GIS (भू-स्थानिक सूचना प्रणाली) और रिमोट सेंसिंग के क्षेत्र में, डेटा का प्रबंधन और प्रदर्शित करने के लिए मुख्यतः दो प्रकार के डेटा प्रारूप प्रयोग किए जाते हैं: रास्टर (Raster) और वेक्टर (Vector)। इनके उपयोग से स्थानिक जानकारी को डिजिटल रूप में संग्रहित, विश्लेषित और प्रस्तुत किया जाता है। इस अध्याय में हम इन दोनों प्रारूपों की मूलभूत अवधारणा, संरचना, फायदे एवं सीमाओं को विस्तारपूर्वक समझेंगे।
रास्टर डेटा प्रारूप में, स्थानिक क्षेत्र को छोटे-छोटे वर्गों या पिक्सलों (Pixels) में बाँटा जाता है। प्रत्येक पिक्सल को विशेष मान (value) दिया जाता है, जो उस स्थान की विशेषता जैसे रंग, तापमान या किसी अन्य गुण की जानकारी देता है। इसे मगज़ के पिक्सल मैट्रिक्स के रूप में भी समझा जा सकता है।
रास्टर डेटा: चित्र की तरह, जिसमें सम्पूर्ण क्षेत्र छोटे-छोटे पिक्सलों में विभाजित होता है, और प्रत्येक पिक्सल का एक मान होता है। उदाहरण के लिए, उपग्रह छवियां (Satellite Images) रास्टर डेटा का एक उदाहरण हैं।
रिज़ोल्यूशन (Resolution): रास्टर डेटा की क्षमता इस बात पर निर्भर करती है कि एक पिक्सल कितना क्षेत्र कवर करता है। उच्च रिज़ोल्यूशन का अर्थ है छोटे पिक्सल और अधिक सटीक डेटा। इसके विपरीत, कम रिज़ोल्यूशन से विवरण कम स्पष्ट होगा।
वेक्टर डेटा प्रारूप में, स्थानिक तत्वों को ज्यामितीय आकृतियों के रूप में संग्रहित किया जाता है: बिंदु (Point), रेखा (Line), और बहुभुज (Polygon). प्रत्येक आकृति के निर्देशांक (coordinates) होते हैं जो स्थान निर्दिष्ट करते हैं।
वेक्टर डेटा: स्थानिक डेटा को बिंदु, रेखा और बहुभुज के रूप में निरूपित करता है, जो वस्तुओं के सटीक भौगोलिक स्वरूप और सीमाओं को दर्शाता है।
| विशेषता | रास्टर (Raster) | वेक्टर (Vector) |
|---|---|---|
| डेटा संरचना | पिक्सल ग्रिड, प्रत्येक पिक्सल का मान होता है | बिंदु, रेखा, बहुभुज आधारित संख्यात्मक निर्देशांक |
| प्रदर्शन | सतत या सतह-आधारित डेटा के लिए बेहतर | वस्तु-आधारित डेटा के लिए उपयुक्त |
| डेटा आकार | उच्च रिज़ोल्यूशन पर बड़ा | छोटा, दक्ष और कम स्थान लेता है |
| सटीकता | प्रत्येक क्षेत्र की केवल औसत जानकारी | सटीक सीमाएं और रूपरेखा संभव |
| उपयोग क्षेत्र | उपग्रह छवि, सतह मॉडलिंग, विश्लेषण | सड़क नेटवर्क, संपत्ति सीमाएं, बिंदु डेटा |
GIS अनुप्रयोगों में, रास्टर और वेक्टर दोनों प्रारूपों का उपयोग आवश्यक होता है। उदाहरण के लिए, भूमि उपयोग मानचित्रण में रास्टर छवियां सतह के प्रकारों को दिखाती हैं, जबकि वेक्टर प्रारूप सड़कों, नदियों और अन्य भौतिक वस्तुओं की सटीक रूपरेखा देता है। कई GIS सॉफ़्टवेयर दोनों प्रारूपों को मिश्रित कर स्थानिक विश्लेषण को अधिक प्रभावी बनाते हैं।
चरण 1: क्षेत्रफल को पिक्सल आकार से भाग करें।
क्षेत्रफल = 10 किमी x 10 किमी = 100 किमी² = 100,000,000 m²
एक पिक्सल का क्षेत्र = 100 m x 100 m = 10,000 m²
चरण 2: कुल पिक्सल संख्या = (पूरा क्षेत्र) / (एक पिक्सल का क्षेत्र)
= \frac{100,000,000}{10,000} = 10,000
उत्तर: छवि में कुल 10,000 पिक्सल हैं।
चरण 1: श्रॉस विधि (Shoelace Formula) का प्रयोग करें:
क्षेत्रफल का सूत्र:
यहाँ, \( (x_5,y_5) = (x_1,y_1) \)
चरण 2: समीकरण के घटक निकालें:
समीकरण के हिसाब से:
\(\sum x_i y_{i+1} = 14 + 20 + 8 + 12 = 54\)
\(\sum x_{i+1} y_i = 15 + 56 + 16 + 2 = 89\)
चरण 3: क्षेत्रफल निकालें:
\(A = \frac{1}{2} \times |54 - 89| = \frac{1}{2} \times 35 = 17.5\) वर्ग इकाइयाँ
उत्तर: बहुभुज का क्षेत्रफल 17.5 वर्ग इकाइयाँ है।
चरण 1: रंगीन पिक्सल वाली इमेज को देखें।
यह पिक्सल ग्रिड पर आधारित होती है, जिसमें हर पिक्सल रंग की जानकारी देता है। यह रास्टर डेटा का उदाहरण है।
चरण 2: सीमाओं और आकृतियों वाली इमेज में सीधे ज्यामितीय आकार होते हैं, जो वेक्टर डेटा के रूप में वर्गीकृत होंगे।
उत्तर: रंगीन पिक्सल आधारित इमेज रास्टर डेटा है क्योंकि यह सतत क्षेत्र को पिक्सल के माध्यम से निरूपित करता है।
चरण 1: दूरी सूत्र का प्रयोग करें:
जहाँ, \( (x_1,y_1) = (3,4) \), \( (x_2,y_2) = (7,1) \)
चरण 2: मान डालें:
d = \sqrt{(7-3)^2 + (1-4)^2} = \sqrt{4^2 + (-3)^2} = \sqrt{16 + 9} = \sqrt{25} = 5
उत्तर: रेखा की लंबाई 5 इकाइयाँ है।
चरण 1: सड़क नेटवर्क वस्तुनिष्ठ, रेखीय और सीमित क्षेत्र के रूप में दर्शाया जाता है।
चरण 2: वेक्टर डेटा में सटीक रेखाएँ और सीमाएं होती हैं, जो सड़क नेटवर्क की उपयुक्तता सुनिश्चित करती हैं।
चरण 3: रास्टर डेटा अधिकतर सतह या क्षेत्रीय विश्लेषण के लिए उपयुक्त होता है, न कि रेखीय नेटवर्क के लिए।
उत्तर: विकल्प (b) वेक्टर डेटा उचित है क्योंकि यह सड़क नेटवर्क के ज्यामितीय और स्थानिक विवरण को सटीक रूप से दर्शाता है।
कब उपयोग करें: उपग्रह इमेजिंग, तापमान मॉडल, भूमि आवरण विश्लेषण में।
कब उपयोग करें: पारंपरिक नक्शा, नेटवर्क विश्लेषण, संपत्ति सीमांकन।
कब उपयोग करें: ज्यामितीय गणनाओं, मानचित्र विश्लेषण।
कब उपयोग करें: जब डेटा संग्रहण और प्रदर्शन की आवश्यकता हो।
कब उपयोग करें: परीक्षा में जल्दी विकल्प पहचानने के लिए।
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