कारक शब्द का अर्थ होता है "कारण" या "कर्त्ता"। हिंदी व्याकरण में कारक (Case) से तात्पर्य उस संबंध से है जो संज्ञा, सर्वनाम अथवा विशेषण और क्रिया के बीच स्थापित होता है। यह संबंध वाक्य में पदों के व्याकरणिक प्रयोग और अर्थ की स्पष्टता हेतु अनिवार्य होता है।
उदाहरण के लिए, वाक्य "राम ने पुस्तक पढ़ी" में 'राम' कर्त्ता है जो क्रिया 'पढ़ी' से जुड़ा है। यहाँ 'ने' कर्त्ता कारक के रूप में कार्य करता है। बिना कारक के वाक्य का संबंध अस्पष्ट हो सकता है।
कारक मुख्यतः प्रत्यय (suffix) के रूप में होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम के साथ जुड़कर उसका संबंध स्पष्ट करते हैं। कभी-कभी कारक रूप में स्वतंत्र शब्द (जैसे 'से', 'को') भी आते हैं।
हिंदी में आठ प्रमुख कारक माने जाते हैं, जिन्हें कारक विभक्ति भी कहा जाता है। ये कारक संज्ञा के पदचय को परिभाषित करते हैं। प्रत्येक कारक की अपनी विशेष भूमिका होती है।
| कारक | भूमिका | प्रश्न | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| कर्त्ता कारक (कर्ता कारक) | जो कार्य करता है | कौन? क्या? | राम ने खाना खाया। |
| कर्म कारक | जिस पर कार्य होता है | किसे? क्या? | राम ने पुस्तक पढ़ी। |
| करण कारक | जिससे क्रिया की जाती है | किससे? | राम ने कलम से लिखा। |
| संप्रदान कारक | जिससे कुछ दिया या प्राप्त किया जाता है | किसको? किसे? | राम ने सीता को फूल दिया। |
| अपादान कारक | जिससे वियोग या निषेध होता है | किससे? किनसे? | राम घर से निकला। |
| सम्बंध कारक | जिससे सम्बन्ध होता है | किसका? किसकी? किसके? | राम की पुस्तक। |
| अधिकरण कारक | जिस स्थान, काल या विषय को सूचित करता है | कहाँ? कब? किस विषय में? | राम स्कूल में है। |
| संबोधन कारक | जिससे पुकारा जाता है | हे कौन? | हे राम! सुनो। |
कारक संज्ञा या सर्वनाम और क्रिया के बीच वाक्य में विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देते हैं, जिससे अर्थ स्पष्ट होता है।
प्रत्येक कारक की अलग-अलग प्रत्यय होती हैं जो संज्ञा के लिंग, वचन एवं एकवचन/बहुवचन के आधार पर परिवर्तित होती हैं। यह धातु, सर्वनाम, विशेषणों के साथ भी सामंजस्य बनाए रखते हैं।
उदाहरण स्वरूप, कर्त्ता कारक में 'ने' प्रत्यय जुड़ता है - 'राम ने', 'सीता ने'। अधिकरण कारक में 'में', 'पर', 'से' आदि उपसर्ग आते हैं।
कारक प्रयोग में त्रुटियों की संभावना अधिक होती है क्योंकि विभिन्न कारकों के प्रत्यय समान लग सकते हैं या संदिग्ध हो सकते हैं। अतः प्रत्येक कारक की भूमिका और प्रत्यय स्पष्टतः समझना आवश्यक है।
चरण 1: कर्त्ता वह होता है जो क्रिया को करता है। क्रिया है "बनाया"।
चरण 2: "सीमा" वही है जो चित्र बनाती है।
चरण 3: कारक प्रत्यय 'ने' कर्त्ता कारक को सूचित करता है।
उत्तर: "सीमा ने" में 'ने' कर्त्ता कारक है।
चरण 1: कर्म वह होता है जिस पर क्रिया होती है। क्रिया है "दिया"।
चरण 2: उपहार वह वस्तु है जो दी जा रही है।
चरण 3: "सीता को" में 'को' संप्रदान कारक है, पर वाक्य में कर्म उपहार है।
उत्तर: "उपहार" कर्म कारक है।
चरण 1: करण कारक उस कारण को दर्शाता है जिससे क्रिया होती है।
चरण 2: क्रिया "लिखा" है, जिसका कारण "कलम" है।
चरण 3: "से" प्रत्यय करण कारक सूचक है।
उत्तर: "कलम से" करण कारक है।
चरण 1: अपादान कारक को स्थान या वियोग का भाव देता है। प्रश्न: "कहाँ से?"
चरण 2: "बाज़ार से" में 'से' अपादान कारक का प्रत्यय है।
उत्तर: "बाज़ार से" अपादान कारक है।
चरण 1: 'राम' कर्त्ता है, जो क्रिया कर रहा है।
चरण 2: कर्त्ता कारक की सबसे सामान्य प्रत्यय 'ने' है।
चरण 3: उचित विकल्प: "राम ने पुस्तक पढ़ा।"
उत्तर: "ने" प्रत्यय सही है।
When to use: जब कर्त्ता का प्रश्न पूछना हो "कौन?" या "क्या?"
When to use: जब क्रिया से प्रभावित वस्तु जाननी हो।
When to use: क्रिया किस माध्यम/कारण से हुई, जानना हो।
When to use: किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान के स्वामित्व या संबंध जानना हो।
When to use: जब बताना हो 'कहाँ से' या 'किससे'।
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