ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन तकनीक है जो पृथ्वी पर किसी भी स्थान की सटीक स्थिति, समय और गति निर्धारण की सुविधा प्रदान करती है। यह प्रणाली स्थान आधारित सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, विशेषकर टाउन प्लानिंग, भू-स्थानिक विश्लेषण, आपदा प्रबंधन और स्मार्ट सिटी के विकास में।
GPS प्रणाली तीन प्रमुख भागों से मिलकर बनती है:
GPS प्रणालियाँ उपयोग के अनुसार विभिन्न प्रकारों में वर्गीकृत होती हैं:
| प्रकार | विशेषताएँ | उपयोग |
|---|---|---|
| सामान्य GPS | स्वतंत्र उपग्रह सिग्नल पर आधारित, सामान्य सटीकता (10-15 मीटर तक) | सामान्य नेविगेशन, वाहन ट्रैकिंग |
| DGPS (डिफरेंशियल GPS) | सुधारित सिग्नल के लिए एक स्थायी बेस स्टेशन से सही जानकारी का उपयोग | सटीक नेविगेशन, सर्वेक्षण |
| RTK GPS (रियल टाइम काइनेटक) | उच्च सटीकता (सेन्टीमीटर स्तर), तुरंत त्रुटि सुधार | कार्य स्थल सर्वेक्षण, कृषि, निर्माण |
GPS की कार्यप्रणाली का आधार निम्नलिखित मुख्य सिद्धांतों पर टिकी है:
graph TD Satellite1[उपग्रह 1] -->|सिग्नल दूरी d1| Receiver[GPS रिसीवर] Satellite2[उपग्रह 2] -->|सिग्नल दूरी d2| Receiver Satellite3[उपग्रह 3] -->|सिग्नल दूरी d3| Receiver Receiver -->|पोजिशन कैल्कुलेशन| Location[स्थिति निर्धारण]
GPS का उपयोग विभिन्न क्षेत्रीय और तकनीकी कार्यों में किया जाता है, विशेषकर:
यद्यपि GPS अत्यंत उपयोगी है, किन्तु इसकी कुछ सीमाएँ भी हैं:
चरण 1: दूरी सूत्र लागू करें: \[ d = c \times (t_{receive} - t_{send}) \]
चरण 2: दिया गया समय = 0.067 सेकंड, प्रकाश की गति = \(3 \times 10^8\) m/s
चरण 3: दूरी गणना करें: \[ d = 3 \times 10^8 \times 0.067 = 2.01 \times 10^7 \text{ मीटर} \]
उत्तर: उपग्रह की दूरी लगभग 20,100 किलोमीटर है।
चरण 1: DGPS के उपयोग से त्रुटि सामान्य GPS के मुकाबले 1 से 3 मीटर तक घट जाती है।
चरण 2: अतः, DGPS की सटीकता सीमा होगी: 3 मीटर तक।
उत्तर: DGPS सटीकता सामान्य GPS की तुलना में लगभग 5 गुना बेहतर होती है, 3 मीटर तक।
चरण 1: प्रत्येक उपग्रह से रिसीवर की दूरी ज्ञात की जाती है। यह दूरी उस उपग्रह के रेडियो सिग्नल के प्रेषण और प्राप्ति समय से मापी जाती है।
चरण 2: दूरी का उपयोग कर पृथ्वी पर उस उपग्रह के आसपास एक गोला बनता है जिसमें रिसीवर स्थित होता है।
चरण 3: तीन उपग्रहों के तीन गोलों का प्रतिच्छेदन बिंदु रिसीवर की स्थिति निर्दिष्ट करता है।
उत्तर: इस प्रकार त्रिलाटरेशन GPS के माध्यम से स्थिति निर्धारण का मूल सिद्धांत है।
चरण 1: RTK GPS की सटीकता सेंटीमीटर (1-2 सेमी) तक होती है, जबकि सामान्य GPS की सटीकता लगभग 10-15 मीटर तक सीमित होती है।
चरण 2: शहरी निर्माण में छोटे टॉलरेंस की जरूरत होती है, अतः RTK GPS की उच्च सटीकता नियोजन और कार्यान्वयन में अत्यंत उपयोगी है।
उत्तर: RTK GPS निर्माण क्षेत्र में बेहतर गुणवत्ता और समय की बचत सुनिश्चित करता है।
चरण 1: रिसीवर की त्रुटि में सबसे प्रभावी कारणों में से एक है 'मल्टीपाथ प्रभाव' जहाँ सिग्नल का इमारतों या पहाड़ों से परावर्तन हो जाता है।
चरण 2: अन्य विकल्पों में उपग्रह संख्या महत्वपूर्ण है लेकिन सामान्यतः 4 या अधिक उपग्रह पर्याप्त होते हैं। रिसीवर की बैटरी क्षमता सिग्नल त्रुटि पर प्रभाव नहीं डालती। उपग्रह की दूरी अपेक्षाकृत स्थिर होती है।
उत्तर: सही विकल्प: B) सिग्नल का मल्टीपाथ प्रभाव
कब उपयोग करें: GPS सिद्धांत प्रश्नों में दूरी और स्थिति निर्धारण पूछे जाने पर।
कब उपयोग करें: GPS के प्रकार और सटीकता संबंधी प्रश्नों में।
कब उपयोग करें: दूरी निर्धारण से संबंधित गणितीय प्रश्नों में।
कब उपयोग करें: GPS सीमाएँ और त्रुटि स्रोत प्रश्नों में।
कब उपयोग करें: परीक्षाओं में उत्तर देने की गति बढ़ाने के लिए।
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