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राष्ट्रीय एकता

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Quick recall · 287 cards

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भारत की धार्मिक विविधता लोगों के जीवन पर कैसे प्रभाव डालती है? निम्नलिखित में से कौन से प्रभाव सकारात्मक हैं?
B · सांस्कृतिक समृद्धि, सहिष्णुता, सामाजिक मेलजोल और शैक्षणिक विकास
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भक्ति आंदोलन का प्रारंभ किया गया था-
(a) आलवार संतों द्वारा
(b) सूफी संतों द्वारा
(c) सूरदास द्वारा
(d) तुलसीदास द्वारा
A · आलवार संतों द्वारा
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सूफी आंदोलन ने किसे बढ़ावा दिया?
A) Religious conflict
B) Social harmony
C) Caste discrimination
D) Sectarianism
B · Social harmony
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सूफी गुरु और शिष्य के संबंध को क्या कहा जाता है?
A) Guru-Shishya
B) Pir-Murid
C) Ustad-Shagird
D) Malik-Servant
B · Pir-Murid
सूफी परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध को 'Pir-Murid' कहा जाता है, जहां पीर आध्यात्मिक मार्गदर्शक होता है और मुरीद शिष्य। यह बाइअत (समर्पण) पर आधारित होता है। इसलिए सही उत्तर B है।[2]
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भक्ति आंदोलन का प्रारंभ किया गया था-

(a) आलवार संतों द्वारा
(b) सूफी संतों द्वारा
(c) सूरदास द्वारा
(d) तुलसीदास द्वारा
A · आलवार संतों द्वारा
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सभी भक्ति संतों के मध्य एक समान विशेषता थी, कि उन्होंने-

(a) अपनी वाणी को उसी भाषा में लिखा, जिसे उनके भक्त समझते थे
(b) जप की सिफारिश की
(c) स्त्रियों को मंदिर जाने को प्रोत्साहित किया
(d) मूर्तिपूजा को प्रोत्साहित किया
A · अपनी वाणी को उसी भाषा में लिखा, जिसे उनके भक्त समझते थे
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महाराष्ट्र में भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक कौन थे और जिन्होंने 15 वर्ष की आयु में भागवत गीता पर एक प्रसिद्ध टिप्पणी लिखी?
B · ज्ञानदेव
ज्ञानदेव (ज्ञानेश्वर) महाराष्ट्र भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक थे। उन्होंने 15 वर्ष की आयु में 'ज्ञानेश्वरी' नामक भागवत गीता पर मराठी भाषा में प्रसिद्ध टीका लिखी। विकल्प B सही है।[6]
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अकबर का 'सुलह-ए-कुल' या 'सार्वभौमिक शांति' का विचार किस कारण विकसित हुआ? A. धार्मिक विद्वानों की कट्टरता को देखकर B. सैन्य विजयों के बाद C. आर्थिक सुधारों के लिए D. विदेशी यात्राओं से प्रेरित होकर
A · धार्मिक विद्वानों की कट्टरता को देखकर
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सिराजुद्दौला ने अंग्रेजों द्वारा किलेबंदी तोड़ने को अस्वीकृत कर देने के बाद कलकत्ता पर कब आक्रमण किया?
B · 1756 ई.
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ईस्ट इंडिया कंपनी ने दिल्ली पर नियंत्रण कब प्राप्त किया?
B · 1764 में
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लॉर्ड डलहौजी ने भारतीय शासकों के विद्रोह का कारण बनने वाली कौन-सी नीति लागू की?
B · व्यपगत सिद्धांत (डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स)
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झाँसी को अंग्रेजों ने कब अधिग्रहित किया?
D · 1853 में
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फ्रांसीसियों ने किस ब्रिटिश बस्ती पर कब्जा किया था?
C · मद्रास
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सर थॉमस रो को किसके दरबार में ब्रिटिश राजा जेम्स प्रथम के प्रतिनिधि के रूप में भेजा गया था?
B · जहाँगीर
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नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई थी?
C · 5th century
नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 5वीं शताब्दी में हुई थी। यह विश्वविद्यालय 600 से अधिक वर्षों तक फला-फूला और पूरी दुनिया में लोकप्रिय रहा। इसलिए सही उत्तर विकल्प C (5th century) है।
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बिहार में 1857 की क्रांति कब शुरू हुई थी?
B · 12 जून 1857
बिहार में 1857 की क्रांति 12 जून 1857 को शुरू हुई थी। यह मेरठ से शुरू हुई पहली स्वतंत्रता संग्राम थी, लेकिन बिहार में इसे 12 जून को नई गति मिली। इसलिए सही उत्तर विकल्प B है।
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मुंडेश्वरी देवी मंदिर, जो विश्व का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है, बिहार के किस जिले में स्थित है?
B · कैमूर
मुंडेश्वरी देवी मंदिर कैमूर जिले में स्थित है, जो पटना से लगभग 210 किमी की दूरी पर है। यह विश्व का सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। इसलिए सही उत्तर विकल्प B (कैमूर) है।
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बिहार को एक अलग प्रांत कब बनाया गया था?
B · 1912
बिहार को 1912 में बिहार एवं उड़ीसा के रूप में एक अलग प्रांत बनाया गया था। बाद में 1 अप्रैल 1936 को उड़ीसा को बिहार से अलग कर दिया गया। इसलिए सही उत्तर विकल्प B (1912) है।
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पटना मेडिकल कॉलेज की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
B · 1925
पटना मेडिकल कॉलेज की स्थापना 1925 में हुई थी। यह बिहार के आधुनिक विकास का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर था। इसलिए सही उत्तर विकल्प B (1925) है।
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बिहार को उड़ीसा से अलग कब किया गया था?
B · 1 अप्रैल 1936
बिहार को उड़ीसा से 1 अप्रैल 1936 को अलग किया गया था। इसके बाद बिहार एक स्वतंत्र प्रांत बन गया। इसलिए सही उत्तर विकल्प B है।
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बिहार में पहला मुख्यमंत्री कौन बना और यह कब हुआ?
B · श्री कृष्ण सिंह - 1937
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भारत के संविधान में पहला संशोधन किस राज्य के कारण किया गया था?
B · बिहार
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बिहार वह पहला भारतीय राज्य कौन सा था जिसने किस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई?
B · भूमि सुधार कानून में
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भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस कब मनाया जाता है?
B · 31 अक्टूबर
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राष्ट्रीय एकता दिवस किस व्यक्ति को समर्पित है?
B · सरदार वल्लभभाई पटेल
राष्ट्रीय एकता दिवस सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है, जिन्हें भारत के लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है। उन्होंने स्वतंत्र भारत में 562 रियासतों का एकीकरण किया। विकल्प B सही है।[6]
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राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत कब की गई थी?
B · 2014
भारत सरकार ने 2014 में राष्ट्रीय एकता दिवस की शुरुआत की थी ताकि सरदार पटेल के एकीकरण योगदान को सम्मानित किया जा सके। विकल्प B सही है।[1][2][3][4]
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राष्ट्रीय एकता दिवस पर कौन सी प्रमुख गतिविधि आयोजित की जाती है?
D · रन फॉर यूनिटी
राष्ट्रीय एकता दिवस पर 'रन फॉर यूनिटी' कार्यक्रम आयोजित किया जाता है जो राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को मजबूत करने के लिए होता है। विकल्प D सही है।[1][3][4]
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भारतीय संविधान में धर्म की स्वतंत्रता से संबन्धित कौन-कौन से अनुच्छेद हैं? Refer to the diagram below listing अनुच्छेद 25 से 28 तक।
B · अनुच्छेद 25 से 28
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करते हैं।
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भारतीय धार्मिक विविधता में पंच-पीर पूजा का क्या महत्व है? Refer to the diagram below illustrating राज्यस्थान में पंच-पीर पूजा।
B · यह धार्मिक सद्भाव एवं सांस्कृतिक एकीकरण का प्रतीक है
पंच-पीर पूजा भारतीय धार्मिक विविधता में विभिन्न समुदायों के बीच सांस्कृतिक एकता का दृष्टांत है।
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धार्मिक संवेदनशील अधिकारियों के तहत धर्म की स्वतंत्रता कौन-से अधिकार प्रदान करता है? Refer to the diagram below summarizing धार्मिक अधिकारी।
D · उपर के सभी विकल्प
भारतीय संविधान धर्म की स्वतंत्रता के तहत पूजा, शिक्षा, और धार्मिक स्थल निर्माण सहित सभी अधिकार प्रदान करता है।
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भारत में धर्मनिर्पेक्षता का क्या अर्थ है? Refer to the diagram below defining धर्मनिर्पेक्षता।
B · सरकार का सभी धर्मों से समान व्यवहार करना
धर्मनिर्पेक्षता का अर्थ है कि सरकार सभी धर्मों के प्रति समान और निष्पक्ष रहती है।
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नीचे दिए गए मानचित्र या तालिका के अनुसार, धातु में किस प्रकार की संघ्यात्मक संरचना होती है? Refer to the diagram below showing धातु में धातुओं का विहटन।
C · हिंदू धर्म
धातु में सबसे अधिक संघ्यात्मक हिंदू धर्म की पीढ़ियों में पाइ जाती है।
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धार्मिक व्यावहारिकता और धार्मिक सिद्धांतों में क्या अंतर होता है? Refer to the diagram below contrasting धार्मिक सिद्धांत और अभ्यास।
C · सिद्धांत ध्यान पर आधारित, व्यावहारिकता कर्मों पर
धार्मिक सिद्धांत विश्वास और शिखाओं पर केंद्रित होते हैं जबकि व्यावहारिकता आचरण और कर्मों पर निर्भर करती हैं।
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धातु में सामाजिक सम्बन्ध के लिए कौन-से तत्व महत्त्वपूर्ण हैं? Refer to the diagram below listing सामाजिक सम्बन्ध के तत्व।
D · उपयुक्त सीमा
सामाजिक सम्बन्ध में धार्मिक निर्णयता, सामाजिक समान्ता और सांस्कृतिक सममति सभी शामिल हैं।
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धार्मिक त्यौहार और अनुष्ठान किस प्रकार धार्मिक साधन को बढ़ावा देते हैं? Refer to the diagram below depicting धर्म त्यौहार।
C · सांस्कृतिक मेलजोल और एकतादायक उपाय के रूप में
धार्मिक त्यौहार सांस्कृतिक मेलजोल को बढ़ावा देते हुए लोगों के बीच सामाजिक सम्बंध मजबूत करते हैं।
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नीचे दिए गए विकल्पों में से "धार्मिक विवিধता" को किस प्रकार परिचित किया गया स जाता है? Refer to the diagram below explaining धार्मिक विविधता।
C · विभिन्न धर्मों का एक साथ होना
धार्मिक विविधता का तात्पर्य विभिन्न धर्मों का एक साथ अस्तित्व होना है।
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धारत् में धार्मिक विद्युत्‍ताओं की भूमिका क्या है?
Refer to the diagram below outlining धार्मिक विद्युत्ताओं के कार्य।
D · उपयुक्त दोनो पहलु विकल्प
धार्मिक विद्यालयन व केवल धार्मिक क्षेत्रों का प्रसार करते हैं बल्कि सामाजिक सदभाव भी बढ़ाते हैं।
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धार्मिक धार्मिक सदभावना के माहले में कौन-सा कथन सही है?
Refer to the diagram below illustrating धार्मिक सदभाव।
B · सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक स्तरो पर प्रयास आवश्यकीय हैं
धार्मिक सदभावना के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक सभी स्तरों पर प्रयास आवश्यक होते हैं।
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नीचे दिए गए में से कौन-सा धार्मिक संघर्श का कारण नहीं है?
Refer to the diagram below explaining धार्मिक संघर्श के कारण।
B · सांझा सांस्कृतिक विरासत
सांझा सांस्कृतिक विरासत धार्मिक संघर्श का कारण नहीं बल्कि सामाजिक समधान है।
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धार्मिक त्योहाओं में से कौन-सा त्योहार विभिन्न समुदायों को एक साथ जोड़ता है?
Refer to the diagram below highlighting महत्वपूर्ण त्योहार।
B · होली
होली का त्योहार विभिन्न समुदायों के बीच सदभाव एवं मेलजोल बढ़ाता है।
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जाइसे पंछी-पीर पूजा रागस्थान में जाती है, यह उदाहरण किस बात का संकेत है?
Refer to the diagram below depicting रागस्थान का पंछी-पीर पूजा।
B · धार्मिक सहिष्णुता और मेल-मिलाप
पंछी-पीर पूजा धार्मिक सहिष्णुता और समुदायों के मध्य मेल-मिलाप का प्रतीक है।
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धार्मिक सूत्रों का कौन-सा पक्का संदंशदातृ द्वारासमर्थित नहीं है? Refer to the diagram below summarizing धार्मिक सूत्रों।
C · धार्मिक अलोचनाओं का करण
संदंशदातृ धार्मिक विश्वास और पूजात्मक का समर्थन करता है, लेकिन किसी धर्म की आलोचना को समर्थन नहीं कर सकता।
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नीचे दिए गए में से कौन-सा उद्देश्यभारतीय की सांप्रदायिक सद्भावना को दर्शाता है? Refer to the diagram below illustrating सांप्रदायिक सद्भाव के उद्देश्य।
B · धार्मिक त्योहारों का एक साथ मनाना
धार्मिक त्योहारों का एक साथ मनाना सांप्रदायिक सद्भाव के महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
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भारत में धार्मिक विवादता का संर्क्षण किससे संभव होता है? Refer to the diagram below showing संर्क्षण के स्त्रोत।
A · सामाजिक न्याय और समर्थन से
धार्मिक विवादता का संर्क्षण सामाजिक न्याय, कानून और समर्थन की सहाय से ही संभव है।
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भारत में धर्म के प्रति असहिष्णुता का मुख्य कारण क्या है? Refer to the diagram below showing असहिष्णुता के उपचार।
A · शिक्सा और संवान बढ़ाना
शिक्षा औरसंवाद बढ़ाकर धार्मिक असहिष्णुता को कम किया जा सकता है।
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भारतीय मेँ धार्मिक विश्विद्यालय के संदर्भ मेँ नीचे दिये गये किस कथन मेँ त्रुटि नहीं है?
C · सिख धर्म मेँ गुरु ग्रंथ साहिब को अंतिम और निरंतर आध्यात्मिक मार्गदर्शक माना जाता है।
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निम्नलिखित मेँ से कौन सा कथन भारतीय धर्मिक विश्विद्यालय और संप्रदायिक सद्भाव के संदर्भ मेँ सही नहीं है?
B · ऐसा माना जाता है कि जैन धर्म की स्थापनाविहीन महावीर ने की जो बौद्ध धर्म से प्रभावित नहीं थे।
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भारतीय की धार्मिक विश्विद्यालय के संदर्भ मेँ कौन सा कथन सही है?
D · धार्मिक प्रश्नों में सहीश्नुत्ता की आवश्यकता सद्भावों से विविध प्रकार रही है।
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भारतीय मेँ धार्मिक विश्विद्यालय और संप्रदायिक सद्भाव के पर्यसँग मेँ नीचे哪个 कथन तathyात्मक रूप से सही है?
C · धार्मिक इस्लाम मेँ सूफिय़त का योगदान पंरपरा धार्मिक सहीष्णुता को बढ़ावा देने मेँ महत्वपूर्ण रहा।
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भारतीय के धार्मिक इतिहाѕ में धार्मिक विश्विद्यालय और सद्भाव के संदर्भ मेँ त्रुटि नहीं है?
C · धार्मिक इतिहास मेँ विविध धर्मों के अनेक संधि-संघ सतह-अस्तित्व भी रहा।
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भारत की सांप्रदायिक सद्भाव की दीर्घकालीन प्रकृति के संदर्भ में सबसे सटीक कथन कौन सा है?
B · इतिहासिक रूप से भारत में विभिन्न धर्मों के अनुयायियों ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान से सद्भाव बनाया।
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भारत के धार्मिक बहुलता के कथित आर्थिक में से कौन सा कथन सही है?
C · भारत में विभिन्न धर्मपरायण सह-अस्तित्व की संस्कृति को बढ़ावा देती हैं।
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भारत में धार्मिक विविधता और सांप्रदायिक सद्भाव के संदर्भ में "धार्मिक सहिष्णुता" की अवधारणा की सही व्याख्या क्या है?
B · यह विविध धार्मिक समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और पारस्परिक सम्मान है।
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भारत के धारा्मिक इतिहास में "धार्म संघ्राम" का अर्थ क्या है, निम्नलिखित में सबसे उपयुक्त विकल्प क्या है?
B · धार्मिक विकल्पों, मान्यताओं और दृष्ट्रिकोणों के बीच संघर्ष।
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भारत में धार्मिक बहुलता के संदर्भ में "धार्मिक संशोधन" का क्या अर्थ होता है?
B · धार्मिक प्रथाओं में अंतः-वैभागीय सुधार और पुनरसंरचना।
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भाषा की धार्मिक विविधता के संदरभ में 'धार्मिक समावेशीकरण' का क्या अर्थ है?
C · विभिन्न धार्मिक समुदायों को समझ में समान रूप से सम्मिलित करना।
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भाषा के धार्मिक इतिहा्स में नीचें में से कौन सा कथन सबसे अधिक सत्य है?
D · धार्मिक बहुलता ने भाषा में सांस्कृतिक समरसता और नवोन्मेष को बढ़ावा दिया है।
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भाषा की धार्मिक विविधता से जुड़ी कौन सी धारणा सही नहीं है?
B · सभी धर्म समान स्तर पर भाषा में फैले हुए हैं।
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भाषा में धार्मिक विविधता के संदर्भ में "पंथ" शब्द का सबसे उपयुक्त अर्थ क्या है?
B · धार्मिक विचारों और विश्वासों का अनुयायी समूह।
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भाषा में धार्मिक सभाओं बढ़ाने के लिए किसी पद्धति का सबसे ज्यादातर उपयोग माना जाता है?
B · सांस्कृतिक और धार्मिक उत्सवों का साझा उत्सव।
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भारत में धार्मि क विचारधारा और सांस्प्रदाइक समुदाय को प्रभारवित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक क्या है?
C · धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक समुदायों।
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भारत में जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत कौन सा है जो धार्मि क समुदाय को बढ़ावा देता है?
A · अहिंसा (Non-violence)
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नीचे दिए गए किसी उत्तरधन में भारत की धार्मि क विचारधारा का स्पष्ट और साकारात्मक प्रदर्शन होता है?
A · विभिन्न समाजों में न सिर्फ़ धार्मि क बल्की सामाजिक विरासतों का साझा उत्सव।
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भारत में धार्मि क विचारधारा और सामाजिक समुदाय को कमजोर करने वाला सबसे समान्य कारण कौन सा है?
A · सामाजिक और आर्थिक असमानता के कारण धार्मि क विखंडन का बढ़ना।
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सूफी आंदोलनों के इतिहास में किस शख्स को सूफी विचारधारा का संस्थापक माना जाता है? Refer to the diagram below showing प्राचीन सूफी संतोँ के नाम और उनके काल।
A · ख्वाजाह मुईनुद्दीन चिश्ती
ख्वाजाह मुईनुद्दीन चिश्ती को सूफी आंदोलन का संस्थापक और प्राचीन सूफी विचारधारा का अग्रदूत माना जाता है।
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निम्नलिखित में से कौन-सा सूफी आंदोलन की धार्मिक विशेषता नहीं है? Refer to the given characteristics:
१. सामाजिक की भावना
२. कठोर पवित्रता नियम
३. भक्ति एवं प्रेम पर जोर
४. धर्मों के बीच सह-अस्तित्व
B · कठोर पवित्रता नियम
सूफी आंदोलन में कठोर पवित्रता नियम नहीं बल्किः प्रेम, सामाजिक और सभी धर्मों के बीच सह-अस्तित्व की भावना प्रमुख थी।
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सूफी आंदोलनों के दौरान, निम्नलिखित में से कौन-सी शिख्षा न भेजी दी जाती थी? Refer to the diagram showing सूफी शिख्षाओं के प्राकार:
1. प्रेम और समरसता
2. भेदभाव और कट्टरता
3. आत्मानुभूति
4. सामाजिक न्याय
B · भेदभाव और कट्टरता
सूफी आंदोलन में भेदभाव और कट्टरता को प्रयोगसाहित नही किया जाता था। इसकी शिख्षा प्रेम, आत्मानुभूति, और सामाजिक न्याय पर केंद्रित थी।
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सूफी आंदोलन का सामाजिक प्रभाव किस प्रकार था? Refer to data below:
१. धार्मिक समुदाय के बीच विवाह बढ़ाना
२. सामाजिक सद्भाव बढ़ाना
३. सामाजिक उँच-नीच को बढ़ावा देना
४. केवल एक धार्मिक संप्रदाय का समर्थन
B · सामाजिक सद्भाव बढ़ाना
सूफी आंदोलन का प्रभाव समाज में सामाजिक और धार्मिक सद्भाव बढ़ाने वाला था, न कि विवाह या उँच-नीच को।
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निम्नलिखित सूफ़ी संतोँ में से कौन सूफ़ी आंदोलनों के प्रमुख समर्थक थे? (Refer to diagram showing सूफ़ी संतोँ के योग्यदान।)
B · ख्वाजा मोइनुद्दीन चौष्ठी
ख्वाजा मोइनуд्दीन चौष्ठी सूफ़ी आंदोलनों के प्रमुख समर्थक थे जो सामाजिक सद्भाव और धर्मों के मेल-जोल पर जोर देते थे।
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सूफ़ी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चौष्ठी की प्रमुख विशेषता क्या थी? (Refer to diagram mentioning उनकी विशेषताएँ।)
B · सामाजिक समरसता, प्रेम और सहिष्णुता
ख्वाजा मोइनुद्दीन चौष्ठी की विशेषता सामाजिक समरसता, प्रेम और सहिष्णुता को बढ़ावा देना थी।
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सूफ़ी आंदोलन की धार्मिक विचारधारा के अनुसार सूफ़ी स्थलों में किस प्रकार के सामाजिक कार्यक्रम होते थे? (Refer to diagram presenting सूफ़ी स्थलों और उनकी विशेषताएँ।)
B · सामाजिक सद्भाव और मेल-जोल के आयोजन
सूफ़ी स्थलों पर सामाजिक सद्भाव, मेल-जोल और भाँविचारे के आयोजन होते थे जो लोगों को जोड़ने का कार्य करते थे।
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सूफ़ी आंदोलन में धार्मीकीय समाज पर किस प्रकार का धार्मिक प्रभाव छोड़ा? (Refer to notes below: 1. कट्टरता बढ़ाना 2. विरुद्धता में समाजताला लाई 3. अल्पगाववाद को प्रोत्साहित किया 4. केवल एक धर्म को बढ़ावा दिया)
B · विरुद्धता में समाजताला लाई
सूफ़ी आंदोलन ने धार्मिक विरुद्धता में समाजताला और सहिष्णुता की भावना को बढ़ावा दिया।
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निम्नलिखित में से कौन सूफी आन्दोलनों की एक सामाजि क प्रमुख विशेषता है? Refer to the diagram of प्रमुख सूफी सामाजिक प्रथाओं।
A · सामाजिक समरसता का प्रवर्तक
सूफी आन्दोलन सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाला तथा, न कि संग़र्ष या कट्टरता का प्रचाःरक।
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सूफी आन्दोलन का प्रमुख सांप्रदायिक उद्देश्‍य कौन-सा था? Refer to text below:
1. सामाजिक-पसंद सहयोग
2. धार्मिक कट्टरता बढ़ाना
3. अलगाववादी सोच को प्रचाःरित करना
4. केवळ इस्लाम के विचार पर ज़ोर देना
A · सामाजिक-पसंद सहयोग
सूफी आन्दोलन का सांप्रदायिक उद्देश्‍य सभी समुदायों के बीच सामाजिक और सहयोगपूर्ण संबंध स्थापित करना था।
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सूफी संतों ने प्रेम और भाईचारے के सन्देश को दर्शाने हेतु कौन-सी भाषा का प्रयोग सर्वाधिक किया? Refer to chart showing भाषाई प्रयोग।
C · हिंदी/उर्दू
सूफी संतों ने आम जनता से जुड़ने के लिए हिंदी और उर्दू भाषा स्तिथानीय भाषाओं का अधिक प्रयोग किया।
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सूफी आन्दोलन के द्वारां प्रचालित 'सामाजिक सद्भावना' का प्रमुख तरीका निम्नलिखित में से कौन-सा था? Refer to points:
1. भेदभाव कम करना
2. प्रेम आदि भावती
3. सामाजिक समरसता
4. उपरोक्‍त सभी
D · उपरोक्‍त सभी
सूफी आन्दोलन के प्रमुख तरीकों में भेदभाव कम करना, प्रेम आदि भावती और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना था, अर्थात् उपरोक्‍त सभी।
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सूफी संतों के अनुुसार भक्ति का सर्वोत्तम मार्ग क्या था? Refer to diagram depicting भक्ति के प्रकार।
B · प्रेम और कρούणा पर आधारित भक्ति
सूफी संतों के अनुसार प्रेम और करुणा पर आधारित भक्ति सर्वोत्तम मार्ग था जो सभी के लिए समान था।
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सूफी संतोँ द्वाराआयोजित सामाजिक परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य क्या है?
B · सामाजिक वर्गायु में प्रास और सामाजिक सद्भाव फैलाना
सूफी संतोँ का उद्देश्य सामाजिक परियोजनाओं के माध्यम से प्रास और सामाजिक सद्भाव फैलाना था।
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सूफी आंदोलन में सामाजिक समस्यों को कम करने में मुख्य की?
A · जाति और धार्मिक भेदभाव
सूफी आंदोलन ने जाति और धार्मिक भेदभाव को कम करने में अहम भूमिका निभाई।
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सूफी आंदोलन की प्रमुख सांप्रदायिक विशेषता क्या थी? निम्नलिखित में से चुनें: 1. समाजता का प्रभाव 2. भेदभाव को बढ़ावा देना 3. हिंसा और द्वेष फैलाना 4. केवल एक धर्म का वर्चस्व
A · समाजता का प्रभाव
सूफी आंदोलन ने सामाजिक समता और धार्मिक समरसता का प्रचार किया।
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सूफी आंदोलन का प्रमुख आध्यात्मिक सिद्धांत कौन-सा था?
C · आत्मिक एकता और प्रेम
सूफी सिद्धांत आत्मिक एकता और प्रेम पर आधारित था, जो सभी धर्मों से ऊपर था।
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सूफी आंदोलन में निम्नलिखित में से किस माध्यम से समाज में समरसता फैलाने का प्रयास किया? Refer to diagrammatic representation of माध्यम।
B · संगीत और काव्य
सूफी आंदोलन में संगीत और काव्य के माध्यम से प्रेम तथा समरसता का प्रसार किया।
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सूफी आंदोलन में धार्मिक संस्कृति में किस प्रकार का योगदान दिया? Refer to summary:
1. सांस्कृतिक मेल-जोल में वृद्धि
2. धर्मों के बीच दूरी बढ़ाई
3. सांप्रदायिक द्वंगे बढ़ाए
4. शिष्य पर प्रतिबंध लगाया
A · सांस्कृतिक मेल-जोल में वृद्धि
सूफी आंदोलन ने विविध धार्मिक और सांस्कृतिक समुदायों के बीच मेल-जोल और समांज बढ़ाई।
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सूफी आंदोलन का प्रमुख भारतीय प्रभाव किस प्रकार दर्ज़ है? Refer to notes:
1. धार्मिक संघर्ष के रूप में
2. सांप्रदायिक सद्भाव की नींव के रूप में
3. राजनैतिक विद्रोह के रूप में
4. सांस्कृतिक पक्ष के रूप में
B · सांप्रदायिक सद्भाव की नींव के रूप में
सूफी आंदोलन को भारतीय इतिहास में सांप्रदायिक सद्भाव और मेल-जोल की नींव के रूप में देखा जाता है।
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निम्न में से कौन-सा सूफी आंदोलन का प्रमुख प्रतीक है? Refer to diagram of प्रमुख चिन्ह।
B · दरगाह
दरगाह सूफी आंदोलन का प्रमुख प्रतीक है जहाँ सूफी संतों के समाधि स्थल होते हैं।
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प्रमुख सूफी सांहित्यिक शीर्षक कौन-सा था? Refer to chart:
1. प्रेम और भक्ति
2. युध्द और वीरता
3. सांसाजिक असमानता
4. राजनैतिक शक्ति
A · प्रेम और भक्ति
सूफी सांहित्य का प्रमुख विषय प्रेम और भक्ति था।
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सूफी संतोँ द्वारा समाजिक संवेदनाओं के लिए कौन-सी गतिविधियाँ अधिक प्रचलित थीं? निम्नलिखित सूची देखें: 1. दरगाहों पर संवाद एवं भजन 2. रागनीतिक हड़तालें 3. धार्मिक शस्त्र वाद 4. कट्टर धार्मिक प्रचार
A · दरगाहों पर संवाद एवं भजन
सूफी संतोँ की संवेदनाएँ, भजन और प्रेमपूर्ण मुलाकातों के माध्यम से समाजिक संवेदनाएं बनाते थे।
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सूफी आंदोलनों के इतिहास में कौन सा शख्स अपनी शिख़्शाओं के माध्यम से सामाजिक समरसता और धरमनिर्पेक्षता को बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध है? नीचे दिए गए विकल्पों में से चुनें।
A · ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती
ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती सूफी आंदोलनों के प्रमुख संत थे जिन्होंने प्रेम, सहिष्णुता और सामाजिक समरसता की शिक्षा दी।
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मूख्य सूफी संतों ने जनमानस को किस प्रकार प्रभावित किया तथा उन्हें कौन-सा आंदोलनी जन-आधारित हुआ? नीचे दिए गए विकल्पों में से चुनें।
B · साधारण भावना में प्रेम औरекта का संदेश देना
सूफी संतों ने सरल भावना में प्रेम, सहिष्णुता और सामाजिक का संदेश आम जनता तक पहुँचाया, जिससे उनकी जन-आधार मज़बूत हुआ।
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सूफी आंदोलन के उद्देश्यों में कौन सा प्रमुख तत्व था जो सामाजिक सद्भावना को बढ़ावा देता था?
C · सभ्य मानवों में प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देना
सूफी आंदोलन का मूल उद्देश्य सभी इंसानो के बीच प्रेम, भाईचारे और सहिष्णुता को बढ़ावा देना था, जिससे सामाजिक सद्भावना स्थापित हो।
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सूफी संत और समाज के बीच किस प्रकार का संबंध संतों ने स्थापित किया? नीचे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प चुनिए।
B · संतों ने सामाजिक दशा को सुधारने के लिए आम लोगों से जुड़ाव किया
सूफी संतों का जनसामान्य से घनिष्ठ संबंध था और उन्होंने समाज में सुधार लाने के लिए मानवता और सहिष्णुता का उपदेश दिया।
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भारतीय सूफी आंदोलन में निम्नलिखित में से कौन सा उपदेश धार्मिक और सामाजिक सद्भाव को प्रोत्साहित करता था?
B · सभ्य धर्मों के प्रति प्रेम और सहिष्णुता
सूफी प्रचार ने सभ्य धर्मों के प्रति प्रेम और सहिष्णुता की शिक्षा दी, जिससे धार्मिक और सामाजिक सद्भाव बढ़ा।
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सूफी आंदोलनों और समाज के बीच संबंध के लिए कौन सा माध्यम सबसे अधिक प्रभावी था?
A · सामाजिक महफिलों और काव्वालियों
सूफी संतोँ ने काव्वालियों और सामाजिक महफिलों के द्वारा अपने संदेश को आम जन तक पहुँचाया जो संबंध का महत्वपूर्ण माध्यम था।
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सूफी आंदोलनों के दौरान मुगल शासन का सूफी संतोँ और उनके शक्तियों के प्रति नजरिया कैसा था?
B · समय-समय पर समर्थन और संरक्षण प्रदान करना
मुगल शासन ने कई बार सूफी संतोँ को संरक्षण दिया तथा उनमें से कई शक्तियों को सम्मानीय किया, हालाँकि यह संबंध हमेशा विरोधाभासी ही होता थी।
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सूफी आंदोलन की प्रकृति विशेषतः क्या थी, जिसने भारतिय समाज में कोई बदलाव स्थापित किया?
B · सामाजिक समरसता और प्रेम
सूफी आंदोलन ने सामाजिक समरसता, प्रेम और सहिष्णुता को बढ़ावा दिया, जो विभिन्न धर्मों के बीच सद्भाव स्थापित करने में मद्दगार था।
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सूफी संतोँ ने अनुशासनिक और जातिगत भेदभाव को कैसे देखा और उनका समाज में क्या थाम था?
B · सभी मानवों को समान समस्याकर भेदभाव को समाप्त करने का उपदेश दिया
सूफी संतोँ ने सभी इंसानों को समान माना और जातिगत भेदभाव को समाप्त करने तथा सामाजिक एकता को स्थापित करने का उपदेश किया।
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सूफी आंदोलन की धार्मिक शक्ति का मूल तत्व कौन सा था जिसने हिन्दू और मुस्लिम दोनों समाजों को प्रभावित किया?
B · सामाजिक एकता और प्रेम
सूफी शक्तियों का मूल तत्व सामाजिक एकता, प्रेम और भाईचारे पर आधारित था, जिसने भारतीय हिन्दू-मुस्लिम दोनों समाजों पर प्रभाव डाला।
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भारतीय सूफी आंदोलनों में किस प्रकार के सांप्रदायिक रिश्ते देखने को मिले?
B · धार्मिक सहिष्णुता और मेल-जोल
सूफी आंदोलन ने धार्मिक सहिष्णुता और मेलजोल को प्रोत्साहित किया, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच संबंध अच्छे बने।
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सूफी संतों ने मुस्लिम धर्म की किन विशेषताओं को मुख़्य रूप से सामाजिक सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण माना?
B · प्रेम, सहिष्णुता, और सहयोग समाज
सूफी संतों ने मुस्लिम धर्म की प्रेम, सहिष्णुता और सहयोग की सामाजिक विशेषताओं को अग्रिम बताया।
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भारतीय संदर्भ में सूफी संतों ने अपने उपदेश आम जनता तक पहुँचानें के लिए कौन सी भाशा का प्रयोग किया?
C · सधारण हिंदी/प्राकृत भाषा
सूफी संतों ने सामान्य जन तक पहुँचने के लिए सरल और सधारण हिंदी या स्थानीय प्राकृत भाषाओं का प्रयोग किया।
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बाल्मीकि, कबीर और मीरा जैसी भक्त संतों एवं सूफी संतों के बीच जो धार्मिक सहिष्णुता का संबंध था, उसे किस शब्द से व्यक्त किया जाता है?
C · सामाजिक सहिष्णुता और प्रेम
भक्ति और सूफी संतों ने सामाजिक सहिष्णुता, एकता और प्रेम का संदेश दिया, जो दोनों धार्मिकोँ की सीमा पार करता था।
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सूफी आंदोलन के सामाजिक प्रभावों में से कौन सा प्रमुख प्रभाव था जिसे अक्सर धार्मिक सद्भावना माना जाता है?
B · सामाजिक एकता और भाईचारे को बढ़ावा देना
सूफी आंदोलन ने सामाजिक सद्भाव, एकता और भाईचारे की भावना को बढ़ावा दिया, जिससे धार्मिक सद्भावना मजबूत हुई।
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सूफी आंदोलन के अभिजात वर्ग और आम जनता के बीच संबंध किस प्रकार था?
B · सूफी आंदोलन ने आम जनता के हितों और भावनाओं को प्रस्तुत किया
सूफी आंदोलन ने आम जनता के साथ जुड़कर सामाजिक सुधार और धार्मिक सहिष्णुता पर काम किया, न कि केवल अभिजात वर्ग तक सीमित रहा।
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सूफी संतों के जीवन और शिष्योंं किस प्रकार की निर्भेपष्टा (सदाविक स्तय) का परिचय देती है?
B · सभी मानवता के लिए समान सत्य और प्रेम
सूफी शिष्योंं सांर्वभौमिक प्रेम और सभी मानवों के लिए समानता की बात करती हैं, जो धर्म, जाति या वर्ग से ऊपर है।
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सूफी आंदोलन के धार्मिक विचारों में निम्न में से कौन सा सिद्धांत अधिक प्रभावी था जो सामाजिक सुधारण को सुनिश्चित करता था?
B · धार्मिक दया और करुणा
सूफी संतों ने करुणा, दया और मानवता के प्रति प्रेम की शिखा दी, जो धार्मिक सुधारण को बढ़ावा देता है।
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सूफी परिवर्तन में किन धार्मिक गुणों को सबसे अधिक दिया गया जो समाज में सुधार और शांति लाते हैं?
B · प्रेम, सहिष्णुता और मेल-जोल
सूफी परिवर्तन में प्रेम, सहिष्णुता और मेलजोल को अधिक माना गया है, जिससे सामाजिक शांति स्थापित होती है।
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सूफी आंदोलन ने धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित में से किस प्रकार के बैठकों और कार्यक्रम आयोजित किए?
A · सामाजिक और धार्मिक महफ़िलें जिनमें कव्वाली और ढोल-नगाड़े थे
सूफी संतों ने द्वाराआयोजित सामाजिक महफ़िलों और कव्वालियों ने आम लोगों में एकता और सद्भाव का संदेश फैलाया।
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सूफी औरदोलन के लिए निम्नलिखित में से कौन सा तत्काल प्रभाविक अभ्यास था जो इसे भारत की धार्मिक विविधता में सफल बना सका?
B · सहिष्णुता और समनुभूति
धार्मिक सहिष्णुता और समनुभूति सूफी आंदोलनों की मुख्य विशेषताएँ हैं जिन्हें इन्हें भारत की धार्मिक विविधता में सफल बनायाऔथा।
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सूफ़ी आंदोलन के प्रमुख सूफ़ी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की प्रमुख विशेषता क्या थी?
B · भक्ति और मान्यता के मध्य समाज के सभी सदस्यों को जोड़ना।
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धार्म में सूफ़ी आंदोलन के दौरान निर्मित में से कौन सा आंदोलन विशेष रूप से सूफ़ी प्रेम का प्रमाण थ था?
C · भक्ति आंदोलन
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धार्म में सूफ़ी आंदोलन के दौरान सूफ़ी संतों ने किस सामाजिक मुद्दे पर विशेष रूप से कार्य किया?
C · सामाजिक समानता और मनुष्यत्व को बढ़ावा देना
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सूफ़ी आंदोलन के संदर्भ में निम्न में से कौन सा कथन सूफ़ी संतों की भूमिका के बारे में सही है?
B · सूफ़ी संत धार्मिक और सामाजिक सुधार दोनों में सक्रिय थे।
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सूफी आंदोलनों की विरासत का थहीं जो इसके अन्य धार्मिक आंदोलनों से अलग करती है?
B · यह सहि जाटि और धर्म के लोगों के लिए हार्दिक प्रेम और सहभागिता का संदेŠ देता था।
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निम्नलिखित में से कौन-सा सूफी आंदोलन के दौरान स्थापित प्रमुख सूफी दरगाहों में से एक नहीं है?
C · सखा जलालुद्दीन की दरगाह, लखनऊ
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सूफी आंदोलनों के तहत किन तौर पर लेकर सूफी संतो ने हिंदू समाज से संवाद स्थापित किया?
C · भक्ति, प्रेम, और मानवता के स्तर पर।
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सूफी आंदोलन की प्रमुख विचारधारा क्षे फिट्रीय संस्कृतियों के संदर्भ में कैसी थी?
B · स्थानीय संस्कृतियों के साथ मिलीभगत से गु्लन-मिश्रणा।
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सूफी आंदोलन के संदर्भ में 'ख़ानक़ाह' किसका प्रतीनिधित्व करता है?
B · सूफी तपश्चर्या एवं आश्रम का केंद्र।
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सूफ़ी आंदोलनों के दौरान सूफ़ी संतोँ के संगीत प्रेेम को किस आधार पर सांप्रदायिक सद्भाव की प्रिक्रिया माना जाता है?
B · संघीत के मध्यम से सभी समुदायों को जोड़ना।
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सूफ़ी आंदोलन के विभिन्न से संबंधित निम्नलिखित में से कौन सा कथन गलत है?
D · सूफ़ी आंदोलन केवल राजनैतिक प्रभाव बढ़ाने के लिए था।
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सूफ़ी आंदोलन ने भारत में किस तरह की सामाजिक समस्याओं को संबोधित किया?
B · सामाजिक समानता और एकता को प्रोत्साहित किया।
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सूफ़ी आंदोलन की दृष्टि से, निम्नलिखित में कौन-सा विकल्प सही नहीं है?
C · धार्मिक अनुष्ठानों का सख्त पालन ही सबसे प्रमुख है।
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भारत में सूफ़ी आंदोलन के चलते सूफ़ी संतोँ का जो सामाजिक उत्पन्न हुआ, उसे किस नाम से जाना जाता है?
D · मक़दूम
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सूफी संतो के जीवन-अनुभव और उपदेशों में वे कौन-सा तत्व सबसे प्रमुख था?
B · दूसरों के प्रति सहिष्णुता और मानवीय सेवा।
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सूफी आनंदोलन ने भर्त में किस कारण से धार्मिक और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा दिया?
B · उनका प्रेम, इंसानियत और समरसता का उपदेश सर्वथा मे था।
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सूफी आनंदोलन के दौरान क्रिम्प में से किसने सूफी विचारधारा को लोकजीवन और भर्तीय संस्कृति के साथ जोड़ने का काम किया?
A · ख्वाजा मोइनुद्दीन चीख़्ती
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सूफी आनंदोलन की कौन-सी विशेषता भारतीय समाज में उसकी लोकप्रियता का मुख्य कारण थी?
B · प्रेम, सहिष्णुता, और सामाजिक समरसता की शिक्षा
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भक्ति आंदोलन की प्रमुख विशेषता कौन-सी थी?
A · धार्मिक आदम्बरों और अनुष्ठानों का अस्वीकार
भक्ति आंदोलन ने धार्मिक सत्कार्यों में आदम्बरों और अनुष्ठानों का विरोद्ध किया और सरल श्रद्धा को अपनाया था।
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निम्नलिखित में से भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत कौन नहीं हैं?
D · संत तुकडोजी महाराज
संत तुकडोजी महाराज भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों में शामिल नहीं हैं, जबकि रामानंद, कबीर और मीराबाई भक्ति आंदोलन के प्रमुख संत थे।
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भक्ति आंदोलन में किस प्रकार की सामाजिक समानता का संदेश किया?
A · जाति प्रथा और धर्मान्धता से मुक्ति
भक्ति आंदोलन ने जाति आधारित वैदर्भाव और धर्मान्धता के खिलाफ आवाज़ उठाई और सामाजिक एकता का प्रचार किया।
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निम्न में से भक्ति आंदोलन की भाषोलिक विषटा में अंतर्गत कोन-से क्षेत्र आते थे?
A · उत्तर भारत, दक्षिण भारत और महाराष्ट्र
भक्ति आंदोलन उत्तर भारत के सहित-सहित दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में भी विशिष्ट हुआ था।
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भक्ति आंदोलन की कूटि और दृष्टीकोंण का सही मिला क्या है?
A · सामाजिक सुधार और ओंछे-बुजुर्ग वर्ग की आलोचना
भक्ति आंदोलन ने सामाजिक बुराइयों का विरोध किया और जातिवाद, रूढ़िवादी के खिलाफ आवाज़ उठाई।
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भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतो की परंपरा में सामान्य और सांप्रदायिक प्रथाएँ किस प्रकार प्रस्तुत हुईं?
A · सभी संप्रदायिक भेदों को समाप्त करने वाला एकता का संदेश
भक्ति आंदोलन के संतों में सभी धार्मिक संप्रदायों के भेदभाव को मिटाकर भावनात्मक एवं सामाजिक एकता को बढ़ावा देते थे।
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भक्ति आंदोलन की प्रमुख संप्रदायिक विशेषता क्या थी?
A · धार्मिक विश्वासों में सरलता और भक्ति के माध्यम से मोक्ष
भक्ति आंदोलन ने अपने सरल और सार्वभौमिक धार्मिक विश्वासों के माध्यम से मोक्ष और भगवाना की भक्ति पर जोर दिया।
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निम्नलिखित में से भक्ति आंदोलन के सामान्य प्रारंभ किसने किया?
A · संतों ने जाति-भेद तथा ऊँच-नीच के भेद को समाप्त कराने का प्रयास किया
भक्ति आंदोलन के संतों ने सामाजिक और जातिगत भेद समाप्त करने तथा जातिवाद का विरोध किया।
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भक्ति आंदोलन के प्रमुख उद्देश्यों में से कौन-सा उद्देश्य सम्मिलित नहीं है?
C · सिंहासन संघर्ष
भक्ति आंदोलन का उद्देश्य सिंहासन संघर्ष नहीं था बल्कि सामाजिक और धार्मिक समानता और भक्ति था।
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भक्ति आंदोलन की प्रमुख सामाजिक प्रेरणा क्या थी?
A · सामाजिक विषमता और धार्मिक रूढ़िवादी का विरोध
भक्ति आंदोलन ने सामाजिक विषमता और धार्मिक अंधविश्वास से लड़ने हुए समाज में सुधार की कोशिश की।
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निम्नलिखित में से कौन-सी बात भक्ति आंदोलनों के धार्मिक एवं सांस्‍कृतिक आंदोलन को दर्शाती है?
A · भक्तों ने प्रदेसीय भावनाओं में कविताओं और भजन बनाने जनधारणा सूचित की
भक्ति आंदोलनों के संतो ने लोक भावनाओं में भजन, कीर्तन और साहित्य रचकर आम जन तक धार्मिक भावनाओं को पहुँचाया।
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भक्तिक आंदोलन के प्रारंभ किस काल में हुआ था एवं इसका मुख् य उद्देश्य क्‍या था? \( \text{(Refer to the timeline)} \)
A · 12वीं सदी में, सामाजि क एवं धा रमि क सुधार के लिए
भक्तिक आंदोलन का प्रारंभ 12वीं सदी में हुआ था एवं इसका मुख् य उद्देश्य सामाजिक एवं धार्मिक सुधार करना था।
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निम्नलिखित में से कौन-सा भक्तिक आंदोलन की प्रमुख संप्रदायों में से एक नहीं है?
C · जैन संप्रदाय
जैन संप्रदाय भक्ति आंदोलन का हिस्सा नहीं था; यह एक स्वतंत्र धार्मिक परंपरा है। भक्ति आंदोलन में प्रमुखतः वैष्णव, शैव तथा संत परंपरा प्रमुख थीं।
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भक्तिक आंदोलन के हिन्दू धर्म पर क्या प्रभाव पड़े थे? \( \text{(Refer to the social reform chart)} \)
A · जाति प्रथा में सुधार और धार्मिक समरसता बढ़ी
भक्तिक आंदोलन ने जाति प्रथा में सुधार किया और भूमि वर्गों में धार्मिक समरसता बढ़ाई।
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निम्नलिखित में से कौन-सा भक्तिक आंदोलन के प्रमुख महाकाव्यों में से एक है?
A · गीता गोविंद
गीता गोविंद जयदेव द्वारा रचित भक्ति काव्य है, जो भक्ति आंदोलन के महत्वपूर्ण साहित्य में शामिल है।
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भक्तिक आंदोलन के दौरान संत कबीर का योगदान किस क्षेत्र में विशेष था?
A · सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता
संत कबीर ने सामाजिक समरसता और धार्मिक एकता के लिए कड़ी आलोचना की और भक्ति आंदोलन को आगे बढ़ाया।
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भक्ति आंदोलन के धार्मिक और सांस्‍कृतिक प्रथाओं पर से कौन-सी बाधा सही नहीं है?
C · यह केवलUCH वार्गों तक सीमित था
भक्ति आंदोलन केवलUCH वार्गों तक सीमित नहीं था, बल्कि यह आम जनता में भी अत्यंत लोकप्रिय था।
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भक्ति आंदोलन के काळ में धार्मिक उत्सव के लिए किस प्रकार के तत्व महत्वपूर्ण थे?
A · एकेश्वरवाद और साधु-संतोँ द्वारा प्रचार
भक्ति आंदोलन में एकेश्वरवादी विचारधारा और संत व साधु अपनै उपदेशों के माध्यम से धार्मिक उत्सव लगाए।
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निर्म में से किस भक्ति कवि ने हिंदी भाषा में भक्तिचाहत की नींव रखी?
D · कबीर
संत कबीर ने हिंदी भाषा में भक्तिचाहत की स्थिति की ओर सरल भाषा में सामाजीक व धार्मिक संदेश दिए।
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भक्ति आंदोलन के धार्मिक सद्भाव में योगदान कौन-सा था?
A · धार्मिक सुधारस्ता और विचारण संस्थाओं का मेल
भक्ति आंदोलन ने विचारण धार्मिक संस्थाओं के बीच सद्भाव और मेल-जोल को बढ़ावा दिया।
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भक्ति आंदोलन के किस प्रभाव्त्व भूमिका के प्रभावान सूत्र को आपके परम् हित के रूप में माना?
B · संत मीराबाई
संत मीराबाई ने प्रभावान कर्षण की भूमिका को अपने जीवन का आदर्श माना और अपने गीतों के माध्यम से इसकी अभिव्यक्ति की।
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भारत में साँझी विरासत का क्या अर्थ है?
A · विश्‍वसनीय सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों की साझा सांस्कृतिक विरासत
साँझी विरासत का अर्थ है विश्वसनीय सांस्कृतिक और धार्मिक समूहों की जो साझा सांस्कृतिक विरासत होती है, जो सामाजिक समूह को बढ़ावा देती है।
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भारतीय समाज में सांप्रदायिक सद्भाव कैसे प्राप्त होता है?
A · धार्मिक त्योहारों और परंपराओं के साझा आयोजन से
सांप्रदायिक सद्भाव भारतीय समाज में विश्वसनीय धार्मिक समुदायों के त्योहार और परंपराओं को मिल-जुलकर मनाने से प्राप्त होता है।
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राजस्थान में पंच-पीर की पूजा किस प्रकार धार्मिक सद्भाव का उदाहरण है?
A · सभी धर्मों के पवित्र स्थानों को एक साथ स्वीकारा करना
पंच-पीर की पूजा इस बात का प्रतीक है कि धार्मिक धर्मों के पवित्र व्यक्तियों को सभी धर्मों के लोग पवित्र मानते हैं, जो सांप्रदायिक सद्भाव को दर्शाता है।
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भारत के संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता के कौन से अनुच्छेद धार्मिक स्वतंत्रता का पालन करने का अधिकार देते हैं?
A · अनुच्छेद 25 से 28
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 सभी धार्मिक लोगों को अपने धर्म की स्वतंत्रता और उसकी पूजा-अर्चना करने का अधिकार देते हैं।
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साँझी विरासत और सांप्रदायिक सद्भाव के बीच मुख्य अंतर क्या है?
A · साँझी विरासत साझी होकर है, सद्भाव सामाजिक मेलजोल है
साँझी विरासत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक वस्तुओं का साझा होकर है जबकि सांप्रदायिक सद्भाव धार्मिक समुदायों के बीच सामाजिक मेलजोल और समझ को दर्शाता है।
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भारतीय समाज में धार्मिक विकल्पता को स्वीकार करने के लिए क्या आवश्यक है?
A · समाज के आवश्यकताओं और सहिष्णुता
धार्मिक विविधता को स्वीकार करने के लिए सभी सामाजिक समूहों को समाज आवश्यकताओं और सहिष्णुता प्रदान करनी होती है।
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राजस्थान में पंच-पीर की पूजा सांप्रदायिक सद्भाव का उदाहारण क्यों है?
A · क्योंकि यह हिंदू और मुस्लिम दोनोँ धर्मों की श्रद्धा का संयोजन है
पंच-पीर की पूजा हिंदू और मुस्लिम दोनोँ धर्मों के प्रति सम्मान को दर्शाती है, जो सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल है।
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भारतीय संविधान के अनुसार किसे धर्म के आधारिक धर्म क्यों नहीं माना गया?
A · धार्मनिर्पेक्ष तथा रक्षण के लिए
भारतीय संविधान धर्मनिर्पेक्षता बनाये रखता है जिससे सभी धर्मों को समान सम्मान और स्वतंत्रता प्राप्त हो।
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किस प्रकाेर धार्मिक विविधता भारतीय समाज में योग्यतान देती है?
A · साझी विचारत और परस्पर सम्मान के माध्यम से
धार्मिक विविधता धार्मिक में सांस्कृतिक सद्भाव और एकता को साझा विचारत और सम्मान के माध्यम से बढ़ावा देती है।
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भारतीय में सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए कौन-सा तरीका सबसे प्रभावी है?
A · धार्मिक शिष्यता में सहिष्णुता और विविध धर्मों की समृद्धि को बढ़ावा देना
धार्मिक शिष्यता में सहिष्णुता और विविध धर्मों की समृद्धि को प्रोत्साहित करने से सद्भावना बढ़ती है।
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भारतीय धार्मिक संरचना का संविधानिक आधार कौन-सा है?
A · धार्मिकपेटक्ता का सिद्घांत
भारतीय संविधान का धार्मिकपेटक्ता का सिद्घांत सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और स्वतंत्रता प्रदान करता है।
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भारत में धार्मिक संध्‍ाव के संदर्भ में "साधी विचारस्त" क्या दर्शाती है? नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए।
A · सभी धर्मों की समान-सममानीय सांस्कृतिक धरोहर
साधी विचारस्त का अर्थ है विविध धर्मिक और सांस्कृतिक समुदायों की साझा और समान-सममानीय संस्कृति और ऐतिहासिकता।
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भारत में धार्मिक विविधता का सबसे बड़ा लाभ क्या है?
A · सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना
धार्मिक विविधता भारत की संस्कृति को समृद्ध करती है और विभिन्न समुदायों के बीच सह-अस्तित्व और समरसता को प्रोत्साहित करती है।
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निम्नलिखित में से कौन सा विविधताएँ भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का संरक्षक करता है?
A · धारा 25-28
धार्मिक स्वतंत्रता के अनुच्छेद 25-28 सभी नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करते हैं।
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भारत में धार्मिक समुदाय को बढ़ावा देने के लिए किसने पं. पीर पूजा़ की स्थापना की?
A · राजस्थान के सूफी संतों ने
राजस्थान में सूफी संतों द्वारा पं. पीर पूजा की परंपरा शुरू की गई, जो विविध धार्मिक समुदायों के धार्मिक सद्भाव का प्रतीक है।
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भारत की धार्मिक विविधता में निम्नलिखित में से कौन-सा धर्म सबसेप्राचीन है?
A · हिंदू धर्म
हिंदू धर्म भारत का सबसे प्राचीन धर्म है, जिसका इतिहास हजारों वर्षों पुराना है।
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धार्मिक संस्कृतियों के तहत किसी अधिकारी का संकल्प भरत के संविधान में किया गया है?
A · धर्म मानने, पूरा करने या अपनाने का अधिकारी
धार्मिक संकल्पधारक धर्म मानने, पूरा करने तथा अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार जीवनीयापन करने के अधिकारी की सुरक्षा करता है।
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सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए कौन-सा तर्कसंगत सर्वश्रेष्ट प्रभार मानना जाता है?
A · धार्मिक आपसी संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
धार्मिक समुदायों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से आपसी समझ और सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
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भारत में धार्मिक अम्लता और सद्भाव के प्रति अधिकार कौन-सा है?
A · धार्मिक संसंवर्त्ता और समानता का सिद्धांत
धार्मिक संसंवर्त्ता एक समानता के सिद्धांत द्वारा भारत में धार्मिक सद्भाव के मुख्‍य आधार हैं।
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भारत सरकार ने धार्मिक सद्भाव के लिए किस प्रकार की नीतियाँ अपनाई हैं?
A · धार्मिक संस्थाओं की रक्षा के साथ समानता को प्रोत्साहित करना
सरकार धार्मिक संस्थाओं की सुरक्षा करते हुए समानता एवं सद्भाव बनाए रखने वाली नीतियाँ अपनाती है।
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सांप्रदायिक सद्भाव किस प्रकार भारतीय सामाजिक व्यवहार के लिए आवश्यक है?
A · क्योंकि यह सामाजिक स्थिरता और एकजुटता बनाए रखता है
सांप्रदायिक सद्भाव सामाजिक स्थिरता और सभी समुदायों की समान भागीदारी बनाए रखता है।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक विचारधारा के संदरभ में निम्न में से कौन सा कथन सही है?
C · धार्मिक विचारधारा के अनुसार सामाजिक व्यवस्था भी विधिमान थी
मध्यकालीन भारत में विविध धार्मिक थे, लेकिन सामाजिक व्यवस्था और मेलजोल के माध्यम से, जिससे धार्मिक सद्भाव बना रहता था।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक विचारधारा के बीच धार्मिक संबंध क्यों महत्वपूर्ण माने जाते हैं?
A · इससे राजनैतिक स्थिति बनी रहती थी
धार्मिक समुदायों में मध्यकालीन भारत में विविध धार्मिक के बीच मेलजोल और संयुक्त शासकों को संभव बनाया, जिससे राजनैतिक स्थिति बनी रही।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक विचारधारा के किस उदाहरन से सांप्रदायिक सद्भाव प्रदर्शित होता है?
A · राजस्थान में पंच-पीर की पूजा
राजस्थान में पंच-पीर की पूजा हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों की आस्थाओं को दर्शाती है और धार्मिक सद्भाव का अच्छा उदाहरण है।
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मध्यकालीन काल में हिंदू-मुस्लिम रिश्तों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा सही नहीं है?
B · धार्मिक विचारधाराओं के कारण संदेह उत्पन्न रहता
मध्यकालीन भारत में जटिल कक्ष-क्षेत्र संघर्ष हुआ, तथापि हमेशा शत्रुत्व का वातावरण नहीं था; कई बार सहयोग और धार्मिक सद्भाव भी प्रबल थी।
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सांप्रदायिक सद्भाव के लिए मध्यकालीन भारत में कौन सा प्रमुख तत्व माना गया?
B · सांस्कृतिक और सामाजिक मेलजोल
सांप्रदायिक सद्भाव के लिए विविध धर्मों के बीच सांस्कृतिक एवं सामाजिक मेलजोल अहम् था जो सह-अस्तित्व को संभव बनाता था।
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मध्यकालीन भारत में हिन्दू-मुस्लिम सांस्कृतिक प्रभाग का क्या कारण था?
B · सांस्कृतिक संर्घषण और नवनव प्रतिभाओं का होना
धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता के कारण यह शैलिगत, संगीतमय एवं काव्य क पुष्ट्रों में नवनव प्रतिभाओं हुआ जिसने सांस्कृतिक संघर्ष को दिया।
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मध्यकालीन भारत में सूफी संतों का धार्मिक सद्भाव में क्या योगदान था?
B · धार्मिक सहिष्णुता और मेलजोल को बढ़ावा देना
सूफी संतों ने सभी धर्मों के बीच प्यार, सहिष्णुता और संवाद को प्रोत्साहित किया जिससे धार्मिक सद्भावना बढ़ी।
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राजस्थान में पंछ-पीर की पूजा का क्या सांस्कृतिक महत्व है?
B · यह हिन्दू-मुस्लिम एकता और सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है
पंछ-पीर पूजा हिन्दू-मुस्लिम दोनों समुदायों द्वारा की जाती है और यह धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक सम्मिलन को दर्शाता है।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक तंत्र और उष्का सांस्कृतिक प्रभाव क्या था?
B · धार्मिक तंत्र सांस्कृतिक समरसता पैदा करता था
धार्मिक तंत्र सांस्कृतिक नीयम, सांस्कृतिक व्य्वहार और मेलजोल को नियन्त्रित करता था जिससे समाज में सांस्कृतिक समरसता बनी रहती थी।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक स्र्वंतर्ता का सबसे प्रमुख आधार क्या था?
B · अंतरधार्मिक संवाद और सहिष्णुता
अंतरधार्मिक संवाद और सहिष्णुता ने विभिन्न धर्मों को स्वतंत्र और समान रूप से जीवित स्थिति बनाए रखने की नींव दी।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक विचारों के मुखाबले सांस्‍कृतिक संबंध कैसा बना रहा?
B · सांमाजिक मेलजोल और सांस्‍कृतिक आदान-प्रदान से
धार्मिक और सांस्‍कृतिक मेलजोल ने संबंध को प्रबल बनाया रूढ़ा जिससे समाज में सांमनजस्य बना रहा।
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मध्यकालीन भारत में धर्मनिर्पेक्षता की प्रधान विशेषता क्या थी?
B · सभी धर्मों को समान अधिकार देना
मध्यकालीन भारत में अल्ग-अलग धर्मों को समान अधिकार और सम्मान दिया जाता था, यह धर्मनिर्पेक्षता की विशेषता थी।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक स्वातंत्रता को बढ़ावा देने वाले कौन सी नीति थी?
B · सभी धर्मों को समान सम्मान मिलना
मध्यकालीन काल में विभिन्न धार्मिक समुदायों को समान सम्मान दिया गया, जिससे धार्मिक स्वातंत्रता को बढ़ावा मिला।
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मध्यकालीन भारत में हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक संबंध का सबसे अधिक उदाहरण क्या है?
A · पंच-पीर पूजा
राजस्थान में पंच-पीर पूजा दोनो समुदायों के साथ सांमाजिक तथा धार्मिक संबंध का उत्कृष्ट उदाहण है।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक संबंध का प्रमुख किस पर सबसे अधिक पड़ा?
A · राजनैतिक स्थिति
धार्मिक संबंध से विविध धार्मिक समुदायों के बीच विश्वास बना और राजनैतिक स्थिति बनी रही।
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धार्मिक साहित्य और सांप्रदायिक सद्भाव स्थापित करने में मध्यकालीन सूफ़ी संतों की भूमिका क्या थी?
B · धार्मिक मेलजोल को प्रोत्साहित करना
सूफी संतों ने तभी धर्मों के प्रति प्रेम और सांप्रदायिकता का उपदेश दिया जो सांप्रदायिक सद्भाव में सहायक था।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में किन कारणों का मुख्य योगदान था?
A · धार्मिक साहित्य और राजय की नीति
मध्यकालीन भारत में धार्मिक साहित्य और सामाजिक व्यवस्था की नीति के कारण धार्मिक स्वतंत्रता बनी रही।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक संस्कृतियों का सामाजिक सद्भाव में क्या योगदान था?
A · वे सामजिक मेलजोल और सहिष्णुता को बढ़ावा देती थीं
धार्मिक संस्कृतियों बीच सामजिक मेलजोल, सहिष्णुता और सामाजिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करती थीं।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक संघर्षों के बावजूद सांप्रदायिक सद्भाव कैसे बना रहा?
A · राजनैतिक प्रयासों और धार्मिक सहिष्णुता से
राजनैतिक प्रयासों और सामाजिक के धार्मिक सहिष्णु रवैये से सद्भाव कायम रहा।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक विविधता और सहिष्णुता के कारण विकाश हुआ किस क्षेत्र में?
A · साहित्य, कला और संगीत
धार्मिक विविधता और सहिष्णुता के कारण साहित्य, कला, संगीत आदि क्षेत्रों में समृद्धि हुई।
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मध्यमकालीन Bharat में धार्मिक सत्त्वों के संबंध में निम्न में से क्या सही नहीं है?
D · धार्मिक सत्त्वों का अर्थ था धर्मों का विलय
धार्मिक सत्त्वों का अर्थ धर्मों का विलय नहीं, बल्कि विभिन्न सत्त्वों प्राचीन और सम्मान है।
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मध्यक्षालीन भारतीय समाज में धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने वाले कौन से तत्व थे?
A · धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
मध्यक्षालीन भारत में धार्मिक सद्भाव का मुख्य आधार धार्मिक सहिष्णुता और विविध संस्कृतियों के बीच आदान-प्रदान था, जिससे सामाजिकी एकता और सांस्कृतिक समृद्धि हुई।
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मध्यक्षालीन भारत में धर्म और रागनिति के संबंध को लेकर निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
B · धर्म का कोई रागनितिक पक्ष नहीं था।
मध्यक्षालीन भारत में धर्म और रागनीतिगत अल्ग नहीं थे; धर्म का रागनीतिप्रभाव रहता था, इसलिए कथन B गलत है।
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मध्यक्षालीन भारत में पंच-पीर की पीजा का क्या सांप्रदायिक महत्त्व था?
A · यह हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच मेल का प्रतीक थी।
पंच-पीर की पूजा हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों में लोाप्रिय थी और यह धार्मिक सद्भाव एवं सांस्कृतिक सहअस्तित्व का प्रतीक थी।
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भारतीय समाज के किस अनुच्‍छेद में धर्म की स्वतंत्रता की गारंटी दी गई है?
A · अनुच्छेद 25-28
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 तक धर्म की स्वतंत्रता से संबंधित प्रावधान हैं जो सभी नागरिकों को धार्मिक आश्वासन और प्रथाओं के अधिकार देते हैं।
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मध्यमकालीन Bharat में धारणिक दर्जे और उससे bounded के लिए किस प्रकार की सामाजिका व्यवस्थाएँ प्रचलित थीं?
A · धार्मिक संस्थान और मेल-जोल की पहलें
धार्मिक विविधों से bounded के लिए कई बार धार्मिक संस्थान, मेल-जोल और संस्थान को प्रोत्साहित किया गया था, जिनसे सामाजिका शांति बनी रहती थी।
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मध्यमकालीन Bharat समाज में धार्मिक संस्थान की खासियत क्या थी?
A · विभिन्न धर्मों का सहअस्तित्व और समर्थन
मध्यमकालीन Bharat में धार्मिक संस्थान का मूल था विभिन्न धर्मों के बीच सह-अस्तित्व और एक-दूसरे के धर्मों का सम्मान करना।
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मध्यमकालीन Bharat में धार्मिक समागम और सांकृतिक आदान-प्रदान के लिए कौन-सी पहल महत्वपूर्ण थी?
A · सुलह-ए-कुल
सुलह-ए-कुल का अर्थ है सभी धर्मों के प्रति सह-अस्तित्व और बातचीत का व्यवहार, जो मध्यमकालीन Bharat में धार्मिक समागम को बढ़ावा देता था।
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मध्यमकालीन Bharat में धार्मिक विविधता और संस्थान किस प्रकार के अंतर्गत बढ़ी?
A · सामांता और सामाजिक पर आधारित शासन
मध्यमकालीन Bharat के कई शासक धार्मिक सामांता और सामाजिक को महत्व देते थे, जिससे सद्भाव बढ़ता था।
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मध्यमकालीन Bharat में धार्मिक संतो और गुरुजनों की भूमिका क्या थी?
A · धार्मिक संतो और सामाजिक एकता को बढ़ावा देना
धार्मिक संतो और गुरुजनों ने धार्मिक संतो और सामाजिक एकता को प्रथमक थे, उन्होंने विभिन्न धर्मों के लोगों को जोड़ने का काम किया।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक और सांस्कृतिक सामंजस्य के उत्पन्न करने के कौन-कौन से उपाय माध्यम स्वरोंत्मक हैं?
A · पंच-पीर की पूजा
पंच-पीर की पूजा हिंदू और मुस्लिम दोनों के द्वारा साझा की गई, जो धार्मिक और सांस्कृतिक सामंजस्य का उत्तम उदाहण है।
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मध्यकालीन भारत में धर्मनिर्पेक्षता की भावना को किस तरह से प्रिशित किया जाता है?
A · राघव का सही धर्मों के प्रति समन दुःष्टिकों रक्षण
धर्मनिर्पेक्षता का मतलब है कि राघव सही धर्मों को समाṁ समान और अधिकार देता है, और किसी धर्म को विशेषाधिकार नहीं देता।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक विवाद के चलते किस प्रकार के सामाजिक परिवर्तन सामने आए?
A · सांप्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक समृद्धि दोनों
धार्मिक विवाद से सांप्रदायिक सद्भाव और सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ कभी-कभी संघर्ष भी देखने को आए, जो इसका विस्तृत पक्ष है।
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मध्यकालीन भारत में धार्मिक हिंसा और सांप्रदायिक संघर्ष से बचाव के लिए किन नीतियों को अपनाया गया?
A · सामाजिक मेल-जोल और धार्मिक संरक्षक को बढ़ावा देना
धार्मिक हिंसा से बचाव के लिए सामाजिक मेल-जोल को मजबूत किया गया जिससे सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ सके।
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मध्यकालीन भारत में शासकों द्वारा धार्मिक संरक्षण दिखाने के सबसे प्रमुख उदाहरण में से एक क्या है?
A · अकबर का सुलह-ए-कुल नीति अपनाना
अकबर ने सुलह-ए-कुल की नीति अपनाकर सभी धर्मों को समान सम्मान दिया, जिससे मध्यकालीन भारत में धार्मिक संरक्षण की श्रेष्ठ मिसाल है।
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मध्यमकालीन भात में धार्मिक समागम की प्राथमिकता का उदाहर कौं-सा है?
A · सिख गुरुओं और मुगल शासनकों के बीच संवाद
सिख गुरुओं और मुगल शासनकों के बीच संवाद और संयोजन धार्मिक समागम की प्राथमिकता का मुख्‍य उदाहर है।
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मध्यमकालीन भात में धार्मिक न्याय और कानून प्रणाली को किस तरह से संचालित किया जाता था?
A · धार्मिक और जातीय आधार पर अलगा-अलगा कानून लागू होते थे
मध्यमकालीन भात में विभिन्न धार्मिक समुदायों के लिए उनके धर्म के अनुसार कानून और न्याय व्यवस्था प्रचलित थे।
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मध्यमकालीन भात के धार्मिक समुदायों के बीच सांप्रदायिक सद्भाव का कौन्-सा प्रारूप था?
A · धार्मिक सहिष्णुता
सांप्रदायिक सद्भाव का अर्थ है विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच सहिष्णुता और सम्मान, जो धार्मिक सहिष्णुता कहलाती है।
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मध्यमकालीन भात में धार्मिक सद्भाव को बनाए रखने में किसका सबसे अधिक योगदान रहा?
A · धार्मिक गुरु, संत और राजा नीतियां
धार्मिक गुरु, संत तथा धार्मिक सद्भाव का प्रेऱणास्रोत थे, और साथ ही राजा की नीतियों ने भी धार्मिक सहिष्णुता को बढ़ावा दिया।
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मध्यमकालीन भात में धार्मिक विविद्ता से उत्पन्न चुनौतियों के समाधान के लिए किस प्रकार की पहल की गई?
A · सांप्रदायिक संवाद और सम्मेलन की पहल
धार्मिक विविद्ता से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान सांप्रदायिक संवाद और सम्मेलन के माध्यम से किया गया।
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मध्यकालीन भारत में साहूकारों के प्रमुख उपकरण क्या थे?
A · धार्मिक मेलजोल, स्थानीय परिसरों का सम्मेलन, मेल-मिलाप समारोह
धार्मिक मेलजोल और स्थानीय परिसरों का सम्मेलन मध्यकालीन भारत में साहूकारों द्वारा रचने के मुख्य उपकरण थे।
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ब्रिटिश काल की शूरुआत और भारतीय मध्य सतत के अध्ययन के संबंध में, किस वर्ष में बहादुर शाह ज़फ़र को अंतिम मुग़ल सम्राट के रूप में ख़देड़ा गया था?
A · 1857
1857 का सिपाही विद्रोह (सिपाही क्रांति) ब्रिटिश काल की शूरुआत में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिससे बाद बहादुर शाह ज़फ़र को अंतिम मुग़ल सम्राट के रूप में खदेड़ दिया गया।
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ब्रिटिश शासन के राज्यनिक और प्रशासनिक पहलुओं में से कौन सा तथ्य सही है?
A · ब्रिटिश ने केंद्रीय प्रशासन स्थापित किया और सेना को ब्रिटिश अधिकारियों से बनाया
ब्रिटिश शासन ने एक केंद्रीय प्रशासनिक प्रणाली अपनाई तथा सेना के अधिकांश हिस्से को भारतीय सैनिकों से बनाया, लेकिन नियंत्रण ब्रिटिशों के हाथ में रखा।
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आर्थिक प्रभाव के संबंध में ब्रिटिश काल ने भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या स्थायी प्रभाव डाला?
A · भारत की कृषि उत्पादकता में गिरावट और कच्चा माल ब्रिटेन को निर्यात
ब्रिटिश काल में भारत की कृषि उत्पादकता और कुटीर उद्योग प्रभावित हुए; भारत कच्चा माल उत्पादक बन गया और ब्रिटेन के औद्योगिक विकास में योगदान दिया।
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सांस्पदिक तंत्र या ब्रिटिश नीति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य सही है?
A · ब्रिटिश ने "विभाजन और राज" की नीति अपनाई जिससे जिज्ञासु धार्मिक तंत्र बढ़ा
ब्रिटिश शासन ने विभाजन और राज की नीति अपनाकर हिंदू-मुस्लिम सद्भाव में दरार डाली और सांस्पदिक तंत्रों को बढ़ावा दिया।
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स्वतंत्रता आंदोलनों में सांस्पदिक सद्भाव के महत्व के संबंध में कौन सा तथ्य सही है?
A · अखिल भारतीय मुस्लिम लीग और कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम में सहयोग किया
अखिल भारतीय मुस्लिम लीग और भारतीय कांग्रेस जैसे संगठनों ने सांस्पदिक सद्भाव बनाए रखा और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया।
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ब्रिटिश काल में भारत की धार्मिक विविदता की स्थिति को देखते हुए, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
A · भारत में विविध धार्मिक समुदायों ने अपने सामाग्रीक रीति-रिवाज बनाए रखे
ब्रिटिश काल में भारत की धार्मिक विविधता बनी रही और प्राचीन धर्म ने अपने परंपराओं व रीति-रिवाजों का पालन किया।
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ब्रिटिश शासन के दौरान धार्मिक संस्थानों के प्रति किस प्रकार की नीति अपनाई गई?
A · धार्मिक संस्थानों को नियन्त्रित करने और ट्रुटियों की आलोचना की गई
ब्रिटिश सरकार ने धार्मिक संस्थानों को नियन्त्रित करने के लिए कई कानून बनाए और उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखी।
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सांप्रदायिक सद्भाव के संदर्भ में सम्मेलन में पंच-पीर की पूजा किस प्रकार धार्मिक सद्भावना को दर्शाती है?
A · विभिन्न धार्मिक समुदायों की आशाओं का संगम
पंच-पीर की पूजा विभिन्न धार्मिक समुदायों के मेलजोल और धार्मिक सद्भावना का प्रतीक है जो धार्मिक सम्मेलन की संस्कृति एकता को दर्शाती है।
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ब्रिटिश काल के समाज भांति‍य समाज में कौन-सी प्रमुख धार्मिक समस्याएं अभिव्यक्त हुईं?
A · सांप्रदायिक तनाव और मतभेद
ब्रिटिश राज की नीतियों और सामाजिक परिवर्तनों के कारण भारत में हिंदू-मुस्लिम सांप्रदायिक तनाव प्रमुख समस्याएं बनकर उभरीं।
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ब्रिटिश काल में सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने वाली कौन-सी नीति थी?
A · विभाजन और राज
ब्रिटिश शासन ने "विभाजन और राज" की नीति अपनाकर धार्मिक समुदायों में धार्मिक मतभेदों का लाभ उठाया।
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नीचे दिए गए में से किसने ब्रिटिश काल में धार्मिक कर्तव्य और सांप्रदायिक कर्तव्य के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया?
A · महत्मा गांधी
महत्मा गांधी ने नेतृत्व में धार्मिक कर्तव्य और सांप्रदायिक कर्तव्य दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास किया।
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ब्रिटिश काल के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से वह कौन सा घातक है जिसे ब्रिटिश शासन की मजबूत नींव रक्खी गई?
A · प्लासी की लड़ाई (1757)
प्लासी की लड़ाई ने ब्रिटिश इस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल पर नियंन्त्रण दिलाया जिससे ब्रिटिश शासन की मजबूत नींव पड़ी।
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धार्मिक और सांप्रदायिक स्थिति ब्रिटिश काल में अधिक बारात की क्या खासियत थी?
A · धार्मिक समरसता के बजाय धार्मिक कटुता थी
ब्रिटिश काल में धार्मिक कटुता बढ़ी जिससे सांप्रदायिक स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
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सांप्रदायिक तनावों के कारणों में से कौन-सा कारण ब्रिटिश काल में प्रमुख था?
C · विभाजन की नीतियाँ और धार्मिक भेदभाव
ब्रिटिश सरकार की विभाजन योगना और धार्मिक भेदभाव ने सांप्रदायिक तनाव बढ़ाया।
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ब्रिटिश नीतियों और भारतीय सांप्रदायिक प्रयासों के बीच में कौन सा संबंध सही है?
B · ब्रिटिश ने धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा दिया
ब्रिटिश सरकार की नीतियाँ और विभाजन की राजनीतिक नियत ने धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा दिया।
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ब्रिटिश काल में धार्मिक सद्भाव बनाए रखने के लिए भारतीय समाज में कौन सी प्रमुख भूमिका से काम आई?
A · सभी धार्मिक समुदायों का सहयोग
सभी धार्मिक समुदायों के बीच सहयोग और समाज ने धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में मदद की।
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ब्रिटिश शासन के दौरान धारणिक संप्रदायिक संस्कृतियों का मुख्य कारण क्या था? Refer to the concept of सांप्रदायिक सत्ता और उसका कारण।
A · ब्रिटिश की विधाजन की नीति
ब्रिटिश सरकार की विधाजन की नीतियों ने सांप्रदायिक संस्कृतियों को बढ़ावा देने वाली मुख्य भूमिका निभाई थीं।
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ब्रिटिश काल के दौरान सांप्रदायिक समूह बढ़ाने के लिए भारतीय समाज ने किस प्रकार प्रतिक्रिया दी? Refer to सांप्रदायिक समूह के प्रयास।
A · सामुहिक पूजा और मेलजोल
भारतीय समाज ने सामूहिक पूजा और मेलजोल के माध्यम से सांप्रदायिक समूह को बढ़ावा दिया।
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धार्मिक समूह को बनाने रहने में ब्रिटिश काल के कौन से तत्व बाधक थे? Refer to बाधक तत्व।
A · विधाजन की नीति, धार्मिक भेदभाव
ब्रिटिश की विधाजन नीति और धार्मिक भेदभाव धार्मिक समूह के लिए बाधक थे।
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ब्रिटिश काल में धार्मिक और सांप्रदायिक विवादों का सामाजिक प्रभाव क्या था? Refer to सामाजिक प्रभाव।
A · समाज में विभाजन और असामंजस्य
धार्मिक विवादों ने समाज में विभाजन और असामंजस्य पैदा किया।
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ब्रिटिश काल में धार्मिक विवाद और सांप्रदायिक संघर्ष में कौन सा कथन गल्त है? Refer to समग्र जानकारी।
B · सांप्रदायिक संघर्ष कभी समसामयिक नहीं था
सांप्रदायिक संकट प्रारंभिकपुर्ण था, इसलिए कथन 'सांप्रदायिक संघर्ष कभी समसामयिक नहीं था' गलत है।
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बिहार का प्रारंभिक इतिहास किस काल से आरंभ होता है?
B · मगध साम्राज्य काल
बिहार का प्रारंभिक इतिहास मुख्यत: मगध साम्राज्य से शुरू माना जाता है, जो प्राचीन इतिहास में एक महत्वपूर्ण साम्राज्य था।
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बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों में से कौन सा स्थल महत्वपूर्ण रह चुका है?
C · बोधगया
बोधगया वह स्थल है जहाँ भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था, इसलिए यह बोधधरम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है।
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बिहार के धर्मों में धार्मिक विचार तथा कोन सा है?
A · सभी धर्मों का एक समान सम्मान
बिहार में धार्मिक विचार ऐसा है कि सभी धर्मों का दृष्टिकोण होता है कि सभी धर्मों का समान सम्मान किया जाता है, जिससे सामाजिक सद्भावना रहती है।
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बिहार में प्राचीन विश्वविद्यालयों में निम्नलिखित में से कौन सा विश्वविद्यालय तांत्रिक एवं बौद्ध शिख्षा का केंद्र था?
B · विक्रमशिला विश्वविद्यालय
विक्रमशिला विश्वविद्यालय तांत्रिक और बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था जो बिहार में स्थापित था।
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बिहार में कौण सा धार्मिक एवं सांस्कृतिक तत्व सामाजिक सद्भाव को प्रोत्साहित करता है?
B · सामूहिक उत्सव और त्यौहार
बिहार में विविध धर्मों और समुदायों के द्वारॉ मनाये जाने वाले सामूहिक उत्सव और त्यौहार सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं।
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बिहार के धर्मनिर्पेक्ष समाज का प्रमुख आधार क्या है?
B · धार्मिक स्वतंत्रता और समन्वय
बिहार का धर्मनिर्पेक्ष समाज धार्मिक स्वतंत्रता और सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार पर आधारित है।
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बिहार में सांप्रदायिक संघर्श और समधान के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
B · संवाद और समंजस्य से संघर्श का समधान संभव है
बिहार में सांप्रदायिक संघर्षों का समाधान संवाद और सामाजि क समंजस्य के माध्यम से संवैधानिक होता है।
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बिहार के प्राचीन सांस् कृतिक उत्सवों में से कौन सा उत्सव सभी धर्मों द्वारा मनाया जाता है?
A · छठ पूजा
छठ पूजा बिहार का प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव है जिसे अनेक समुदाय साथ मिलकर मनाते हैं,जिससे सांप्रदायिक सद्भाव बढ़ता है।
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बिहार में धार्मिक विविधता के बावजूद सामाजिक विवाद बनाए रखने में कौन सी ताकत प्रमुख भूमिका निभाती है?
B · समान नागरिकता और संविधानिक अधिकार
समान नागरिकता और संवैधानिक अधिकार प्रमुखधार्मिक स्वतंत्रता बिहार में सामाजिक विवाद कम बनाए रखते हुए मध्यमपुर्ण भूमिका निभाते हैं।
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बिहार के प्राचीन इतिहास अध्ययनों पर यह स्पष्टरूप होता है कि इसका धार्मिक स्वरूप किस प्रकार का था?
B · बहुधार्मिक और सहिष्णु
बिहार का प्राचीन इतिहास बहुधार्मिक और सहिष्णुता की भावना वाला था,जहाँ विभिन्न धर्म समाज रूप से फल-फूल रहे थे।
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भारत में राश्ट्रीय एकता का अर्थ क्या है? नीचे दिए चित्र का संदर्भ लें। राष्ट्र्रीय एकता का आधार है: सभी प्रदेशों, समाजों और भाषाओं का समायोजन। निम्नलिखित विकल्पों में से कौन सा राष्ट्र्रीय एकता का सही अर्थ दर्शाता है?
A · देश के सभी वर्गों का एकजुट होना
राष्ट्र्रीय एकता का मतलब है देश के सभी वर्गों, प्रदेशों, और समाजों का एकजुट होना तथा सहयोग़ करना।
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धार्मिक सद्भाव का उद्देश्य और धार्मिक संविधान का संबन्ध क्या है? संदर्भित अवधारणा देखें। धार्मिक संविधान किस प्रकार धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देता है?
A · धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार देना
धार्मिक संविधान अनुच्छेद 25 से 28 तक सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है, जिससे सद्भाव बढ़ता है।
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भारत में धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए कौन सा संवैधानिक प्रावधान महत्वपूर्ण है? भारतीय संवैधानिक प्रावधानों का संदर्भ लें। धार्मिक सद्भाव को कायम रखने के लिए संविधान में कौन सा अनुच्छेद मुख्य रूप से कार्य करता है?
A · अनुच्छेद 25-28
अनुच्छेद 25-28 नागरिकों को धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार देते हैं, जो धार्मिक सद्भाव के लिए आवश्यक है।
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भारत में धार्मिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए अपनाए जाने वाले वाले व्यवहारिक नियम क्या हैं? सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए निम्न में से कौन सा कर्तव्य सही है?
A · समाज के सभी वर्गों के प्रति समान और संवेदनशील रहना
सभी के प्रति समान और संवेदनशील बनाये रखना ही धार्मिक सद्भाव को मजबूत करता है।
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देश में विविध सांस्कृतिक धार्मिक विविधता के बावजूद राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए कौन सा तत्व सबसे महत्वपूर्ण है? निम्न में से कौन सा तत्व धार्मिक एकता में योगदाना देता है?
A · धार्मनिरपेक्षता और समानता की भावना
धार्मनिरपेक्षता और समानता की भावना ही विविधताओं में एकता की नींव है।
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राष्ट्र में पंच-पीर की पूजा का उदहारण किस प्रकार धार्मिक सांप्रदायिक सद्भावना को दर्शाता है? यह पूजा किस बात का प्रतीक है?
A · धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकीकरण
पंच-पीर की पूजा विविधित धर्मो के लोगों के साथ मेलजोल और सद्भाव की मिसाल है।
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भारत में धार्मिक सद्भाव कायम रखने के लिए निम्नलिखित में से कौन सा साधन प्रभावी है? धार्मिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए कौन सा तरीका बेहतर माना जाता है?
A · धार्मिक संवाद और प्रयास प्रयास समान
धार्मिक संवाद और प्रयास से सभी समाज के वर्गों के बीच समान भावना बढ़ती है।
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भारतीय संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकारी किन प्रकार बहुसांस्कृतिक समाज में राष्ट्रीय एकता को मजबूत देता है? संविधान का किस पहलू से राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित होती है?
A · सभी धर्मों को समान अधिकार और संरक्षण देना
सभी धर्मों को समान अधिकार देने से एकता और सद्भाव बढ़ता है।
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भारत में सांप्रदायिक संघर्ष की प्रमुख क्रिया क्या है?
A · विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच शंका और सहयों की भावना
सांप्रदायिक संघर्ष का अर्थ है विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच शंका, मेल-जोल और सहयों की भावना होना।
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भारत में विभिन्न धर्मों के बीच धार्मिक संघर्ष बढ़ाने का प्रमुख कारण क्या है?
A · धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान
धार्मिक स्वतंत्रता और सभी धर्मों के समान सम्मान से ही भारत में धार्मिक संघर्ष बनाये रखने में मदद मिलती है।
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सांप्रदायिक संघर्ष की आधारिक अवधारणा क्या है?
A · सभी धर्मों को समान आधार मिलना
सांप्रदायिक संघर्ष में सभी धर्मों को समान आधार और समान दायरा जाताता है ताकि सब मिल-जुल कर रहें।
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भारत के संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का प्रावधान किस अनुच्छेद के अंतर्गत आता है?
A · आनुच्छेद 25-28
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 के अंतर्गत धार्मिक स्वतंत्रता तथा संरक्षण का प्रावधान है।
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राजस्थान में पंच-पीर पूजा का सांप्रदायिक संघर्ष से क्या संबंध है?
A · विभिन्न धर्मों के लोगों को एक साथ जोड़ना
पंच-पीर पूजा में हिंदू एवं मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग एक साथ मिलकर श्रद्धा करते हैं, जो सांप्रदायिक संघर्ष का उधारण है।
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भारतीय संविधान द्वार दी गई संवैधानिक धार्मिक संधि को बेहतर किसे माना जाता है?
A · सभी धर्मों को समान अधिकार प्रदान करेगा
भारतीय संविधान सभी धर्मों को समान अधिकार दिलाने तथा धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देकर धार्मिक संधि को बेहतर देता है।
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सांप्रदायिक संघर्ष के लिए प्रमुख कारण क्या महत्त्वपूर्ण है?
A · सभी धर्मों को स्वतंत्र और समान माना जाना
धार्मिकर्पेक्षता का मूलब है कि राज्य सभी धर्मों के प्रति निष्पक्ष रहता है और सभी को समान माना जाता है, जिससे संधि बढ़ता है।
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भारत में सांप्रदायिक संघर्ष के लिए निम्नलिखित में से कौन सा सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है?
A · भारतीय संविधान
भारतीय संविधान ने सभी नागरिकों को समान धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान कर सांप्रदायिक संघर्ष के लिए सबसे बड़ा आधार तैयार किया है।
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सांप्रदायिक संघर्ष के लिए धार्मिक नेतاؤں की भूमिका होनी चाहिए?
A · मिलजुल कर परिस्थितिता और शांति का समर्थन देना
धार्मिक नेताओं को समुदायों के बीच मिलजुल कर परिस्थितिता, सहयोग और शांति का समर्थन देना चाहिए ताकि संघर्ष स्थिति न हो सके।
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भारत में सांप्रदायिक संघर्ष के लिए सबसे उपयुक्त उदाहरण कौन सा है?
A · पंच-पीर पूजा
पंच-पीर पूजा एक ऐसा उदाहारण है जिसमें विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ आकर समान और विश्वास दिखाते हैं, जिससे संघर्ष बढ़ता नहीं है।
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सांप्रदायिक सद्भाव को कायम रखने वाला घटक क्या है?
A · धार्मिक कट्टरता
धार्मिक कट्टरता वहीं समाजों के बीच संघर्ष और विवाद पैदा करती है, जिससे सद्भाव कायम होना कठिन होता है।
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धार्मिक विवादों के दौरान में हारत की विशेषता क्या है?
A · अनेक धर्मों का समुदाय और सह-अस्तित्व
हारत धार्मिक विवाद वाला देश है जहाँ अनेक धर्म शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व करते हैं।
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सांप्रदायिक सद्भाव का लक्ष्य क्या होता है?
A · सभी धर्मों के बीच शांति और मेलजोल को बढ़ावा देना
सांप्रदायिक सद्भाव का उद्देश्य सभी धार्मिक समुदायों के बीच शांति और मेलजोल को बढ़ावा देना है।
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धार्मिक संविधान किस प्रकार से धार्मिक सद्भाव को सुनिश्चित करता है?
A · धार्मिक स्वतंत्रता और भेदभाव न करने के प्रावधान के द्वारा
धार्मिक संविधान सभी धर्मों को समान अधिकार और आधिकारिक प्रदान करता है जिससे धार्मिक सद्भाव बना रहता है।
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सांप्रदायिक सद्भाव के लिए सबसे आवश्यक गुण कौन सा है?
A · सहिष्णुता
सहिष्णुता ही वह गुण है जो विभिन्न धर्मों के बीच शांति और सद्भाव बनाए रखता है।
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भारत में धार्मिक सुधार की सफलता के लिए किसका योगदान महत्वपूर्ण है?
A · सभी धर्मों के बीच सम्मान और सहयोग
जब सभी धर्म एक-दूसरे का सम्मान करते हैं और सहयोग करते हैं, तभी धार्मिक सुधार बेहतर रूप से शुरू होते हैं।
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राजस्थान में पंच-पीर पूजा किस प्रकार की संप्रदायिक भावना का उदाहरण है?
A · धार्मिक समन्वय
पंच-पीर पूजा हिन्दू और मुस्लिम दोनो धर्मों के लोगों के बीच सम्मान और सहयोग को दर्शाती है।
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धार्मिक सुधार को बढ़ावा देने के लिए भारत में कौन-सा धार्मिक आंदोलन महत्वपूर्ण है?
A · धार्मिक स्वतंत्रता का समर्पण
धार्मिक स्वतंत्रता का समर्पण करके ही सभी धर्मों के बीच धार्मिक सुधार स्थापित किया जाता है।
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संप्रदायिक सुधार के लिए किस प्रकार के प्रयास आवश्यक हैं?
A · सभी धर्मों के बीच सम्मान और मेल-मिलाप
सभी धर्मों के बीच सम्मान एवम् मिलजुल कर रहने से ही धार्मिक सुधार बढ़ता है।
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धार्मिक विविधता के बावजूद भारत में सांप्रदायिक सद्भाव क्यों संभव है?
A · सब धर्मों की सह-अस्तित्त्व पर आधारित संस्था के कारण
भारत की संस्था सभी धर्मों के सह-अस्तित्त्व पर आधारित है, जिससे सांप्रदायिक सद्भाव होता है।
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सांप्रदायिक सद्भाव के संदर्भ में "धार्मिक सहिष्णुता" का क्या मतलब है?
A · विभिन्न धर्मों का सम्मान और स्वीकार करना
धार्मिक सहिष्णुता का अर्थ है सभी धर्मों के प्रति सम्मान, स्वीकार तथा स्वीकार्यता।
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भारतीय में धार्मिक विविधता के बावजूद सांप्रदायिक सद्भाव कैसे स्थापित होता है?
A · समान स्वतंत्रता अधिकार एवं सहिष्णुता के कारण
भारत के संविधान द्वारा समान अधिकार और लोगों में सहिष्णुता के कारण विभिन्न धर्मों में सद्भाव बना रहता है।
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सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए कौन सा सकारात्मक व्यवहार आवश्यक है?
A · सभी के प्रति सम्मान और सहिष्णुता
सभी समुदायों में सम्मान और सहिष्णुता के व्यवहार सद्भाव बनाए रखने में सहायता करता है।
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राष्ट्रस्थान में पंच-पीर पूजा को किस तरह से देखा जाता है?
A · धार्मिक सद्भाव और सम्मान का प्रतीक
पंच-पीर पूजा में विभिन्न समुदाय मिलकर श्रद्धा करते हैं जो धार्मिक सद्भाव का स्पष्ट उदाहरण है।
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सांप्रदायिक सद्भाव में "धार्मिक समानता" का क्या महत्व है?
A · सभी धर्मों को बराबर दर्जा देना
धार्मिक समानता सभी धर्मों को समान अधिकार और सम्मान देने से सद्भाव बना रहता है।
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सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए सरकार को क्या करना चाहिए?
A · सभी धर्मों के लिए समान नियम एवं अवसर सुनिश्चित करना
सरकार द्वारा सभी धर्मों को समान अवसर और अधिकार देने से सद्भाव बनाए रखना संभव होता है।
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भारतिय समाज में सांप्रदायिक सद्भाव का महत्व क्या है?
A · समाज में शांति और एकता बनाए रखना
सांप्रदायिक सद्भाव से ही समाज में शांति, एकता और विकास संभव होता है।
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धार्मिक विवादों के कारण भारत में किस बाद का विवाद ज्यादा जाता है?
A · सांप्रदायिक सद्भाव ओर सहिष्णुता
धार्मिक विवादों के कारण भारत में सभी धर्मों के बीच सद्भाव और सहिष्णुता बनाए रखना आवश्य्क होता है।
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सांप्रदायिक सद्भाव में “सांस्कृतिक प्रथाएँ” किस प्रकार सहायक होती हैं?
A · समुदायों के बीच मेल-जोल और आपसी सम्मान बढ़ाकर
सांस्कृतिक प्रथाएँ साझा करने से समुदायों में मेल-जोल और आपसी सम्मान बढ़ता है।
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सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ाने के लिए निम्न में से कौन सा कदम महत्वपूर्ण नहीं है?
A · धार्मिक कतृर्ता को प्रोत्त्साहित करना
धार्मिक कतृर्ता सद्भाव के विरोधी तत्व हैं, इसलिए इसे प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए।
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सांप्रदायिक सद्भाव कीintoshिक udāharaṇõ मे¿ से कौन सा सही है?
A · राजस्थाने मे पंछ-पीर पूजा
पंछ-पीर पूजा एक ऐतिहासिक उदाहरण है जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग मिलकर श्रद्धा करते हैं।
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सांप्रदायिक सद्भाव बनाने के लिए किन किस प्रकार के कानूनी आवश्यक्ता हैं?
A · धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के कानून
सभी धर्मों को समान अधिकार देने वाले कानूनी कानून ही सद्भाव बनाए रखने में मदद करते हैं।
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सांप्रदायिक सद्भाव को किस सामाजिक मू्ल्य के माध्यम से बढ़ावा दिया जा सकता है?
A · सहिष्णुता
सहिष्णुता विभिन्न धर्मों के बीच संबंधों को मज़बूत बनाती है।
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सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने में शिष्य का क्या योगदान है?
A · धार्मिक सहिष्णुता और समानता का प्रचार
शिष्य के माध्यम से सहिष्णुता और समानता की भावना विकसित की जाती है जो सद्भाव के लिए आवश्यक है।
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सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने वाले कौन से तत्व हैं?
A · सम्मान, सम्मान और समानता
सम्मान, सम्मान और समानता से ही समाज में सद्भाव कायम होता है।
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धार्मिक सद्भाव की दृष्टि से राजसührान में पंच-पीर पूजा क्यों उत्कृष्ट धारणा है?
A · धार्मिक एकता और सह-अस्तित्व
पंच-पीर पूजा धार्मिक एकता और सह-अस्तित्व का प्रतीक है।
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भारतीय संविधान की विशेषता क्या है, जिससे धार्मिक सद्भाव संभव होता है?
A · धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी
भारतीय संविधान सभी नागरिकों को धर्म चुनने एवं पालन की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जो सद्भाव का मूल आधार है।
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भारत में धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में कौन-सा कारक सबसे महत्वपूर्ण है?
A · धार्मिक सहिष्णुता और समानता
धार्मिक सहिष्णुता और समान के प्रति समान भावनाएं धार्मिक सद्भाव बनाए रखने में सबसे महत्वपूर्ण हैं।
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सांप्रदायिक सद्भाव के संबंध में भारतीय समाज में एकता का क्या महत्व है?
A · समाज में शांति, विकास और समरसता बनाए रखना
एकता से समाज में शांति, विकास और सामंजस्य स्थापित होता है जो सद्भाव का मूल है।

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