रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) वह प्रक्रिया है जिसमें बिना किसी भौतिक संपर्क के, पृथ्वी के सतह के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है। इसका अर्थ है, हम उपग्रह, विमान या अन्य उपकरणों से भूमि, जल एवं वायु की स्थितियों का अध्ययन करते हैं, जो सीधे पैरामीटर का मापन किए बिना बहुत दूर से किया जाता है।
यह तकनीक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि बड़े और दुर्गम क्षेत्रों का डाटा जल्दी एवं प्रभावी ढंग से प्राप्त करना संभव बनाती है, जो पारंपरिक सर्वेक्षण विधियों से सम्भव नहीं होता। शहरी नियोजन, कृषि, पर्यावरण संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।
रिमोट सेंसिंग की शुरुआत 19वीं सदी के अंत में विमान से फ़ोटोग्राफ़ी के रूप में हुई। 20वीं सदी में उपग्रह प्रौद्योगिकी के विकास ने इसे नए आयाम प्रदान किए। 1970 के बाद से, NOAA, LANDSAT और IRS जैसे उपग्रहों ने भू-स्थानिक डेटा संग्रहण को क्रांतिकारी बना दिया।
यद्यपि रिमोट सेंसिंग की प्रारंभिक प्रगति औद्योगिक एवं सैन्य उद्देश्यों में हुई, आज इसका उपयोग नागरिक और पर्यावरणीय समस्याओं में व्यापक रूप से हो रहा है।
रिमोट सेंसिंग को परिभाषित करना आवश्यक है ताकि इसकी प्रकृति स्पष्ट हो सके।
रिमोट सेंसिंग के तीन मुख्य सिद्धांत हैं:
graph TD A[सूर्य से विद्युत चुम्बकीय विकिरण] A --> B[पृथ्वी की सतह पर विकिरण का परावर्तन/उत्सर्जन] B --> C[उपग्रह या हवाईयान द्वारा सेंसर से विकिरण संग्रहण] C --> D[डेटा प्रसंस्करण एवं विश्लेषण] D --> E[सूचना एवं निर्णय]
रिमोट सेंसिंग की प्रक्रिया दो प्रकार की होती है जिनसे पृथ्वी की सतह की जानकारी प्राप्त होती है।
इसमें उपकरण स्वयं विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा उत्सर्जित करते हैं और उस ऊर्जा के परावर्तन को मापते हैं। उदाहरण के लिए, रडार (RADAR) और लेजर (LIDAR) प्रणालियाँ। सक्रिय रिमोट सेंसिंग में सूर्य की उपलब्धता महत्वपूर्ण नहीं होती, क्योंकि यह स्वयं ऊर्जा स्रोत का उपयोग करता है।
इसमें उपकरण उस ऊर्जा को मापते हैं जो सूर्य से आती है और पृथ्वी की सतह से परावर्तित होती है या पृथ्वी स्वयं से उत्सर्जित करती है। LANDSAT, MODIS जैसे सैटेलाइट निष्क्रिय सेंसिंग का उदाहरण हैं। इसका मुख्य निर्भरता स्रोत सूर्य की किरणों पर होती है।
रिमोट सेंसिंग में विद्युत चुम्बकीय विकिरण के विभिन्न तरंग दैर्ध्य (Wavelength) क्षेत्रों का उपयोग किया जाता है, जैसे कि:
| स्पेक्ट्रम क्षेत्र | तरंग दैर्ध्य सीमा (नैनोमीटर) | उदाहरण |
|---|---|---|
| दृश्य (Visible) | 400-700 | नेत्रों से दिखाई देने वाला प्रकाश |
| निकट अवरक्त (Near Infrared) | 700-1400 | वनस्पति अध्ययन हेतु |
| मध्य एवं दूर अवरक्त (Mid & Far Infrared) | 1400-25000 | भूमि की नमी, तापमान मापन |
| माइक्रोवेव | 1 mm - 1 m | रडार इमेजिंग |
प्रत्येक क्षेत्र में प्रतिबिंब या उत्सर्जन पृथ्वी की सतह और वस्तुओं की भौतिक एवं रासायनिक विशेषताओं पर अलग-अलग प्रभाव डालता है। इस कारण से विभिन्न प्रकार की जानकारी प्राप्त की जाती है।
रिमोट सेंसिंग में डेटा दो मुख्य प्रारूपों में संग्रहित होता है:
रास्टर डेटा को पिक्सल के ग्रिड के रूप में संग्रहित किया जाता है, जहाँ प्रत्येक पिक्सल का मान सतह के एक निश्चित क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। उपग्रह छवियाँ मुख्यतः रास्टर प्रारूप में होती हैं।
वेक्टर डेटा बिंदु (points), रेखा (lines) और बहुभुज (polygons) के रूप में स्थानिक विखंडनों का प्रतिनिधित्व करता है। यह डेटा अधिकतर मानचित्र निर्माण और विशेष भू-आकृतिक विशेषताओं के लिए उपयोगी होता है।
| विशेषता | रास्टर डेटा | वेक्टर डेटा |
|---|---|---|
| डेटा संरचना | पिक्सल ग्रिड | बिंदु, रेखा, बहुभुज |
| उपयोग क्षेत्र | सैटेलाइट इमेज, डिजिटल फोटोग्राफी | सड़कें, जलाशय, सीमा दर्शाने के लिए |
| विशेषता | विस्तृत सतह मूल्यांकन | स्पष्ट सीमाएँ एवं निरूपण |
शहरी नियोजन, कृषि, पर्यावरण संरक्षण और आपदा कार्यों के लिए रिमोट सेंसिंग के व्यावहारिक उपयोग निम्नलिखित हैं।
रिमोट सेंसिंग से प्राप्त डेटा का GIS (Geographic Information System) में उपयोग करके स्थानिक विश्लेषण एवं डिजिटल मैपिंग की जाती है। GIS रिमोट सेंसिंग की उन्नत डिजिटल छवियों को मैनेज, विश्लेषण और प्रस्तुत करने का एक ऐसा मंच है जिसके माध्यम से स्मार्ट शहरों की योजना और क्रियान्वयन में सहायता मिलती है।
रिमोट सेंसिंग और GIS के संयोजन से भूमि उपयोग, आपदा प्रबंधन और पर्यावरणीय निगरानी में अधिक सटीकता एवं दक्षता प्राप्त होती है।
चरण 1: प्रति पिक्सल क्षेत्रफल निकालें: \(30m \times 30m = 900\, \text{m}^2\)
चरण 2: कुल पिक्सल संख्या ज्ञात है: 50
चरण 3: कुल क्षेत्रफल = पिक्सल संख्या x प्रति पिक्सल क्षेत्र = \(50 \times 900 = 45000\, \text{m}^2\)
उत्तर: कुल वन क्षेत्र 45000 वर्ग मीटर या 4.5 हेक्टेयर है।
चरण 1: सूत्र: \( R = \frac{H \times S}{F} \)
चरण 2: मूल्य बदलें: \( H = 700,000 \, m \) (700 km), \( S=1\), \( F=0.5 \,m \)
चरण 3: गणना करें: \[ R = \frac{700,000 \times 1}{0.5} = 1,400,000\, \text{m} = 1400\, \text{km} \]
उत्तर: रेज़ोल्यूशन 1,400,000 मीटर अर्थात 1400 किलोमीटर होगा, जो बहुत कम सटीक है। सामान्यत: बेहतर फोकल लंबाई या ऊँचाई आवश्यक होती है।
चरण 1: सक्रिय (Active) रिमोट सेंसिंग में उपकरण स्वयं ऊर्जा उत्सर्जित करता है।
चरण 2: निष्क्रिय (Passive) रिमोट सेंसिंग में ऊर्जा स्रोत सूर्य होता है।
उत्तर: सक्रिय रिमोट सेंसिंग उपकरण स्वयं ऊर्जा स्रोत होता है, इसलिए सही उत्तर है: सक्रिय रिमोट सेंसिंग।
चरण 1: सड़क मार्ग एक नेटवर्क है जिसे बिंदु और रेखाओं के रूप में दिखाया जा सकता है।
चरण 2: वेक्टर डेटा इसी रूप में परिवेशीय वस्तुओं का सटीक निरूपण करता है।
उत्तर: इस हेतु वेक्टर डेटा उपयुक्त है क्योंकि इसमें बिंदु और रेखा शामिल होती हैं।
चरण 1: रिमोट सेंसिंग से प्राप्त विस्तृत स्थानिक डेटा GIS में इंटीग्रेट किया जाता है।
चरण 2: इस संयोजन से शहरी भूमि उपयोग का विस्तृत मानचित्रण, यातायात प्रवाह विश्लेषण, और पर्यावरण मानिटरिंग संभव होती है।
चरण 3: उदाहरण:
उत्तर: GIS और रिमोट सेंसिंग एकीकृत कर स्मार्ट सिटी प्रबंधन में अनेक व्यवस्थित एवं कुशल समाधान उपलब्ध कराते हैं।
कब उपयोग करें: जब चित्र की गुणवत्ता और सूक्ष्मता समझनी हो।
कब उपयोग करें: जब विभिन्न विकिरण क्षेत्रों से संबंधित प्रश्न आएं।
कब उपयोग करें: परीक्षा में प्रकार आधारित प्रश्नों में भ्रम से बचने के लिए।
कब उपयोग करें: समग्र शहरी नियोजन या स्मार्ट सिटी से संबंधित सवालों में।
Progress tracking is paywalled — subscribe to mark subtopics as understood and save your streak.
Go to practice →