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असहयोग आंदोलन

असहयोग आंदोलन

असहयोग आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण चरण था, जिसने देश के विभिन्न वर्गों को ब्रिटिश शासन के विरोध में एकजुट किया। यह आंदोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में 1920 में शुरू हुआ और इसके माध्यम से भारतियों ने ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार, सरकारी संस्थाओं से असहयोग, तथा सविनय अवज्ञा के माध्यम से स्वतंत्रता की मांग तेज की।

1. पृष्ठभूमि एवं परिचय

असहयोग आंदोलन के प्रक्षेपण में तीन मुख्य घटक थे।

  • जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919): अमृतसर के जलियांवाला बाग में ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर ने निहत्थे लोगों पर गोली चलाकर सैंकड़ों की हत्या कर दी। इस क्रूर घटना ने देशभर में भारी आक्रोश फैला दिया।
  • खिलाफत आंदोलन: प्रथम विश्व युद्ध के बाद तुर्की के खिलाफ ब्रिटिश नीतियों के कारण भारत के मुसलमानों ने इस आंदोलन की शुरुआत की, जिसे महात्मा गाँधी ने अपना समर्थन दिया तथा हिन्दू-मुस्लिम एकता स्थापित करने का प्रयास किया।
  • लॉर्ड कर्जन का विरोध: ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत के संविधान में नियमों में कठोर सॢचकता के विरोध के रूप में भी आंदोलन ने बल प्राप्त किया।
graph TD  A[जलियांवाला बाग हत्याकांड]  B[खिलाफत आंदोलन]  C[लॉर्ड कर्जन का विरोध]  A --> D[असहयोग आंदोलन का प्रारंभ]  B --> D  C --> D

2. प्रमुख नेता और संगठन

असहयोग आंदोलन में अनेक राष्ट्रीय नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

  • महात्मा गाँधी: इस आंदोलन के प्रेरक और मार्गदर्शक, जिन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों के आधार पर आंदोलन को जन-आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया।
  • श्री भीमराव पंवार (बी. पी.)- बाल: कांग्रेस के प्रमुख नेता जिन्होंने गाँधी के साथ सहयोग किया।
  • गोपाल कृष्ण गोखले: स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रगतिशील नेता जिन्होंने व्यापक स्तर पर आंदोलन का समर्थन किया।

3. असहयोग आंदोलन की विशेषताएँ

असहयोग (Non-Cooperation) का अर्थ:
यह एक प्रकार का शांतिपूर्ण विरोध था जिसमें लोग ब्रिटिश शासन की सभी सेवाओं, स्कूलों, न्यायालयों, और उत्पादों का असहयोग करते थे लेकिन हिंसा से किनारा करते थे।

असहयोग आंदोलन में मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्रवाइयाँ शामिल थीं:

  • सरकारी आदानों-प्रदान से इनकार: जैसे सरकारी नौकरियों, स्कूलों तथा अदालतों से त्यागपत्र देना।
  • विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार: खादी के पहनावे को बढ़ावा देना एवं अंग्रेजी कपड़ों का परित्याग।
  • टैक्स देने की अवज्ञा: ब्रिटिश टैक्स वसूलने में बाधा उत्पन्न करना।

प्रमुख प्रकार और कार्यवाही:

  • शैक्षिक असहयोग: अंग्रेजी विद्यालयों और कॉलेजों को छोड़ना।
  • वानीय असहयोग: विदेशी वस्तुओं की खरीदारी बंद करना।
  • राजनीतिक असहयोग: ब्रिटिश शासन की सरकारी संस्थाओं से असहयोग करना।

4. प्रभाव एवं परिणाम

असहयोग आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

  • राष्ट्रीय एकता का संवार्धन: हिन्दू-मुस्लिम एकता सुदृढ़ हुई एवं भारतीय जनता में स्वतंत्रता के प्रति जागरूकता बढ़ी।
  • सामाजिक सुधारों को गति: शराब का बहिष्कार तथा बाल विवाह एवं अछूत प्रथा के खिलाफ आवाज उठी।
  • विभिन्न वर्गों का सहभाग: युवा, किसान, व्यापारी एवं छात्र संगठन आंदोलन से जुड़े।
  • असहयोग आंदोलन का तत्काल प्रभाव: ब्रिटिश प्रशासन पर दबाव बना लेकिन 1922 में चौंरी-चौंरा कांड के कारण आंदोलन को विराम देना पड़ा।

5. आलोचनाएं एवं सीमाएँ

  • हिंसा में परिवर्तन: आंदोलन की मूल भावना अहिंसा थी, किंतु कुछ स्थानों पर हिंसा भड़क उठी, जो गाँधीजी के सिद्धांतों के विरुद्ध थी।
  • समर्थन की सीमितता: सभी वर्गों एवं समुदायों द्वारा आंदोलन का समान रूप से समर्थन नहीं मिला।
  • ब्रिटिश प्रशासन की प्रतिक्रिया: मामलों में कड़ी कार्रवाई की गई, नेताओं की गिरफ्तारी एवं दमन भी हुआ।
Key Concept

असहयोग आंदोलन

एक शांतिपूर्ण राष्ट्रीय आंदोलन जिसमें ब्रिटिश वस्तुओं व संस्थाओं का बहिष्कार तथा सरकारी सेवाओं से असहयोग किया गया।

WORKED EXAMPLES

उदाहरण 1: जलियांवाला बाग हत्याकांड और असहयोग आंदोलन Easy
जलियांवाला बाग हत्याकांड के किस प्रकार के प्रभावों ने असहयोग आंदोलन को बल दिया?

चरण 1: जलियांवाला बाग हत्याकांड में निहत्थे नागरिकों की ब्रिटिश सेना द्वारा निर्मम हत्या हुई।

चरण 2: यह घटना भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति गहरा विरोध उत्पन्न करने लगी।

चरण 3: इस आक्रोश ने महात्मा गाँधी सहित अन्य नेता के असहयोग आंदोलन को शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया।

उत्तर: जलियांवाला बाग हत्याकांड ने जनमानस में ब्रिटिश शासन के प्रति क्रोध एवं असहयोग के लिए प्रेरणा दी।

उदाहरण 2: असहयोग आंदोलन में खादी पहनने का महत्व Medium
असहयोग आंदोलन के दौरान खादी पहनने को क्यों बढ़ावा दिया गया?

चरण 1: ब्रिटिश वस्त्रों का बहिष्कार करने हेतु स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना आवश्यक था।

चरण 2: खादी स्थानीय उत्पादन थी, जिससे भारतीय कारीगरों को रोजगार मिलता था।

चरण 3: खादी पहनना ब्रिटिश वस्त्रों के विरोध तथा स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया।

उत्तर: खादी पहनना आर्थिक स्वराज तथा स्वदेशी को बढ़ावा देने का प्रतीक था।

उदाहरण 3: चौंरी-चौंरा कांड के कारण असहयोग आंदोलन क्यों रुका? Hard
असहयोग आंदोलन में गांधीजी ने चौंरी-चौंरा कांड के बाद आंदोलन को रोक दिया। इसके पीछे कारण स्पष्ट करें।

चरण 1: चौंरी-चौंरा में व्यापारियों के एक समूह ने ब्रिटिश पुलिसकारियों पर हमला कर उन्हें आग लगा दी।

चरण 2: यह हिंसा गांधीजी के सिद्धांत अहिंसा और सत्याग्रह के खिलाफ थी।

चरण 3: गांधीजी ने हिंसा फैलने से रोकने के लिए आंदोलन को तत्काल रोकने का निर्णय लिया।

उत्तर: हिंसा वृद्धि और गांधीजी के अहिंसात्मक नीति के विरुद्ध होने के कारण आंदोलन को स्थगित किया गया।

उदाहरण 4: असहयोग आंदोलन की सामाजिक प्रभाव सीमा Medium
किस प्रकार असहयोग आंदोलन के सामाजिक प्रभाव सीमित थे? इसे उदाहरण सहित समझाएँ।

चरण 1: आंदोलन ने सामाजिक सुधारों जैसे शराब का बहिष्कार एवं बाल विवाह के विरोध को बढ़ावा दिया।

चरण 2: किंतु भारत के विभिन्न इलाकों और वर्गों में पूर्ण समरसता नहीं बन सकी।

चरण 3: कुछ प्रदेशों में आंदोलन का समर्थन कम रहा तथा कमजोर वर्ग जैसे दलितों तक इसका प्रभाव सीमित रहा।

उत्तर: सामाजिक प्रभाव व्यापक होने के बावजूद आंदोलन का समर्थन सभी स्तरों पर समान नहीं था।

उदाहरण 5: असहयोग आंदोलन के अंतर्गत सरकारी संस्थाओं से बहिष्कार Easy
असहयोग आंदोलन के दौरान सरकारी संस्थाओं से असहयोग का क्या अर्थ था? कोई दो उदाहरण दें।

चरण 1: सरकारी संस्थाओं से असहयोग का अर्थ था उनकी सेवाओं का प्रयोग न करना।

चरण 2: इसका उद्देश्य ब्रिटिश प्रशासन को कमज़ोर करना था।

चरण 3: उदाहरण: (1) सरकारी नौकरियों को छोड़ देना, (2) न्यायालयों में पेश न होना।

उत्तर: सरकारी संस्थाओं से बहिष्कार आंदोलन की रणनीति का हिस्सा था ताकि ब्रिटिश शासन प्रभावित हो।

Tips & Tricks

Tip: असहयोग आंदोलन को समझने के लिए सबसे पहले जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन, और लॉर्ड कर्जन विरोध के बीच संबंध याद करें।

When to use: कहानी एवं तर्क आधारित प्रश्नों मे इन्हें जोड़कर उत्तर तैयार करते समय।

Tip: प्रधानमंत्री गाँधी के तीन मुख्य तरीकों- सत्याग्रह, अहिंसा एवं असहयोग को शब्दों में याद रखें।

When to use: आंदोलन की विशेषताओं के प्रश्नों में।

Tip: "खादी" को असहयोग आंदोलन का प्रतीक समझें; प्रश्नों में खादी पहनने के कारणों को आसान ढंग से याद कर सकेंगे।

When to use: बहुविकल्पीय व वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में।

Tip: चौंरी-चौंरा कांड को समझें और याद रखें कि हिंसा क्यों असहयोग आंदोलन को कमजोर करती है।

When to use: कारण-प्रभाव वाले प्रश्नों के लिए।

Tip: असहयोग आंदोलन के सीमित पहलुओं और आलोचनाओं को नोट कर लें, क्योंकि ये परीक्षा में भ्रम पैदा करते हैं।

When to use: परीक्षा में नेगेटिव प्लस पॉजिटिव टाइप प्रश्नों के लिए।

Common Mistakes to Avoid

❌ असहयोग आंदोलन को 1857 के विद्रोह के समान समझना
✓ असहयोग आंदोलन 1920 के दशक का अहिंसात्मक और जन-आधारित आंदोलन था
क्यों: 1857 का विद्रोह सैन्य एवं हिंसात्मक था, जबकि असहयोग आंदोलन अहिंसात्मक था और गांधीजी द्वारा संचालित था।
❌ सीधे सरकारी नौकरी छोड़ना आंदोलन के उद्देश्य को समझना
✓ असहयोग आंदोलन केवल बहिष्कार तथा अहिंसात्मक असहयोग का माध्यम था, न कि केवल नौकरी छोड़ना
क्यों: आंदोलन में स्कूल, न्यायालय आदि सभी सरकारी संस्थाओं से असहयोग था; केवल नौकरी छोड़ना पर्याप्त नहीं।
❌ असहयोग आंदोलन की समाप्ति को साम्प्रदायिक विघटन से जोड़ना
✓ असहयोग आंदोलन का विराम चौंरी-चौंरा कांड जैसी हिंसात्मक घटनाओं से हुआ, न कि पूरी तरह साम्प्रदायिक तनाव से।
क्यों: असहयोग आंदोलन में हिन्दू-मुस्लिम एकता बनी थी; इसका अंत मुख्य रूप से हिंसा में वृद्धि के कारण हुआ।
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