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GPS

GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) परिचय

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन तकनीक है जो पृथ्वी पर किसी भी स्थान की सटीक स्थिति, समय और गति निर्धारण की सुविधा प्रदान करती है। यह प्रणाली स्थान आधारित सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेषकर टाउन प्लानिंग, भू-स्थानिक विश्लेषण, आपदा प्रबंधन और स्मार्ट सिटी के विकास में।

GPS क्या है?
यह एक ऐसा सिस्टम है जो उपग्रहों के माध्यम से पृथ्वी पर किसी भी बिंदु की भौगोलिक स्थिति (अक्षांश, देशांतर, ऊँचाई) ज्ञात करता है।

GPS की संरचना

GPS प्रणाली तीन प्रमुख भागों से मिलकर बनती है:

  • उपग्रही नेटवर्क (Satellite Network): पृथ्वी के चारों ओर लगभग 30 उपग्रह होते हैं, जो निरंतर रेडियो सिग्नल भेजते रहते हैं। ये उपग्रह पृथ्वी से लगभग 20,200 किलोमीटर की ऊँचाई पर कक्षाएँ ग्रहण करते हैं।
  • नियंत्रण प्रणाली (Control Segment): पृथ्वी पर विभिन्न नियंत्रण केंद्र, जो उपग्रहों की स्थिति और समय समन्वय का संचालन करते हैं। ये केंद्र उपग्रहों को ट्रैक करते हैं और आवश्यक सुधार भेजते हैं।
  • उपयोगकर्ता खंड (User Segment): GPS रिसीवर उपकरण, जो उपग्रहों से सिग्नल प्राप्त करता है और उसका विश्लेषण करके स्थान निर्धारण करता है।
पृथ्वी उपग्रह नियंत्रण केंद्र उपयोगकर्ता

GPS के प्रकार

GPS प्रणालियाँ उपयोग के अनुसार विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत होती हैं:

प्रकार विशेषताएँ उपयोग
सामान्य GPS स्वतंत्र उपग्रह सिग्नल पर आधारित, सामान्य सटीकता (10-15 मीटर तक) सामान्य नेविगेशन, वाहन ट्रैकिंग
DGPS (डिफरेंशियल GPS) सुधारित सिग्नल के लिए एक स्थायी बेस स्टेशन से सही जानकारी का उपयोग सटीक नेविगेशन, सर्वेक्षण
RTK GPS (रियल टाइम काइनेटक) उच्च सटीकता (सेन्टीमीटर स्तर), तुरंत त्रुटि सुधार कार्य स्थल सर्वेक्षण, कृषि, निर्माण

GPS के सिद्धांत

GPS की कार्यप्रणाली का आधार निम्नलिखित मुख्य सिद्धांतों पर टिकी है:

  1. ट्रिलाटरेशन (Trilateration): यह वह प्रक्रिया है जिसमें तीन या अधिक उपग्रहों से प्राप्त दूरी की माप के आधार पर पृथ्वी पर किसी वस्तु की स्थिति निश्चित की जाती है।
  2. टाइम सिग्नल (Time Signal): उपग्रहों द्वारा निरंतर रेडियो सिग्नल भेजा जाता है जिसमे सिग्नल भेजने का समय होता है, प्रति सिग्नल रिसीव करने वाले GPS रिसीवर समय माप कर दूरी निर्धारित करते हैं।
  3. सिग्नल ट्रांसमिशन: उपग्रह से निकली सिग्नल कितनी जल्दी प्राप्त होती है, उसे आधार मानकर दूरी मापी जाती है क्योंकि सिग्नल की गति प्रकाश की गति के समान होती है।
graph TD    Satellite1[उपग्रह 1] -->|सिग्नल दूरी d1| Receiver[GPS रिसीवर]    Satellite2[उपग्रह 2] -->|सिग्नल दूरी d2| Receiver    Satellite3[उपग्रह 3] -->|सिग्नल दूरी d3| Receiver    Receiver -->|पोजिशन कैल्कुलेशन| Location[स्थिति निर्धारण]
Key Concept

GPS का मूल सिद्धांत

किसी वस्तु की स्थिति का निर्धारण तीन या अधिक उपग्रहों से दूरी के आधार पर किया जाता है।

GPS अनुप्रयोग

GPS का उपयोग विभिन्न क्षेत्रीय और तकनीकी कार्यों में किया जाता है, विशेषकर:

  • ट्रैकिंग और मार्ग नियोजन (Tracking & Route Planning): वाहनों, सामग्रियों और व्यक्तियों की वास्तविक समय में निगरानी।
  • स्मार्ट सिटी परियोजनाएं (Smart City Projects): बेहतर शहरी नियोजन, यातायात प्रबंधन, आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन।
  • आपातकालीन सेवाएं (Emergency Services): बचाव अभियान में तुरंत स्थान खोजने में सहायता।

GPS की सीमाएँ

यद्यपि GPS अत्यंत उपयोगी है, किन्तु इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं:

  • संकेत विघटन (Signal Interference): भारी पेड़, ऊँची इमारतें या मौसम खराब होने पर सिग्नल कमजोर हो सकता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव (Environmental Impact): शहरी क्षेत्रों में मल्टीपाथ प्रभाव के कारण सटीकता प्रभावित होती है।
  • सटीकता में प्रभाव (Accuracy Limitations): सामान्य GPS की त्रुटि सीमा 10-15 मीटर तक हो सकती है, जो कुछ कार्यों के लिए अपर्याप्त हो सकती है।

अवधारणाएँ और सीमाएँ

  • GPS में उपग्रह, नियंत्रण केंद्र और उपयोगकर्ता खंड होते हैं।
  • ट्रिलाटरेशन एवं समय सिग्नल GPS के मूल सिद्धांत हैं।
  • DGPS और RTK GPS जैसे संवर्धित प्रकार सटीकता बढ़ाते हैं।
  • GPS अनुप्रयोग टाउन प्लानिंग, स्मार्ट सिटी और आपातकालीन कार्यों में होते हैं।
  • पर्यावरणीय प्रभाव और सिग्नल विघटन GPS की मुख्य सीमाएँ हैं।
Key Takeaway:

सम्पूर्णतः, GPS एक शक्तिशाली स्थान निर्धारण प्रणाली है, जिसके ज्ञान से शहरी नियोजन में समुचित रणनीतियाँ बनाई जा सकती हैं।

कार्यप्रणाली सूत्र

सूत्र संग्रह

दूरी सूत्र (Distance Formula)
\[ d = c \times (t_{receive} - t_{send}) \]
जहाँ: d = दूरी (मीटर), c = प्रकाश की गति (लगभग \(3 \times 10^8\) मी/से), \(t_{receive}\) = प्राप्ति समय, \(t_{send}\) = प्रेषण समय

कार्यक्रम उदाहरण (Worked Examples)

उदाहरण 1: GPS द्वारा दूरी निर्धारण Medium
एक GPS उपग्रह ने सिग्नल 0.067 सेकंड पहले पृथ्वी पर एक रिसीवर को भेजा। प्रकाश की गति \(3 \times 10^8\) मी/से के आस-पास है। उस उपग्रह से रिसीवर की दूरी ज्ञात करें।

चरण 1: दूरी सूत्र लागू करें: \[ d = c \times (t_{receive} - t_{send}) \]

चरण 2: दिया गया समय = 0.067 सेकंड, प्रकाश की गति = \(3 \times 10^8\) m/s

चरण 3: दूरी गणना करें: \[ d = 3 \times 10^8 \times 0.067 = 2.01 \times 10^7 \text{ मीटर} \]

उत्तर: उपग्रह की दूरी लगभग 20,100 किलोमीटर है।

उदाहरण 2: DGPS के मानक लाभ Medium
एक बेस स्टेशन DGPS का उपयोग कर रिसीवर को त्रुटि सुधार सिग्नल भेजता है जिससे सटीकता में सुधार होता है। यदि सामान्य GPS की सटीकता 15 मीटर है, तो DGPS से सटीकता किस सीमा तक सुधर सकती है, यह बताइए।

चरण 1: DGPS के उपयोग से त्रुटि सामान्य GPS के मुकाबले 1 से 3 मीटर तक घट जाती है।

चरण 2: अतः, DGPS की सटीकता सीमा होगी: 3 मीटर तक।

उत्तर: DGPS सटीकता सामान्य GPS की तुलना में लगभग 5 गुना बेहतर होती है, 3 मीटर तक।

उदाहरण 3: त्रिलाटरेशन की व्याख्या Easy
समझाइए कि GPS किस प्रकार तीन उपग्रहों से दूरी का उपयोग कर किसी बिंदु की स्थिति निश्चित करता है?

चरण 1: प्रत्येक उपग्रह से रिसीवर की दूरी ज्ञात की जाती है। यह दूरी उस उपग्रह के रेडियो सिग्नल के प्रेषण और प्राप्ति समय से मापी जाती है।

चरण 2: दूरी का उपयोग कर पृथ्वी पर उस उपग्रह के आसपास एक गोला बनता है जिसमें रिसीवर स्थित होता है।

चरण 3: तीन उपग्रहों के तीन गोलों का प्रतिच्छेदन बिंदु रिसीवर की स्थिति निर्दिष्ट करता है।

उत्तर: इस प्रकार त्रिलाटरेशन GPS के माध्यम से स्थिति निर्धारण का मूल सिद्धांत है।

उदाहरण 4: RTK GPS उपयोग में लाभ Medium
RTK GPS की सटीकता सामान्य GPS से कितना बेहतर होती है? इसका शहरी निर्माण कार्य में क्या महत्व है?

चरण 1: RTK GPS की सटीकता सेंटीमीटर (1-2 सेमी) तक होती है, जबकि सामान्य GPS की सटीकता लगभग 10-15 मीटर तक सीमित होती है।

चरण 2: शहरी निर्माण में छोटे टॉलरेंस की जरूरत होती है, अतः RTK GPS की उच्च सटीकता नियोजन और कार्यान्वयन में अत्यंत उपयोगी है।

उत्तर: RTK GPS निर्माण क्षेत्र में बेहतर गुणवत्ता और समय की बचत सुनिश्चित करता है।

प्रश्नपत्र शैली: GPS में त्रुटि का कारण Hard
एक GPS रिसीवर की स्थिति में समय-समय पर त्रुटि आती है। निम्नलिखित में से कौन-सा कारण सबसे प्रभावित मानना उचित होगा?
A) उपग्रह संख्या का कम होना
B) सिग्नल का मल्टीपाथ प्रभाव
C) रिसीवर के बैटरी की क्षमता
D) उपग्रह की दूरी

चरण 1: रिसीवर की त्रुटि में सबसे प्रभावी कारणों में से एक है 'मल्टीपाथ प्रभाव' जहाँ सिग्नल का इमारतों या पहाड़ों से परावर्तन हो जाता है।

चरण 2: अन्य विकल्पों में उपग्रह संख्या महत्वपूर्ण है लेकिन सामान्यतः 4 या अधिक उपग्रह पर्याप्त होते हैं। रिसीवर की बैटरी क्षमता सिग्नल त्रुटि पर प्रभाव नहीं डालती। उपग्रह की दूरी अपेक्षाकृत स्थिर होती है।

उत्तर: सही विकल्प: B) सिग्नल का मल्टीपाथ प्रभाव

Tips & Tricks

ट्रिलाटरेशन को समझने के लिए: तीन गेंदों का मिलना मानकर सोचें, जहाँ हर गेंद उपग्रह से दूरी दिखाती है।

कब उपयोग करें: GPS सिद्धांत प्रश्नों में दूरी और स्थिति निर्धारण पूछे जाने पर।

DGPS और RTK GPS में अंतर याद रखने का सूत्र: D = Differential, R = Real Time (वास्तविक समय त्रुटि सुधार)

कब उपयोग करें: GPS के प्रकार और सटीकता संबंधी प्रश्नों में।

GPS दूरी सूत्र को जल्दी याद रखने का तरीका: दूरी = गति x समय, अर्थात \(d = c \times \Delta t\), जहाँ \(c\) प्रकाश की गति।

कब उपयोग करें: दूरी निर्धारण से संबंधित गणितीय प्रश्नों में।

सिग्नल विघटन कारणों को याद रखने के लिए: 'पेड़, भवन, मौसम' तीनों मुख्य बाधाएँ हैं।

कब उपयोग करें: GPS सीमाएँ और त्रुटि स्रोत प्रश्नों में।

प्रश्न का प्रकार तुरंत पहचानने का सूत्र: - यदि दूरी या समय दिया हो -> गणना प्रश्न। - यदि GPS का आधार पूछा हो -> सिद्धांत प्रश्न। - यदि तकनीक या उपयोग पूछा हो -> अनुप्रयोग प्रश्न।

कब उपयोग करें: परीक्षाओं में उत्तर देने की गति बढ़ाने के लिए।

Common Mistakes to Avoid

❌ GPS में केवल दो उपग्रहों से स्थिति ज्ञात करने का प्रयास करना
✓ कम से कम तीन उपग्रहों के सिग्नल से स्थिति निश्चित करें
क्यों: दो उपग्रहों से केवल सर्पित (परिधीय) स्थान मिल सकता है, त्रिलाटरेशन के लिए तीन या चार उपग्रह आवश्यक होते हैं।
❌ DGPS को सामान्य GPS जैसा ही मान लेना
✓ DGPS में अतिरिक्त बेस स्टेशन द्वारा त्रुटि सुधार शामिल होता है
क्यों: DGPS सिग्नल में त्रुटि घटाकर सर्वेक्षण में उच्च सटीकता प्रदान करता है, यहां सामान्य GPS समान नहीं होता।
❌ प्रकाश की गति के बजाय सिग्नल की अन्य गति लगाना
✓ सिग्नल की गति को प्रकाश की गति (लगभग \(3 \times 10^{8}\) मी/से) मानना चाहिए
क्यों: GPS सिग्नल रेडियो तरंगें होती हैं, जो प्रकाश की गति से चलती हैं, अन्य गति से गणना त्रुटिपूर्ण होगी।
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