तार्किक तर्क (Logical Reasoning) की शाखा में किसी कथन (Statement) से निहित, लेकिन प्रत्यक्ष न दर्शायी गयी मान्यताओं को धारणा (Assumption) कहते हैं। किसी दिया गया कथन तभी स्पष्ट और समझने योग्य बनता है, जब उससे जुड़ी धारणाएँ यथावत समझी जाएँ।
धारणा का मुख्य उद्देश्य है तर्कों की अंतर्निहित सचाइयों को खोलना, ताकि किसी निष्कर्ष की सटीकता या असत्यता का परीक्षण किया जा सके।
कथन-धारणा की प्रक्रिया निम्नानुसार समझी जाती है:
| तत्व | परिभाषा | उदाहरण |
|---|---|---|
| कथन (Statement) | वह वाक्य जो किसी विषय पर सटीक तथ्य या विचार रखता है। | "सभी छात्र मेहनत करते हैं।" |
| धारणा (Assumption) | कथन के आधार में छुपा योगदान या माना हुआ तथ्य। | "मेहनत से सफलता मिलती है।" |
धारणा, कथन को संपूर्ण अर्थ प्रदान करती है। बिना धारणा के कथन अक्सर अधूरा या भ्रमित करने वाला होता है।
धारणा ज्ञात करने के लिए निम्न बिंदुओं का ध्यान रखना चाहिए:
graph TD A[कथन पढ़ें और समझें] --> B{क्या कथन के पूर्ण अर्थ के लिए धारणा आवश्यक है?} B -- हाँ --> C[धारणा का विकल्प चुनें] B -- नहीं --> D[वह विकल्प असंबंधित] C --> E{क्या धारणा प्रत्यक्ष/छिपी हुई है?} E -- प्रत्यक्ष --> F[स्पष्ट धारणा मानें] E -- छिपी हुई --> G[अप्रत्यक्ष धारणा मानें]कथन-धारणा की परीक्षा हेतु यह आवश्यक है कि विकल्पों की तुलना की जाए और उनमें स्पष्टीकरण खोजा जाए कि कौन-सी धारणा कथन को सुनिश्चित करती है।
| कथन | संभावित धारणा | धारणा स्वीकार्य/अस्वीकार्य क्यों |
|---|---|---|
| यदि कोई व्यक्ति अपने कार्य में सफल है, तो वह प्रयासरत होगा। | सफलता के लिए प्रयास आवश्यक हैं। | स्वीकार्य; क्योंकि सफल होने के लिए प्रयास अनिवार्य है। |
| सभी नगरों में स्वच्छता अभियान चलाना चाहिए। | स्वच्छता अभियान से स्वास्थ्य में सुधार होता है। | स्वीकार्य; यह धारणा कथन का आधार है। |
| विकासशील देश में शिक्षा अति आवश्यक है। | देश का विकास शिक्षा द्वारा होता है। | स्वीकार्य; यह धारणा कथन के समर्थन में है। |
ध्यान दें कि कथन-धारणा, न्याय निगमन (Deductive reasoning) और कारण-प्रभाव (Cause-effect) जैसे अन्य तार्किक तर्कों से भिन्न हैं। न्याय निगमन में निष्कर्ष देने के लिए सभी आवश्यक तथ्य होते हैं, परंतु कथन-धारणा में धारणाएँ छिपी होती हैं। यह धारणा हमसे अपेक्षा करती है कि हम छुपे हुए तर्क को समझें।
चरण 1: कथन का अर्थ समझें कि अभ्यास और निपुणता का सम्बन्ध है।
चरण 2: विकल्प देखें जो धारणा बन सकती हैं।
चरण 3: विकल्प (b) 'निपुणता अभ्यास से आती है' कथन को सही तरीके से पुष्ट करता है। अन्य विकल्प कथन के विपरीत हैं।
उत्तर: विकल्प (b) सही धारणा है।
चरण 1: स्पष्ट करें कि कथन में कहा गया है छात्र शिक्षा के महत्व को समझते हैं।
चरण 2: विकल्पों में देखें कि किस धारणा से कथन समर्थित है।
चरण 3: विकल्प (c) 'शिक्षा लाभदायक है' छिपी हुई धारणा है जो कथन के बिना कहे सही होने को बताती है। अन्य विकल्प उपयुक्त नहीं क्योंकि वे या तो विरोधाभासी या अनावश्यक हैं।
उत्तर: विकल्प (c) सही धारणा है।
चरण 1: कथन में सरकार ने सड़कों की गुणवत्ता बढ़ाने हेतु धनराशि जारी की है।
चरण 2: धारणा पहचानें कि सरकार की रुचि और प्रतिबद्धता कथन का आधार है।
चरण 3: विकल्प (b) 'सरकार सड़कों के विकास में रुचि रखती है' सही धारणा है, अन्य विकल्प विरोधाभासी या असंगत हैं।
उत्तर: विकल्प (b) एक उचित धारणा है।
चरण 1: कथन का विश्लेषण करें, जहाँ 'सफल उद्यमी' और 'जोखिम लेने का साहस' बताया गया है।
चरण 2: धारणा के विकल्पों का परीक्षण करें।
चरण 3: विकल्प (a) 'जोखिम बिना सफलता संभव नहीं' कथन के समर्थन में सही धारणा है।
उत्तर: विकल्प (a) सही धारणा है।
चरण 1: कथन में पुस्तकालय जाने के प्रोत्साहन पर बल दिया गया है।
चरण 2: धारणा का परीक्षण करें कि प्रोत्साहन क्यों जरूरी है।
चरण 3: विकल्प (a) 'पुस्तकालय ज्ञान का स्रोत है' धारणा को पुष्ट करता है।
उत्तर: विकल्प (a) उपयुक्त धारणा है।
कब उपयोग करें: जब कथन में किसी निष्कर्ष की व्याख्या करनी हो।
कब उपयोग करें: प्रश्न में कई विकल्प असत्य लगे तो उन्हें तुरंत हटाएं।
कब उपयोग करें: जब सभी विकल्प प्रासंगिक लगें, तब।
कब उपयोग करें: परीक्षा से पूर्व अभ्यास के लिए।
कब उपयोग करें: जब कथन विशेष परिस्थिति पर आधारित हो।
कथन-धारणा तार्किक तर्क की एक महत्वपूर्ण शाखा है जिसमें किसी कथन के पीछे छुपी या स्वाभाविक मान्यताओं की पहचान की जाती है। इसके द्वारा हम किसी भी दिए गए तर्क की सटीकता, दृढ़ता और प्रासंगिकता का मूल्यांकन करते हैं। सही धारणा की समझ परीक्षाओं में सफल होने के लिए अनिवार्य है।
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