👁 Preview — Study, Practice and Revise are open; mock tests and the rest of the syllabus unlock on subscription. Unlock all · ₹4,999
← Back to भारतीय इतिहास एवं राष्ट्रीय आंदोलन
Study mode

भारत छोड़ो आंदोलन

भारतीय इतिहास एवं राष्ट्रीय आंदोलन: भारत छोड़ो आंदोलन

परिचय

भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement), जिसे अगस्त आंदोलन भी कहा जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण चरण था। यह आंदोलन 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी द्वारा कांग्रेस की आठवें एजितोरियल (आजादी का प्रस्ताव) के तहत शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य भारत में ब्रिटिश शासन को समाप्त कराना था। इस आंदोलन ने भारतीय जनता को एक मजबूत राष्ट्रीय चेतना से संपन्न किया और स्वतंत्रता की ओर महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

आंदोलन की पृष्टभूमि

भारत छोड़ो आंदोलन शुरू होने से पहले भारत और विश्व दोनों ही राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों से गुज़र रहे थे।

  • वैश्विक द्वितीय विश्व युद्ध: 1939 में जब द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ, ब्रिटिश सरकार ने भारत को बिना किसी भारतीय प्रतिनिधि से सलाह लिए युद्ध में शामिल कर दिया। इससे भारतीय जनता में गहरा आक्रोश उत्पन्न हुआ।
  • आर्थिक कठिनाइयां: युद्ध के दौरान भारत की आर्थिक स्थिति बहुत बिगड़ी। युद्ध सम्बंधित उच्च करों, वस्तुओं की कमी और महंगाई से आम नागरिक पर गंभीर प्रभाव पड़ा।
  • ब्रिटिश अत्याचार: ब्रिटिश सरकार ने सभी विरोध प्रदर्शनों को कठोर दमन के माध्यम से दबाने का प्रयास किया। इससे स्वतंत्रता की मांग और तेज़ हुई।

आंदोलन के प्रमुख नेता एवं उनके भूमिका

भारत छोड़ो आंदोलन में कई राष्ट्रीय नेताओं ने भाग लिया, जिनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी।

  • महात्मा गांधी: आंदोलन के सर्वोच्च मार्गदर्शक, जिन्होंने 'डू या डाई' (करो या मरो) का नारा दिया। उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों को आधार बनाया।
  • सुभाष चंद्र बोस: हालांकि बोस कांग्रेस से अलग हो चुके थे, पर उनका प्रभाव आंदोलन की राष्ट्रीय ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक रहा।
  • पंडित जवाहरलाल नेहरू: गांधीजी के सहयोगी, जिन्होंने आंदोलन के दौरान युवाओं को संगठित करने में सक्रिय भूमिका निभाई।

आंदोलन की प्रमुख घटनाएँ और विशेषताएँ

यह आंदोलन अनेक किस्म की गतिविधियों से ओत-प्रोत था जिसमें विभिन्न प्रकार की रणनीतियाँ अपनाई गईं।

  • असहयोग और सत्याग्रह: इंडियन नेशनल कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन से पूरी तरह असहयोग करने का आह्वान किया। सरकारी कामों, स्कूलों और न्यायालयों का बहिष्कार किया गया।
  • जन आंदोलन एवं धरने: पूरे देश में बड़े पैमाने पर धरने, प्रदर्शन और हड़तालें हुईं, जिनमें लाखों लोग सम्मिलित हुए।
  • ब्रिटिश गिरफ्तारी एवं दमन: ब्रिटिश सरकार ने आंदोलन के नेताओं को गिरफ्तार कर कठोर कार्रवाई की। इससे आंदोलनकारियों का मनोबल टूटने की बजाय और बढ़ा।
graph TD    A[भारत छोड़ो आंदोलन शुरू]    A --> B[नेताओं की गिरफ्तारी]    B --> C[जनता में गुस्सा और प्रदर्शन]    C --> D[ब्रिटिश दमन और कूटनीति]    D --> E[स्वतंत्रता संग्राम को नया आयाम]

आंदोलन के परिणाम एवं महत्व

भारत छोड़ो आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी। इसके परिणामस्वरूप राष्ट्रीय एकता बढ़ी और ब्रिटिश शासन की कमजोरियां सामने आईं।

  • राष्ट्रीय एकता: विभिन्न वर्गों और समुदायों ने आंदोलन में भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया।
  • ब्रिटिश शासन की गिरावट: ब्रिटिश सरकार अपने वर्चस्व को बनाए रखने में असमर्थ महसूस करने लगी।
  • स्वतंत्रता की दिशा में प्रगति: आंदोलन ने स्वतंत्रता की मांग को वैश्विक स्तर पर मजबूत किया और 1947 में भारत की आज़ादी का मार्ग प्रशस्त किया।

मूल बातें संक्षेप में

भारत छोड़ो आंदोलन के मुख्य बिंदुओं का संक्षिप्त सारांश

  • 1942 में महात्मा गांधी द्वारा प्रेरित किया गया।
  • 'डू या डाई' का नारा दिया गया।
  • असहयोग, धरने और गिरफ्तारी इसकी विशेषताएँ हैं।
  • राष्ट्रीय एकता और स्वतंत्रता की दिशा में निर्णायक कदम।
Key Takeaway:

भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी और देश को स्वतंत्रता की ओर अग्रसर किया।

WORKED EXAMPLES (कार्य उदाहरण)

उदाहरण 1: भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत कब हुई? आसान
भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत किस वर्ष और किस नेता के द्वारा हुई थी?

चरण 1: भारत छोड़ो आंदोलन का प्रारंभ महात्मा गांधी ने किया था।

चरण 2: यह आंदोलन 8 अगस्त 1942 को पुणे में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र के दौरान आरंभ किया गया।

उत्तर: भारत छोड़ो आंदोलन 8 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी द्वारा शुरू किया गया था।

उदाहरण 2: भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान क्या-क्या गतिविधियाँ हुईं? मध्यम
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान भारतीय जनता ने किन-किन प्रकार के विरोध प्रदर्शनों का आयोजन किया?

चरण 1: आंदोलन के दौरान असहयोग और सत्याग्रह को अपनाया गया।

चरण 2: स्कूलों, न्यायालयों, और सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार किया गया।

चरण 3: जनसभाएँ, धरने, हड़तालें का आयोजन हुआ।

उत्तर: इस आंदोलन में असहयोग, धरना-प्रदर्शन, हड़ताल और सत्याग्रह जैसी गतिविधियाँ हुईं।

उदाहरण 3: भारत छोड़ो आंदोलन का ब्रिटिश सरकार पर क्या प्रभाव पड़ा? मध्यम
भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश शासन की स्थिति पर क्या प्रभाव डाला?

चरण 1: आंदोलन ने ब्रिटिश सरकार की पकड़ कमजोर की।

चरण 2: नेताओं की गिरफ्तारी के बावजूद जनता का विरोध बढ़ता गया।

चरण 3: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश शासन की निन्दा हुई।

उत्तर: यह आंदोलन ब्रिटिश शासन की राजनीतिक और नैतिक कमजोरी को उजागर करने में सहायक था।

उदाहरण 4 (परीक्षा शैली): भारत छोड़ो आंदोलन में किस नारे का प्रयोग किया गया? आसान
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सबसे प्रभावशाली नारा कौन-सा था?
(a) जय हिंद
(b) स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है
(c) डू या डाई
(d) वन्दे मातरम्

चरण 1: भारत छोड़ो आंदोलन के मुख्य नारे को पहचानना आवश्यक है।

चरण 2: 'डू या डाई' (Do or Die) नारा महात्मा गांधी ने दिया था, जो इस आंदोलन का प्रमुख नारा था।

उत्तर: (c) डू या डाई

स्पष्टीकरण: 'जय हिंद' तथा 'वन्दे मातरम्' अन्य स्वतंत्रता संग्राम के नारे हैं, और 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है' असहयोग आंदोलन का नारा था।

उदाहरण 5 (परीक्षा शैली): भारत छोड़ो आंदोलन का प्रमुख नेता कौन था? आसान
निम्नलिखित में से भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व किसने किया था?
(a) सुभाष चंद्र बोस
(b) महात्मा गांधी
(c) भगत सिंह
(d) पंडित नेहरू

चरण 1: आंदोलन का नेतृत्व कौन कर रहा था, जानना आवश्यक है।

चरण 2: भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था, जिन्होंने राष्ट्रीय आंदोलन को उभार दिया।

उत्तर: (b) महात्मा गांधी

स्पष्टकरण: सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्रता संग्राम के दूसरे आयाम से जुड़े थे, भगत सिंह क्रांतिकारी थे, और पंडित नेहरू भी नेतृत्‍व में थे, पर प्रमुख नेतृत्व महात्मा गांधी का ही था।

उदाहरण 6: भारत छोड़ो आंदोलन एवं असहयोग आंदोलन में क्या भेद था? कठिन
भारत छोड़ो आंदोलन और असहयोग आंदोलन के प्रमुख भेद संक्षेप में समझाइए।

चरण 1: असहयोग आंदोलन (1920-22) में प्रमुख था ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार, शिक्षा एवं न्यायालयों से असहयोग।

चरण 2: भारत छोड़ो आंदोलन (1942) में 'डू या डाई' नारा था, जिसमें पूर्ण ब्रिटिश शासन से तत्काल विद्रोह की बात कही गई।

चरण 3: असहयोग आंदोलन अपेक्षाकृत शांति पूर्ण था, जबकि भारत छोड़ो आंदोलन में व्यापक जन आक्रोश और कड़े दमन का दौर शुरू हुआ।

उत्तर: असहयोग आंदोलन आंशिक ब्रिटिश शासन का विरोध था जबकि भारत छोड़ो आंदोलन पूरी ब्रिटिश सत्ता को समाप्त करने का उद्देश्य लेकर आया था।

Tips & Tricks

Tip: भारत छोड़ो आंदोलन की तारीख याद करने के लिए '8 अगस्त 1942' का संकल्प लें क्योंकि यह कांग्रेस का आठवाँ सत्र था।

When to use: तिथियों एवं महत्वपूर्ण घटनाओं को याद करते समय।

Tip: आंदोलन के नेताऐं तीनों-गांधी, नेहरू और बोस-का मुख्य सम्बोधन उनके नाम के पहले अक्षरों के आधार पर 'जीएनबी' (GNB) स्मृति युक्ति बनाएँ।

When to use: नेताऒं की याददाश्त तेज करने के लिए।

Tip: 'डू या डाई' नारे को गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन का प्रमुख नारा समझें, जो आंदोलन की विद्रोह भावना को दर्शाता है।

When to use: स्वतंत्रता संग्राम के नारे पहचानते समय।

Tip: आंदोलन की प्रमुख घटनाओं को क्रमबद्ध याद करें: प्रारंभ -> गिरफ्तारी -> जन आक्रोश -> दमन -> परिणाम।

When to use: घटनाओं के अनुक्रम को समझने के लिए।

Tip: 'भारत छोड़ो आंदोलन' को समझने के लिए पहले '1857 का विद्रोह', 'असहयोग आंदोलन', 'सविनय अवज्ञा' को पढ़कर उसमें प्रगतिशीलता देखें, ताकि संबंध स्थापित हो सके।

When to use: इतिहास में घटनाओं को क्रमिक रूप से समझने के लिए।

Common Mistakes to Avoid

❌ भ्रामक रूप से मान लेना कि भारत छोड़ो आंदोलन में सभी नेता गांधीजी के अनुरूप थे।
✓ वास्तव में सुभाष चंद्र बोस ने गांधीजी के आहिंसात्मक रास्ते को अस्वीकार कर अलग रणनीति अपनाई।
यह गलती इसलिए होती है क्योंकि दोनों नेताओं की समान कालावधि में सक्रियता को समान रूप में समझ लिया जाता है, जबकि उनकी राजनीतिक धाराएँ भिन्न थीं।
❌ भारत छोड़ो आंदोलन को असहयोग आंदोलन या सविनय अवज्ञा आंदोलन से समान समझ लेना।
✓ प्रत्येक आंदोलन का अलग ऐतिहासिक संदर्भ, लक्ष्य और तरीका होता है; भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में शुरू हुआ और इसका उद्देश्य पूर्ण ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह था।
अलग आन्दोलन होने के कारण इनके तात्कालिक लक्ष्य, रणनीति भिन्न होते हैं जिन्हें स्पष्ट भेदभाव करना आवश्यक है।
❌ आंदोलन की तारीख गलत याद कर लेना (उदा. 1947 को भारत छोड़ो आंदोलन का वर्ष समझ लेना)।
✓ सटीक तारीख 8 अगस्त 1942 है, जो महात्मा गांधी के नेतृत्व में शुरू हुआ।
भारत की स्वतंत्रता 1947 को मिली जबकि स्वतंत्रता संग्राम की विभिन्न घटनाएँ अलग-अलग समय पर हुईं; इनकी तिथियों को भ्रमित न करें।
Curated videos per subtopic
Top YouTube explainers, AI-ranked for your exam and language. Unlocks with subscription.
Unlock

Try Practice next.

Progress tracking is paywalled — subscribe to mark subtopics as understood and save your streak.

Go to practice →
Ask a doubt
भारत छोड़ो आंदोलन · 10 free messages
Ask me anything about this subtopic. You have 10 free messages this session — chat history isn't saved in preview.