बीमा एवं वित्त विषय में बीमा शब्दावली की समझ आवश्यक है। बीमा (Insurance) वह व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति अथवा व्यवसाय अपनी संभावित आर्थिक हानि से सुरक्षा के लिए एक निश्चित राशि, जिसे प्रीमियम (Premium) कहते हैं, नियत करता है। बीमा पॉलिसी (Policy) बीमा अनुबंध का लिखित प्रमाण होती है, जिसमें बीमाधारक और बीमाकर्ता के अधिकार एवं दायित्व निरूपित होते हैं। इस अध्याय में हम बीमा शब्दावली की मूल बातें समझेंगे जिससे आगामी अध्यायों जैसे IRDAI, बीमा उत्पाद, दावा प्रक्रिया आदि में आसानी होगी।
परिभाषा: बीमा एक अनुबंध है जिसके द्वारा व्यक्ति अथवा संस्था अपनी संभावित आर्थिक हानि को साझा करता है और इस साझा जोखिम के बदले एक निश्चित प्रीमियम का भुगतान करता है।
उद्देश्य: भविष्य में अनुचित आर्थिक जोखिम से सुरक्षा प्रदान करना।
बीमा का मूल सिद्धांत है जोखिम का साझाकरण। इसका तात्पर्य यह है कि कई लोग एक साथ आती हुई समस्याओं या जोखिमों से उत्पन्न हानियों का भार एक-दूसरे के साथ बांटते हैं। उदाहरण के लिए, कई वाहन मालिक एक सामान्य बीमा कंपनी को प्रीमियम देते हैं ताकि किसी एक वाहन को दुर्घटना या चोरी से आर्थिक नुकसान होने पर वह बीमा कंपनी उसकी पूर्ति कर सके।
परिभाषा: प्रीमियम वह निश्चित राशि होती है जिसे बीमाधारक बीमाकर्ता को बीमा सुरक्षा प्राप्त करने के लिए नियमित या एकमुश्त भुगतान करता है।
यह राशि बीमा कंपनी के लिए सुरक्षा का खर्च होती है और जोखिम के मूल्यांकन के आधार पर निर्धारित की जाती है। इसे बीमा शुल्क भी कहा जाता है।
प्रीमियम की गणना इस प्रकार होती है:
उदाहरणतः यदि वाहन का जोखिम मूल्य Rs.5,00,000 है और दर 2% है, तो प्रीमियम होगा:
प्रीमियम = Rs.5,00,000 x 0.02 = Rs.10,000
परिभाषा: बीमा पॉलिसी वह लिखित दस्तावेज़ है जो बीमाधारक एवं बीमाकर्ता के बीच बीमा अनुबंध की शर्तों, अधिकारों एवं दायित्वों को स्थापित करती है।
पॉलिसी में जोखिम की सीमा, प्रीमियम की राशि, दावा की शर्तें, अवधि, बीमाधारक एवं बीमाकर्ता के दायित्व आदि विस्तार से वर्णित होते हैं।
दो प्रमुख प्रकार के बीमा होते हैं:
परिभाषा: पुनर्बीमा वह प्रक्रिया है जिसमें एक बीमाकर्ता अपनी बीमित जोखिमों के कुछ हिस्से को अन्य बीमा कंपनियों को पुनः आवंटित करता है ताकि जोखिम की भारी मात्रा को साझा किया जा सके।
यह बीमा कंपनियों की सुरक्षा एवं वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
चरण 1: दिए गए आंकड़ों को पहचानें।
बीमित मूल्य = Rs.3,50,000
बीमा दर = 3% = 0.03
चरण 2: प्रीमियम सूत्र लागू करें।
\( \text{प्रीमियम} = \text{जोखिम मूल्य} \times \text{दर} = 3,50,000 \times 0.03 \)
चरण 3: गुणन करें।
प्रीमियम = Rs.10,500
उत्तर: कार का बीमा प्रीमियम Rs.10,500 होगा।
चरण 1: घटना की सूचना बीमाकर्ता को देनी होती है।
चरण 2: आवश्यक दस्तावेज यथा दुर्घटना रिपोर्ट, बीमा पॉलिसी आदि जमा करना होते हैं।
चरण 3: बीमाकर्ता द्वारा जांच एवं सत्यापन के बाद दावा स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाता है।
उत्तर: सूचना, दस्तावेज़ जमा करना, जांच और स्वीकृति/अस्वीकृति मुख्य कदम हैं।
चरण 1: पुनर्बीमा वह प्रक्रिया है जिसमें बीमाकर्ता अपनी जोखिम का भाग अन्य बीमाकर्ताओं को स्थानांतरित करता है।
चरण 2: यह जोखिम प्रबंधन का एक उपकरण है जो अत्यधिक हानियों से बचाता है।
चरण 3: इससे बीमा कंपनियाँ अधिक जोखिम ले सकती हैं और वित्तीय रूप से सुरक्षित रहती हैं।
उत्तर: पुनर्बीमा बीमाकर्ताओं के बीच जोखिम का बंटवारा है जिससे जोखिम प्रबंधन और वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
चरण 1: जोखिम मूल्य और दर को पहचानें।
जोखिम मूल्य = Rs.12,00,000
दर = 1.5% = 0.015
चरण 2: प्रीमियम की गणना करें।
\( \text{प्रीमियम} = Rs.12,00,000 \times 0.015 = Rs.18,000 \)
उत्तर: प्रीमियम Rs.18,000 होगा।
चरण 1: पॉलिसी की परिभाषा को समझें।
पॉलिसी बीमा अनुबंध का लिखित प्रमाण होती है जिसमें अधिकार और दायित्व वर्णित होते हैं।
चरण 2: विकल्पों का मूल्यांकन करें।
उत्तर: विकल्प (B) सही है।
किस समय उपयोग करें: जब बीमित मूल्य और दर ज्ञात हों, त्वरित प्रीमियम निकालने के लिए।
किस समय उपयोग करें: पुनर्बीमा का अर्थ समझने में भ्रम होने पर।
किस समय उपयोग करें: परीक्षा में दावा प्रक्रिया के प्रश्न आने पर।
किस समय उपयोग करें: पॉलिसी शब्द से जुड़े वस्तुनिष्ठ प्रश्न में।
किस समय उपयोग करें: बीमा नियमन से संबंधित प्रश्न में तेज उत्तर देने के लिए।
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