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रस, छंद और अलंकार (Ras, Chhand & Alankar)

Theory

रस (Ras) — काव्य की आत्मा

रस का अर्थ है — आनंद। काव्य पढ़ने/सुनने से जो आनंद मिलता है, वही रस है।
भरतमुनि: 'रसस्य आत्मा' — रस काव्य की आत्मा है।

9 मुख्य रस + 1 (शांत) = 10 रस:

रस स्थायीभाव देवता रंग
श्रृंगार रति (प्रेम) विष्णु हरित
हास्य हास प्रमथ श्वेत
करुण शोक यम कपोत
रौद्र क्रोध रुद्र रक्त
वीर उत्साह इंद्र गौर
भयानक भय काल कृष्ण
वीभत्स जुगुप्सा (घृणा) महाकाल नील
अद्भुत विस्मय ब्रह्मा पीत
शांत निर्वेद विष्णु पीत
वात्सल्य वत्सल (ममता) (बाद में जोड़ा)

श्रृंगार रस: संयोग श्रृंगार (मिलन) + वियोग श्रृंगार (विरह)
रसराज/रसपति: श्रृंगार रस

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छंद (Chhand) — काव्य की लय

छंद वह विधा है जिसमें मात्रा, वर्ण, यति, गति के नियमों का पालन होता है।

छंद के दो मुख्य भेद:
1. मात्रिक छंद: मात्राओं की गणना
→ दोहा: 13+11 मात्राएं (विषम+सम चरण)
→ चौपाई: प्रत्येक चरण में 16 मात्राएं
→ सोरठा: 11+13 (दोहे का उल्टा)
→ रोला: 24 मात्राएं (11+13)
→ कुंडलियाँ: दोहा + रोला = 6 चरण
2. वर्णिक छंद: वर्णों की संख्या की गणना
→ इंद्रवज्रा (11 वर्ण), उपेंद्रवज्रा (11 वर्ण)
→ मंदाक्रांता, शार्दूलविक्रीडित, वसंततिलका

प्रमुख छंद और उनके लक्षण:
→ दोहा: पहला चरण 13 मात्रा, दूसरा 11 मात्रा
उदाहरण: 'मेरी भव बाधा हरो, रादुवा सुत तोय' — तुलसीदास
→ चौपाई: 16-16 मात्रा, अंत में दीर्घ (जगण निषिद्ध)
उदाहरण: 'जय हनुमान ज्ञान गुन सागर...' — तुलसीदास

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अलंकार (Alankar) — काव्य का श्रृंगार

अलंकार का अर्थ है — आभूषण/सजावट। काव्य की शोभा बढ़ाने वाले तत्त्व अलंकार कहलाते हैं।

दो मुख्य भेद:
1. शब्दालंकार (Sound-based):
अनुप्रास: एक ही वर्ण की आवृत्ति — 'चारु चंद्र की चंचल किरणें'
यमक: एक शब्द अलग-अलग अर्थों में — 'काली घटा का घमंड घटा'
श्लेष: एक शब्द के एक साथ कई अर्थ — 'रहिमन पानी राखिए'

2. अर्थालंकार (Meaning-based):
उपमा: दो वस्तुओं की तुलना — 'मुख मंडल चंद्रमा जैसा' (उपमेय, उपमान, साधारण धर्म, वाचक)
रूपक: उपमेय में उपमान का आरोप — 'तुम रमा हो, तुम उमा हो'
उत्प्रेक्षा: कल्पना/संभावना — 'मानो', 'जनु', 'जनहु', 'मनु'
अतिशयोक्ति: अत्यंत बढ़ा-चढ़ाकर — 'आँखों से खून के आँसू बह रहे'
अन्योक्ति: अप्रत्यक्ष कथन — 'नहिं पराग नहिं मधुर मधु' (रहीम)
विरोधाभास: विरोध का आभास — 'मैं निर्धन हूँ तो भी धनवान'
मानवीकरण: जड़ में चेतन — 'नभ की ऑंखें आँसू बहा रही हैं'

Key Table

विषयनामपहचान/लक्षणउदाहरण
रसश्रृंगारस्थायीभाव=रतिप्रेम-मिलन/विरह
रसवीरस्थायीभाव=उत्साहवीरता/पराक्रम वर्णन
रसकरुणस्थायीभाव=शोकविछोह/मृत्यु वर्णन
छंददोहा13+11 मात्राकबीर, तुलसी, रहीम
छंदचौपाई16+16 मात्रारामचरितमानस
अलंकारअनुप्रासवर्ण आवृत्तिचारु चंद्र की चंचल
अलंकारउपमा'जैसा/सा'मुख चंद्र जैसा
अलंकाररूपक'है ही' आरोपतुम उमा हो
अलंकारउत्प्रेक्षा'मानो/जनु'मानो बादल छा गया
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