GIS, अर्थात् Geographical Information System (भू-स्थानिक सूचना प्रणाली), एक प्रणाली है जो भौगोलिक (स्थानिक) और गैर-स्थानिक डेटा को संग्रहीत, विश्लेषित एवं प्रदर्शित करती है। शहरी नियोजन में GIS का उपयोग विभिन्न स्थानिक परिदृश्यों का अवलोकन, विश्लेषण तथा निर्णय निर्माण के लिए किया जाता है। GIS की अवधारणा को समझने के लिए इसके मूल तत्व, प्रकार तथा घटकों को विवेचित करना आवश्यक है।
GIS का मुख्य उद्देश्य स्थान के संदर्भ में सूचनाओं का व्यवस्थित प्रबंधन करना है। यह किसी भी स्थान पर मौजूद वास्तविक वस्तुओं के साथ उनके विवरणों को जोड़ता है, जिससे शहरी तैंयारी, संसाधन प्रबंधन एवं पर्यावरणीय विश्लेषण में सहायता मिलती है।
GIS के महत्वपूर्ण तत्व हैं:
GIS को समझने के लिए इसके दो मुख्य घटक पर ध्यान देना आवश्यक है:
GIS के वर्गीकरण उसके उपयोग, तकनीक, और डेटा स्वरूप के आधार पर किया जाता है। प्रमुख प्रकार हैं:
स्थानिक डेटा वह है जो किसी वस्तु के वास्तविक स्थान को दर्शाता है। उदाहरणतः, एक नदी के किनारे का शून्यांकीय निर्देशांक (latitude और longitude)। गैर-स्थानिक डेटा में उस वस्तु के गुणधर्म या विवरण शामिल होते हैं जैसे नदी का नाम, जल धारिता, प्रदूषण स्तर।
| विशेषता | स्थानिक डेटा | गैर-स्थानिक डेटा |
|---|---|---|
| परिभाषा | वस्तु का स्थान या स्थिति | वस्तु के गुण या विवरण |
| उदाहरण | भवन का अक्षांश-देशांतर | भवन का उपयोग या निर्माण वर्ष |
| प्रकार | सामान्यतः रेखाचित्र/नक्शे रूप में | आंकड़ों और पाठ्य विवरण के रूप में |
GIS में डेटा के दो प्रमुख प्रकार होते हैं: रास्टर (Raster) और वेक्टर (Vector)।
रिमोट सेंसिंग वह प्रक्रिया है जिससे पृथ्वी की सतह से बिना सीधे संपर्क के उपग्रह या हवाई यंत्रों के माध्यम से विभिन्न प्रकार की सूचनाएँ प्राप्त की जाती हैं। GIS के लिए यह एक महत्वपूर्ण डेटा स्रोत होता है। रिमोट सेंसिंग द्वारा प्राप्त तस्वीरों (सैटेलाइट इमेज) का GIS में उपयोग कर स्थानिक विश्लेषण और नक्शे तैयार किए जाते हैं।
GPS (Global Positioning System) एक उपग्रह आधारित नेविगेशन प्रणाली है जो किसी स्थल की सटीक स्थिति (अक्षांश, देशांतर, ऊँचाई) प्रदान करती है।
DGPS (Differential GPS) GPS की तुलना में अधिक सटीकता प्रदान करती है क्योंकि यह बेस स्टेशन के माध्यम से त्रुटियों को सुधार कर अधिक विश्वसनीय स्थान तय करती है।
Step 1: अक्षांश और देशांतर से पार्क की स्थिति ज्ञात होती है, जो कि स्थानिक डेटा है।
Step 2: क्षेत्रफल, पेड़ की संख्या जैसे गुण-धर्म गैर-स्थानिक डेटा के अंतर्गत आते हैं।
Step 3: GIS में स्थानिक डेटा से हम पार्क की नक्शा पर सटीक स्थिति देख सकते हैं और गैर-स्थानिक डेटा से उसकी विशेषताओं का विश्लेषण कर सकते हैं।
Answer: अक्षांश-देशांतर स्थानिक डेटा और क्षेत्रफल आदि गैर-स्थानिक डेटा हैं, दोनों का GIS में पूर्ण विश्लेषण के लिए आवश्यक योगदान होता है।
Step 1: सड़कों को बिंदु और रेखाओं के रूप में प्रतिनिधित्व करना वेक्टर डेटा की विशेषता है। इसलिए, सड़क नक़्शे के लिए वेक्टर डेटा उपयुक्त है।
Step 2: उपग्रह द्वारा प्राप्त तस्वीरें पिक्सेल आधारित होती हैं, अतः वे रास्टर डेटा कहलाती हैं।
Answer: सड़कें वेक्टर डेटा हैं और उपग्रह छवियाँ रास्टर डेटा होती हैं।
Step 1: Trilateration सूत्र है:
\[ (x - x_i)^2 + (y - y_i)^2 + (z - z_i)^2 = r_i^2 \]
Step 2: उपग्रह निर्देशांक: \( x_i=100, y_i=50, z_i=40 \)
Step 3: दूरी \( r_i = 30 \) किमी है। अतः समीकरण होगा:
\[ (x - 100)^2 + (y - 50)^2 + (z - 40)^2 = 30^2 = 900 \]
Answer: उपयोगकर्ता का स्थान उपरोक्त त्रिज्या की सतह पर स्थित होगा।
Step 1: GPS सिग्नल में उपग्रह और वातावरणीय कारणों से त्रुटियां उत्पन्न होती हैं।
Step 2: DGPS में एक आधार स्टेशन (Base Station) होता है जो अपनी सटीक स्थिति ज्ञात रखता है और GPS सिग्नल की त्रुटि का पता लगाकर सुधार के लिए उपयोगकर्ता को सुधारित सिग्नल भेजता है।
Step 3: इसलिए, DGPS अधिक सटीक स्थान जानकारी प्रदान करता है।
Step 4: DGPS का उपयोग विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों, बंद ठिकानों, और जहाज़ी नेविगेशन में किया जाता है जहाँ उच्च सटीकता आवश्यक होती है।
Answer: DGPS बेस स्टेशन द्वारा त्रुटि सुधार करता है, जिससे GPS की तुलना में अधिक सटीकता प्राप्त होती है और यह तब उपयोगी होता है जब सटीक स्थान निर्धारण अत्यावश्यक हो।
Step 1: GIS में स्थानिक डेटा से तात्पर्य उस जानकारी से है जो वस्तु के भू-स्थान को दर्शाए, जैसे "नदी का स्थान।"
Step 2: विकल्पों में से, (B) "नदी की लंबाई और स्थान" स्थानिक डेटा है क्योंकि इसमें नदी का भौगोलिक विस्तार शामिल है।
Step 3: अन्य विकल्प जनसंख्या, प्रदूषण, और सामग्री जैसे गैर-स्थानिक या विवरणात्मक डेटा हैं।
Answer: सही उत्तर है (B) नदी की लंबाई और स्थान।
When to use: जब GIS से जुड़े प्रश्न में अलग-अलग प्रकार के डेटा को पहचानना हो।
When to use: GIS डेटा प्रारूपों पर आधारित प्रश्नों का जल्दी समाधान करते समय।
When to use: उपग्रह आधारित स्थान निर्धारण से संबंधित गणनाओं में।
When to use: सटीकता से जुड़े GIS प्रणाली के प्रश्नों में।
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