निर्णयन (Decision Making) का अर्थ है किसी समस्या या परिस्थिति पर सही विकल्प चुनकर उसका समाधान या परिणाम निर्धारित करना। यह मानव जीवन का एक अनिवार्य व्यवहारिक पहलू है, जहाँ व्यक्ति को विभिन्न विकल्पों में से किसी एक का चयन करना होता है। तार्किक तर्क के अंतर्गत निर्णय की प्रक्रिया का अध्ययन किया जाता है, जिससे न केवल सही विकल्प चुना जा सके बल्कि उसे समझदारी और प्रभावी ढंग से लागू भी किया जा सके।
निर्णयन की प्रक्रिया कई चरणों में संपन्न होती है, जिनका पालन करना आवश्यक होता है:
graph TD A[समस्या की पहचान] --> B[विकल्पों का विश्लेषण] B --> C[निर्णय लेना] C --> D[परिणाम का मूल्यांकन] D --> E[आगे के सुधार]
निर्णयन व्यक्ति एवं संगठन की सफलता के लिए आधारभूत है। गलत निर्णय से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं जबकि सही निर्णय से समस्या का स्थायी समाधान होता है। किसी भी प्रतियोगी परीक्षा या व्यवसायिक क्षेत्र में तार्किक निर्णयन क्षमता अत्यंत आवश्यक समझी जाती है।
तार्किक निर्णय वह होता है जो पूर्ण जानकारी, स्पष्ट सोच और मापनात्मक तुलना पर आधारित हो। इसमें सभी विकल्पों को तौलने के बाद सबसे अच्छा विकल्प चुना जाता है।
कई मामलों में सभी जानकारी उपलब्ध नहीं होती या परिणाम अनिश्चित होते हैं। ऐसे में निर्णय प्रायिकता के आधार पर लिए जाते हैं, जहाँ संभावित परिणामों की संभावना को अनुमानित किया जाता है।
यह सिद्धांत लागत, लाभ तथा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर आधारित होता है। इसका उपयोग व्यवसाय एवं वित्तीय निर्णयों में सर्वाधिक होता है।
चरण 1: विकल्पों (कार्ड, वॉलेट, नेट बैंकिंग) के फायदे-नुकसान का विश्लेषण करें।
चरण 2: कार्ड सुविधा अधिक विस्तृत और सुरक्षित है परंतु कुछ स्थानों पर वॉलेट अधिक त्वरित लेन-देन के लिए बेहतर हो सकता है।
चरण 3: नेट बैंकिंग को घर बैठे उपयोग करना आसान है लेकिन यह कार्ड या वॉलेट की तुलना में थोड़ा जटिल भी हो सकता है।
उत्तर: सुरक्षा और सुविधा के लिए कार्ड को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
चरण 1: प्रत्येक विकल्प की लागत, बिक्री की संभावनाएँ और अनुमानित लाभ की गणना करें।
चरण 2: मूल्य 150 रुपए पर लाभ प्रति इकाई अधिक लेकिन ग्राहक कम होंगे। 100 रुपए पर ग्राहक अधिक लेकिन प्रति इकाई लाभ कम।
चरण 3: 120 रुपए पर संतुलित लाभ और ग्राहक संभावित हैं। सर्वश्रेष्ठ विकल्प यही है।
उत्तर: कम्पनी को 120 रुपए की कीमत तय करनी चाहिए।
चरण 1: केवल वेतन हार्ड नम्बर का तुलना करना पर्याप्त नहीं, नरम लाभ (कार्य परिवेश, ग्रोथ अवसर) भी महत्वपूर्ण हैं।
चरण 2: यदि जॉब A में बोनस और ग्रोथ अधिक हैं, तो कुल लाभ जॉब A बेहतर है। यदि जॉब B का वार्षिक वेतन अधिक है लेकिन ग्रोथ कम है, तो दीर्घकालिक लाभ कम हो सकता है।
चरण 3: निर्णयकर्ता को अपने भविष्य लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के अनुसार विकल्प चुनना चाहिए।
उत्तर: यदि जॉब A का कुल लाभ (वित्तीय एवं गैर-वित्तीय) बेहतर है, तो जॉब A चुना जाना चाहिए अन्यथा जॉब B।
चरण 1: कुल गेंदों की संख्या, \( n(S) = 5 + 3 = 8 \)।
चरण 2: लाल गेंदों की संख्या, \( n(E) = 5 \)।
चरण 3: प्रायिकता का सूत्र है,
\[ P(E) = \frac{n(E)}{n(S)} = \frac{5}{8} \]
उत्तर: लाल गेंद आने की प्रायिकता 5/8 है।
चरण 1: निर्णय के लिए तार्किक दृष्टिकोण अपेक्षित होता है ताकि सही और यथार्थ विकल्प चुना जा सके।
चरण 2: भावनाएँ और पूर्वाग्रह (Bias) निर्णय में गलत दिशा दिखा सकते हैं।
चरण 3: बिना आधार के अटकलें निर्णय को अनिश्चित और अस्थिर बनाती हैं।
उत्तर: (c) तार्किक सोच सही आधार है।
When to use: जब कई विकल्पों का विश्लेषण करना हो।
When to use: अंतिम निर्णय लेने से पहले।
When to use: अनिश्चितता के मामलों में विकल्पों का चयन करते समय।
When to use: सिद्धांतात्मक प्रश्नों का त्वरित उत्तर देते समय।
When to use: आत्म-मूल्यांकन और उत्तर समीक्षा के दौरान।
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