिकारियों के तहत आदेश मिलने पर तलाशी करने का अधिकार होता है, जबकि वाणिज्यिक अधिकारियों का दुरुपयोग नहीं करते।
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तलाशी में अवधि के कारणों में से निम्नलिखित में कौन सा कारण शामिल नहीं है?\
नीचे दिए गए चित्र में अवधि के संबंधित कारण दिखाए गए हैं।
D · अपरोध द्वाराः तलाशी का विरोध करना
अपरोध द्वाराः तलाशी का विरोध अवधि के कारण नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों और विधिक प्रक्रिया के पालन न करने कारण है।
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तलाशी में अवैध साक्ष्यों का प्रमाण क्या होता है? Refer to the diagram below जो अवैध साक्ष्यों के प्रमाण को दर्शाता है।
C · साक्ष्य को मुकदमें में अस्वीकार्य माना जाता है
अवैध तरीके से प्राप्त साक्ष्य को भारतीय न्यायदिक प्रक्रिया में आमतौर पर मुकदमें में स्वीकार नहीं किया जाता, क्योंकि यह नियमों का उल्लंघन होता है।
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तलाशी करने वाले को कौन-कौन सेागजत स्लॉट रखनें होते हैं? Refer to the diagram below जिसमें तलाशी के लिए आवश्य कागजात सूचीबद्ध हैं।
A · तलाशी वारंट और पहलाच पत्र
तलाशी वारंट और पुलिस अधिकारियों के पहलाच पत्र तलाशी के समय आवश्यक होते हैं ताकि तलाशी वारंट और प्रमाणित हो सके।
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न्यायालय की अनुमति के बिना तलाशी के दौरान कौन सी क्रिया अवैध मानी जाती है? Refer to the diagram below दर्शाया गया है तलाशी के दौरान अवैध क्रियाएं।
B · साक्ष्य का नष्ट करना
साक्ष्य का नष्ट करना बिना अनुमति या उचित प्रमाण के अवैध माना जाता है जबकि साक्ष्य जब्ती और गवाह बुलाने का कानूननी है।
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तलाशी की दक्षताSlाहदता क्या होती है? Refer to the diagram below गाँव तलासी की दक्षताSlाहदता का प्रतिनिधित्व किया गया है।
A · एक अधिकारी जो तलाशी में सहयोग करता है
दक्षताSlाहदता वह अधिकारी होता है जो तलाशी के दौरान अधिकारियों को तकनीकी या प्रशासनिक सहायता प्रदान करता है।
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तलाशी के दौरान संदिग्ध दोषों की पहचान कैसे जाती है? Refer to the diagram below जहाँ तलाशी में संदिग्ध दोषों के चारण दिखाए गए हैं।
A · तलाशी के रिकॉर्ड का निरीक्षण कर
तलाशी के दौरान हुए संदिग्ध दोष तलाशी रिकॉर्ड और प्रक्रियाओं के निरीक्षण से पहचाने जाते हैं ताकि कागजी कार्यवाही सही हो।
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तलाशी से संबंधित विरोधाभासों का निदान किसके द्वारा किया जाता है? Refer to the diagram below जो तलाशी से संबंधित विवाद समाधान की प्रक्रिया दर्शाता है।
C · न्यायालय
तलाशी विवादों का अंतिम निदान न्यायालय द्वारा किया जाता है जो विधिक दृष्टि से उच्चतर निम्न प्राथमिकता प्रदान करता है।
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तलाशी प्रक्रिया के दौरान पुलिस को कौन सा प्रावधान सबसे अधिक पालन करना होता है? Refer to the diagram below जिसमें तलाशी के सार्वभौमिक चरण दिखाए गए हैं।
A · कानून का पालन करना
तलाशी प्रक्रिया के दौरान कानून का सख्ती से पालन करना आवश्यक है तथा तलाशी वैध और न्यायसंगत हो सके।
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तलाशी में ग्राहक व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा में क्या शामील है? Refer to the diagram below जिसमें तलाशी और ग्राहक व्यक्तियों के अधिकार सूचीबद्ध हैं।
A · वकील से बात करने का अधिकार
ग्राहक व्यक्तियों को अपने वकील से संपर्क करने का अधिकार होता है, जो कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
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तलाशी के प्रारंभिक सबूतों की जांच में किसका याogeneratedमुख्य अधिकार होता है? Refer to the diagram below जो प्रारंभिक जांच प्रक्रिया को दिखाता है।
A · स्थानीय पुलिस अधिकारी
स्थानीय पुलिस अधिकारी प्रारंभिक सबूतों की जांच में अग्रणी भूमिका निभाते हैं, जो आगे की जांच का आधार बनती है।
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तलाशी के समय जब कोई व्यक्ति तलाशी से विरोध करता है, तो इस स्थिति में ताना प्रक्रिया को क्या करना चाहिए? \( \)
Refer to the diagram below showing तलाशी के दौरान विभिन्न परिस्थतियों एवं ताना प्रक्रिया की कार्यवाहियाँ।
B · उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए उचित अधिकारी को सूचित करना
जब तलाशी के दौरान विरोध किया जाता है तो उचित है कि ताना प्रक्रिया उचित अधिकारियों को सूचित करे और कानूनी के अनुसार कार्यवाही करे।
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तलाशी की अवधि निर्धारि करने वाला मुख्य आधार क्या होता है? \( \)
Refer to the diagram below indicating तलाशी के अवधि होने के मुख्य कारण और प्रमाण।
A · तलाशी आदेश की उपस्थिति
तलाशी अवधि होने का मुख्य आधार है उपस्थिति जो उचित तलाशी आदेश हो। व्यक्ति की असहमति या पूरीस की इच्छा तलाशी के अवधि होने का आधार नहीं है।
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भारतीय कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर के अनुसार, किसी प्राधिकारी के पास तलाशी जारी करने का अधिकार किस आधार पर होता है? \( \)
निम्नलिखित विकल्पों में से सही विकल्प चुनिये।
A · जिले के पुलिस अधिकारी
तलाशी आदेश जारी करने का अधिकार अधिकतर जिले के पुलिस अधिकारी या न्यायालय को प्राप्त होता है, लेकिन सड़क पुलिस अधिकारी अशा आधार तलाशी जारी नही कर सकते।
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निम्न में से तलाशी के दौरान किसी प्राधिकारी के समान की जांच की अनुमति नहीं होती? \( \)
Refer to the diagram below detailing तलाशी के दौरान किये जाने वाले जांच के प्रकार।
C · अधिकृत स्थान की तलाशी
अधिकृत स्थानों की तलाशी बिना उचित आदेश के नहीं की जानी चाहिए, जबकि शरीर की वस्तुएं, गिरफ्तारी के दौरान कोट की जेब और वाहन के डिब्बा तलाशी के दौरान में आते हैं।
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तलाशी के दौरान यदि कोई अवैध सामान मिला तो पुलिस को क्या करना चाहिए? ( )
नीचे दिए चित्र में तलाशी की कार्रवाइयाँ दर्शाई गई हैं।
A · सामान को कब्जे में लेकर रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए
अवैध सामान मिलने पर पुलिस को उसे कब्जे में लेना होता है तथा उसे रिपोर्ट बनाकर आगे न्यायालय में प्रस्तुत करना होता है।
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तलाशी के आदेश में कौल-कौल से विचारण होना अवश्यक है? ( )
नीचे दी गई तस्वीर में तलाशी के आदेश के आवश्यक्ताएँ दर्शाई गई हैं।
D · उपर्युक्त सभी
तलाशी आदेश में स्थान, तारीख, अधिकारी के नाम व हस्ताक्षर तथा संबद्ध कानून प्राधिकारी का उल्लेख होना अवश्यक है। तकि आदेश और आदेश वाहक माना जाए।
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तलाशी के कौल से प्रकरण के लिए अधाल्त का आदेशावश्यक नहीं होता? ( )
निम्न विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए।
C · आपातकालीन परिस्थितियों में तलाशी
आपातकालीन स्थिति में यदि अपराध हो रहा हो या वही होने वाला हो तो बिना वारंट के तलाशी की अनुमति होती है। अन्य स्थिति मामलो में आदेश अधाल्त का आदेश आवश्यक होता है।
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तलाशी पर किस प्रकरण का प्रमाण पत्र जारी किया जाता है? ( )
नीचे दी गई तस्वीर में तलाशी के बाद जारी किए गए दस्तावेज़ दर्शाए गए हैं।
C · तलाशी रसीद
तलाशी के बाद तलाशी रसीद जारी की जाती है, जिसमें जैन व्यक्तियों को कब्जे में लिया गया, उनकी जानकारी सम्मिलित होती है।
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तलाशी प्राधिकारी का उल्लंघन करने पर क्या canonical प्रभार होता है? ( )
निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए।
A · तलाशी अवैध मानी जाएगी और साक्ष्य अस्वीकार किए जाएंगे
अवैध तलाशी के कारण प्रमाण तथा साक्ष्य अस्वीकार किए जाते हैं और यह canonical प्रकरण का उल्लंघन माना जाता है।
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तलाशी के समय पुलिस के निम्नलिखित कौन से अधिकार होते हैं? \( \)
Refer to the diagram below explaining विशेष अधिकार तलाशी के दौरान।
D · उपर्युक्त सभी
तलाशी प्रक्रिया में पुलिस को प्रत्येक की, स्थान की तलाशी लेने तथा अवैध या संभावना वस्तुओं को जब्त करने का अधिकार होता है।
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पुलिस द्वारावाहन तलाशी के लिए अधीकृत व्यक्ति कौन होता है? \( \)
C · यातायात पुलिस अधिकारी
वाहन की तलाशी यातायात पुलिस अधिकारी द्वारातकृत या नियम अनुसार की जा सकती है। वाहन मालिक या सामान्य व्यक्ति की यह अनुमति नहीं होती।
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तलाशी के संबंध में 'विवेचक' का क्या कार्य है? \( \)
निम्नलिखित विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
B · तलाशी में उपस्थित रहना और साक्ष्य सुनिश्चित करना
विवेचक तलाशी में उपस्थित होकर साक्ष्य की सुरक्षा, विवरण लेना और विधिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करता है।
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तलाशी के लिए वारंट लेने में निम्नलिखित किस तथ्य का उल्लंघन अनिवार्य है? \( \)
D · उपर्युक्त सभी
तलाशी वारंट में स्थान, उद्देश्य और अधिकारी का उल्लंघन अनिवार्य होता है ताकि वारंट वैध एवं प्रभावी हो सके।
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तलाशी के समय निम्न में से कौन-सा कार्‍य निषिद्ध है? \( \)
C · व्यक्ति की बिना वारंट के फोर्र्सफुल तलाशी लेना
बिना वारंट और नियम अनुसार फोरसफुल यानी जल्दीजबरदस्ती से व्यक्ति की तलाशी लेना असंवैधानिक और निषिद्ध है।
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तलाशी के समय पुलिस अधिकारी को किससे अनुमति लेनी चाहिए? \( \)
B · अधिकृत न्यायालय
तलाशी आदेश हेतु सामान्यत: अधिकृत न्यायालय का अनुमति आदेश आवश्यक माना जाता है।
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तलाशी के लिए प्रयुक्त प्रमाण में क्या शामिल होता है? \( \)
D · उपरुक्त सभी
तलाशी के लिए प्रयुक्त प्रमाण में सभी विवरण शामिल होते हैं, जैसे खोजी प्रक्रिया, संबंधित परिचरधरी और न्यायिक जांच में सहायता मिलती है।
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तलाशी के संबन्ध में 'वस्तु जब्ती' का आदेश किसे प्राप्‍त होता है? \( \)
A · पुलिस अधिकारी
तलाशी के दौरान पुलिस अधिकारी को अवैध या साक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण वस्तुएं को जब्ती करने का आदेश प्राप्त होता है।
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तलाशी के समय वाहनों की तलाशी के लिए किन परिस्थितियों में अनुमति आवश्यक नहीं होती? \( \)
C · आपातकालीन स्थिति में जब आपकी अपरा ध हो रहा हो
आपातकालीन स्थिति स्पष्ट अपराध होते समय बिना अनुमति सम्यक्‍त न्यायालय के बिना वाहन तलाशी की जा सकती है।
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तलाशी के कानून में "सूचना" शब्द का क्या अर्थ होता है? \( \)
B · किसी व्यक्ति की शिकायत या सूचना
सूचना का अर्थ होता है कि किसी व्यक्ति से मिली कोइ शिकायत या सूचना जो तलाशी के लिए आधार हो सकती है।
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निम्नलिखित में से जमात की प्रिक्रिया से संबन्धित क्र्या सही है? संदर्भ के लिए ध्यान दें, जमात गृहफतारी के बाद आरोपि को अस्थायी स्वतंत्रता प्रदान करने की व्यवस्था है।
B · जमात की अनुमित न्यायतालय द्वारा दिया है जो मामले का निर्णय कर रहा हो
जमात की अनुमित उस न्यायतालय से ही प्राथमीक होती है जो मामले का निर्णय कर रहा हो; थाना स्तर या अन्य अधिकारियों का अधिकार नहीं होता।
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जमात के प्रयोज़न के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? जमात का मूल उद्देश्य आरोपि को गिरफतारी किये जाने के बाद अस्थायी स्वतंत्रता प्रदान करना है।
C · न्यायतालय की प्रिक्रिया में सहयोग बढ़ाना
जमात का उद्देश्य आरोपि को अस्थायी स्वतंत्रता देकर न्यायतालय की प्रिक्रिया में सहयोग बढ़ाना और निश्चय न्यायतालय निर्णय सुनिश्चित करना है।
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जमात के प्रकाकर निम्नलिखित में से कौन-से होते हैं? सही विकल्प चुनें:
C · प्रि-आरेस्ट जमात और पोस्ट-आरेस्ट जमात
जमात, मुख्यतः: प्रि-आरेस्ट (गिर्फ़तारी से पहले) और पोस्ट-आरेस्ट (गिर्फ़तारी के बाद) के रूप में दी जाती है, जो प्रिक्रिया पर निर्भर करती है।
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जब कोई आरोपी जमात के लिए आवेदक करता है तो निम्नलिखित में से न्यायतालय को क्या विचार करना होता है?
D · इन सभी का न्यायतालय विचार करता है
जमात देते समय न्यायतालय की पहली पर विचार करता है जिसमें अपराध का स्वप्न, साक्ष्य, गवाह, आरोपी के चरित्र व आपराधिक रिकॉर्ड शामिल होता है।
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निम्न में से जमात क्यों और कब निरस्त की जाती है?
D · इन सभी परिस्थितियों में
जमात तब निरस्त की जाती है जब आरोपी मामले में उपस्थित नहीं होता, गवाहों को धमकाता है या अपराधिक में पुनः संलिप्तता करता है।
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जमानत की अवधि अनుమत किस स्थिति में लीय जाती है?
B · जब गिरीफ्तारी से पहले जमानत मांगी जाती है
अग्रिम जमानत गिरीफ्तारी से पहले मांगी जाती है ताकि आरोपि को गिरीफ्तारी के बाद अस्थायी स्वतन्त्रता मिल सके।
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जमानत के प्रकल्प में निम्नलिखित में से क्या आवश्यक नहीं है?
B · गिरीफ्तारी का कारण
गिरीफ्तारी का कारण जमानत प्रकल्प का भाग नहीं है, जबकि जमानतकर्ता की विधिवतनियता, राशि और अधिकारी क्षेत्र अवश्य होते हैं।
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निम्नलिखित में से जमानत के संबंध में सत्य न होकर झूठा कौन सा कथन है?
B · जमानत आवश्य प्रतीय आरोपि को दी जानी चाहिए
हर आरोपि को अनिवार्य रूप से जमानत नहीं दी जानी चाहिए; यह न्यायालय की विवेचना शक्ति पर निर्भर है।
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जमानत की अवधि और निरस्तीकरण का निर्णय किसके द्वारा किया जाता है?
C · न्यायालय द्वारा़
जमानत की अवधि और निरस्तीकरण का निर्णय न्यायालय ही कर सकता है न कि आरोपि या पुलिस।
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निर्वाचित मुक़्तिदाता (जमानतकर्ता) के क्या कर्तव्य हैं?
A · आरोपि की उपस्थिति सुनिश्चित करना़
जमानतकर्ता का मुख्य कर्तव्य आरोपि की न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित कराना होता है, अन्य विकल्प गलत हैं।
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निम्नलिखित में से समन के कौन-से प्रकार होते हैं? Refer to the following विकल्प:
B · मुखदमेबाजी समन, गैऱ-मुकदमेबाजी समन, प्रादेशिक समन
समन के प्रकार होते हैं - मुखदमेबाजी समन, गैर-मुकदमेबाजी समन और प्रादेशिक समन।
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न्यायालय द्वारा समन जारी करने का प्राधिकारी किसे प्रतिपाद होता है? निम्न विकल्पों में से सही विकल्प चुनें।
A · न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट
समन जारी करने का अधिकारी केवल न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के पास होता है जो न्यायालय का हिस्सा होता है।
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समन किस स्थिति में जारी किया जाता है? निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनें।
A · जब अभियुक्त या पक्षक को न्यायालय में उपस्थित होना हो
समन तब जारी किया जाता है जब अभियुक्त या पक्षक को न्यायालय में उपस्थित होने के लिए कहा जाता है।
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न्यायालय के समन की सेवा (service of summons) किस प्रकार से होती है? सही विकल्प चुनें।
A · प्रत्यक्ष हस्तांतरण, डाक द्वारा, अधिसूचना द्वारा
समन की सेवा प्रति्यक्ष तौऱ पर या डाक द्वारा अथवा विज्ञापन आदि माध्यम से की जा सकती है।
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निम्नलिखित में से कौन सा समान का नकलीकरण या दुरुपयोग माना जाता है?
A · समान की पहचान छुपाना या गलत हस्ताक्षर करना
समान का नकलीकरण मतलब इसमें छेड़छाड़ या गलत जानकारी देना जैसे पहचान छुपाना या गलत हस्ताक्षर करना है।
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समान के उल्लंघन के क्या प्रनाम हो सकते हैं? सही विकल्प चुनें।
A · जुर्माना, गिर्फ्तारी, व न्यायालयीय अवमानना
समान का उल्लंघन करने पर न्यायालय जुर्माना लगा सकता है, गिर्फ्तारी कर सकता है और अवमानना का दंड दे सकता है।
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न्यायालय समान जारी करते समय किस प्रकार का पालन करता है? सही विकल्प चुनें।
A · निर्दिष्ट व्यक्‍ति की पहचान, विहित नोटिस, सेवार का प्रमान कराना
समान जारी करने का औपचारिक प्रक्रम होता है जिसमें पहचान, नोटिस देना और सेवा का प्रमान शामिल होता है।
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निम्न में से कौन सा समान जारी करने का सही कारण हो सकता है? Refer to the options.
A · मुकदमे में उपस्थिति होने हेतु पक्षकार को बुलाना
समान जारी करने का मुख्य कारण पक्षकार या गवाह को न्यायालय में उपस्थिति कराना होता है।
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समान की सेवा नहीं होने या असफल होने पर न्यायालय का अगला कदम क्या हो सकता है? सही विकल्प चुनें।
A · पुनः समान जारी करना या वैकल्पिक विहित अपनाना
समान सेवा यदिअसफल हो तो न्यायालय पुनः समान जारी कर सकता है या वैकल्पिक विधि अपना सकता है।
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वारंट की प्राथमिक किस अधिनियम में दी गई है?
B · कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973
वारंट की प्राथमिक कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, 1973 में विस्तारित रूप से दी गई है जिसमें इसका व्यावहारिक अनुप्रयोग सुनिश्चित होता है।
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निम्नलिखित में से कौन वारंट जारी करने का अधिकार रखता है?
B · सिर्फ़ प्रथम श्रेणी के मैजिस्ट्रेट
वारंट जारी करने का अधिकार समान्यत: प्रथम श्रेणी के मैजिस्ट्रेट का होता है, वहीं अपराधी को गिरफ्तारी या तलाशी लेने की अनुमति होती है।
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वारंट जारी करने के लिए कौन-कौन से प्रावधान अनिवार्य हैं?
A · महत्पूर्ण तथ्य, कुछी, गिफ्तगाफ्तारी हेतु आदेश
वारंट जारी करने के लिए महत्त्वपूर्ण तथ्य एवं प्रमाण केन्द्रीत होने चाहिए जो अपराधी की गिरफ्तारी या तलाशी के लिए आवशयक हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सा वारंट का वहत्ता का कारण नहीं है?
D · वारंट में आरोपी का फोटो होना
वारंट की वहत्ता के लिए आरोपी का फोटो आवश्यक नहीं होता; जबकी तारीख, न्यायालय की संज्ञा, और मजिस्ट्रेट का हस्ताक्षर आवश्यक हैं।
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यदि वारंट पर कोइ दोष पाया गया है, तो न्यायालय की कौन-सी कार्रवाई उचित है?
A · वारंट को निरस्त करना या रद्द करना
जब वारंट में विधिक दोष होता है तो न्यायालय उक्त वारंट को निरस्त या रद्द कर सकता है ताकि न्यायिक प्रक्रिया सही ढंग से चल सके।
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वारंट जारी करने के बाद किस प्रकार की कार्रवाई वैध होती है?
A · आरोपी की गिरफ्तारी एवँ तलाशी
वारंट जारी होने के बाद वारंट आरोपी की गिरफ्तारी और तलाशी दोनों हेतु वैध प्रयोग होते हैं तथा अपराध की जांच हो सके।
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किस वारंट को "तलाशी व वारंट" कहा जाता है?
A · जिसमें गिरफ्तारी और तलाशी दोनों की अनुमति हो
तलाशी व वारंट वह होता है जिसमें कोर्ट आरोपी को पकड़ने के साथ-साथ उसके स्थान की तलाशी करने का अधिकार भी देता है।
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वारंट जारी करने के लिए निम्न में से कौन-सा तथय अवश्यक नहीं है?
D · मजिस्ट्रेट की इच्छा
मजिस्ट्रेट की व्यकित्तिगत इच्छा से वारंट जारी नहीं किया जाता, बल्किस कानूनी तथ्य और परिस्थितिगत आधार होते हैं।
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वारंट जारी करने का प्राथमिक किस प्रकृतिव पर्याय है?
A · मौजूद सक्रियताओं और जांच के आधार पर
वारंट जारी करने का प्राथमिक न्यायकियायल मौजूदा सक्रियताओं और जांच की सहयोगी आधार पर निर्भर करता है।
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निम्नलिखित में से वारंट के संबंध में सही कथन कौन सा है?
A · वारंट बिना जांच के कभी जारी नहीं होता
वारंट केवल तब जारी होता है जब न्यायकियायल के पास उचित जांच एवं तथ्य होते हैं, यह बिना जांच के कभी जारी नहीं होता।
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कौन-से मामलोँ में वारंट जारी किया जा सकता है?
A · गंभीर अपराध जिनमें सजाया की संभावना अधिक हो
वारंट प्रायः उन मामलों में जारी होता है जहाँ गंभीर अपराध हुआ हो और गिरफ्तारी की आवश्यकता हो।
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न्यायालय में 'संज्ञान की परिणभाषा' से क्या अभिप्राय है? सदरह के लिए नीचे दिए गए पाठ को देखें।
A · किसी अपराधी यावादी मामले को न्यायालय दिवस सुनवाई के लिए लेना
संज्ञान का अर्थ है न्यायालय द्वाराफैसला किसी अपराध या विवाद की सुनवाई करना और उसे संज्ञान में लेना।Any विकल्‍प प्राथमिक या प्रक्रमात्मक पक्ष पर केंद्रीत हैं।
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निम्न में से कौन 'संज्ञान के प्रकार' में सम्मिलित नहीं है?
C · तहसील संज्ञान
'तहसील संज्ञान' संज्ञान के प्रकार के रूप में मान्य नहीं है जबकि 'स्वयं संज्ञान' या 'अपवाद संज्ञान' संज्ञान के प्रकार हैं। 'आगाहत संज्ञान' शो अपराध संदर्भ में किया जाता है।
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न्यायालय के संज्ञान के अधिकार क्षेत्र पर कौन-सा कथन सही है?
B · किसी अन्य स्थान से भी संज्ञान लिया जा सकता है, यदि विधि में अनुमति हो
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, किसी मामलोें में न्यायालय अपने क्षेत्राधिकार के बाहर भी संज्ञान ले सकता है यदि विधि में इसका प्रावधान हो।
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संज्ञान की प्रक्रिया में निम्न में से कौन-सी क्रिया शामिल नहीं है?
D · फैसला सुनाना
संज्ञान की प्रक्रिया में अपराध का पता लगाना, शिकायत प्रस्तुत करना, गवाहों को तलब करना और मुक़दमा चलाना शामिल होता है। फैसला सुनाना मुकदमा चलाने के बाद आता है, इसलिए संज्ञान की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं।
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स्वयं संज्ञान लेने का अधिकारी न्यायालय को किस प्रावधान के तहत मिलता है?
B · कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर की धारा 190
भारतीय दंड संहिता की धारा 190 न्यायालय को स्वयं संज्ञान लेने का अधिकार प्रदान करती है। अन्य विकल्प संबन्धित नहीं हैं।
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न्यायालय द्वारासंजन लेने के बाद अभियोजन की प्रिक्रिया शुरू होती है। निम्न में से कौन-सा चरण पहले आता है?
C · शिकायत पत्र दर्ज करना
संजन लेने के बाद सबसे पहला कदम होता है शिकायत-पत्र या एफआईआर दर्ज करना जिससे अभियोजन प्रिक्रिया शुरू होती है।
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न्यायालय द्वारासंजन कब लिया जा सकता है?
B · जब न्यायालय को आरोप होने का ठोस संकेत हो
न्यायालय तभी संजन लेता है जब उसे आरोप होने का ठोस संकेत हो, चाहे सूचना किसी से भी प्राप्त हो।
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न्यायालय द्वारास्वयं संजन लेने की शक्ति के संबंध में निम्न में से कौन-सी बात सही नहीं है?
D · यह शक्ति अभियोजन पक्ष को बाधित करने के लिए होती है
स्वयं संजन का उद्देश्य न्यायालय को आरोपों के विरुद्ध तुरन्त कार्रवाई करने देना है, न कि अभियोजन पक्ष को बाधित करना।
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न्यायालय के संजन के प्रकरणों में 'अपवाद संजन' का अर्थ क्या है?
C · विशेष परिस्थितियों में संजन लेना, जो सामान्य प्रिक्रिया के अपेक्षित न हो
अपवाद संजन का तात्पर्य विशेष हालात में संजन लेने से है, जो सामान्य प्रिक्रियाओं के अतिरिक्त होता है।
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कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर के अनुसार अभियोजन के लिए उपयोग में परमाण कोन-सा है?
D · सबूत उपकरण
संजन लेने हेतु न्यायालय शिकायत, गवाहों के बयान एवं तफ्तीश रिपोर्ट सहित किसी भी उपयोगी प्रमाण के आधार पर कार्रवाई कर सकता है।
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न्यायालय के संज्ञान के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही है?
B · संज्ञान तब भी लिया जा सकता है जब कोई आधिकारिक अदेश न हो
कोर्ट स्वयं संज्ञान ले सकती है भले ही कोई एफआईआर या पुलिस रिपोर्ट न हो, जब उसे उपराध की जानकारी हो।
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न्यायालय की संज्ञान क्षमता कौन निर्धारित करता है?
A · भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता
संज्ञान क्षमता का निर्धारण मुख्यतः भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) द्वारा किया जाता है, जो न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र और प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है।
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न्यायालय के संज्ञान में "प्रारम्भिक" का क्या अर्थ होता है?
A · एफआईआर दर्ज करना
प्रारम्भिक का अर्थ है अपराध की प्रार्थमक सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज करना, जो संज्ञान की प्रारम्भिक शुरुआत है।
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नियम में से कौन-सा कथन संज्ञान की सीमा को स्पष्ट करता है?
B · न्यायालय संज्ञान तब भी ले सकता है जब प्रारंभिक संदेह हो
संज्ञान के लिए पूर्ण प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती, प्रारम्भिक संदेह पर भी न्यायालय संज्ञान ले सकता है।
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संजालनिक संज्ञान का अर्थ है:
C · न्यायालय स्वयं से निष्पक्ष प्रस्तुतियों में संज्ञान लेना
संजालनिक संज्ञान का मतलब है न्यायालय की वह क्षमता जिसमें वह स्वयं किसी मामले या अपराध के संज्ञान ले सकता है बिना शिकायत दर्ज हुए।
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न्यायालय को संज्ञान लेने के लिए किस तथ्य का निश्चय होना आवश्यक है?
B · अपराध के घटित होने का उचित संदेह
अपराध के घटित होने का उचित संदेह ही न्यायालय के संज्ञान लेने का आधार होता है, न कि प्रमाण का पूर्ण होना।
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न्यायालय के संज्ञान के संबंध में निम्न में से कौन-सा विकल्प सही है?
D · कोई भी शिकायत मिलने पर न्यायालय संज्ञान ले सकता है
कानून के अनुसार न्यायालय किसी भी प्रकार सूचना मिलने पर अपराध के संज्ञान ले सकता है।
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न्यायालय के संज्ञान की प्रकिया में धारा 190 और 156(3) का किस प्रकार सम्बन्ध है?
A · धारा 190 स्वयंसंज्ञान की है, 156(3) पुलिस जाँच के लिए
धारा 190 न्यायालय को स्वयंसंज्ञान लेने का अधिकार देती है, जबकि 156(3) पुलिस को अभियोजन के लिए आदेश देती है।
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न्यायालय के संज्ञान के अंतर्गत आने वाला कौन-सा अपराध "मांसिक अपराध" में वर्गीकृत नहीं होता?
B · चोरी
चोरी भावनिक अपराध है, जबकि अन्य जेल से संबंधित हत्या, धोखाधड़ी और अपहरण मानसिक अपराध होते हैं।
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न्यायालय किस परिस्थिति में स्वतंत्र संज्ञान नहीं ले सकता?
C · न्यायालय पर कोई विषिष्ट आदेश हो
यदि न्यायालय पर किसी प्रकार संज्ञान न लेने का निर्देश या प्रभार हो, तब स्वयं संज्ञान नहीं ले सकता। बाकी स्थितियों में ले सकता है।
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संजनन अधिकारीम द्वारा न्यायक को किस प्रकार के प्रकरणों में संजनन लेने का अधिकार नहीं दिया गया है?
A · नागरिक विवाद
संजनन अधिकारी मुख्‍यतः आपराधिक मामलों पर लग्द होता है, नागरिक विवादों के अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत आते हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सी स्थिति में न्यायालय संजनन ले सकता है, भले ही कोई शिकायत न हुई हो?
A · जब अपराधिक सार्वजनिक सभाव का हो
अगर अपराधिक सार्वजनिक कल्याण या सार्वजनिक सभाव का हो तो न्यायालय स्वयं संजनन लेकर कार्रवाई कर सकता है।
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संजनन की प्रक्रिया में "अपवाद संजनन" कब लागू होता है?
B · विशेष सरकारी मामले में जब समान्य प्रक्रिया संभव न हो
अपवाद संजनन का प्रयोजन विशेष परिस्थितियों में होता है जहाँ समान्य कानूनी प्रक्रिया बाधिक होती है या सरल नहीं हो पाती।
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न्यायालय के संजनन से संबन्धित निम्न में से कौन-सा दावा सही नहीं है?
B · संजनन का दायराआपराधिक मामलों तक सीमित है
संजनन का दायरा केवल आपराधिक तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ अन्य विशेष मामले भी संजनन के अंतर्गत आते हैं।
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कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर की धाराओं के अंतर्गत न्यायक को संजनन लेने का अधिकार कब मिलता है?
B · जब किसी भी शिकायत या जानकरी न्यायक तक पहुँचे
न्यायक किसी भी शिकायत या कानूनी सूचना पर आपराधिक मामले में संजनन ले सकता है।
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संज्ञान लेने में न्यायलय की कौन-सी शक्ति होती है?
B · मुकदमा चलाने या न चलाने का निर्णय लेना
संज्ञान लेने की शक्ति से न्यायालय तय करता है कि किसी मामले में मुकदमे की कारवाई होगी या नहीं।
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निम्नलिखित में से किस स्थिति में न्यायलय संज्ञान नहीं ले सकता?
B · जब मामला सम्यक् सीधा से बाहर हो
यदि मामला कानूनी रूप में निर्वादित सम्यक् सीमा (समयबद्धता) के बाहर हो जाता है तो न्यायालय संज्ञान नहीं ले सकता।
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कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर की किस धारा के तहत न्यायलय स्वयंसंज्ञान लेकर जांच प्रारंभ कर सकता है?
B · धारा 190
धारा 190 न्यायलय को स्वयंसंज्ञान लेने और जांच शूरू करने की शक्ति प्रदान करती है।
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संज्ञान लेने के लिए आवश्यक नहीं है:
C · आरोप प्रमानित हो चुका हो
संज्ञान के समय आरोप प्रमाणित होना आवश्यक नहीं होता, केवल प्रारंभिक संदेह पर्याप्त है।
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न्यायालय का संज्ञान किस प्रकार की घटनाओं पर लिया जाता है?
B · सीधा अपराध मामलों पर
संज्ञान शब््द का प्रयोग मुख्यतः अपराध मामलों के संबंध में होता है, जहाँ न्यायालय अपराध के लिए प्रतिक्रिया शुरू करता है।
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न्यायालय के संज्ञान प्रदान में किसी रोल अधिकारी की कोई भूमिका नहीं है?
C · अभियुक्त की उपस्थिति
संज्ञान के लिए अभियुक्त की उपस्थिति अनिवार्य नहीं होती, यह केवल व सुनवाई के बाद आता है।
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अधिनियम के अंतर्गत न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने से निम्न में से क्या सुनिश्चित होता है?
B · न्यायालय के अधिकारी क्षेत्र की पुष्टि हुई
संज्ञान लेने का अर्थ न्यायालय के क्षेत्राधिकार को लगा करना और मामले की जांच करने का अधिकार प्राप्त करना है।
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न्यायालय का संज्ञान लेने का अधिकार किस स्थिति में स्वतंत्र समाप्‍त हो सकता है?
B · जब शिकायतकर्ता अपना दावा वापिस ले ले
यदि शिकायतकर्ता अपना दावा वापस लेता है तो समान्यतः संज्ञान की प्रक्रिया प्रारंभिक प्रभारित हो सकती है।
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न्यायालय द्वारा संज्ञान लेने के बाद कौन-सी कारर्वाई तुरन्त की जा सकती है?
D · जांचरी हेतू तफ्तीश प्रारंभ करना
संज्ञान के बाद पुलिस या न्यायालय जांच प्रारंभ करता है ताकि तथ्य स्पष्‍ट हो सकें।

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