असहयोग आंदोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण चरण था, जिसने देश के विभिन्न वर्गों को ब्रिटिश शासन के विरोध में एकजुट किया। यह आंदोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में 1920 में शुरू हुआ और इसके माध्यम से भारतियों ने ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार, सरकारी संस्थाओं से असहयोग, तथा सविनय अवज्ञा के माध्यम से स्वतंत्रता की मांग तेज की।
असहयोग आंदोलन के प्रक्षेपण में तीन मुख्य घटक थे।
graph TD A[जलियांवाला बाग हत्याकांड] B[खिलाफत आंदोलन] C[लॉर्ड कर्जन का विरोध] A --> D[असहयोग आंदोलन का प्रारंभ] B --> D C --> D
असहयोग आंदोलन में अनेक राष्ट्रीय नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
असहयोग आंदोलन में मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्रवाइयाँ शामिल थीं:
असहयोग आंदोलन ने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:
चरण 1: जलियांवाला बाग हत्याकांड में निहत्थे नागरिकों की ब्रिटिश सेना द्वारा निर्मम हत्या हुई।
चरण 2: यह घटना भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति गहरा विरोध उत्पन्न करने लगी।
चरण 3: इस आक्रोश ने महात्मा गाँधी सहित अन्य नेता के असहयोग आंदोलन को शुरू करने का मार्ग प्रशस्त किया।
उत्तर: जलियांवाला बाग हत्याकांड ने जनमानस में ब्रिटिश शासन के प्रति क्रोध एवं असहयोग के लिए प्रेरणा दी।
चरण 1: ब्रिटिश वस्त्रों का बहिष्कार करने हेतु स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना आवश्यक था।
चरण 2: खादी स्थानीय उत्पादन थी, जिससे भारतीय कारीगरों को रोजगार मिलता था।
चरण 3: खादी पहनना ब्रिटिश वस्त्रों के विरोध तथा स्वतंत्रता का प्रतीक बन गया।
उत्तर: खादी पहनना आर्थिक स्वराज तथा स्वदेशी को बढ़ावा देने का प्रतीक था।
चरण 1: चौंरी-चौंरा में व्यापारियों के एक समूह ने ब्रिटिश पुलिसकारियों पर हमला कर उन्हें आग लगा दी।
चरण 2: यह हिंसा गांधीजी के सिद्धांत अहिंसा और सत्याग्रह के खिलाफ थी।
चरण 3: गांधीजी ने हिंसा फैलने से रोकने के लिए आंदोलन को तत्काल रोकने का निर्णय लिया।
उत्तर: हिंसा वृद्धि और गांधीजी के अहिंसात्मक नीति के विरुद्ध होने के कारण आंदोलन को स्थगित किया गया।
चरण 1: आंदोलन ने सामाजिक सुधारों जैसे शराब का बहिष्कार एवं बाल विवाह के विरोध को बढ़ावा दिया।
चरण 2: किंतु भारत के विभिन्न इलाकों और वर्गों में पूर्ण समरसता नहीं बन सकी।
चरण 3: कुछ प्रदेशों में आंदोलन का समर्थन कम रहा तथा कमजोर वर्ग जैसे दलितों तक इसका प्रभाव सीमित रहा।
उत्तर: सामाजिक प्रभाव व्यापक होने के बावजूद आंदोलन का समर्थन सभी स्तरों पर समान नहीं था।
चरण 1: सरकारी संस्थाओं से असहयोग का अर्थ था उनकी सेवाओं का प्रयोग न करना।
चरण 2: इसका उद्देश्य ब्रिटिश प्रशासन को कमज़ोर करना था।
चरण 3: उदाहरण: (1) सरकारी नौकरियों को छोड़ देना, (2) न्यायालयों में पेश न होना।
उत्तर: सरकारी संस्थाओं से बहिष्कार आंदोलन की रणनीति का हिस्सा था ताकि ब्रिटिश शासन प्रभावित हो।
When to use: कहानी एवं तर्क आधारित प्रश्नों मे इन्हें जोड़कर उत्तर तैयार करते समय।
When to use: आंदोलन की विशेषताओं के प्रश्नों में।
When to use: बहुविकल्पीय व वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में।
When to use: कारण-प्रभाव वाले प्रश्नों के लिए।
When to use: परीक्षा में नेगेटिव प्लस पॉजिटिव टाइप प्रश्नों के लिए।
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